Tuesday, 20 January 2026

2 Oct मोहनदास गाजी एक Naughty Indian! ठरक और दोगलेपन का बेताज बादशाह! Satya Sanatan Ankur Arya

झाल घृत नमस्कार दोस्तों आप सभी का एक बार फिर से स्वागत है आपके अपने YouTube चैनल सत्य सनातन में आज या 2 अक्टूबर और 2 अक्टूबर को पूरा देश मोहनदास करमचंद गांधी जी का जन्मदिन मनाता है वह दूसरी बात है कि आज ही के दिन लाल बहादुर शास्त्री जी का भी जन्मदिन है जिनके विषय में काफी कम बात हुई मोहनदास करमचंद गांधी जी का गाजी नाम उठाकर के पूरे परिवार ने जिस देश की सत्ता को हटाया है उस देश के दिल में रहने रचने बसने वाले लाल बहादुर शास्त्री जी के जीवन पर ना केवल प्रकाश ही कम डाला गया बल्कि उनकी मृत्यु के बाद में उठे हुए सवालों का भी कभी जवाब नहीं दिया गया मोहनदास करमचंद गांधी जी का गाजी नाम चुरा करके जो लोग आज सत्ताधीश होने के सपने देख रहे हैं उन्हीं में से एक राहुल गांधी ने पिछले दिनों कहा था कि मोहनदास करमचंद गांधी जी के साथ इसमें महिला रहती थी लेकिन मोहन भागवत के आसपास में क्या आपने कभी महिलाओं को देखा है हमने महिलाओं को तो दोनों के आसपास में देखा है लेकिन दो अलग-अलग चाल और चरित्र के साथ में देखा है हमने जब मोहन भागवत जी के आसपास में किसी कन्या को किसी महिला को देखा है तो वह तब देखा है जब रक्षाबंधन का त्योहार था और वह उनके हाथ में उनकी कलाई पर राखी बांध रही थी लेकिन मोहनदास करमचंद गांधी के आसपास रहने वाली महिलाओं के साथ उनके कैसे संबंध थे उसके विषय में राहुल गांधी ने शायद वह बड़ा नहीं है और या फिर वह आज की पीढ़ी को गुमराह करने के लिए इस तरह की बातें करते हैं मोहनदास करमचंद गांधी के विषय में हमने पूरी की पूरी प्ले लिस्ट बनाई हुई है और जिसमें हमने इस व्यक्ति के सारे वह क्लासिक यह जो इतिहास में कभी बताई नहीं गए या फिर इतिहास पर मिट्टी डालकर के दबाने के प्रयास किए गए लेकिन मोहनदास करमचंद गांधी का यह नंगा सच सबके सामने आना बहुत जरूरी है कि मोहनदास करमचंद गांधी जिन महिलाओं चंदे पर हाथ रखकर के चलता था उसी प्रकार से वह उनके साथ में सत्य के प्रयोग भी किया करता था सत्य के प्रयोग नाम के पुस्तक है जिसको खुद मोहनदास करमचंद गांधी ने लिखा है और इस पुस्तक में मोहनदास कर्मचंद गांधी जी कहा जाता है कि वह उन लड़कियों के साथ में सत्य के प्रयोग किया करता था उस आयु में जब मोहनदास करमचंद गांधी जी की श्रम की आयु पूरी अधेड़ों चुकी थी वह मरणासन्न था मरने के बहुत ही नजदीक था लेकिन दूसरी तरफ वह जो लड़कियां थी 18 19 साल की थी दोनों ने इतना फर्क था कि एक तरफ तो ब्रम्हचर्य जब आप 70 80 के पार पहुंच जाए तो ब्रह्मचर्य के प्रयोग करने का उस समय पर कोई औचित्य नहीं बचता क्योंकि उस समय पर आपकी फैक्ट्री बंद है सारे टावर टूट चुके हैं तो उस समय पर आपको सिग्नल मिलेंगे ऐसा कैसे सोच सकते हैं लेकिन दूसरी तरफ वह लड़कियां जो 18 19 साल की थी जिनके हारमोनल चेंजेस उस टाइम पर कोई रहते जो उस समय पर धीरे-धीरे जवान हो ही रही थी उस समय पर किसी नग्नावस्था में के साथ पढ़े हुए पुरुष को देख करके उनकी क्या मनस्थिति हुई होगी यह किसी भी साइकोलोजी के स्टूडेंट या टीचर से आप पूछ सकते हैं उन महिलाओं और लड़कियों के दिमाग पर उनकी जो मानसिकता है उसके ऊपर कितना बड़ा आघात किया गया मोहनदास करमचंद गांधी के द्वारा यह जो पाप हुआ है उसके द्वारा इसका सवाल-जवाब लेखा-जोखा आज कोई भी नहीं रख रहा है जो कि उसकी अत्यंत आवश्यकता है मोहनदास करमचंद गाजी इतना ज्यादा कामुक व्यक्ति था के बाहर उसका खुद का बाप मरा हुआ पड़ा था और गाजी अंदर अपनी वाइफ कस्तूरबा के साथ में सहवास कर रहा था बाहर अपने बाप की लाश को देख करके उसके अंदर का जो का मुख जानवर था वह जाग गया और उसने रोती हुई कस्तूरबा गांधी के साथ में जबरदस्ती सहवास किया था और इस बात को भी कोई और नहीं बल्कि मोहनदास करमचंद गाजी स्वं ही रहता है मोहनदास करमचंद गांधी के इसमें जितनी भी महिलाएं थी चाहे वह देश की ऊंचाई विदेशियों उन सब पर ही मोहनदास करमचंद गांधी का दिल आ जाता था मोहनदास करमचंद गांधी जी का दिल आना ठीक उसी प्रकार से था जिस प्रकार से एक बच्चे को दिन में पांच से छह बार भूख लगती है पांच से छह बार उसको सुसु जाना पड़ता है यानी के दिन में भी कईं बार उसका किसी भी महिला पर कितनी ही बार देखा जाता था यहां तक कि कुछ लोग तो यह भी कहते हैं कि उनका दिल काफी बार बकरी पर भी आया और बकरी से उनको अनन्य प्रेम था यह दूसरी बात है कि वह भी हिंदुओं की आस्थाओं के प्रति बहुत ही ज्यादा निष्ठुर थे जब उनके सामने बात कही गई कि हिंदुओं का पूज्य पशु यदि कोई है तो वह लगाएं उसका मान सम्मान होना चाहिए मुसलमानों को उसकी जान लेने नहीं चाहिए उसका गोश्त नहीं खाना चाहिए तो उस समय पर भी मोहनदास करमचंद गांधी के विचार बड़ी खतरनाक ते मोहनदास करमचंद गांधी उस समय पर कहते थे कि हिंदुओं को यह भाईचारा बनाए आपके लिए खुद अपने हाथ से गाएं मुसलमानों को सौंप देने चाहिए हालांकि अन्यान्य स्थानों पर यह भी आता है कि वह गाय के महत्व को जानते थे और गो-पालन को बढ़ावा देने के भी उन्होंने बहुत सारे कार्य किए और इस तरह के कई बार उन्होंने इस फीचर्स भी दिए लेकिन यदि हिंदू और मुसलमानों के भाईचारे की बात की जाए तो हमेशा मोहनदास करमचंद गांधी ने मुसलमानों का ही पक्ष लिया मोहनदास करमचंद गांधी ने उस समय पर जब बंटवारा हो चुका था और हिंदू जो पाकिस्तान सहित है वह यहां भारतवर्ष में दिल्ली के जामा मस्जिद में सेंटर ले रहे थे उस समय पर मोहनदास करमचंद गांधी ने आदेश दिलवाकर के हिंदुओं के बर्तन बारिश के मौसम में ही बाहर फिंकवा दिए थे हालांकि मोहनदास करमचंद गांधी एक तरफ तो यह चाहते थे कि कोई भी हिंदू मस्जिद में शेल्टर नाले वहां पर जाकर शरण ना ले क्योंकि वह मुसलमानों का पवित्र स्थान है लेकिन दूसरी तरफ वह मंदिरों के अंदर नमाज पढ़ाने वहां पर मुसलमानों उपयोग रहते हैं उनको करवाने के पूर्ण पक्षधर थे मुसलमानों के प्रति उनके इस प्रेम को देखकर के ही उनके पुत्र ने इस्लाम को कबूल कर लिया था जी हां मोहनदास करमचंद गाजी उनके खुद के पुत्र हरिलाल ने इस्लाम कबूल कर लिया था और साथ ही साथ मोहनदास करमचंद गांधी की पोती के साथ में ही जबरदस्ती कई बार उसने दुष्कर्म भी किया था मोहनदास करमचंद गाजी अपने इस बेटे से काफी निराश थे और उन्होंने कई बार उसको पत्र लिखे लेकिन पत्रों का कोई सटीक जवाब नहीं मिल पाया हरिलाल इस बात को जानते थे कि एक मुसलमान ही पक्का बहन बेटी मांय कोई भी उसको मिल जाए उसके साथ में इस उसकी सहमति से या फिर जबरदस्ती भी उसका साथ में दुष्कर्म कर सकता है की बहुत कोशिश और बहुत मेहनत के बाद में कस्तूरबा गांधी ने आर्य समाज पहुंच करके उनसे गुहार लगाई उसके बाद में इस व्यक्ति के साथ में डिबेट की गई उसको हराया गया और उसका शुद्धिकरण कराया गया लेकिन मोहनदास करमचंद गाजी बहुत ही एहसान फरामोश व्यक्ति का मोहनदास करमचंद गांधी ने उभरते हुए आर्य समाज को दबाने का हर एक प्रयास किया यही नहीं जिस समय पर स्वामी श्रद्धानंद जी ने लाखों हिंदुओं की घर वापसी कराई थी शुद्धिकरण कराया था उसके बाद उन्होंने उसी जामा मस्जिद में खड़े होकर के वेद मंत्रोच्चारण किया था तब मोहनदास करमचंद गांधी के दिल में स्वामी श्रद्धानंद जी के प्रति जो नफरत थी वह जगजाहिर हो चुकी थी यही नहीं जब एक मुसलमान ने स्वामी श्रद्धानंद जी को जब क्यों बहुत बीमार थे उनके घर में घुसकर धोखे से उनको गोली मार उनकी हत्या कर दी थी उसके बाद में मोहनदास करमचंद गांधी ने स्वामी श्रद्धानंद जी के हत्यारे को ही अपना भाई बताया था और यह ही उसके लिए लॉयर्स भी तैयार किए थे या तो कांग्रेस की परंपरा रही है कि धर्म या देश के खिलाफ बोलने वाले उनके खिलाफ लड़ने वाले लोगों को हमेशा ही कांग्रेस ने वकील प्रोवाइड करा हैं सारे सुरक्षा मुहैया कराई और बड़े-बड़े पदों पर उनको आसीन कराया है चाहे वो मोहनदास करमचंद गाजी हो चाचा नेहरू हो चाहे इंदिरा गांधी योजना राजीव गांधी जी ओझा सोनिया हो या फिर अब राहुल-प्रियंका गाजी हूं दोस्तों मोहनदास करमचंद गांधी के विषय में यह बताया जाता है कि मोहनदास करमचंद गांधी ने स्वयं प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध में भारतीय सैनिकों को अंग्रेजों की तरफ से लड़ने के लिए झोंक दिया था मोहनदास करमचंद गांधी के विषय में यह भी बताया जाता है कि उन्होंने जबरदस्ती सुभाष बाबू का विरोध किया था सुभाष बाबू जो कि कांग्रेस कमेटी के सर्वाधिक वोट पाकर के अध्यक्ष बने थे लेकिन एक अन्य ऐसे पुरुष जो कि मोहनदास करमचंद गांधी के लिए बकरियों का इंतजाम की झाल उसको अध्यक्ष बनवा दिया गया था यही नहीं मोहनदास करमचंद गांधी में एक और बड़ी कमी थी जिसका दंश हम आज तक झेल रहे हैं और वह था सर्वाधिक वोट पाने के बावजूद सरदार पटेल को प्रधानमंत्री ना बनाना उसके विपरीत केवल एक वोट पाने वाले चाचा नेहरू को प्रधानमंत्री पद के लिए मनोनीत करना उसके बाद में हमने देखा किस प्रकार से भारत का बंटवारा भी हुआ था कश्मीर का बड़ा हिस्सा भी गया और यही नहीं जांचा लहरों की वजह से ही हमारे राम मंदिर को भी 70 साल तक का लंबा इंतजार करना पड़ा क्योंकि उस समय पर सरदार वल्लभ भाई पटेल और राजेंद्र प्रसाद यह जानते थे यह मानते थे और चाहते थे कि हमारा खोया हुआ वैभव और टूटे हुए जितने भी मंदिर हैं उनकी पुनर्स्थापना होनी चाहिए आज तक हमारे देश के अंदर जो सेक्युलरिज्म का कीड़ा हमारे देश को धीरे-धीरे खोखला करता रहा उसके पीछे गाजी नेहरू की जोड़ी इन दोनों का स्थान है यहां तक भी लोग कहते हैं और इतिहासकार इस बात को मानते हैं कि अगर मोहनदास करमचंद गांधी ओर नेहरू ना होते तो हमारे देश का बंटवारा भी ना होता और हमारा देश सेक्युलर देश ना होता आप लोग यह जानते हैं कि बंटवारा हुआ ही धर्म के आधार पर था लेकिन मुसलमानों ने अपने देश अलग कटवाने के बाद उनको इस्लामिक देश मनाया लेकिन चाचा नेहरू के ऊपर सभी हिंदुओं का दबाव होने के बावजूद सभी सांसदों का दबाव होने के बावजूद देश को हिंदू राष्ट्र नहीं बनाया गया और उसका दंश भी हम आज तक जेल रहे हैं आज भी हमारे देश में इस्लामिक घुसपैठ और उनके षड्यंत्र देश को तोड़ने के कुकृत्य इसी प्रकार से जारी हैं जिस प्रकार से इस्लाम की स्ट्रैटेजी है दूसरे यानि के गैर इस्लामिक देशों के खिलाफ मोहनदास करमचंद गांधी के विषय में विशेष तौर बहुत सारे हैं लेकिन आज इस वीडियो में सिर्फ इतना ही आज गाजी का बर्थडे है बर्थडे ऊपर इससे बड़ी सप्रेम सत्य सनातन हम कुंवारे की तरफ से नहीं हो सकती थी आप सब ने इस वीडियो को देखा सुना और इंफेक्शंस को जाना आप इनको ड्रॉप शेयर भी कर सकते हैं वीडियो अच्छा लगे जानकारी से भरपूर लगे तो इसको सब के साथ में Share अवश्य करें मेरे बिन बोले सत्य सनातन धर्म की जय जय हिंद वंदे मातरम

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