Tuesday, 20 January 2026

#MANTHAN Minakshi जी ने बताया क्यों हुआ उनके यज्ञोपवीत पहनने पर हंगामा Satya Sanatan Ankur Arya

मैं ये पूछना चाहती हूं जो ये भी पौराणिक जो ये कहते हैं कि महिलाओं को वेद पढ़ने का अधिकार नहीं है तो मुझे बता दो क्या तुम्हारे घर में सरस्वती माता की तस्वीर नहीं है और जब सरस्वती माता की तुम उस तस्वीर को देखोगे तो उसमें तुम्हें दिखाई देंगे कि सरस्वती माता ने चारों वेद अपने हाथों में पकड़ रखे हैं तो हटा दो उस तस्वीर को भी तुम वहां से हटा दो उस तस्वीर को भी आप 10 दिन एक एक जैसी रील देखिए आप सनातन धर्म के ऊपर रील्स देखिए या सनातन धर्म के ऊपर कोई शॉर्ट्स देखिए वीडियो देखिए तो 11वें दिन आपके मोबाइल में वही चीजें आएंगी आपके सामने वो आध नंगी लड़किया सिर्फ इसलिए आ रही क्योंकि आप देख रहे हो आप देख रहे हो इसलिए आ रही है आप लाइक फॉलो कर ही क्यों रहे हो जब एक पंडित एक फेमस कथावाचक अपने पंडाल के बाहर ये लिख देगा कि अपने चप्पलों के साथ अपनी बुद्धि भी बाहर छोड़ कर आना तो क्या प्रश्न करेगा बच्चा अगर अगर तुम प्रश्नों के उत्तर नहीं दोगे तो वो कोई नया पंडित ढूंढेंगी नया कथावाचक ढूंढेंगी और वहां से अपने प्रश्नों का उत्तर लेंगी अगर तुम नहीं दोगे [संगीत] तो महिला सशक्तिकरण क्या है और उसकी आवश्यकता ही क्यों पड़ी मुस्कान जी ने कहा कि सशक्तिकरण की जरूरत क्यों पड़ी माताएं बहने पहले से सशक्त थी एक ऐसा काल आया था मध्य काल बीच में जहां महिलाओं को नीचा दिखाया गया उनको पैर की जूती समझा गया जब मोहम्मद बजबी इस देश में आया था तो एक तरफ से उसने मंदिरों को लूटना शुरू करा और वो जा पहुंचा यहां अपने सोमनाथ के मंदिर में सोमनाथ के मंदिर में उसने बहुत सोना चांधी गिरे माने के सब लूटे और वहां से निकलता हुआ वो जब जा रहा था अपने देश को वापस तो इतनी लूट के बाद उसने यहां की माताओं बहनों और बेटियों को देखा जब उसकी नजर इन पर पड़ी धन दौलत की जो उसने लूट गही थी वो सबको समझ आई सामाजिक जो लूट होती है वो समझ आती है सामरिक लूट समझ आती है संपत्ति की लूट समझ आती है लेकिन एक लूट और करी उसने एक जो लूट वो सांस्कृतिक लूट थी जो करी उसने जब मोहम्मद गजनबी देश से गया तो अपने वो ऊंट खचर के पीछे हमारी माता बहनों ललना को इस देश की ललना को खींचते हुए घसीटते हुए यहां से लेकर गया और लेकर गया कहां अपने अरब के बाजारों में और अपनी माता बहनों को वहां बेचा गया दोदो दीनार में और उसने क्या नारे लगाए दुख कर हिंदुस्तान दोदो दिनार तो एक जो ये मध्य काल जब मुगल आए मुगल आए यहां पे ये अंग्रेज आए यहां पे ये जो काल था जहां पे महिलाओं को नीचा समझा गया छोटा समझा गया और अब वो बढ़ता बढ़ता ऐसा हो गया था कि बिल्कुल ही खत्म वई थी माताओं की पहचान बहनों की पहचान और दूसरी कम्युनिटीज में तो ये भी कहा जाता है कि ये एक पसली है हम ये कोई इसमें कोई अलग से आत्मा नहीं है ये पसली है हमसे निकली हुई ऐसे भी कहा जाता है और उसके बाद सशक्तिकरण की बात हुई फेमिनिज्म की बात हुई जो फेमिनिज्म जो शब्द जो यूज किया जाता है वो 1930 में निकाला गया था वो इक्वलिटी के लिए निकाला गया था कि इक्वलिटी हो क्योंकि उस समय पर बिल्कुल इक्वलिटी थी ही नहीं मतलब बिल्कुल खत्म हो चुका था सब कुछ ना वोट देने के अधिकार है ना एजुकेशन का अधिकार और किसी चीज का अधिकार नहीं है उस समय पर ये फेमिनिज्म शब्द निकला था और ये ग्रीक के एक लेक्चरर ने यूज किया था अपने भाषण में इक्वलिटी को यूज करते हुए कि आज जो फेमिनिज्म का हम अर्थ देखते हैं जो फेमिनिज्म से आप मतलब देखते हैं वो हम सभी जानते हैं कि अगर लड़की थप्पड़ भी मार रही है तो उसमें भी ये फेमिनिज्म का एक वो दिख जाता है कि फ्रीडम फेमिनिज्म इक्वलिटी इक्वलिटी तो अलग अलग क्षेत्र में चाहिए लड़कियों को अगर उनको कहा जाएगा कि तुम्हें नहीं छोटे कपड़े पहने तो क्यों नहीं पहनने हमें छोटे कपड़े ये भी तो पहनते हैंकर ये भी तो करते हैं तो इक्वलिटी वहां चाहिए हमें भी दारू पीनी हमें भी सरेट प हम भी छोटे कपड़े पहनने लेकिन इक्वलिटी वहां नहीं मानती है जब एक पंडित अपने कथा से कहता है कि तुम्हें यजो पवित्र ने का अधिकार नहीं है तुम्हें गायत्री मंत्र पढ़ने का अधिकार नहीं है जब इक्वलिटी नहीं मांगती अरे अरे आपने कह दिया चलो अच्छा है आपने कह दिया ये यहां इक्वलिटी नहीं दिखाई देती इ क्वालिटी वहां दिखाई देती है ये फैमज वहां दिखाई देता है तो जैसे कि आयुष जी ने बताया ये नारी सशक्ति कर सबने अच्छे से बताया तो मुझे लगता है नारी को सशक्त होने की जरूरत है लेकिन सही दिशा में एक मात्र निष्टा एक शब्द है जो वेद में कहा जाता है जो माता मांजने वाली हो जो मांझे अपनी संतान को मांझे और मांजने का अर्थ यहां अपनी बेटी को था मतलब उसको अपनी बेटी को सशक्त करना था वहां माता मांझा करती थी बेटियों को तो मुझे लगता है कि माता को निर्माता ही बनना पड़ेगा वापस से क्योंकि आज हम माता को देख रहे क्या हालत है माता की तो माता को वापस से निर्माता बनेगा तभी ये समाज बढ़ पाएगा तभी ये समाज चल पाएगा आपने अभी संस्कारों की बात की तो बच्चों के लिए तो चाहे वह लड़की हो लड़का हो सबके सामान्य है कि एंड तक उनके सारे संस्कार सेम है बट एट द एंड जब बात आती है तो हम बहुत सारे कथावाचक से सुनते हैं कि नारियों को यजो पवित धारण नहीं करना चाहिए नारियों को गायत्री मंत्र नहीं करना चाहिए तो मीनाक्षी जी मैं आपसे पूछना चाहूंगी मुस्कान जी का ये प्रश्न पूछने का एक और उद्देश्य है मुझसे क्योंकि इसम मेरी बड़ी कंट्रोवर्सी हुई थी यज्ज पवित्र संस्कार प क्योंकि मैं ी परिवार से आती हूं मैं सच बताऊ तो मैं पौराणिक परिवार से आती हूं और मेरी फैमिली पूरी कृष्ण डिवटी है और मेरा जो ये टर्निंग पॉइंट था लाइफ का ये यूनिवर्सिटी ऑफ पतंजलि में जाने से ही हुआ है वहां से मैं वैदिक सिद्धांतों को जानना शुरू हुई और मुझे सात से आठ महीने लगभग हुए होंगे आर्य समाज के सिद्धांतों को जानते हुए बस ज्यादा नहीं किंतु मैं ऐसे परिवार से आती हू और मैं एक छोटी सी घटना बताती हूं आपको क्योंकि बहुत माहौल गंभीर हो चुका है एकदम मैं बताती हूं कि मेरे अभी लक्ष्मी पूजा ई थी मेरे घर में और मम्मी लक्ष्मी जी लेकर आई और हमारे घर में लड्डू गोपाल है तो मेरी माता कहती है कि लक्ष्मी जी ना रो तुम्हे देख के हस रही है मैंने कहा अच्छा मैंने कहा हां हंस रही है मम्मी हस रही है फिर थोड़ी देर बाद बोलती है ये लड्डू गोपाल तुम्हारी तरफ देख रहे हैं मैंने कहा मम्मी वो केवल एक मूर्ति है ऐसा नहीं होता है तुम नास्तिक हो गई हो तुम नास्तिक हो गई हो पता नहीं कौन सा तुम पर प्रभाव पड़ रहा है कहां से तुम ये सब संस्कार ले रही हो तुम नास्तिक हो गई हो तो ये यूनिवर्सिटी ऑफ पतंजलि में जब मैं गई तो य वेद आरंभ से पहले यजो पवित्र होता है तो वहां शुरुआत करने से पहले यजो पवित्र संस्कार और सबका हो रहा था मैंने भी वो यज्ज पवित संस्कार लिया सब कुछ समझकर ध्यान में रखकर परिवार से पूछा मना कर दिया मैंने कहा मैं फिर भी लूंगी तो यज पवित्र संस्कार लिया और वो वीडियो मैंने अपने बहुत वायरल हुई और उसका बहुत विरोध हुआ बहुत गालियां पड़ी मुझे कि ये नारी होकर कैसे फैला रही है ये क्या समाज को दिशा देगी कैसी है ये बहुत विरोध हुआ उसका तो मैंने वो वीडियो सोचा कि डिलीट कर देती हूं तो मैंने अपने एक गौतम खट्टर जी हैं मैंने उनसे बात करी कि मैं देखो एक बार ये मैं वीडियो डिलीट कर दूं क्या ये बहुत विरोध हो रहा है इसका तो उन्होंने कहा तुमने कुछ गलत किया क्या मैंने कहा नहीं तो उन्होंने मुझे सारे जितने भी प्रमाण थे वो मेरे सामने रख दिए लाकर तो मनुस्मृति से लेकर सारे प्रमाण मेरे सामने रखे उस दिन मैंने अच्छे से समझा यजो पवित्र संस्कार को 16 संस्कारों में 16 संस्कार ये पुराणिक में तो सारे संस्कार खत्म हो चुके हैं नारियों में ऐसे भी है कि परिवारों में नामकरण संस्कार तक महिलाओं का नहीं होता है एक परिवार में मैं गई तो संस्कार पूछी इसका नामकरण संस्कार हुआ तो उन्होने कहा हां बेटे का हुआ है मैंने कहा बेटी का इसका नाम तो इसका भी अच्छा है तो उन्होने कहा नहीं हमारे में नामकरण संस्कार लड़कियों का नहीं होता लड़कों का होता मुझे बहुत बुरा लगा सुनकर दूसरा एक तो विवाह सं तो खैर हो नहीं सकता महिला के बिना नहीं तो वो वो भी कर देते है ना तो एक विवाह संस्कार तो चलो हो जाता है तो 16 संस्कारों में से ये जो 11वें नंबर का जो संस्कार है वो हमारा यजो पवित्र संस्कार है और 12वें नंबर का वेद आरंभ संस्कार ये ये दिखाता है कि वेद आरंभ आपका जब होगा उससे पहले ही यजो पवित होगा यजो पवित्र लेकर ही आप वेद आरंभ कर सकते हो तो यजो पवित में जो तीन धागे होते हैं वो तीन ऋणों को दिखाते हैं मातृ पितृ ऋण गुरु ऋण और ऋषि ऋण ये दिखाते हैं तो ऐसा तो नहीं है कि जो माता का दूध दूध का जो ऋण है अब माता ने दूध पिलाया बेटी को पिलाया बेटे को भी पिलाया अब जो उसका ऋण है वो केवल पुत्र पर चढ़ रहा है पुत्री पर नहीं चढ़ रहा है ये तो गलत बात है ना महिलाओं को वेद पढ़ने का अधिकार नहीं है मैं ये पूछना चाहती हूं जो ये भी पौराणिक जो ये कहते हैं कि महिलाओं को वेद पढ़ने का अधिकार नहीं है तो मुझे बता दो क्या तुम्हारे घर में सरस्वती माता की तस्वीर नहीं है और जब सरस्वती माता की तुम उस तस्वीर को देखोगे तो उसमें तुम्हें दिखाई देंगे कि सरस्वती माता ने चारों वेद अपने हाथों में पकड़ रखे हैं तो हटा दो उस तस्वीर को भी तुम वहां से हटा दो उस तस्वीर को भी तो जो ये चार वेद माता सरस्वती ने पकड़े हुए ये ऐसे ही नहीं पकड़े हुए उन्होंने भी अध्ययन किया होगा और वो भी महिला है तो इसका अर्थ हम भी वेद पढ़ सकते हैं और हम भी यजो पवित्र संस्कार ले सकते हैं तो ये जो मैं एक राजा जनक की सभा थी राजा जनक की सभा में सारे विद्वानों को बुलाया वे जो भी वेद जानते हैं उन सबको बुलाया तो विदुषी गार्गी भी वहां थी विदुषी गार्गी वहां थी और याज बलक भी वहां थे तो वहां ने से जिन सींक मड़े हुए गाय की जो गाय थी वो वहां थी कि जो भी ये प्रतियोगिता जीतेगा वो ये गाय लेकर जाएगा तो याज वल्की जी अपने साथी से कहते हैं कि ये गाय हमारे यहां जानी चाहिए हमारे यहां आनी चाहिए तो जितने भी विद्वान वहां बैठे थे उन्होंने कहा कि अभी शुरू तो होने दो अभी शुरू होगी तो तो ये गाय आपके यहां प जाएगी ऐसे थोड़ी चली जाएंगी तो प्रश्न उत्तर हुए बहुत ज्यादा हुआ अंत में क्या हुआ गारगी जी खड़ी हुई विदुषी गारगी खड़ी हुई उन्होने कहा मैं तीन प्रश्न पूछूंगी और इन तीन प्रश्नों का यदि यावल जी ने उत्तर दे दिया तो ये गाय ले जा सकते हैं और उसके अंद और ये निर्णय किया गया कि विदुषी गार्गी को इतना ज्यादा अध्ययन था वेदों का कि ये जो प्रश्न करेंगी उसके बाद कोई प्रश्न करने के लायक है भी नहीं ये ऐसे प्रश्न करेंगी तो उनका जो उत्तर उन्होंने दिया और वो ले गए गायों को तो इतना मान था विदुषी गार्गी में कुछ तो होगा ना पढ़ा तो होगा ना कुछ ऐसे ही तो नहीं बिठा दिया गया होगा दूसरा एक प्रमाण और मैं जब ये सब सुन रही थी जब ये जान रही थी तो उसके दौरान मुझे शंकराचार्य जी का एक एग्जांपल दिया गया जब शंकराचार्य जी मंडन मिश्र जी के पास गए शास्त्रार्थ करने के लिए तो उसका जो जजमेंट कर रही थी जो स्त्री वो मंडन मिश्र जी की पत्नी थी तो जब मंडन मिश्र जी की पत्नी उनके शास्त्रार्थ का अगर निर्णय करेगी कौन जीतेगा और कौन हारेगा इसका अर्थ यह है कि वो भी कुछ ना कुछ तो जानती ही होगी उसने भी पढ़ा ही होगा और यदि उसने वेद आरंभ लिया वेद आरंभ किया होगा वेद पढ़े होंगे तो यजो पवित्र जरूर लिया होगा तो ऐसा नहीं है 16 का 16 संस्कार जैसे दीदी ने बताया 16 के 16 संस्कार पुत्र के भी होते हैं और पुत्री के भी होते हैं इसलिए जो मैं बोलना चाहती हूं जो अपने मंचों से कथावाचक ये पंडित जो बोल देते हैं कहते हैं कि स्त्रियों को यजो पवित्र लेने का अधिकार नहीं है वेद पढ़ने का अधिकार नहीं है उनको गायत्री मंत्र पढ़ने का अधिकार नहीं है तो मैं यही जानना चाहती हूं कि गायत्री मंत्र में ऐसी कौन सी अभद्र बात कह दी गई है जो हमें पढ़ने का अधिकार नहीं और पुरुषों का पढ़ने का अधिकार है ऐसी कौन सी बात कह दी गई है तो पर मुझे बुरा इस बात पर लगता है जो मैं जो पहले बात बोल रही थी फ्रीडम के नाम पर तुम यह तो कह देती हो कि मुझे क्यों नहीं छोटे कपड़े पहनने का अधिकार है फ्रीडम के नाम प तुम यही क्यों नहीं पूछ रही हो कि मुझे क्यों नहीं गायत्री मंत्र पढ़ने का अधिकार है फ्रीडम के नाम प तुम ये क्यों नहीं पूछ र कि मुझे क्यों नहीं जो पवित्र लेने का अधिकार है तुम ऐसे कैसे कह सकती हो कि मुझे छोटे कपड़े पहनने का अधिकार क्यों नहीं है ये क्यों नहीं कहते ये क्यों आता है ये सवाल मन में और मैं तो मानती हूं गलती उनकी भी नहीं है जब एक पंडित एक फेमस कथा वाचक अपने पंडाल के बाहर ये लिख देगा कि अपने चप्पलों के साथ अपनी बुद्धि भी बाहर छोड़ कर आना तो क्या प्रश्न करेगा बच्चा आकर अगर तुम प्रश्नों के उत्तर नहीं दोगे तो वो कोई नया पंडित ढूंढेंगी नया कथावाचक ढूंढेंगी और वहां से अपने प्रश्नों का उत्तर लेंगी अगर तुम नहीं दोगे तो यहां टाइम ये है कि तुम्हें उत्तर देने पड़ेंगे तुम्हें उत्तर बताना पड़ेगा कि क्यों नहीं ले सकते अगर कोई है वैलिड रीजन तो दो हमें हम मानेंगे हम मानने के लिए तैयार है मेरी माता मुझसे कहती है अ कहते हैं कि जो माता होती है वो दे देवता होती है हमारे वेदों में हमें बताया जाता है हमरे हमें मेरे आचार्य जी मुझे बताते जो माता होती है वो वेदों वो देवता होती है माता निर्माता होती है मैं माता की सारी बातें मानती हूं लेकिन माता की बातें मैं ऐसी तो नहीं मान सकती हूं जो गलत होंगी और ऐसा भी नहीं है कि मैं अपनी माता को समझाने का प्रयास नहीं करती हूं मैंने शुरू किया धीरे-धीरे मैंने उस बात को वहीं खत्म कर दिया कि ठीक बोल रहे हो आप मम्मी ये हंस रही है मुझे देखकर ये भी मुझे देख रहे हैं सही बोल रहे हो अगले दिन गोवर्धन था मेरी माता जी वो गोवर का जो बनाते हैं अपने यहां पर उसकी परिक्रमा लगा रही थी और आचार्य जी ने मुझे गोवर्धन का अर्थ समझाया कि गौ का वर्धन करना गायों का वर्धन करना गोवर्धन कहलाता है मम्मी के पास में गई मैंने कहा आपको पता है कि ये गोवर्धन का अर्थ क्या होता है कहती एक कहानी सुनाई पौराणिक से मुझे बढ़िया सी मैंने कहा बढ़िया कहानी थी आपकी मम्मी पर आपको पता है इसका अर्थ कैसे इसको अगर डिवाइड करेंगे आपने संधि विच्छेद तो पढ़ा होगा ना मम्मी कह रही हां तो पता है अब ग और वर्धन को अलग करो ग का जो वर्धन होता है उसको गोवर्धन कहते हैं तो दो मिनट वो चुप खड़ी रही फ बोलती है कि हो सकता है वैसे ये भी हो सकता है चलो मैं मान लेती हूं तो ऐसे मैंने शुरू करा मैंने उनको बताया कि ईश्वर और भगवान में क्या डिफरेंस है आपको पता है भगवान क्या होते है मम्मी तो बोलती है भगवान कृष्ण है उनका एक ही इलाज वही होता है वैसे मैं बताऊं कृष्ण डिवटी का एक ही कृष्ण भगवान है तो फिर मैंने कहा फिर ये कहते कर्ण कण में भगवान है मतलब हर जगह जाकर भगवान है तो मैं उनको ऐसे समझाने का प्रयास करती हूं वो समझती है तो ऐसा नहीं है कि समझेंगे नहीं जहां प्रमाण होंगे वहां लोग समझेंगे मेरे यज्ज पवित्र को उन्होंने समझा मैंने उनको सारे प्रमाण उनके सामने रख दिए कि ये देखो ये है ना ये सारे प्रमाण है ना जिस मुझे एक बात समझ नहीं आती लोग बोलते थे कि मनुस्मृति में ऐसा लिखा हुआ है तो मैंने यह प्रश्न किया आचार्य जी मनुस्मृति में ये लिखा गया है तो उन्होंने कहा कि ये वैसा है कि एक लड़की बोल रही है कि मैं नहीं मानती चीजों को मैं नहीं मानती धर्म को इसमें बहुत मिलावट है और यह पता नहीं क्या पाखंड चल रहा है मैं धर्म को नहीं मानती तो उसको ये पूछो कि जो दूधिया दूध लेकर आता है उसमें पानी मिलाकर लेकर आ है तो तुम ये कह दो कि दूध खराब है दूध पीना नहीं चाहिए ऐसा तो नहीं कहोगी दूध अच्छा तो होता है बस वह मिलावट करके लेकर आ रही है वैसा ही है तो यही मुझे आचार्य जी ने समझाया कि यह मिलावट है बेटा जिस मनुस्मृति में ये लिखा हो सकता है यत नार्यस्तु पूज्यंते रमंते तत्र देवता उसी मनुस्मृति में कैसे लिखा हो सकता है कि नारियों को या वेद पढ़ने का अधिकार नहीं है देखने का भी अधिकार नहीं है छूने का भी अधिकार नहीं है अगर वो पढ़ ले या और सुन ले तो उनके कान में खोलता हुआ तेल डाल दे या कुछ भी तो ऐसे कैसा होता है कि एक ही एक ही अ जो ग्रंथ है वो अलग-अलग दो बातें कह रहा है ये बिल्कुल गलत था ये मिलावट थी हमारे इसमें तो बहुत ज्यादा बड़ा कह दिया मैंने क [प्रशंसा] धन्यवाद मीनाक्षी जी से मेरा सवाल है कि हम देखते हैं महिलाएं हैं जॉब करना चाहती हैं कुछ पति-पत्नी है जो जॉब करना चाहते हैं तो आने वाली जो उनकी संतान होगी उसका निर्माण कैसे होगा सबसे पहले तो मैं बहुत देर से एक चीज ऑब्जर्व कर रही थी मैं जभी भी किसी मैं मेरे को बहुत समय नहीं हुआ है इन सिद्धांतों को जानने हुए इस समाज से जुड़े हुए लेकिन जब भी मैं किसी मंच पर जाती हूं या मैं किसी को देखती हूं तो मुझे कोई युवा नहीं दिखाई देता है मुझे बुरा लगता है ऐसा नहीं है कि युवाओं तक ये बात जा नहीं रही है मुझे युवा दिखाई नहीं देता मुझे लगता है कि यह सिद्धांत इतने इंपॉर्टेंट है कि ये युवाओं तक जाने चाहिए पर कहीं ना कहीं ये ऐसा कमी रह जाती है मुझे ऐसा लगता है मुझे कमी खलती है तो मुझे तो ज्यादा समय नहीं हुआ मुस्कान जी भी हम बहुत छोटे हैं और जितने भी यहां बैठे उन सबसे मुझे लगता है हम बहुत छोटे हैं तो जैसे इन्होने प्रश्न मुझसे किया प्रश्न बच्चों के लिए जो पूछा तो एक जो समय आया था बीच में जैसे नारी सशक्तिकरण की जो बात हो रही है एक काल जो बीच में आया था तो उस काल में बेटियों को वेदों से दूर कर दिया इसलिए वह नावेद हो गई और जावेद के करीब हो गई और वो जावेद को अपना बिल्कुल पूरा हमसफर मानती है और माता-पिता को बेवकूफ समझती है है ना तो वो मुझे लगता है वो एक एलिमेंट शायद इन्होने छोड़ दिया है श्रद्धा जी ने बहुत अच्छा बताया लेकिन एक जो इसका कारण है ये लव जिहाद और ये जो डाइवोर्स जो इसका कारण है एक कारण ये भी है हम टेलीविजन को भूल जाते हैं आज जो यूथ है यहां बैठे हुए कम लोग चलाते होंगे सोशल मीडिया लेकिन यूथ जितना भी है इंडिया या इंडिया से बाहर भी 80 प्र का उसमें सासू भी शादी कर रही है बहू भी शादी कर रही है फिर डाइवोर्स हो जाता है फिर शादी कर लेते हैं दूसरा पति आ जाता है वो मर जाता है फिर दूसरा पति आ जाता है ऐसे घूम घूम कर चार पांच शादियां सासू की हो जाती है और चार पांच बहू की हो जाती है ठीक है डाइवोर्स नहीं होंगे तो क्या होगा उनको देख उनको लग रहा है कि अच्छा इसका हमसफर दूसरा वाला नया वाला आ गया ऐसे तो हमारे जीवन में भी आ सकता है तो ये ये एक बहुत बड़ा कारण है ये हंसी की बात नहीं है मैं सच बता रही हूं ये बात सोशल मीडिया पर हम देख देख रहे हैं जो कुछ भी हम देख रहे हैं आज अगर किसी एक एक बड़ा जरिया है कमाने का youtube1 जैसी रील देखिए आप सनातन धर्म के ऊपर रील्स देखिए या सनातन धर्म के ऊपर कोई शॉर्ट्स देखिए वीडियो देखिए तो 11वें दिन आपके मोबाइल में ही चीजें आएंगी आपके सामने वो अध नंगी लड़कियां सिर्फ इसलिए आ रही है क्योंकि आप देख रहे हो आप देख रहे हो इसलिए आ रही है आप लाइक फॉलो कर ही क्यों रहे हो नहीं करोगे तो आगे भी कुछ नहीं होगा आप देख रहे हो कर रहे हो इसलिए वो भी बनाने का प्रयास कर रही है वो वहां से कमाने का वो सोर्स है लड़कियों का मुझे लगता है जो लड़कियां ये लव जिहाद के चक्कर में फंसती हैं जो ल शायद उनको अपना इतिहास नहीं पता उनको नहीं पता लक्ष्मीबाई कौन है उनको नहीं पता जीजाबाई कौन है उनको नहीं पता कर्णावती कौन है किरण बाई सा कौन है किरण सिंहनी स चढ़ी उर पर खींच कटार अकबर मांगे भीख दोनों हाथ पसार यह किरण बाई साथी जानते ही नहीं है शायद वह अपना इतना अनमोल इतिहास नहीं जानती है इसलिए वह अब्दुल के चक्कर में फंसती है मुझे ऐसा लगता है ठीक है वो नहीं जानती जीजा मां माता जीजा बहन ने बोला कि शिवा छत्रपति शिवाजी है इसलिए क्योंकि जीजा मां जैसी प्रेरणा करने वाली उनके साथ थी प्रेरणा करने वाली माता होनी चाहिए माता निर्माता होनी चाहिए मैं मानती हूं कि आज का युग ऐसा है कि जो यह जनरेशन चल रही है सोसाइटी में ये और इतना महंगाई जो हो गई है कि अगर माता कमाएंगे तो ही चल पाएगा शायद एक जो मिडल क्लास है या फिर जो बहुत निम्न स्तर का जो घर है जहां नहीं है ज्यादा सुविधाएं तो अगर माता कमाएंगे तो ही कुछ चल सकता है लेकिन निर्माण की जो बात आती है अगर आप एक कमजोर परिवार जो तो आर्थिक थोड़ा कमजोर है उनके बच्चों को जाक देखोगे तो उनके बच्चे में तो कोई ऐसा नहीं हो रहा है कि वो लिविन में रह रहे हैं या वो समलैंगिक हो रहे हैं उनके बच्चों में तो उनको सिर्फ एक चीज दिखाई दे रही कि कमाना कैसे है आज मेरे माता-पिता इस हालत में तो मुझे कैसे कमाना है मुझे कैसे आगे बढ़ना है तो वही स्त्रियों को भी सीखना होगा नारी सशक्तिकरण की बात कर रहे हैं तो क्या वो देख नहीं रही है कि जिस अब्दुल के पीछे मैं पागल हूं जिस अब्दुल के पीछे मैं पागल दिख रही हूं अगर उसके साथ मेरे पिता ने या मेरी माता ने मुझे देखा तो उनको उनकी हृदय पर क्या बीतेगा उनको कैसा लगेगा वो सोच नहीं पाती हैं क्योंकि उन्होंने वो इतिहास पढ़ा नहीं है एक मनु बाई थी लक्ष्मीबाई जब पिता के जब भाई आया और वो तलवार चला रही थी तो भाई ने उनकी तलवार गिरा दी वो पिता के पास रोती हुई जाती है कि मेरी भाई ने तलवार गिरा दी मुझे अच्छा नहीं लगा तो उन्होंने कहा कि तुमने गिरने ही क्यों दी ये चीज तुम्हारी थी तुमने अपनी चीज गिरने ही क्यों दी उसके हाथ तुम्हारी चीज पड़ी तुम्हे अपनी चीज लेने कैसे दी उसको वही मनु बाईसा बनी लक्ष्मीबाई तो वही बड़े होकर कहते कि मैं अपनी झांसी नहीं दूंगी ऐसा प्रेरणा करने वाला माता-पिता होना चाहिए ऐसे प्रेरणा करने वाले माता-पिता होने चाहिए जो अपनी बेटी को लक्ष्मी बाई बना सके जीजाबाई बना सके किरण बाई सा बना सके कर्णावती बना सके जो नीरा आर्य जैसी औरतें निकले ऐसा साहस माता-पिता में होना चाहिए और बिल्कुल ठीक बात है कि माताएं नहीं ध्यान दे पाती है निकल घर से जा रही है तो लक्ष्मी बाई के पास भी ऑप्शन नहीं था उन्होंने बांधा था ना कंधे पर तो वही कंधे पर बांध कर चलना पड़ेगा आपको युद्ध भी लड़ना पड़ेगा और बच्चे को कंधे पर बांध कर भी चलना पड़ेगा करना पड़ेगा ये आपका दायित्व है आज बोल देते हैं कि माता और पिता इक्वल है नहीं है बिल्कुल भी इक्वल जब उस ईश्वर ने भेद किया तो हम कौन है हम इक्वल नहीं है बल्कि तुम्हारा दर्जा ऊंचा है मुझे लगता है कि माता निर्माता थी इसलिए पहले बच्चों से पहले उनका नाम लगाया जाता था हम सुनते हैं कि देवकी नंदन कृष्ण है ना यशोदा नंदन कृष्ण हम देखते हैं कुंती नंदन अर्जुन हम देखते हैं कौशल्या नंदन राम तो शायद माता पहले निर्माता थी इसलिए उनका नाम पहले लगाया जाता था आज माता निर्माता नहीं है और इक्वलिटी उनको ना थोड़ा सा एक पुरुष समाज ने ऐसा भी किया बीच मिडल जो आया था काल जो आया था इसमें ऐसा भी हुआ कि माताओं को थोड़ा सा नीचा दिखा दिया गया उनको उनको क्योंकि वो ऊंची थी उनको नीचे लाने के लिए उ उन्होंने क्या कि देखो अरे बताओ तुम्हारे साथ कितना अत्याचार तुम्हें बच्चे पैदा करने पड़ते हैं ये ये इक्वलिटी में यहां तक आ गई यहां तक घुस गई वो इक्टी में लाने के लिए तो उन्होंने कहा अरे बताओ तुम्हें बच्चे पैदा करने पड़ते हैं बताओ तुम्हें पालने पड़ते हैं बताओ तुम्हें मेहनत करनी पड़ती है बताओ पुरुष तो कोई नहीं कर रहा ऐसा तो उन्होने हां बात तो ठीक है हम बच्चे पैदा कर ें तो सेरोगेसी आ गया हम नहीं हमारा शरीर खराब होता है ऐसे हम बच्चे नहीं पैदा करेंगे तो ये ये कहां से आ रही है ये उस समाज के द्वारा लाया गया था यह चीज तो माता माता रही नहीं आज माताओं को देखो सोशल मीडिया पर टीवी पर वो कैसी माताएं हो गई है और बच्चा उनको देख रहा है एक मां बैठी है पास में और बच्चा बैठा है वो देख रही है वो टीवी उसमें अनुपमा चल रहा है तो माता भी तो वही ग्रहण कर रही है ना और बच्चा भी वही ग्रहण कर रहा है उसको दिख रहा है कि एक टीवी में बच्चा ग्लैमरस लाइफ जी रहा है मैं भी अपने बच्चे को वैसे ही ग्लैमरस लाइफ देना चाहती हूं तो मैंने एक बच्ची की बात सुनी वो क्या कहती है कि मेरी जो बुआ है वो अपनी बच्ची से कहती है कि ये जो स्कर्ट है ना इसको थोड़ी सी ऊंची और करो क्योंकि हम ऐसी पार्टी में जा रहे हैं तो वो उसको ऐसे कह रही है कि मेरी जो बेटी है वो उस पार्टी के अनुसार हो इसलिए स्कर्ट को थोड़ी और ऊंची कर ली ये माता है ये कहां से निर्माता बनेगी ये माता नहीं बन सकती निर्माता क्योंकि वो भी उस अनुपमा को सीरियल को देख रही उसमें ग्लैमरस बच्चा दिख रहा है तो वो उस ग्लैमरस को बच्चे को देखकर अपने बच्चे को भी ग्लैमरस लाइफ देना चाह रही है तो ये ये खराब है ये यहां से माता निर्माता नहीं बन सकती और जैसे बात करी कि कैसे संभाल सकते हैं तो आपको लक्ष्मीबाई बनना ही पड़ेगा आपको अपने बच्चे को अगर आपकी ऐसी स्थिति नहीं है कि आपको जाना ही पड़ेगा घर से बाहर आपको करना ही पड़ेगा और एजुकेशन बहुत जरूरी है माता की बहुत जरूरी है एजुकेशन ये नौकरी करें या ना करें लेकिन एजुकेशन बहुत जरूरी है क्योंकि आप के साथ बच्चा ज्यादा जुड़ा हुआ है माता के साथ ज्यादा जुड़ा होता है ना तो मैं वैसे ही कह रही हूं कि माता को लक्ष्मीबाई बनना पड़ेगा और बच्चे को कंधे पर बांधकर चलना ही पड़ेगा ये आपका दायित्व है और आपको संभालना ही पड़ेगा धन्यवाद

No comments:

Post a Comment

😲 अपना Point साबित के लिए इतने कुतर्कआइये कुछ Cross Questions करें।

में एक बार क्या हुआ कि उनका खूब सारा लोगों ने आप जैसे यह दोनों ने बहुत विरोध किया और उन विरोध करने वाले लोगों ने महर्षि दयानंद सरस्वती जी...