है क्यों हिस्ट्री गायत्री मंत्र का जप करें तो इसके विपरीत फल मिले तारण है कि स्त्री का यह अविकसित संस्कार नहीं होता था और यज्ञोपवीत केवल पुरुषों का होता है दोस्तों अब इन गुरु घंटालों से यदि कोई पूछे कि जो प्रवेश का अधिकार क्यों नहीं है और इनसे पूछिए कि यदि आप मूर्ति में मानते हैं तो उपायों में जो मूर्तियां मिल रही हूं उन पर जनेऊ कैसे हैं और वह जनेऊ भी कुछ साधारण देने वहीं आज की तरह वह भी धातु का सोने का चांदी का चिन्ह है महिलाओं के कंधे पर उसी दिशा में है तो इससे जरा पूछे जा करके कि महिलाओं को यदि अधिकार नहीं है यह जो कविता तो यह कौन सी महिलाएं थी जिनके कंधे पर यज्ञोपवीत है और अधिकार नहीं है तो क्यों नहीं है नमस्ते दोस्तों एक बार फिर से आप सबका स्वागत है आपके अपने YouTube चैनल सत्य सनातन में आपने देखा होगा कि आजकल कुछ तथाकथित पंडे-पुजारी कुछ तथाकथित धर्मगुरु या फिर कहें कि कथावाचक कुछ इस तरीके की बातें कर रहे हैं कि महिलाओं को गायत्री मंत्र जपने का कोई अधिकार ही नहीं है वही लोग हैं जो अभी तक कह रहे थे कि शूद्र को भी अधिकार नहीं है वेद पठन पाठन का अधिक अधिकार नहीं है लेकिन आज हम यहां से आपको बताएंगे कि किस प्रकार से यह सारे के सारे दावे झूठे हैं और ना केवल झूठे हैं बल्कि हमारे समाज को तोड़ने वाले हैं और महिलाओं का शरीर अपमान करने वाले हैं [संगीत] अपने मित्र यह वीडियो बहुत महत्वपूर्ण है और यह एक आर्टिकल है प्रियांशु सेठ जी का जिन्होंने आजकल जो भ्रांतियां फैलाई जा रही हैं हालांकि ब्रांच या तो बहुत लंबे समय से थी लेकिन क्योंकि सोशल मीडिया नहीं था यह माध्यम नहीं था इस वजह से यह सारे संदेशों थे जो हम देना चाहते थे उनकी गति व्रत नहीं थी अब हम बताना चाहते हैं कि आज के युग में बहुत सारे हिंदू समाज में एक भ्रांति फैलाई गई है कि गायत्री मंत्र का एग्जाम है उस स्त्रियों को नहीं करना चाहिए दोस्तों यह हमारे शास्त्रों के सर्वथा विरुद्ध है प्राचीन काल में सभी स्त्री और पुरुष नित्यप्रति जी हां नित्यप्रति भी गायत्री की उपासना करते थे किंतु आज यह नहीं होता है आजकल के पौराणिक और जो बैरी गुरु है अपने धर्म के वह अपने चेले और शैलियों को नए-नए मंत्र देते हैं कोई राम ॐ रामाय नम ह कहता है कोई नमो नारायण यह कहता है और कोई तो अपना नाम ही उनसे गंवा देता है मंत्र बता करके अ इन मंत्रों में एक बहुत हिम्मत प्रसिद्ध सा मंत्र है ॐ नमो भगवते वासुदेवाय इस मंत्र के संबंध में पहली बात तो यह है कि यह कोई मंत्र ही नहीं है कोई भी व्यक्ति इस मंत्र को किसी वैध में नहीं दिखा सकता है और सबसे बड़ी बात के मंत्र केवल और केवल वैद्य में है उसके अलावा दर्शनों में सूत्र हैं और उसके अंजाने जितने भी किताबें बचती हैं वहां पर श्लोक बताए गए हैं दूसरी बात यह है कि यह द्विजों के लिए नहीं है यह बात पुराणों से भी सिद्ध होती है क्योंकि पुराण विष्णु कहते हैं द्वादश आश्रम मंत्र मिस्त्री सुरेश विधीयते विष्णु धर्मों प्रथम खंड 155 28 अर्थात द्वादश अक्षर का मंत्र स्त्री और शूद्रों के लिए होता है और यह क्या है यह द्वादशाक्षर ही है जब स्त्रियों को वेदाधिकार से वंचित कर दिया गया तब ओम नमो भगवते वासुदेवाय आदि जो मन मैं इस प्रकार के मंत्री बना लिए गए कोई भी पुरानी अपने शिष्यों को गायत्री मंत्र का जप करना नहीं बताता है कुछ पुरानी गुरु गायत्री मंत्र बताते भी हैं तो कहते हैं कि स्त्रियों को इस मंत्र का जाप नहीं करना चाहिए उनको इसका मंत्र का जाप करने का अधिकार ही नहीं है यह ऐसा अनर्थ है जिसका समाधान बहुत आवश्यक है वे भगवान से लेकर पुराणों तक इस मृत्यु तक सब ने ही वेद में स्त्रियों का अधिकार माना है वे अध्ययन में स्त्रियों का अधिकार माना है जब वेद मंत्रों की दृष्टा विशेषताएं भी हुई हैं हैं इनके वैध ना पढ़ने की जैसी बात कैसे मिटाई जा सकती है बहुत सारे ब्रह्मवादिनी देवियों का इतिहास में वर्णन आता है महाभारत के शल्य पर्व में एक तपस्विनी का इतिहास आया है जो वे अध्ययन योग सिद्धि को प्राप्त करने वाली थी इनका नाम था सिद्धा भरद्वाज की पुत्री शुमिता वर्ली वेद की पूरी पंडित हाथी वक्त सांडिलें की पुत्री श्रीमती निरंतर वेदाध्ययन में प्रवृत्त रहती थी शिवा नामक ब्राह्मणी वेदों में पारंगत हुई थी इसी प्रकार से भारती मैत्री गार्गी सुलभा द्रोपदी माई हू ना धारिणी वेदवती आधी कितनी ही देवियों का वर्णन आता है जो वे पड़ती थी वेदवती को तो चारों वेद ही कंठाग्र हो चुके थे यही नहीं अपितु देवियों को ब्रह्म की पदवी भी मिलती थी जब चारों वेद पढ़ने का अधिकार पहले से पहले देवियों को प्राप्त है तो केवल और केवल एक गायत्री मंत्र जो कि वेदों में से ही है उसका अधिकार नहीं होगा तो किस आधार से यह पंडे-पुजारी और तथाकथित जो कथावाचक बने बैठे हैं किस अधिकार से इस बात को कहते हैं पुराणों ने भी स्त्रियों को अधिकार दिया है तो वेद मंत्र ग्रहण करें श्लोक संख्या चार 13 भविष्य पुराण उत्तर-पर्व इसमें लिखा हुआ है या स्त्री भरत राय व्यक्त अपितु आचार्य संयुक्ता शुभा सांचे मन प्राण प्रगण्य तु असर बत्रा स्वंउग यह आता अर्थात उत्तम आचरण वाली विधवा स्त्री भी वेद मंत्रों को ग्रहण करें और सर्द हवा यह के जो विवाहित स्त्री है अपने पति की अनुमति से मंत्रों को ग्रहण करें वशिष्ठ स्मृति थे स्लो की संख्या 217 में लिखा है यदि स्त्री के मन में पति के प्रति दुर्भाव आए तो उस पाप का प्रायश्चित करने के लिए एक साथ 108 बार गायत्री मंत्र जपना चाहिए और मन से उसका पश्चाताप भी करना चाहिए भविष्य पुराण के श्लोक संख्या 122 नो में अर्थात और वैदिक मंत्रों का जप करना निरर्थक है अर्थात जिनको आप मंत्र बताते हैं कि गुरु ने फलाना मंत्र दे दिया डिमांड मंत्र दे दिया पहले तो आप यह जानिए कि मंत्र केवल और केवल दो में ही होता है और यहां पर सॉन्ग बताया जा रहा है कि व्यथा है बेकार है जॉब भवेदिदम् और वैदिक जितनी भी चीजें हैं ॐ का जप करना ही व्यर्थ है अर्थात पुराण भी वेदों की ओर चलने का वेदों की ओर लौटने का संकेत करती है ऐसे बहुत सारे प्रमाण वजह से यह बात सिद्ध की जा सकती है कि जो मठधारी दे लोगों को गायत्री जप से रोकते हैं वेद शास्त्र पुराण इतिहास आदि सब से मुंह मोड़ते हैं इस पवित्र मंत्र की व्याख्या में कितने ही ग्रंथ लिखे जा चुके हैं और अभी और भी कितने जा रहे लिखे जाने बाकी हैं बहुत सारे लिखे भी जाएंगे परंतु इस मंत्र की पूर्णरूपेण व्याख्या फिर भी नहीं हो सकती है क्योंकि यह चार वेदों का सार है जिन साधकों ने इसका जप करना है वह बड़े-बड़े ग्रंथों को सामने नहीं रख सकते और बिना स्वार्थ के भी जब अधिक लाभ नहीं पहुंचाता जप करने वाले को यह ज्ञात होना चाहिए कि मैं भगवान के समक्ष बैठा हुआ हूं मैं क्या कह रहा हूं उस प्रियतम से मैं क्या निवेदन कर रहा हूं और कौन सी मांग उसके सामने में रख रहा हूं गायत्री मंत्र कहता है कि मैं सन्मार्ग की ओर प्रेरित हूं अर्थात् जो सड़क मार्ग है ईश्वर मुझे उस और बढ़ाओ दोस्तों सन्मार्ग से बढ़ ईश्वरदान कोई हो ही नहीं सकता है और यही गायत्री मंत्र में कहा गया है तो गायत्री मंत्र को आत्मसमर्पण का मंत्र समझा जाता है जिस प्रकार से प्यार ही अच्छे तरीके से जानती है कि विवाह मंडप में पवित्र अग्नि के सामने बैठी हुई पूर्ण निष्ठा के साथ अपने पतिदेव के आगे अपने आपको मैं समर्पित करती हूं पति सॉफ्ट रहता है कि मैं अपने आपको इस अग्नि के सामने बैठ करके इसको साक्षी मानते हुए अपनी पत्नी के समर्पित करता हूं इसी प्रकार से गायत्री मंत्र का जप करने वाले भी अपने प्रियतम से कहते हैं कि हे प्यारे मैं तेरे सुंदर शुद्ध तेज का ध्यान करता हूं तू ही वर्ण करने योग्य है तू जो कि सारे जगत का उत्पन्न करने वाला है सबको प्रकाश देने वाला है प्राण प्यारे दुखों को दूर करने और सुखों को देने वाले रक्षकों और विटामिन अपनी बुद्धि को मैं तेरे अर्पण करता हूं तू इसे प्रकाश की ओर ले कर चल यह वह मंत्र है जो कि सभी के लिए कल्याणकारी है तो क्या स्त्री कल्याण की पात्र नहीं है क्या स्त्री को मोक्ष का अधिकार नहीं है क्या स्त्री के अंदर आत्मा नहीं है इस प्रकार की जो भावना यह इस प्रकार की जो एक कांसेप्ट जो बना हुआ था वह सारा का सारा इब्राहिम पिछले जन्म में हमने देखा है वहां पर स्त्रियों को केवल और केवल भोग की वस्तु समझा गया है हमारे यहां पर नहीं लेकिन आज हमें ऐसा लगता है कि यहां पर बैठे हुए जो पंडे-पुजारी तथाकथित जो कथावाचक बने हुए हैं उनके ऊपर सनातन का कम और अ वैदिक ग्रंथों का मनुष्यकृत ग्रंथों का वेदों के बाद मनुष्यों द्वारा लिखी गई कथा कहानियों का उनका ज्यादा असर है इब्राहिम रिलीजन का में बहुत ज्यादा असर है इसी वजह से वह इस तरीके की बकवास करते हैं अब महर्षि दयानंद सरस्वती जी की अपार दया से स्त्रियों को भी वेदादि अधिकार प्राप्त है अतः इन अवैदिक तथाकथित मंत्रों की तिलांजलि कर देनी चाहिए महर्षि दयानंद सरस्वती जी ने पहली बार महिलाओं के लिए स्पेशल यह महिलाओं के लिए गुरुकुल खोलें जहां वे महिलाएं बच्चियां लड़कियां जो है वह वेदाध्ययन कर सकें वह यज्ञोपवीत पहन सकें वह पारंगत हो सके और आचार्य तक बन सके गायत्री मंत्र हो वैदिक ग्रंथों दर्शन उपनिषद हो इन सब का अध्ययन स्वाध्याय आर्य समाज के द्वारा महर्षि दयानंद सरस्वती जी की प्रेरणा से जितने भी गुरुकुल बनाए गए हैं कन्या गुरुकुल उन सबमें यह स्वाध्याय कराया जाता है इसलिए महिलाओं को चाहिए कि वह इन पाखंडियों को छोड़ें इन पाखंडों का त्याग करें और सीधे अपने वेदों की ओर लौटो को सीधे कल्याणकारी मार्ग की ओर लौटें क्योंकि आप किसी भी तरीके से किसी भी अंश में पुरुषों से कम नहीं है वर्णन कई अंशों में उनसे कई गुना अधिक ज्यादा की है इस तरीके के सभी प्रखंडों के ऊपर नकेल कसने के लिए सत्य सनातन कृतसंकल्पित है आप सभी जानते हैं इस प्रकार से जितने भी इस प्रकार के पाखंड होंगे हम सब का खुलासा करेंगे और उन सब का आंसर भी अपने बेटों से ही देंगे इस वीडियो में सिर्फ इतना ही यह वीडियो आपको अच्छी लगे जानकारी से भरपूर लगे तो इसको सबके साथ में Share अवश्य करें मेरे संग होली सत्य सनातन वैदिक धर्म की जय जय हिंद वंदे मातरम अ [संगीत] हुआ था कृष्ण पक्ष बधाइयां छैयां कृतम अखिलेश भक्तों की अध्यक्षता वित्त रहित यथावत कि समिति का चयन समिति त्यौहार त्यौहार क्षमता का समय तय हुआ था एक कहते हैं त्यौहार बधाइयां व्यक्ति को यदि रख यह
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😲 अपना Point साबित के लिए इतने कुतर्कआइये कुछ Cross Questions करें।
में एक बार क्या हुआ कि उनका खूब सारा लोगों ने आप जैसे यह दोनों ने बहुत विरोध किया और उन विरोध करने वाले लोगों ने महर्षि दयानंद सरस्वती जी...
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हेलो दोस्तों प्रतीक्षा समाप्त हुई सनातन से तू आ चुका है सनातन सेतु का लिंक अब हर जगह पर आपको मिल जाएगा हमारे जितने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म...
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