एक अजीब विडंबना है कि समाचार चेनल्स मेनस्ट्रीम मीडिया इस मुद्दे को नहीं उठाता कि जब 3 महीने तक शाहीन बाग में एक भी मीडियाकर्मी को घुसने नहीं दिया था लेकिन हंगामा इस बात पर उठ जाता है जब हाथरस में एक दिन के लिए मीडिया को बैन कर दिया जाता है सारा का सारा मीडिया चीखना-चिल्लाना और चूड़ियां तोड़ना शुरू कर देता है आज हम बात करेंगे मीडिया के बारे में ही कि मीडिया था कितना सिलेक्टिव है कितना कलेक्टिव है और कितना हिंदुओं से नफरत करने वाला है इस विडियो को अंत तक अवश्य देखिए और हमको ट्विटर पर फॉलो करना ना भूलें पिन कमेंट में उसका मैं लिंक दे रहा हूं मैं कि हाल ही में जिस प्रकार से देश की राजधानी में हॉरर किलिंग का मामला सामने आया है मोहम्मद अफरोज और मोहम्मद राज ने अपने साथियों के साथ मिलकर के 18 साल के राहुल की पीट-पीटकर हत्या कर दी आरोपी तोपों जो यह बिल्कुल भी गवारा नहीं उतरा है उसकी 16 साल की जो बहन है वह राहुल से मित्रता रखती है वह बहन का एक इंटरव्यू के सामने है उसमें फूट-फूटकर रो करके सारी बातों को बयान कर रही है इस पर तमाम समाचार समूह ने खबर को प्रकाशित किया इसमें इंडियन एक्सप्रेस है हिंदुस्तान टाइम है इंडिया टुडे हैं लेकिन इन समाचार समूह ने खबर के मूल तथ्यों को सामने नहीं रखा ना तो आरोपितों की पहचान को सामने रखा और ना ही हत्या की असल वजह बताई और ना ही मृतक की पहचान ही सामने रखी यह सिलसिला वैसे कोई नया नहीं है बीते बहुत समय लंबे समय से इन दिग समाचार समूहों की मजहबी पत्रकारिता का रवैया कुछ इसी प्रकार से चलता आ रहा है तब तक खुद में कितना हास्यास्पद है कि जब एक अल्पसंख्यक तथाकथित असंख्य कि मुस्लिम समुदाय के व्यक्ति की हत्या हो जाती है तब सारे के सारे मीडिया संस्थान और गैरजरूरी और गैर जरूरी तथ्य को सामने रखने की कोशिश करते हैं ताहिर भले ही वे उससे कितना भी ज्यादा स्वास्थय जाए मैं अल्पसंख्यकों में मुसलमानों की बात क्यों कर रहा हूं क्योंकि जब पश्चिम बंगाल के अंदर ममता बनर्जी के शासन काल में एक सिख भाई की पगड़ी उछाल दी जाती है और ऊपर से हमको 10 दिन के रिमांड में भेजा जाता है उनकी बहुत बुरी तरीके से पिटाई की जाती है तब कोई मीडिया संस्थान आ करके उनके हक की लड़ाई लड़ने के लिए आगे नहीं आता है लेकिन जो मुसलमानों के साथ में इस प्रकार की घटना होती है और चाहे वह की गलती की वजह से क्यों न हो जैसे कि ट्रेन में सीट के ऊपर झगड़ा होने पर एक मुस्लिम लड़के ने खुद चाकू निकालकर के हिंदू व्यक्ति के ऊपर हमला किया था और उस पूरी की पूरी रेंज में वह लड़का ही मारा गया जो मुस्लिम था इसको गौ मांस का मुद्दा बनाकर के इन्हीं सभी सभी प्रमुख समाचार चैनलों ने और पत्रों ने है यह करके बताया था कि देखे गुंडाराज आ गया है दिल्ली की जो राहुल की घटना है इस पर इंडिया टुडे ने खबर प्रकाशित की है कमर के शीर्षक में ही पूरा तमाशा बना देता है और बताया जाता है कि दिल्ली विश्वविद्यालय का छात्र था उसकी पीट-पीट कर हत्या कर दी गई है इसकी वजह भी एक लड़की से केवल दोस्ती बता दी गई है यहां ना तो बताया गया कि लड़का हिंदू धर्म यह बताया गया कि जो मारने वाले और लड़की है जो हथियार हैं वह कौन थे वह मुसलमान थे वहीं दूसरी तरफ 2019 के जुर्म महीने में झारखंड स्थित खास सम्मान जिले में भीड़ ने एक युवक की बुरी तरीके से पिटाई कर दी थी तब इंडिया टुडे को यह खबर लगी और उसने शीर्षक में उसका मजहबी रखा और पिटाई तथाकथित उसकी वजह बताई के वहां पर श्री रामचंद्र जी के नारे लगवाने के लिए उसकी पिटाई की गई इवन उसको लिंचिंग तक बता दिया गया था जब शिवलिंग शक नहीं कि हार्ट अटैक से हुई मौत की जो की कस्टडी में 6 दिन के बाद कि उसकी मौत हुई थी वह चोर था अमिताभ-रेखा की ही बात कर रहा हूं पत्रकारिता का ऐसा ही मजहबी नजरिया पेश किया इंडियन एक्सप्रेस दिल्ली में 18 साल के छात्र हिंदू छात्र की हत्या के मामले में इंडियन एक्सप्रेस ने खबर प्रकाशित की इनके शीर्षक में उस लड़के को छात्र तक नहीं बताया गया था और बजा के लिए शीर्षक में लिखा गया था आखिर और घुम्मन ने के महिला की वजह से हत्या कर दी गई महिला कौन थी हत्या करने वाले कौन थे हत्या का असली कारण क्या था कुछ नहीं जब साल 2018 के अप्रैल महीने में झारखंड के गुमला जिले स्थित शुक्र गांव में एक युवक की तीन युवकों ने हत्या कर दी थी तब इंडियन एक्सप्रेस ने शीर्षक में ही मजहब बता दिया था और वहां पर लिखा गया था स्पष्ट तैयार क्यों मुस्लिम था इसके अलावा कारण भी बताया कि एक नाबालिक लड़की से रिश्ते के वजह से अन्य मजहब के युवकों के द्वारा इसकी हत्या कर दी गई है दिल्ली में 18 साल अधिकतर हिंदू छात्र की हत्या पर कुछ इस शैली में तथ्य पेश किए गए हिंदुस्तान टाइम्स के द्वारा हिंदुस्तान टाइम्स ने खबर के शिक्षक मत है कि उसकी हत्या लड़की के परिवारीजनों ने की है जिससे कि उसके उस लड़की से संबंध थे लेकिन यहां पर भी दो मूल तथ्य नहीं बताए गए कि हत्या करने वाले कौन थे उनका मजाक किया था ठीक इसी तरह की घटना जो थी वह 2018 के मई महीने में राजस्थान के बीकानेर जिले में हुई थी तब हिंदुस्तान टाइम्स ने पूरी जानकारी शीर्षक में ही बता दी थी कि शीर्षक ही बता दिया था कि मरने वाला कौन है और मारने वाला कौन है वजह भी उसी में स्पष्ट कर दी थी ताकि आपको पूरा का पूरा समाचार ना पढ़ना पड़ेगा आप हेड लाइन से समझ जाएं कि हो क्या रहा है कुछ इस मिजाज की ही एक घटना 2018 के शुरुआत में हुई थी इसमें अंकित सक्सेना नाम के 23 वर्षीय युवक और पेशे से फोटोग्राफर जॉब विवेक YouTube चैनल में थारो बहुत अच्छा एक्टर बेटा उसकी इस बीच सड़क पर ही गला रेतकर हत्या कर दी गई थी जहां क्योंकि उसने मुस्लिम लड़की से बातचीत कर ली थी और उसे उसके साथ में प्रेम भी हो गया था हत्या करने वाले कौन थे जिस लड़की से बात होती थी उसी के परिवारजनों थे मुसलमान थे लेकिन इंडिया टुडे की खबर के शीर्षक से इस तरह की हर जरूरी बात ही नदारद हो चुकी थी बल्कि इंडिया टुडे ने इस ख़बर से जुड़ी हुई घटना से जुड़ी दस बातें और 10 बिंदुओं की मदद से घटना को जाने इस तरीके के पॉइंट बना दिए थे मीडिया संस्थान चाहे वह हिंदुस्तान टाइम्स ही क्यों न हो जिसने की खबर के शीर्षक में बस सक्सेना लिख करके काम चला लिया था यह हो या फिर इंडियन एक्सप्रेस को एक ने अंकित सक्सेना को फोटोग्राफर बता दिया था और अपनी पूरी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया था किसी ने भी शीर्षक में घटना से जुड़ी हुई जो बुनियादी जानकारी होती है वह नहीं रखी थी अच्छा मैं आपको चंदन गुप्ता जी के बारे में पूछना चाहता हूं उस युवक का नाम भी शायद आपको पता होगा छबीस जनवरी का दिन था गणतंत्र दिवस का तिरंगा यात्रा हो रही थी सारे के सारे लोग जो थे वह निकल रहे थे और वहां पर गोली चल गई थी इस मामले में भी तमाम समाचार समूहों ने खबरें प्रकाशित की थी लेकिन किसी ने भी तथ्य को स्पष्ट रूप से सामने रखने का प्रयास तक नहीं किया था उन्होंने अन्य खबरों की तरह ही शीर्षक में नहीं बताया कि हत्यारे का मतलब क्या था जो आरोपित गिरफ्तार किए गए थे उनका नाम क्या था वह कौन थे और किस वजह से उन्हों ने मारा था यह नफरत जो है तिरंगे के प्रति वंदे मातरम के प्रति और भगवान के प्रति भारत के प्रति यह नफरत है तो है क्यों और कि लोगों के अंदर है वहीं बताया गया था चाहे इंडियन एक्सप्रेस को इंडियन टुडे हो चाहे इंडियन एक्सप्रेस को सा इंडिया टुडे हो यह हिंदुस्तान टाइम्स और सभी ने केवल मदारी पूरी कर ली खबरें परोसने की यह जो पूरी की पूरी प्रक्रिया है कि ना केवल अफसोसनाक बल्कि बहुत ज्यादा भयावह है दंगे होने के बाद में उनको भीड़ का धर्म नजर आता है लेकिन भीड़ कम मजहब नजर नहीं आता है धर्म निरपेक्षता के कीमत इतनी महंगी होती है धीरे-धीरे लोग इसकी भेंट चढ़ जाते हैं कितना विचित्र है हत्या करने वाले व्यक्ति का धर्म हो सकता है लेकिन हत्या करने वाले कम अब नहीं हो सकता है दिल्ली के अंदर पुलिस वालों को पीट-पीटकर मार दिया जाता है लेकिन उनका मजहब आज तक किसी को नहीं पता लगा एक व्यक्ति जो खुलेआम कहता है कि हम हिंदुओं को समाप्त करने के लिए ही दिल्ली के अंदर इकट्ठे हुए थे और यह जो तेज और पेट्रोल बम मरीज आप इस तरह ने मंगवाई थी जो गोलियां ने मंगवाई थी यह सारी की सारी हिंदुओं को खत्म करने के लिए राम मंदिर का बदला लेने के लिए हमने इंतजाम किए थे लेकिन उसमें भी आपको मजहब नजर नहीं आता है लेकिन असल समस्या यह नहीं है असल समस्या है हिंदुओं की निंद्रा हिंदुओं का वह बेहोशीपन जिससे वह जाग नहीं रहे हैं उनके ऊपर जितने कि दंगे है वह समझ लीजिए पानी के छींटे हैं उन पानी के छींटों से भी जिनकी नींद ना खुले उसको भला कौन जगह सकता है और कौन उठा सकता है इस वीडियो में सिर्फ इतना ही इस वीडियो में हमने बताने का प्रयास किया कि किस प्रकार से हमारा मेनस्ट्रीम मीडिया हिंदुओं के ऊपर होने वाले अत्याचारों को छिपा लेता है जबकि मुसलमानों के ऊपर छोटी सी विच कि टाकशी अधिक हो जाए तो उसको भी बढ़ा-चढ़ाकर बताने का प्रयास करता है इस प्रकार के दोगलेपन का हमें बहिष्कार करना पड़ेगा जिस प्रकार से आप और हम सब मिलकर के केबीसी के दोगलेपन का बहिष्कार कर रहे हैं इस वीडियो में सिर्फ इतना ही यह वीडियो आपको जानकारी से भरपूर लगे तो इसको सबके साथ में Share अवश्य करें मेरे संग बोली सत्य सनातन वैदिक धर्म की जय जय हिंद वंदे मातरम झाल
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