Saturday, 31 January 2026

कौन कहता है कि अकबर महान था, एक धर्मांध, दुर्दांत शासक का काला चिट्ठा। Akbar Was Not Great.

कि नमस्कार दोस्तों मेरा नाम है आपका एक बार फिर से स्वागत करता हूं आपके अपने YouTube चैनल सत्य सनातन में और आज हम जिस पुस्तक का रिव्यू करने जा रहे हैं वह पुस्तक का नाम है कौन कहता है अकबर महान था ब्राइटर है इसके पुरुषोत्तम नागेश टोपी और इनके पूरे पुस्तकों के सेट का हमने एक बार पहले भी रिव्यु किया था जिसमें यह पुस्तक रह गई थी मीणा स्वयं अपने आप में एक कानून निरंकुश धर्मांध गाजी अकबर के चरित्र का स्वतंत्र चित्रण गाजी किसको बोलते हैं जो काफिरों का क़त्ल करें और फिर भी माना जाए जो शहीद कहते हैं शहीद व होता है जो काफिरों का क़त्ल करते हुए मारा जाए और गिवर होता है जो मार के उनको जिंदा रह मोटा-मोटी वास्तव में यह होता है अकबर को बहुत सारे लोग हमारे हिंदुस्तान में बड़ा मा देख सकते हैं मानते हैं कि वह तो हिंदू मुस्लिम एकता का प्रतीक था गंगा-जमुनी तहजीब का प्रतीक था ऐसा कुछ भी नहीं था हमारे देश के छः में इतिहासकारों ने उसके विषय में जितना गंध मचाया है फैलाया है जितना झूठ फैला है उस पूरे का पर्दाफाश करती है यह पुस्तक पर रायटर है पुरुषोत्तम नागेश ओक में और इसका सबसे पहले हम प्राइजेज आपको बता दें इस का प्राइस है 250 रूपये वे 250रु मात्रक यह पुस्तक है मैं इसमें जो विषय सूची है उस पर हम पहले एक बार ध्यान देते हैं कि अकबर के शासनकाल का इतिवृत्त अकबर का धूर्ततापूर्ण परिवेश अकबर की क्रूरता व बर्बरता अकबर की अनैतिकता शराबखोरी और नशेबाजी शादियां नहीं सरासर अपहरण विजय अभियान लूट-खसोट की अर्थव्यवस्था खाओ दूर व्यवस्थित प्रशासन अकबर की सेना कर निर्धारण धन-लिप्सा व्यक्तित्व और स्वभाव विश्वासघात पाखंड दुर्भिक्ष धर्मांधता दुराचारपूर्ण प्रथाएं जो उसने चला हुई थी विद्रोहों की भरमार भवन निर्माण दीन-ए-इलाही के बारे में भी पूरा बताया गया है निस्तेज नवरत्न जो नवरत्न उसे रखे हुए थे वह कौन थे और कैसा उनका तेज था वह बताया जाएगा इतिवृत्त अली अकबर का मकबरा हिंदू राजभवन है और फिर संदर्भ सूची के कहां से कौन सी पुस्तक का जिसमें यहां पर निर्णय वर्णन किया गया है कहां कहां से उसका रेफ्रेंस उठाया गया है रेफ्रेंस की सबसे पहले बात कर लेते हैं कि अकबर डी ग्रेड वन जो मुगल और फिर वहां से जितने भी किताबे और वहां से जितने भी रेफ्रेंस थे अक्सर यही होता है कि हमारे को ऐसे कोई चार पेज का निर्धारण करके लिख दिया जाता है कि अकबर महान था मुगलों का शासन ऐसा था वैसा था और हमारे बच्चे स्कूल में पढ़ करके आ जाते हैं इतने पेज लेकिन जो वास्तविक इतिहास है जो उस समय के इतिहासकारों ने लिखा है उन लोगों की पुस्तकें जब तक आप नहीं पढेंगे तब तक आपको पता नहीं पड़ेगा यह सिर्फ आपके सामने एक छवि बना दी जाती थी कि अकबर महान था यह था वह और फिर फिल्में बनाती जाती है अकबर जोधा जैसी लेकिन जब तलक आप उनकी उस समय की पुस्तक नहीं पढेंगे आपको असलीयत का पता नहीं लगेगा अपनी पुस्तक अकबर एक महान मुगल के पृष्ठ संख्या 10 प्रवीण से रश्मि जो लिखे हैं वह बताया गया है अकबरनामा में जो लिखा गया है वह बताया गया है हैं और फिर उसके साथ-साथ जो भारत वर्ष में मुस्लिम प्रभुत्व के उत्थान का इतिहास को चार भागों में पुस्तक है इसके लेखकों ने मोहम्मद कासिम फरिश्ता मूल फारसी में जॉन ब्रिज द्वारा अनुदित है और 1966 में पुनः प्रकाशित हुई थी वहां से रेफ्रेंस ले गए हैं ऐसी जगह से रेफ्रेंस ले गए हैं जो कि आप हम अपने स्कूल कॉलेज के जमाने में नहीं पढ़ पाए थे वह सब कुछ इस पुस्तक मिलेगा कि जो अकबर के समय के लेखक थे वह लोग जो अकबर के पूरी जीवनी को पढ़कर के उसके अन्य कार्यो को देखते हुए जिन्होंने किताबे लिखी मुंतख़ब उद दावा प्रमुख अब्दुल कादिर बिन मुलुख शाह उर्फ अल बदायूंनी बड़े लेखक रहे हैं मूल फारसी में उन्होंने किताब लिखी थी और वहां से इन्होंने लिए हैं उसके रेफ्रेंस इस अकबर ग्रेट पॉलीटिकल हिस्ट्री वहां से उठाया गया है बेताज एंड इट्स एनवायरमेंट मौलवी मोइनुद्दीन अहमद यह सारे मुसलमानों के द्वारा लिखित पुस्तक के उस समय की पुस्तकें हैं जिनका यहां पर रेफ्रेंस लिया गया है बादशाहनामा चीज हैंडबुक फॉर विजिटर्स टो आगरा एंड इट्स नेबरहुड कि यह सभी जितने भी रेफ्रेंस इस हैं सबको यहां पर दर्शाया गया है बताया गया है अब हम चलेंगे इसके ऊपर की जो अकबर ने किया किस प्रकार से उसने अपने इस भारतवर्ष को लुटा खसोटा यहां की बहन बेटियों की इज्जत तो को रौंदा यहां उसने किस प्रकार के धर्मांधता के आधार पर लोगों को बेवकूफ बनाने की कोशिश की और किस प्रकार से उसका खुद का जीवन भी कितना निस्तेज रहा और कितनी बार वह आरा और जिसको कि इतिहासकारों ने छिपाया है वह सब कुछ इस पुस्तक में खुलेआम दिया गया है बहुत ही जरूरी किताब यह है जिसमें कि आपको पता लगेगा कि उसके जॉब संरक्षक था बैरम खान कि उसके परिवार वालों को उसकी बीवी को उसकी बेटी को किस प्रकार से उसने छीन लिया बैरम खान को किस प्रकार से उसने मरवा दिया केवल और केवल अपनी भोग-लिप्सा की वजह से जो भी उसका नरभक्षी रूप था वह उसकी दहशत थी उसकी वजह से उसने कितने लोगों का जीवन तबाह किया वह सब कुछ आपको यहां से पता लगेगा इस पुस्तक से यह पुस्तक है जो आपको बताती है कि हमारे जीवन में हमारे सामने ही किस प्रकार से आताताइयों को क्रूर आतंकवादियों को बहन बेटियों की इज्जत लूटने वालों को हमारे भारत वर्ष के छात्र में इतिहासकारों ने झूठा और गलत इतिहास प्रस्तुत कर हमारे अंदर उसकी एक बहुत बड़े को न्याय प्रिय शासक की छवि बनाने की कोशिश की व्यक्तित्व और स्वभाव मुस्क़ा पढेंगे तो अकबर देखने बदसूरत और बंदा था उस समय के इतिहासकारों के अनुसार वे स्वभाव से बहुत ही क्रूर विश्वासघाती अनपढ़ और अत्याचार में आनंद अनुभव करने वाला था मच रेट की कमेंट्री पुस्तक में संपादक महोदय ने लिखा है भारत के शासकों की लंबी सूची में अशोक और अकबर भय व आतंक के कारण के महान व्यक्तित्व दूसरे सभी शासकों से ऊपर है दोनों की तुलना लाभकारी हो सकती है अकबर में विजय करने और गौरव पाने की लालसा थी और सत्य निष्ठा का अभाव था कि उन्होंने अशोक की विशेषता थी उसका मित्रवत शासन करना सच्चा आत्म-नियंत्रण और आत्मिक महत्वकांक्षा अकबर सभी लड़ाइयों में तैमूर का सच्चा वंशज होने की झलक मिलती है और उसमें फिफ्थ संस्थाएं शामिल हैं जो तैमूरलंग ने में हुआ करती थी आधुनिक खोजों से यह पुरानी धारणा निर्मूल हो गई है कि अकबर दार्शनिक शिक्षक के बारे में प्लेटो द्वारा की गई कल्पना के बहुत विकट बैक तथा महत्वकांक्षा और चालाकी से भरा उसका चरित्र और सही रूप में हमारे सामने है उसकी तुलना ठीक ही तालाब की उस मछली से की गई है जो दूसरी कमजोर मछलियों को अपना भोजन बनाती है वह इतना बड़ा घूमना और संकीर्ण था और उसकी कथनी और करनी में इतना अधिक अंतर था बल्कि कभी-कभी दोनों एक-दूसरे से इतने विपरीत होते थे कि बहुत खोजने पर भी उसके विचारों की कोई थाह नहीं मिलती थी अकबर एक से अधिक पत्नियां रखने की अपनी आदत को छोड़ नहीं सकता था बल्कि उस समय की स्किन अवधि को कोई महत्व देने की आवश्यकता है यह है कि एक समय ऐसा आया था जब वह अपनी पत्नियों को अपने अमीर-उमरा में बांट देना चाहता था अर्थात इतनी भी आपके पास हो गई थी कि वह अपनी बीवियों को भी बांट देना चाहता था मजिस्ट्रेट ने लिखा है कि कहीं उसके अमीर-उमरा उद्दंड ना हो जाएं इसलिए बादशाह कई बार उन्हें अपने दरबार में बुलाकर डांट फटकार के साथ आदेश देता था मानो वे उसके गुलाम हो यह सारी बातें आपको पता लगेगी कि किस प्रकार से वह एक बहुत ज्यादा काम लूप व्यक्ति था अंधविश्वासी था एकदम अनपढ़ था खैर महरूम था और उसने इस देश को बनाने नहीं बल्कि देश को तोड़ने के लिए कार्य किया है कि इस पुस्तक को आप सभी पढ़ें इस पुस्तक को आप सभी मंगाएं आप लोगों को पता लगेगा कि उसके जो नवरत्न थे वह कौन थे उसने जोधाबाई के साथ में विवाह किया अकबर नहीं किया कैसे किया बीरबल कौन था बीरबल उसके जीवन में क्या महत्व रखता था और खुद अकबर ने हिंदू-मुस्लिम एकता को बनाए रखने के लिए गंगा-जमुनी तहजीब को बनाए रखने के लिए क्या-क्या कार्य की और यह कोई कहानी नहीं लिखी गई है सारा का सारा बड़े-बड़े इतिहासकारों के आधार पर दिया गया है कि वह ऐसा व्यक्ति था अ हैं तो यह थी पुस्तक कौन कहता है अकबर महान था इस पुस्तक को अवश्य लगाएं वे दृषिटकोण से आपको यह पुस्तक घर बैठे मिल जाएगी हो सके तो आप पुरुषोत्तम नागेश ओक का पूरा सेट बनाए जिससे कि आपको अपने संपूर्ण सत्य इतिहास के बारे में पता पड़े लेकिन यदि इतना सामर्थ्य भी नहीं है और आप पढ़ने के शौकीन है तो अकबर के ऊपर यह पुस्तक व श्रमिकों की भारतवर्ष में सबसे ज्यादा जो झूठ फैलाया गया है वह अकबर के जीवन चरित्र के ऊपर ही फैलाया गया है तो आज के बुक रिव्यू मैं सिर्फ इतना ही अगर फिर से एक बार फिर किसी नई किताब के साथ में हम फिर से आपसे मिलेंगे तब तक के लिए नमस्ते आप अपना ध्यान रखें और सारा ख्याल रखें सत्य सनातन वैदिक धर्म की जय जय हिंद वंदे मातरम

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