ढाई मोर्चे का चक्रव्यूह स्वाध्याय भाग दो अध्याय 15 सरदार वल्लभ भाई पटेल की आधे कटे मोर्चे की गद्दारी पर भविष्यवाणी पृष्ठ संख्या 102 बहुत सारे मुसलमानों के मैंने इंटरव्यू देखे जिनमें वो कह रहे हैं कि कानून व्यवस्था बहुत सुदृढ़ हुई है हमारे मकान भी बने हैं और हमें खाने पीने को भी मिल रहा है लेकिन फिर भी हम मौजूदा सरकार को वोट नहीं दे सकते क्योंकि हमारे ईमान के खिलाफ है इस बात का सीधा-सीधा मतलब यह है कि खुद को सरदार वल्लभ भाई पटेल का परम भक्त बताने वाली सरकार भी उनके आदर्शों का पालन और उनके मन की पीड़ा को आज तक समझ नहीं पाई है सरदार वल्लभ भाई पटेल ने बंटवारे के बाद में बहुत ही साफ और स्पष्ट शब्दों में इस पूरी कौम की गद्दारी पर कहा था कि तुम दो घोड़े की सवारी मत करो बंटवारा हो चुका है और अब यहीं पर तुमको रहना है लेकिन मुझे अफसोस इस बात का है कि यहां के लोग अभी भी कश्मीर के मुद्दे पर आवाज नहीं उठा रहे यह बात थी 1947 से 51 के बीच की आजादी के बाद सरदार वल्लभ भाई पटेल इस बात से बहुत ज्यादा परेशान थे कि बंटवारे के पक्ष में खड़ी हुई पूरी की पूरी मुस्लिम लीग को सत प्रतिशत वोट देने वाली यही कौम भारत में कैसे रह गई क्योंकि वह उनकी गद्दारी से भली भाति परिचित थे लेकिन कहते हैं कि वह भी मोहन बाबा के आग्रह के सामने झुकने को बहुत ज्यादा मजबूर हो चुके थे फिर भी रह-रहकर उनका दुख य प्रकट होता रहता था कुछ आंकड़ों के मुताबिक 1946 के प्रांतीय चुनावों में मुस्लिम आरक्षित सीटों पर 492 में से 429 सीटों पर मुस्लिम लीग ने जीत प्राप्त की थी यानी कि लगभग लगभग 87 पर मुसलमानों ने मुस्लिम लीग को चुना था बाकी कांग्रेस को चुन रहे थे ऐसा मान सकते हैं लेकिन क्या केवल 87 पर मुसलमान ही पाकिस्तान गए थे 1941 की जनगणना के अनुसार बिहार में तकरीबन 13 पर मुसलमान थे यानी करीब करीब 47 16314 बिहार में मुस्लिम लीग का चयन करने वाले 85 पर मुसलमान थे लेकिन पाकिस्तान कितने गए थे 1951 की जनगणना में हमें ये बात पता लगती है कि 1947 के बंटवारे में पूरे भारतवर्ष से करीब 72 लाख 62 000 मुसलमान पाकिस्तान चले गए थे और भारत में उस समय पर 3 करोड़ 54 लाख मुसलमान बाकी थे क्या यह मुसलमान जो भारतवर्ष में रुके हुए थे वोह मुस्लिम लीग को सपोर्ट ना करने वाली 13 पर आबादी थी जी नहीं यह वही सब थे जिन्होंने बंटवारे की नीव रखने वालों को खुलकर वोट किया था लेकिन जब उनको चरखे का आश्वासन मिल गया कि भले तुमने मेरी लाश के ऊपर देश का बंटवारा चुना हो भले ही तुमने खिलाफत आंदोलन और डायरेक्ट एक्शन डे में हिंदुओं का नरसंहार किया हो भले ही तुमने मुस्लिम लीग को सपोर्ट किया हो लेकिन तुम भारत छोड़ कर के मुस्लिम लीग के द्वारा बनाए गए देश में मत जाओ क्योंकि तुमको कोई कुछ नहीं कहेगा बंटवारे का सारा इल्जाम मेरा गुलाब वाला बाबू और कलम वाली बाई उठाकर सावर कर के ऊपर डाल देंगे बस तुम इस बात का रट्टा फिकेशन मार लेना और अहिंसा के नाम पर कायर बनी मेरी कौम कल तुम्हारी इन बातों को सुन सुन कर के ही खुद बखुदा कटोरा उठाकर भीख मांगने जाता है तो भी कम वक्त कोई उसको एक चवन्नी तक नहीं देता चरखे वाले बाबू के इस आश्वासन और आजादी के बाद आई सरकारों ने ही अपनी पूरी वफादारी निभाते हुए ना केवल उनको यहां पर रोका अभयदान दिया बल्कि उनके मनमर्जी के कानून भी बनवाए गए उनको मान्यताएं दी गई दूसरी ओर हमारे हिंदू भाइयों को इस देश में जो वापस आ रहे थे उनके सब रास्ते रोककर एक बार फिर से वही संघर्ष उत्पन्न कर दिया जिसका अंदेशा सरदार वल्लभ भाई पटेल और भीमराव राम जी अंबेडकर को पहले से ही था सरदार ने अपने भाषण में कहा था कि जो लोग कल तक बंटवारे का समर्थन करते हुए मुस्लिम लीग को शत प्रतिशत समर्थन दे रहे थे वोट दे रहे थे ऐसा क्या हुआ एक ही रात में कि उनकी मानसिकता बदल गई और वह सारे के सारे लोग यहां पर रुक गए हैं वह अपने पसंदीदा देश में नहीं गए हैं इसलिए मुझे यह बात समझ में नहीं आती है भीमराव राम जी अंबेडकर को भी इस बात का बहुत ज्यादा कष्ट हुआ करता था उन्होंने भी अपनी किताब पाकिस्तान अथवा भारत का विभाजन में इस चिंता को पुरजोर व्यक्त किया था लेकिन इस देश का दुर्भाग्य देखि कि उन्हीं भीमराव अंबेडकर का खुद को उपासक और वंशज बताने वाले लोग उनकी इस बात पर अमल तक नहीं करना चाहते हैं ठीक यही विषय हमारे प्रथम सीडीएस ने भी सभ्यताओं के टकराव का मुद्दा उठाया था कि इस समय हमारा देश ढाई मोर्चे के चक्रव्यूह से लड़ रहा है एक है चीन दूसरा पाकिस्तान और आधा कटा हुआ मोर्चा इस देश के अंदर छुपा हुआ है जो कहने को तो हमारे ही देश का नागरिक है लेकिन कठपुतली इन बाकी दो देशों का बना हुआ है हमें बार-बार इशारे मिलते रहे लेकिन कभी भी खुल कर के भी किसी ने भी इस बात पर बात नहीं की क्योंकि वही फिर संप्रभुता अखंडता एकता सहिष्णुता प्रेम दिवस लहसुन प्याज की चिंताएं अगर इन तीनों लोगों के जीवन को देखा जाए तो सरदार वल्लभ भाई पटेल हमारे देश के पहले गृहमंत्री थे बाबा साहब हमारे देश के पहले कानून मंत्री थे और जनरल बपिन रावत साहब हमारे पहले सीडीएस थे ये पहले पहले जितने भी लोग थे इन सबको पता था कि आवश्यक चिंताएं हमारे देश के लिए क्या हैं लेकिन इशारे करने के अलावा उन्होंने कभी भी इस देश की जनता को खुलकर वो बात नहीं कही क्योंकि उन सबको लगता था कि कहीं ना कहीं चचा जान नाराज हो जाए और इन सब चिंताओं के चक्कर में कितनी चिंताएं जल गई और जलेगी इसका अंदाजा किसी को भी नहीं है लेकिन प्रथम ग्रह मंत्री कानून मंत्री और प्रथम सीडीएस हमें सिर्फ इशारे करते चले गए जबकि उनके हाथ में था कि वह अपने नागरिकों को कोई विधान बना दें ताकि सनातन काल से इस भूमि को भगवान की तरह पूजने वाले और अपने लहू से इसको सींचने वाले लोग सुरक्षित रह सकें जिन्होंने कभी अपना साम्राज्य बढ़ाने के लिए कभी किसी दूसरे मुल्क के ऊपर आक्रमण तक नहीं किया बल्कि पूरी दुनिया को वसुदेव कुटुंबकम और सर्वे भवंतु सुखिन सर्वे संतु निरामया की सदका मनाएं ही दी हैं जिसने कभी अपने लिए कोई देश नहीं मांगा जिसने कभी प्रथम वार नहीं किया और जिसने हारे का सहारा बनकर खत्म होती हुई मजहब और सभ्यताओं को शरण दी आसरा दिया इस्लाम के नबी मोहम्मद के नवासो का जीवन बचाने के लिए जिन्होंने अपने सात बेटों समेत अपना भी बलिदान दे दिया दुनिया से खत्म हो चुके पारसियों को जिन्होंने अपनी आंखों पर बैठा लिया यजीद को जिन्होंने अभयदान दिया यहूदियों की रक्षा के लिए जिन्होंने दधीच बन कर के रक्षा कवच बना दिया आप सब कुछ जानते हुए भी इनको बस इशारे करते रहे सोचिए कि जिस दिन धरती पर मानवता की रक्षा करने वाला यह सनातन धर्म समाप्त हो जाएगा उस दिन इन शरणार्थियों को कौन बचाएगा मानवता के लिए अपने घर के दरवाजे खोलने वालाला इस धरती पर कौन बचेगा सैमुअल पी हंटिंगटन भी अपनी किताब क्लासेस ऑफ सिविलाइजेशन में क्रुसेड काल को आधारित करते हुए यही कह रहे हैं कि किस प्रकार से दो प्रमुख मजहब अपनी विचारधारा अपनी मानसिकता को कुदरत का निजाम और पैगाम बता कर के एक दूसरे का खून बहाते रहे वो भी सदियों तक जबकि दूसरी तरफ भारत ने कभी भी अपनी विचारधारा की आड में साम्राज्य के विस्तार और दूसरे की विचारधारा होने पर सामने वाले का कभी भी नरस घार नहीं किया फ्रांस के पत्रकार फ्रैंकोस गोइटर इस बात को लिख रहे हैं कि भारत भले ही हिंदू बहुसंख्यक हो लेकिन उन पर लगातार हमले हो रहे हैं हिंदू बहुत ज्यादा अहिंसक और शांतिप्रिय है लेकिन उनके ऊपर बढ़ते हुए हमलो के खतरों को देखते हुए उन्हें लड़ना चाहिए हिंदू बहुत अक्षमा वान है भारत के डीएनए में समाए हुए इन गुणों को इन क्षमाशील होता की प्रवृत्ति को क्या हमारे प्रथम नेता नहीं जानते थे शत प्रतिशत जानते होंगे लेकिन हमें स्पष्ट शब्दों में आगाह करते-करते रह गए कभी-कभी यह महसूस होता है जैसे माता और पिता मरने से पहले सामने खाट पर पड़े हुए हैं अपनी संतानों को सिर्फ इशारा कर रहे हैं कि पीछे जो तुम्हारा शत्रु खड़ा हुआ है जिनको तुम अपने परिवार का सदस्य मानते हो जिनको तुम अपना चचा जान समझते हो वह तुम्हारे पीछे चचा जान नहीं बल्कि तुम्हारे पीछे खड़ा है तुम्हारा अघोषित शत्रु तुम्हारे परिवार का सदस्य इस व्यक्ति से सावधान रहना अगर उनसे पूछेंगे कि साफ-साफ क्यों नहीं बता रहे हो तो बस वही चाचा जान बुरा मान जाएंगे तो बस हम साफ-साफ नहीं कहेंगे और आज हालात यह है कि संतानों को यह बात 75 साल में भी समझ नहीं आई जबकि चाचा जान बंटवारे में अलग घर लेने के बावजूद भी आज भी अपने बड़े भाई के घर पर ही रोटी तोड़ रहा है और रोज बुरा मानकर मुंह फुलाकर बैठ जाता है और वैसे भी अबकी बार चाचा जान का जो इरादा है वो पूरे घर के ऊपर कब्जा करने का है और आप चाचा जान को खुश करने में लगे हुए हो मुझे लोग कहते हैं कि फिर किसी पर भी विश्वास ना करें क्या भाई पांचों उंगलियां बराबर नहीं होती हैं सभी एक जैसे नहीं होते हैं हां भाई मुझे पता है कि 90 पर जो सांप होते हैं ना वो जहरीले नहीं होते लेकिन हम फिर भी एक-एक सांप से कटवा करर ये चेक नहीं कर सकते कि कौन सा सांप जहरीला है और कौन सा नहीं और ऐसा मैं इसलिए बोलता हूं क्योंकि हम हजार साल तक यही प्रयोग करते रहे कि कौन सा सांप जहरीला है और कौन सा नहीं है हम अपनी संतानों को बस इशारे करते रहे और चल बसे मैं नहीं चाहता हूं कि अपनी संतानों को इस प्रकार से इशारे करते हुए मर जाऊं इशारों को मैं शब्द और भाषा देने का काम कर रहा हूं मैं साफ और स्पष्ट शब्दों में कहता हूं लव द कंट्री यू लिव इन और लिव इन द कंट्री यू लव
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