9th मे दोस्तों आप सबका एक बार फिर से स्वागत है आपके अपने YouTube चैनल सत्य सनातन में जिस लिस्ट में आरक्षण सिंह पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ मेरा और राहुल आर्य जी का नाम था उसी लिस्ट में ही बहुत सारे टीवी एंकर पत्रकारों का भी नाम था और बहुत सारे स्वतंत्र लोगों के भी नाम थे जिनमें से केवल सरदाना जी की मृत्यु हो चुकी है और इस मृत्यु के पीछे कहीं ना कहीं कोई षड्यंत्र भी है क्योंकि जब रोहित जी की तबीयत पूरी तरीके से ठीक होती जा रही थी अचानक से उनको कोई डिस्ट्रॉयड दिया गया उसके बाद में हार्ट अटैक हुआ इसकी जांच होनी चाहिए हम सरकारों से इस बात की डिमांड करते हैं आज हमारा सबसे बड़ा सवाल यही रहेगा कि क्या लाश के ऊपर हंसने वालों मजाक और ठट्ठा बनाने वाले लोगों की ईए कोई सिलेक्टिव लेस है आज ही शहाबुद्दीन की मृत्यु हुई है कुर्मा से तड़प-तड़पकर इस व्यक्ति की मौत हुई और शहाबुद्दीन एक आतंकवादी था बहुत सारी धाराओं में वह लंबित था में जेल गया था यहां तक कि चंदा बाबू नाम के एक व्यक्ति के तीन बेटों को तेजाब से नहला कर उनके टुकड़े-टुकड़े करके नमक की बोरियों में भरकर फिकवा दिया गया था चश्मदीद गवाह उनके अंतिम बचे हुए लड़के राजीव रोशन को गोलियां मरवा दी थी वह भी शादी के 18वें ही दिन इतनी निर्मम हत्याकांड के बावजूद आज तक किसी मुसलमान ने नहीं तो शहाबुद्दीन के खिलाफ कोई फत्वा निकाला ना उसके सिर पर कोई इनाम निकाला और ना ही उन्होंने कहा कि रमजान के महीने तक भी जिस व्यक्ति ने नहीं बक्शे पाप करने से ऐसे व्यक्ति ने इस्लाम का नाम बदनाम किया है उसने हमारे रसूल को नीचा दिखाने का प्रयास किया है इसके नाम पर फत्वा निकाला जाए और इसको इस्लाम से बर्खास्त किया जाए कभी भी किसी मुसलमान ने उसके खिलाफ एक उंगली तक नहीं उठाई दोस्तों आपको मैंने पहले बताया था कि इस्लाम की गुस्ताखी क्या है नबी की आलिया गुस्ताखी क्या है कि पाकिस्तान में ड्रोन अंत की एक नन ने अलमारी का दरवाजा खोला अलमारी के दरवाजे पर एक स्टिकर था स्टिकर पर छोटी सी क़ुरआनी आयतें लिखी हुई थी वह स्टिकर झटके से उतर कर नीचे गिर गया दूसरी नन्हे झटपट उसको उठाया अलमारी पर वापस चिपकाने की कोशिश की लेकिन तब तक उसको मुसलमान देख चुके थे और उन्होंने उन दोनों नल की बेरहमी से पिटाई की थी और उनको ब्लासफेमी में अंदर करवाने का पूरा प्रयास किया बस इतनी सी बात है इसी बात से इस्लाम का नाम बदनाम हो जाता है और इस्लाम के रहनुमाओं का दिमाग फिर जाता है और वह उनका सर तन से जुदा करने का फरमान सुना देते हैं वह दूसरी बात है कि शहाबुद्दीन हो या गैंगस्टर के नाम पर दुनिया के अंदर आतंक मचाने वाले छुटभैए यह लोग हो या फिर आतंकवादी गिरोह बनाकर मोहम्मद इमरान के नाम पर जो लोग पूरी दुनिया में दहशत फैला रहे हैं लाखों करोड़ों लोगों को मौत के घाट उतार रहे कि उनसे इस्लाम नबी या फिर अल्लाह कुरान का नाम बदनाम नहीं होता बल्कि शहाबुद्दीन जैसे लोग बल्कि मुख्तार अंसारी जैसे लोग अतीक अहमद जैसे लोग मुसलमानों के सबसे बड़े हीरो बन जाते हैं क्योंकि वह नमाजी भी हैं वह व्यक्ति भी हैं वह पुरानी भी है वह अल्लाह ही भी हैं और वह मोहम्मद को ही अपना नबी मानने वाले लोग हैं इस्लाम के क्राइटेरिया में सिर्फ इतनी सी बात आती है कि आप लोगों ने वह सभी ट्वीट देखें जिसमें रोहित सरदाना के जाने के बाद में लोगों ने कहा कि का फिर था और यह जहन्नम जाएगा कुछ लोगों ने कहा मैं मिठाई बांट लूंगा तो किसी ने इसपर सिर्फ और सिर्फ मजाक हंसी ठट्ठा बनाने का कुत्सित प्रयास किया था शहाबुद्दीन के मरने के बाद में सर जी उस्मानी का कोई ट्वीट नहीं आया शहाबुद्दीन के मरने के बाद में बिहार से ही संबंध रखने वाले रवीश कुमार का कोई पोस्ट नहीं आया उसने कहीं पर नहीं लिखा कि इस्लाम का नाम में काम करने वाले शहाबुद्दीन जिसने की एक लाचार पिता के तीन तीन बेटों को उसकी आंखों के सामने ही मारा पुलिस लाचार पिता को जिसको अपने तीन बेटों को कंधा देने के लिए मजबूर होना पड़ा वह व्यक्ति जो न्याय की गुहार लगाते-लगाते एक दिन मर गया जिसकी खुद की बिक्री भी न्याय की आस में इसकी आंखें पथरा गई वह मर गई थी मीणा उसके लिए रमेश कुमार ने एक भी पोस्ट नहीं लिखा आप सोचिए कि इन लोगों की दुश्मनी या फिर नफरत किस के प्रति है क्या उन लोगों के प्रति है जो खून बहाते हैं जो आतंक मचाते हैं जो लोगों को तेजाब से नहला कर के उन के टुकड़े-टुकड़े कर नमक की बोरी में भर देते हैं क्या उनकी नफरत उन लोगों से है जो कृष्णानंद राय को बीच भरे रा 500 गोलियों से भूनकर के उनके सिखा काट लेते हैं क्या उनके प्रति जिन्होंने बिहार उत्तर प्रदेश बंगाल को जंगलराज बनाया नहीं उनकी उनके प्रति पूरी कि है क्योंकि उनके नाम में मोहम्मद आता है तो कि वह मुसलमान है तो कि वह लूट के माल में से जकात देते हैं और क्योंकि वह कुरान को सर्वोपरि मानते हैं और क्योंकि वह हिंदुओं से बेहद नफरत करते हैं इसलिए मुसलमानों के हीरो ही माने जाते रहेंगे सर जी उस्मानी हो स्वरा भास्कर हो या फिर वह पत्रकारिता जगत के सभी लोग या फिर ट्विटर फेसबुक इंस्टाग्राम जैसे प्लैटफॉर्म्स पर हिंदुओं से नफरत फैलाने वाले लोग उनकी मौत पर जश्न मनाने वाले वह लोग इस बात पर कुछ नहीं बोलेंगे कि शहाबुद्दीन ने किस प्रकार हजारों लोगों को नर्क बना करके रखा था बहन बेटियों के जीवन को नर्क बना करके रखा था वह सिर्फ इस बात पर ही बोलेंगे कि रोहित सरदाना ने क्रॉस क्वेश्चन क्यों किया और रोहित सरदाना ने सवाल पूछा दोस्तों मुसलमानों का सबसे बड़ा मसीहा जाकिर नाइक और जाकिर नाइक का पूरा काम धाम या भारतवर्ष में देखने वाला एक व्यक्ति वह कहता है कि यदि रोहित सरदाना ने इस्लाम को मान लिया होता मोहम्मद को पैगंबर मान लिया होता तो आज ऐसे नहीं मरता इन लोगों से पूछना चाहता हूं कि शहाबुद्दीन हो या फिर और यह एक महिला को थप्पड़ों से मारने वाला हिंदू विरोधी व्यक्ति हो या फिर वह मौलाना जो मरकज में शामिल हुए थे यह सभी लोग भी को म्यूट से तड़प-तड़प कर मर हैं अभी भी सैकड़ों में जो मुसलमान झेल रहे हैं वजह से मर रहे हैं वह रात-दिन अल्लाह अल्लाह करते थे कुरान पढ़ते थे मोहम्मद को अपना पैगंबर मानते थे वह लोग तड़प-तड़पकर क्यों मर रहे हैं और तड़प-तड़प कर मरने की बात किसके लिए चल रही है यह कमेंट में आप पड़े करो फल के सिद्धांत की बात हो रही है करो फल के सिद्धांत की बात किसके लिए है आज तक इब्राहिम में को के जितने भी नबी हुए पैगंबर हुए प्रॉफिट हुए सभी के सभी तड़प-तड़प कर मर हैं सभी की पूरी फैमिली अंत को प्राप्त हुई है और वह भी निर्मलता के साथ में क्या यही कर्मफल सिद्धांत उन नदियों पैगंबरों आपके ऊपर भी लागू होता है अथवा ही वह नबी जिन्होंने कहा कि हम ही अल्लाह के या बोर्ड के भेजे हुए हैं उनको भी तड़प तड़प कर मरना पड़ा असामयिक मौत उन लोगों की भी हुई और उनको देखने वाला तक कोई नहीं था मोहम्मद अली जिन्ना मुसलमानों का सबसे बड़ा हीरो तड़प-तड़पकर मक्खियों से भी लक बिना कर मरा था क्या उसका भी कोई कर्मफल सिद्धांत था ऐसा नहीं है की मुसलमानों को ऊपर से प्रॉफिट के देव दूध अपने पाल ने में लेने आते हो उन लोगों की भी तड़प-तड़पकर ही मौत होती है तो फिर यह नफरत क्यों और किस लिए इस नफरत की वजह है एक किताब जिस किताब में लिखा हुआ है कि काफिरों को कभी भी अल्लाह सद्बुद्धि नहीं देगा और काफिरों को वह जहन्नम का ईंधन बनाएगा ज्यादा में उनके पकोड़े तल ले जाएंगे और उन लोगों को कभी भी वह इजाजत नहीं देगा काफिरों के प्रति इतनी नफरत भरी किताब पर कई बार बैन लगाने की बात हुई लेकिन वह नहीं लगती है और बार-बार ठीक कहा जाता है कि देश और दुनिया में न जाने क्यों नफरत बढ़ती जा रही है जिनकी मजहबी किताब ही व्रत पालन सिखाती हो भला बोलो नफरत से दूर कैसे हो सकते हैं अंत में एक बार फिर से अपने सवालों दौड़ाते हुए के रवीश कुमार स्वरा भास्कर या फिर सोशल मीडिया टूल्स जो कल तक रोहित सरदाना जी की मृत्यु के बाद में जो कि एक षड्यंत्र प्रतीत होती है उसके बाद में जो हंसी ठहाके लगा रहे थे जो काफिरों को जहन्नम की आग बता रहे थे उन लोगों का शहाबुद्दीन की मौत पर एक गैंगस्टर एक आतंकवादी और एक घन घोर हिंदू विरोधी व्यक्ति की मौत पर अभी तक एक भी ट्वीट एक भी कमेंट एक विडियो या फिर एक भी हंसी का इमोजी क्यों नहीं आया क्या है इसके पीछे कारण आपको जो कुछ भी लगता है कमेंट करके जरूर बताइएगा शाहबुद्दीन जैसे यह जितने भी लोग हैं इन सब का भी कर्मफल सिद्धांत के अनुसार न्याय होगा रोहित सरदाना एक सनातनी थे और वह कहीं गए नहीं सिर्फ कपड़े बदलने के लिए मैं वापस जरूर आएंगे क्योंकि आत्मा अजर है अमर है अविनाशी है या आत्मा सनातनी है मेरे संग बोले सत्य सनातन वैदिक धर्म की जाए जय हिंद वंदे मातरम
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😲 अपना Point साबित के लिए इतने कुतर्कआइये कुछ Cross Questions करें।
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