Saturday, 31 January 2026

आर्यों को मौत का खौफ़ क्यों नही होता Ankur Arya On Swami Shraddhanand ji

अब्दुल नसीर ने गोली मारी थी केवल इस बात के लिए क्योंकि स्वामी जी मालाबार पहुंच गए थे और उन्होंने वहां लाखो कन्वर्टेड मुसलमानों को वापस हिंदू धर्म में वापस ले करके आए थे तो हमें जीवन में उनके यही सीखने को मिलता है यदि हमने कोई लक्ष्य प्राप्ति के लिए आगे बढ़े हैं तो अगर हमने कोई संकल्प कर लिया है उसके लिए तो उसमें कोई भी विकल्प नहीं होना चाहिए आप अगर कुछ भी करने जा रहे हो तो सबसे पहले आपसे प्यार मानती है तप त्याग दे सकते हो या नहीं दे सकते त्याग कर सकते हो या तो नहीं कर सकते हो यानी कि संकल्प में कोई विकल्प नहीं और वह थे स्वामी श्रद्धानंद जी की तो आइए दोस्तों मैं आपको शर्करा के लाता हूं बता दें अमर बलिदानी श्रद्धानंद जी के कक्ष में जिसको आज भी सुरक्षित रखा गया है आर्य समाज मुल्तान नगर के श्रीमान प्रधान आर्य राजकुमार जी के द्वारा यही वह स्थान है जहां पर उस समय स्वामी जी ने बीमार थे और मोहम्मद रशीद ने आकर के उनको तीन गोलियां मार दी केवल इस लिए क्योंकि स्वामी जी शुद्धि का आंदोलन चलाते थे स्वामी जी कभी किसी से डरे नहीं हिंदू समाज उनका सदा ही ऋणी रहेगा हम यहां पर साफ सफाई करेंगे उसके बाद में यह वन करेंगे उनके जीवन से जुड़े हुए बहुत सारे पहलुओं को आपस में हम बताएंगे यहां यह देश के विभिन्न स्थानों से अलग-अलग गणमान्य लोग आएंगे और वह सभी अपने-अपने विचार भी रखेंगे मैं बात कर रहा था हिंदू समाज और स्वामी श्रद्धानंद जी के उपकारों की मौत हुए द कई लाख हिंदुओं को जबरदस्ती तलवार के आगे धर्मांतरित कर मुसलमान बना लिया गया था स्वामी जी के प्रयासों के द्वारा ही वापस सुन को शुद्ध करके हिंदू बनाया गया स्वामी जी ने दलित उद्धार के लिए दिल्ली के अंदर ही सैकड़ों एकड़ जमीन दलितों के नामकरण के नाम से आर्यनगर बरसाए तथा उनकी बच्चियों के लिए अलग-अलग विद्याालय भी बनाएं स्वामी जी ने दलित उद्धार और अछूतों की प्रथा को दूर करने के लिए अनेक अनेक कार्य किए स्वामी जी ने शुद्धि आंदोलन में कई लाख हिंदुओं की घर वापसी कराई आज 24 हिंदुओं की घर वापसी करा कर भी लोग बड़े-बड़े गुणगान करवाने लग जाते हैं लेकिन स्वामी जी ने कभी ऐसा नहीं किया है जिन्हें हरिद्वार में गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय की स्थापना कर ना केवल भारत वर्गी पूरे विश्व पर बड़ा उपकार किया जहां से कालांतर में संस्कृत के बड़े-बड़े विद्वान निकले दोस्तों इस प्रकार से स्वामी श्रद्धानंद जी को संपूर्ण हिंदू समाज व संपूर्ण आर्य समाज तथा संपूर्ण भारतवर्ष कोटि-कोटि नमन करता है तथा उनके भाषण पर चलने के लिए हम सभी कृतसंकल्पित है वह एक ऐसे वीर थे जो अंग्रेज़ों से भिड़ गए वह एक ऐसे वीर थे जो मुस्लिमों से भिड़ गए लेकिन अपने भारत और भारतीयता के मूल्यों को कभी नष्ट नहीं होने दिया हम सब को भी ऐसे अमर हुतात्मा बलिदानी स्वामी श्रद्धानंद जी के जीवन से हम को परिचित होना चाहिए तथा हिंदू समाज को एकत्रित करना है तथा संगठित करने के लिए उन्हीं के आभूषण तथा विचारों का पालन करना अत्यंत आवश्यक है आज उनका बलिदान दिवस है जिस दिन मोहम्मद रशीद ने उनको गोली मारी थी दोस्तों हमें अपने इतिहास से सीखना चाहिए तथा भविष्य में उसका अनुशरण करना चाहिए शब्दों के साथ आपको एक बार फिर से स्वामी जी के बलिदान दिवस की बहुत-बहुत शुभकामनाएं ईश्वर हम सबको उनके जैसी निडरता उनके जैसी अधीरता गंभीरता तथा अपने राष्ट्र अपने धर्म पर मर मिटने का जज्बा प्रदान करें सत्य सनातन वैदिक धर्म की जय जय हिंद वंदे मातरम यह एक छोटा सा खेत था जो कि हमने बनाया था जब उनका बलिदान दिवस था और यह जो आपने देखा है यह वही रूम में है जिसमें उनको मोहम्मद रशीद अब्दुल रशीद ने गोली मारी थी केवल इस बात के लिए क्योंकि स्वामी जी मालाबार पहुंच गए थे और उन्होंने वहां लाखो कन्वर्टेड मुसलमानों को वापस हिंदू धर्म में वापस ले करके आए थे और लाखों दलित ऐसे थे जिनको कि फिर मुसलमान बनाया गया था तो उनके लिए उन्होंने यहां दिल्ली में भी जगह-जगह पर जमीनें खरीद खरीद के फिर उनके नाम से आर्यनगर बरसाए उनकी बस्तियों के बीच में यज्ञशालाएं बनाई उनको अपने हाथ से यज्ञोपवीत पहनाया उनका शुद्धिकरण किया और फिर जो रेगुलर समुदाय है जो आपने पिछले दिनों सुना होगा राजस्थान में एक लड़का था टाइगर जिसका सरनेम था और उसने एक बांग्लादेशी मुस्लिम को मार दिया था किसी वजह से तो वह रेगुलर समुदाय जो कि एससी-एसटी में आते हैं उन लोगों के लिए उनकी कन्याओं के लिए सबसे पहली बार यहां गुरुकुल बनाया था रैगर कन्या गुरुकुल जो कि आजकल रेगुलर कन्या विद्यालय के नाम से प्रसिद्ध है दिल्ली में ही तो दलित उद्धार करने के वजह से स्वामी जी के ऊपर बहुत सारे अटैक हुए हैं उनके खुद के संप्रदाय के लोगों ने समुदाय के लोगों ने खुद आर्य समाज के लोगों ने भी उनका बहुत विरोध किया और उनकी जो पूरी लाइफ है बहुत स्ट्रगल से भरी हुई है इसलिए आज के युग में आज के टाइम में जब हम चारों तरफ इस बात को देख रहे हैं कि कन्वर्जन और हैट्रिक पूरी पूरी टीम लगी हुई है नौकर वतन के नाम से एक पूरी टीम लगी हुई अग्निवीर के नाम से कि एक पूरी टीम लगी हुई है कर्मयोगी के नाम से तो इस प्रकार से जो अरे समाज के बहुत सारे शाखाएं हैं जो कन्वर्जन को रोकने में लगी हुई है लेकिन फिर भी फिर भी कन्वर्जन नहीं रुक रहा है ऐसी स्थिति भी अगर आज की तारीख में हो रही है जबकि हम इतने जागरूक हैं तो आपको यह जरा इमेजिन करो कि जब कोई व्हाट्सएप नहीं था कोई हमारे बीच में संचार का ऐसा कोई तीव्र माध्यम नहीं था खाओ ऐसे समय में इस टाइम पर स्वामी श्रद्धानंद जी बैठे हुए पाकिस्तान में थे ही बंटवारे से पहले बात है मुसलमानों को पता लगता है कि हिंदुस्तान के भी साउथ एरिया में इतना बड़ा नरसंहार चल रहा है और वहां पर भी कन्वर्जन और है जो उनके पास में तार पहुंचता लाहोर तो अपनी पूरी टीम को वहां से भेज दो हैं यहां तक लो आते हैं और आप यकीन मानोगे कि उस टाइम तो उनके पास में फंडिंग यदि पैसा भी नहीं था तो उस समय प्रभु 371 रुपए ले करके वहां से वह लोग निकले लोगों से बीच-बीच में मिलते रहे उन्हें यह बताया जागरूक किया और फिर सही समय पर वह साउथ इंडिया पहुंचे वहां जाने के बाद में उनका जो विरोध हुआ उन सब का सामना करने के बावजूद यह पुरे इतिहास मतलब यह विश्व के इतिहास का सबसे बड़ी घर वापसी फिर इसमें लाखों लोगों की घर वापसी पर शुद्धिकरण कराया गया वो तो वह कीर्तिमान स्थापित करने वाले स्वामी श्रद्धानंद जी के विषय में हम आज हम बात करने वाले हैं तो स्वामी जी पंजाब प्रांत में उनका जन्म हुआ था उनके पिता जी जो थे वह एक अंग्रेजी सरकार में इंस्पेक्टर थे से 22 फरवरी सन अट्ठारह सौ छप्पन आपको बताया कि 1857 में फिर युक्ति का समय था वह भी उठ गया था लेकिन स्वामी जी अपने पूरे माहौल से अलग है उनके जीवन से में बहुत सारी चीजें सीखने को मिलती है तो उसका स्टेप मिस शुरू करूंगा मैं कि उनके जीवन समय सीखने को यह मिलता है कि जिस समय पर वह टीनएज में थे उस समय वो हिंदुस्तान के अंदर क्रांति की आग लगी हुई थी लेकिन स्वामी जी उस टाइम पर पैसे नहीं थे तो कि वह एक इंस्पेक्टर के बेटे थे और खूब उनकी लाइफ कि वह बहुत लेंथ थी उनके सामने जो भी चीज उनको पसंद आती थी वह मिल जाती थी पढ़ने के लिए वह विदेश तक गए हमेशा बिल्कुल पाश्चात्य सभ्यता वहीं कपड़े बॉयफ्रेंड सेंड तुम कुछ एवरीथिंग सारी चीजें वहीं और फिर धीरे-धीरे धीरे-धीरे उनके जीवन में और क्या परिवर्तन आता है जो ईस्ट इंडिया कंपनी यहां पर कार्यरत थी मीणा उनके प्रभाव में वहां गए उनके प्रभाव में आने के बाद में उन्होंने पूरे तरीके से क्रिश्चियनिटी की तरफ झुकाव हुआ फिर उसके बाद मुनाफिक ताकि तरफ झुका हुआ लेकिन जो असल जिंदगी उनको चीज चाहिए थी कि वास्तव में कोई नियंता है वास्तव में क्या इस धरती का इस विश्व का इस ब्रह्मांड का कोई अधिष्ठाता है अथवा नहीं है उसका उनको सही उत्तर नहीं मिल पा रहा था ऐसे टाइम में जो उनके पिताजी ने देखा उनको यह तो हालात और ज्यादा खराब होते जा रहे हैं कि वह रोजाना रोजाना व शराब पीते थे रोजाना जुआ खेलते थे रोजाना वह नृत्य देखने के लिए जाते थे इस तरीके की जब सारी बातें उनमें जितनी भी कुछ बुराइयां हो सकती है व्यक्ति के जीवन में वह सब आ चुकी थी विवाहित होने के बावजूद और उनकी जो पत्नी थी उनके विशेष सुनो कि वह शराब पी के आते थे लेट जाते थे सो जाते थे उनकी पत्नी उनके पास बैठी रहती थी उनके होश में आने का इंतजार करती रहती थी भोजन तक नहीं करती थी अ है तब उनके जीवन में सबसे बड़ा सबसे बड़ा परिवर्तन तभी आया पहला उनके पिताजी नुदबा के इस शहर में एक संन्यासी आया हुआ है आप उनके पास जाओ रूम के पास में गए जाने के बाद उन्होंने बहुत सारे क्वेश्चन के बहुत सारे क्वेश्चन किए हैं कि 1979 उनके सारे बातों का आंसर देने शुरू कर दिए ढेरे ढेरे ढेरे से कि आखिर में स्वामी श्रद्धानंद क्या कहते हैं कि आपने मुझे निरुत्तर तो कर दे लेकिन संतुष्ट नहीं किया था कि संन्यासी कहते हैं कि संतुष्ट तो तय आपको केवल भगवान कर सकते हैं लेकिन आपको अपने मनोयोग से सोचना चाहिए कि जिस तरीके के पुत्र का आप कर रहे हो क्या उनसे आप खुद खुद आप उनसे के साथ संतुष्ट हो जिस भी तरीके कि आप सुधार कर रहे हो यह चीजें व है जो मैं आपको इसलिए बताना चाहता हूं कि हमारे जीवन में भी ऐसे बहुत सारे समय आते हैं बहुत सारे ऐसे जज कुछ ऐसे मोमेंट्स आते हैं जब हम लोग भी सोचने लगता है कि जो हम कर रहे हो किसके लिए कर रहे हैं खाओ पियो ऐश करो जो खाया वह अपना है और जो जो कुछ बच गया वह गाना है वह हमारा बिल्कुल भी नहीं है कि जब उन्होंने अपने जीवन में यह परिवर्तन को देखा उस समय उनको हर छोटी छोटी चीज़ों करनी शुरू हुई और तब उन्होंने अपने पूरे जीवन को छोड़कर के फिर उन्होंने इस देश के पुनरुद्धार के लिए कार्य किया मेसी दयानंद सरस्वती वह संन्यासी मेह महर्षि दयानंद सरस्वती अपने आप में एक बहुत बड़ी हस्ती हैं प्रधान जी हम बहुत कुछ किया लेकिन अपने जीवन में वह जो कुछ नहीं कर पाए उन सबको करने वाले उनको स्वामी श्रद्धानंद जी ने मेसी दयानंद सरस्वती जी के जीवन का एक बहुत बड़ा सपना था कि वह यहां पर मैं कॉलेज शिक्षा पद्धति को पूरी तरीके से खत्म कर दें और यहां पर गुरुकुलों की स्थापना एक बार फिर से हो और उनका अच्छे तरीके से संचालन हो लेकिन यह भी एक दुर्भाग्य है कि वह सीधे नंद सरस्वती जी अपने जीवनकाल में भी सफल गुरुकुल नहीं चला पाए और अगर हम स्वामी श्रद्धानंद जी की बात करें तो उन्होंने जब गुरुकुलों की स्थापना करने का है तो आवाज संकल्प तथा जूनून संकल्प लिया उनकी जो कहानी है इस गुरुकुल कांगड़ी हरिद्वार की स्थापना की वह भी बहुत जबरदस्त है तो आज हम उन्हें के विषय में एक भूमिका थी स्वामी श्रद्धानंद जी के विषय में बहुत लोग जानते हैं उन्हीं के विषय में मार्च बात करेंगे तो सबसे पहला है कि स्वामी श्रद्धानंद एक विजेता संन्यासी कैसे हैं विजेता संन्यासी को इसलिए हैं क्योंकि अपने जीवन काल में कभी भी उन्होंने संकल्प में कोई विकल्प नहीं आने दिया जो उन्होंने संकल्प किया कि मुझे नशे से पूरी तरीके से छूटना है तो उन्होंने अपने जीवन में यह संकल्प लिया और उसमें कोई विकल्प नही रखा तो हमें जीवन में उनके यही सीखने को मिलता है यदि हमने कोई लक्ष्य प्राप्ति के लिए आगे बढ़े हैं तो अगर हमने कोई संकल्प कर लिया है उसके लिए तो उसमें कोई भी विकल्प नहीं होना चाहिए दूसरा उनका जो संकल्प बहुत बड़ा कि मुझे गुरुकुल बनाना है तो गुरुकुल के बारे में मैं आपको बताना चाहूंगा 1898 में जब उन्होंने शपथ ली कि मुझे गुरुकुल बनाना है तो उनके पास में एक पैसा भी नहीं था और उन्होंने अपना घर इस टाइम पर बेचना शुरू किया ऑफिस बेचने स्टोर की मशीनें बेचनी शुरू कर दी तो उनके पास में तपस्या आयोजित नहीं हो पाया तब उन्होंने संकल्प लिया कि जब तक मैं पूरे 30 हजार रुपए नहीं इकट्ठे कर लूंगा तब तक वापस नहीं आऊंगा 1992 में जाकर कम का संकल्प पूरा हुआ लेकिन घर से निकले और जो धन आधे लोग थे जो कहते थे यहां गुरुकुल हम बनाएंगे बनाएंगे वह सब लोग दम पीछे लेकिन स्वामी जी ने अपने संकल्प में विकल्प नहीं लाएं 4 साल लगातार परिव्राजक के रूप में लोगों से वह भीख क्यों मांगते रहे उन्हें स्पष्ट तौर पर कह दिया मुझे भूख चाहिए आपको अपने बीएचयू शुभेंदु सुनाई होगा कि बीएचयू की स्थापना कैसे हुई थी कल नरेंद्र मोदी जी ने अपनी जो यात्रा थी वह परसों उन्होंने यात्रा के अपनी बीएचयू से शुरू की बीएचयू का इतिहास जो है वैसा ही कुछ गुरुकुल कांगड़ी का इतिहास है कि चौधरी अमन सिंह जो उस समय कांगड़ी गांव के आसपास जिनके पास में 1200 जयंती बिना किसी स्वार्थ के लिए उन्होंने देखा कि इनके संकल्प में कोई विकल्प नहीं है जहां के संकल्प में विकल्प नहीं होता जॉब संकल्प स्थिर होकर निकलते हैं तो वह लोग जो आपके साथ नहीं थे जो आपके उपेक्षा कर रहे थे जो विरोध कर रहे थे वह भी साथ-साथ जाते हैं बारह सौ बीघे जमीन कोई कम मायने नहीं रखती है चौधरी अमन सिंह जी ने एक बार में ही दस्तखत किए और उन्हें कार्य के पूरा गुरुकुल आप इसमें स्थापित करो मेरे लिए कुछ बताया नहीं बचता है पर आप इस गुरुकुल को चलाओ और वह समय था जब किसी ने गुरुकुल का नाम भी नहीं सुना था उस समय पर गुरुकुल हुआ नहीं करते थे ऐसे व्यक्ति फिर संचालक में विकल्प और सॉरी शासनकाल में कोई विकल्प ना लाना उनका योग तीसरी बात आती है वह था जिस टाइम लाहौर में बैठे हुए थे और मालाबार में खिलाफत आंदोलन अपने चरम पर था और लगातार मां हिंदुओं को कट गया उस समय यह उस समय की बात है जब उन्होंने बिना किसी मुद्रा दिए अपने शिष्यों को वह भेजना शुरू किया और उन्होंने कहा कि मुझे सिर्फ और सिर्फ रिजल्ट चाहिए हमारे जितने भी भाई वहां पर मारे गए हैं सब हमें वापिस चाहिए लेकिन आपके सामने कोई विकल्प नहीं है आपने सिर्फ और सिर्फ यही कार्य करना है रोलेट एक्ट का विरोध हो स्वामी जी ने सबसे पहली बार रोलेट एक्ट का विरोध किया कि शुद्धिकरण के बाद में सबसे बड़ी जिम्मेदारियों के पास में ही वह थी मीणा दलितों का उत्थान करना उसमें उन्होंने कोई विकल्प नही लिया स्वामी जी को उनके खुद के विरादरी ने उनकी बिरादरी से अलग कर दिया बोले मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है लेकिन मुझे दलितौद्धार करके ही रहना है तो इसके बारे में हमें आगे भी बहुत सारी चीजें पता पड़ेगी सच्चे देशभक्त अभी आज के टाइम में भी बहुत सारी धारणा बनी हुई है कि कौन देशभक्त है अभी कल की गलियां परसों की बात है जब मोदी जी का एक इंटरव्यू हुआ था अक्षय कुमार ने लिया तो उसमें एक बात उठाई गई बहुत ज्यादा के वह तो खुद जिनमें एलियन है यहां कि उनके पास नागरिकता ही नहीं है तो वह कैसे देशभक्त बन सकते हैं तो ऐसी बातें उठाने वाले लोगों को हम जवाब नहीं दे पाते समय है जब भारत तेरे टुकड़े होंगे इन ऑनलाइन चला कहने वाला पुरुष वक्त कह सकता है कि भारत के टुकड़े करने वाला खुसबू आ सकता है कि आप मुझे देश में अपनी सिखाओगे मेरी देशभक्ति मेरे साथ है और मेरे से बड़ा कोई देशभक्त नहीं है जब पाकिस्तान के फेवर में बात करते हुए हिंदुस्तान की नागरिकता तो आपके पास में है अगर क्या नागरिक ही किसी की देशभक्ति का परिचय है क्या आपके पास में नागरिकता भारत की है आप गुणगान पाकिस्तान के कर रहे हो और कह रहे हो कि मैं मुझे देशभक्ति गाने को आवश्यकता नहीं है तो यदि आपकी देशभक्ति पर कोई सवालिया निशान नहीं खड़ा हो सकता तो एक केनेडियन नागरिकता के व्यक्ति को योग भारत की बात कर रहा है उसकी नियुक्ति पर सवाल क्यों है लेकिन कि देश मंे एक अलग सहमति बनाने की कोशिश की जा रही है देश भक्ति के बारे में हम बात करें तो उस वह समय था जिस समय पर महर्षि दयानंद सरस्वती जी ने सबसे पहली बार कहा कि स्वराज्य हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है और स्वराज्य ले के रहेंगे और उसी वही है कि स्वामी श्रद्धानंद जी अटल खड़े रहे और यह अपने इसी पुरानी दिल्ली की बात जिस समय पर अंग्रेजों ने लोगों को मासिक तितर-बितर कर दिया और कहा कि आपको यहां से भाग जाओ नहीं तो मैं गोली मार दूंगा स्वामी जी अपने सीने से उनकी बंदूक हटाकर बट यहां से अपने वस्त्र हटा करके अपना पूरा संन्यासी जो कि वास होता आटा तोड़ कर गोली अब मारना तो यह उनका स्टैचू अभी भी बना हुआ है तो ऐसे थे वह वक्त व्यक्ति मतलब यह कि कहीं जाकर खड़े हो गए और नारेबाजी करनी शुरू कर दी भारत माता की जय वंदे मातरम भारत माता की जय वंदे मातरम् बोलना यह उसके लिए लगना पड़ता है उसके लिए लड़ना पड़ता है और उसके लिए छोड़ना पड़ता है सबसे बड़ी बात यह आप अगर कुछ भी करने जा रहे हो तो सबसे पहले सत्यार्थ मानती है त्याग दे सकते हो या नहीं दे सकता त्याग कर सकते हो तो नहीं कर सकते हो यानी कि संकल्प में कोई विकल्प नहीं और वह थे स्वामी श्रद्धानंद जी तो देशभक्ति की बात नहीं था उन्होंने सबसे पहली बार उन्होंने कहा कि शिक्षा पद्धति के आधार पर हम बिलकुल भी अपने देश के अंदर यह किसकी नहीं ला सकते हैं और इसके बाद हम क्या करें अगर हम तो अब हम क्या करेंगे और वह इस बात से डरते थे जो आज हमारे देश में चल रहा है वह महात्मा गांधी नेहरू हुए मैं आपको सिखाऊंगा कि जब वह अमृतसर की कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बने थे तो नेहरू उनके पैरों में बैठा करते थे मोती लाल नेहरू उनके साथ बैठा करते थे वह दौड़ था वह था जब कांग्रेस की सब भूल कर दो कि वह मां के देखेंगे लेकिन उन्होंने यह बात कही कि हम मैं कॉलेज शिक्षा पद्धति के आधार पर बिल्कुल भी अपने देश को ना तो आजाद कर सकते हैं और न ही आगे बढ़ सकते हैं और यही डर कभी के समय में भगत सिंह चंद्रशेखर आजाद राजगुरु सुखदेव इन सब के भीतर भी नहीं था कि यदि हम विदेशी विधान को चलाएंगे तो अपने देश को आगे नहीं बढ़ा सकते और वह दर्द उनके अंदर भी था स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती जी अपने ब्लॉग लिखते हैं दुखी दिल की दास्तान तो उन्होंने अपने गुरुकुल की स्थापना के बारे में सब कुछ बताया है आप लोग भी हैं जैसे कि अगर आप भी है कोई कोचिंग सेंटर है स्कूल अपना खड़ा करना चाहते हैं जिसका पूरे तरीके से आज सिलेबस है वह पूरी तरीके से अलग वो मान लो ताकि बात के ऊपर कौन यकीन करेगा आपने कहा कि मैं अपने स्टूडेंट्स को मुक्त नहीं जाने दूंगा मेरे बच्चे हां बिल्कुल खाली हाथ आएंगे डिग्री तक पीएचडी करेंगे तो अभी तक के तो यकीन करेगा क्या नहीं करेगा वैसा ही उस दौरान में 1898 में उन्होंने उसकी विचारधारा लोगों के सामने रखे 18 सो 96 में लोगों को यकीन है कि ऐसा कैसे होगा मतलब सब छोटी रखेंगे सर संस्कृत में बात करेंगे इवन वह जमाना ऐसा था कि जब उन्होंने अपना एक पत्र निकाला हिंदी में वह देवनागरी को उस समय पर स्वामी दयानंद सरस्वती जी करने से हिंदी पर ज्यादा जोर डालने लगे थे कुछ समय पर उर्दू बहुत ज्यादा प्रचलित थी तो उनको पेपर फेल हो गया था फिर उनको तेज नाम से एक उर्दू का पत्र निकालना पड़ा क्योंकि उस समय पर मैं खुद जान तो मेरे दादा जो थे वह उर्दू पढ़ा करते थे और उर्दू की अच्छे वाले उनको थे और यह बात मैं जो कर रहा हूं वह कर रहा हूं मैं अठारह सौ नब्बे से लेकर के 1898 तक उनका पूरा विरोध हुआ लेकिन उन्होंने फिर भी कहा कि हम हिंदी में पढ़ें गांव हम पूरी तरीके से गुरूकुलीय शिक्षा हमारी होगी और तब जा करके हम एक अच्छे थे में का निर्माण कर सकते हैं चाणक्य की एक वजह से यह तो उस छोटी सी रिक्वेस्ट है तो उसमें वह कहते हैं गुरुकुल से बच्चों को निकालते हो गुरुकुल से अपनी खोज निकालते हैं तब जाकर को चंद्रगुप्त मौर्य को इतना मजबूत कर पाते हैं उस चीज को महर्षि दयानंद सरस्वती और श्रद्धानंद जी बहुत अच्छी तरीके से जानते थे तब जाकर को मैंने गुरुकुल कांगड़ी कि अपने मन में अवधारणा बनाएं कि हम इसे इस तरीके से खाता बनाएंगे आगे हम देखेंगे कि किस तरीके से उन्हें छोटी सी झोंपड़ी से अपने गुरु की शुरुआत की थी तो मैं देशभक्ति की बात कर रहा था एक बार की बात है अंग्रेजों को पता लग गया कि गुरुकुल कांगड़ी में बम बनाए जाते हैं और यह लोग जो है वह निडर इसीलिए इतने कट्टर इसे लिए हैं क्योंकि आतंकवादी टाइप के लोग हैं तो उनके गुरुकुल में घुस जाते हैं सारे अंग्रेज तोड़फोड़ मचाने शुरू और स्वामी जी पहुंचे क्या बात भाई क्या बात हो गई क्यों इतना आवेश में आ रहे हो कि मैं पता लगा है कि आपके गुरुकुल में यह बनाए जाते हैं बिल्कुल आप बनाए जाते हैं भाई तू मेरे से पूछ लेते पहले यह तोड़फोड़ मचाने की क्या जरूरत है चलो आओ मैं लेकर चलता हूं यह हमारे बम बनाए जाते हैं स्वामी जी उनको साथ में ले करके गए तो वहां दंगल में सब जो अपने गुरुकुल के छात्र थे वह कुश्ती लड़ने को दम पर रहा है को एक्सरसाइज कर रहा है देखो यह सारे बम है और सारे के सारे चलते-फिरते में जहां जाएंगे वहीं और ज्यादा तैयार करेंगे तो बताओ आपको चाहिए 24 तो अंग्रेज मैं उनसे कम जल-भुन बैठे फिर जाने लगे तो उन्हें रास्ते में रोक लिया हो लेकिन यह बम बनाने की जो विधि है ना यह बुक में लिखी हुई हमने यह बुक लेते जाओ तो है सत्यार्थ प्रकाश निकाल धन को दे दी सुणो शादी के कहां इसमें घुम लिखने की बनाने की कौन सी विधि में कहां पर लिखी हुई है के बाद मैन को पता पड़ा कि यह लोगों की विचारधाराओं को चेंज कर रहे हैं मैं कॉलेज शिक्षा पद्धति मैक्स मुलर के सिद्धांत तुम सबसे अलग इन्होंने अपने खुद के और पूरे तरीके से पाणिनीय अष्टाध्याई के तहत पूरे तरीके से व्याकरण के आधार पर शुद्ध वेदों का भाष्य करना शुरू कर दिया है और अब भविष्य में यह जो ताकत ताकत खड़ी होगी वह अंग्रेजों की नींव बहुत जल्दी हिला देगी तो इस वजह से हम मानते हैं के स्वामी श्रद्धानंद जी एक सच्चे अर्थों में देश भक्त थे और धर्म योद्धा मैंने आपको बताया कि धर्म का अर्थ सिर्फ इतना नहीं है क्या हाथ में कलावा बांधा माथे पर तिलक लगाना शूभ से लेकर शाम तक जो भी आपको मिलता इसको राम राम करना नहीं यह धर्म की पहचान नहीं है धर्म की पहचान हमारे यम और नियम है इधर में की पहचान सत्य है कल या परसों की बात किसी से व्यक्ति मेरी बात हो रही थी तो वह कहते थे कि यह जो श्रीलंका में भी हुआ है तो वहां आपातकाल लगाकर वहां के मुसलमानों को भगाया जा रहा है मारा जा रहा है ऐसा क्यों यह तो बहुत गलत बात है मैं सिर्फ उन्होंने क्या किया था न्यूजीलैंड की बात के ऊपर आप क्यों नहीं बोलते हो और कितने साल रहे मुगल यहां इतने साल 300 साल कितनी पीढ़ियां केवल चार पीढ़ियां लेकिन हमारे इतिहास में हुई पढ़ाया जाता है हमारे यहां हेमू नहीं पढ़ाया था हमारे यहां राजा दाहिर नहीं चढ़ाया जाता है हमारे यहां महाराणा प्रताप नहीं चढ़ाया जाता है हमारे यहां राजा सूरजमल नहीं पढ़ाया था हमारा दयानंद सरस्वती नहीं है श्रद्धानंद नहीं है हमारे यहां तो पढ़ाया हैं देश के टुकड़े करने वाले लोगों को उनको बताए जाते हैं डिश पत्थर इस लिए जो सच्चे धर्म योद्धा जो लड़ाई उस समय से चली आई थी उसको एक हद तक रोकने का बहुत बड़ा प्रयास था यह लाखों हिंदुओं का शुद्धीकरण क्योंकि मानवता के खिलाफ जो लड़ाई लड़ी गई थी खलीफा ही कि वह तो आप सब जानते हैं जब सेकंड वर्ल्ड वॉर चला सड़कों पर हमला किया गया अंग्रेजों के द्वारा वहां से खलीफा को अलग कर दिया गया उसका विरोध हिंदुस्तान में पैदा हुआ पुरुष क्रोध का विरोध कहां होता है अंग्रेजों उनका वश नहीं चलता मुसलमानों का संग्रह जो नहीं चला तो उन्होंने वहां के जो बेचारे मासूम हिंदू रहते थे उनको काटना होकर ताप को बताओ तुमको विचारों को चिता बी मैं सर नहीं हुई सड़कों पर मरे कटे हुए हिंदू पड़े रहे उनको चील-कौओं व्यक्ति दूध और कुछ तो उनके बच्चों को उनकी लाशों को खींचते रहे लेकिन इतिहास नहीं पढ़ाया जाएगा क्योंकि अगर दाहिर को पढ़ाना पड़ गया तुम हमद बिन कासिम के ऊपर यह छह पेज कैसे लिखेंगे इतिहास वाले अगर उसने महाराणा प्रताप को बढ़ाना पड़ गया तो एक बार को मान कैसे बताएंगे और अगर यह सब बताना पड़ भी गया तो हिंदू स्वाभिमान जाग जाएगा आज जो दो दो चार चार लोग कंवर्ट होते हैं उस कितनी बड़ी-बड़ी न्यूज़ बनती है वह यह लोग उसको प्रकाशित भी करते हैं अपनी मैगजींस में इतने बड़े आंदोलन चलते हैं और लाखों लोगों की घर वापसी होती है सैकड़ों परिवारों को वापस लाया था कोई उसके बारे में बात करने का जिक्र कर का कोई मतलब ही नहीं है लेकिन ऐसे समय में भी एक ऐसा संन्यासी उठा जिसमें अपने सच्चे धर्म का पालन करते हुए एक अच्छे संन्यासी का धर्म का पालन करते हुए एक सच्चे धर्म योद्धा की तरह जीवन को दिया है मानवतावादी स्वामी श्रद्धानंद जी एक सच्चे मानवतावादी थे पार्टिकल आप सुंदरम मानवाधिकार तो मानव अधिकार किनके सुरक्षित हमारे देश में आप लोगों को बताएं सेना का कोई मानवाधिकार नहीं होता है डिफरेंस करने वाले का कोई मानवाधिकार नहीं होता है केवल और केवल आतंकवादी का मानवाधिकार होता है उनके लिए रात को दो बजे की कोर्ट खुलती हैं उनके लिए सब काम होते हैं लेकिन मानवतावादी उनको इसलिए हम मानते हैं जो कि उन्होंने कभी भी किसी भी व्यक्ति में कोई भेज कभी भी नहीं किया है कि कभी भी कोई भेज नहीं किया उन्होंने अपने जीवन में जब भी जिस व्यक्ति के कि जब भी कोई कमी महसूस हुई पूर्ण कभी नहीं देखा है कि सामने वाला व्यक्ति कौन है वह खुद एक कायस्थ परिवार उस परिवार से थे लेकिन उन्होंने अपने जीवन में जितना ज्यादा दलितों के साथ में जीवन जिया है जितना ज्यादा दबे-कुचले और लाचार लोगों के साथ में जीवन जिया है और उनके लिए जीवन जिया है उतना मुझे नहीं लगता कि किसी ना किसी के लिए जीवन जिया होगा उस दौरान पर अगर बात हम यह करेंगे भाई उन्होंने इस्लाम के लिए मुसलमानों के लिए कोई जीवन नहीं जिया तो मैं उनको अपने यहां से बाहर मानता हूं मैं उनको वास्तव में मानव नहीं मानता हूं जिसने एक बार अच्छे से मैं आपको सच बताता हूं कि जितने एक बार अच्छे से कुरान पढ़ना वह अपने जीवन में कभी मुसलमान रह ही नहीं सकता यह मैं आपको करंट क्लिक करके देता हूं जिस ढंग से लौंग एक बार क़ुरान और हदीस पढ़ लें तो और अपने ढंग से नहीं पड़ी उनका फिर यही वाला होता है फिर वहीं श्रीलंका करते हैं वहीं फिर मालाबार करते हैं वहीं मुजफ्फरनगर करते हैं वहीं मेरठ करते हैं इसलिए मानवतावाद का अर्थ यह बिल्कुल भी नहीं है कि आप अपनी तपस्या बैठे हुए और आपके ऊपर चीटियां चढ़ जाएं सांप चढ़ जाए विश्व डंक मारने लग जाए और आप आराम से बैठे रहो नहीं जी मैं तो हिंसावादी हूं मैं तो हिंसा नहीं करूंगा अहिंसा की स्थापना के लिए हिंसा करनी पड़ती है और हिंसा परमो धर्मः धर्महिंसा तथैव च इसलिए गांधी जी की अधूरी बात पर मत चलना शुद्धि आंदोलन के बारे में हमने आपको बताया है कि किस प्रकार से मालाबार में संकल्प शक्ति के बारे में बताया शिक्षा के क्षेत्र में योगदान और में खास तौर पर जो महिलाओं की शिक्षा के बारे में जो बात है उसके बारे में विशेष ध्यान देना चाहूंगा दयानंद सरस्वती जी अपने जीवन में गुरुकुल की स्थापना करना चाहते थे वो चाहते थे कि बच्चियों के लिए गुरुकुल बने कि श्रद्धानंद जी की प्ले लिस्ट छोटे बच्चे मेहुल कान्वेंट स्कूल में थे उस टाइम ही अंग्रेजों के स्कूल तो वह बच्चे जब घर आते हैं तो वह घाटे थे यह साफ-साफ बोल तेरा क्या लगेगा मोल इसाई सा बोल तो उन्हें खा के भाई यह तो बड़ी गलत बात है अब कोई स्कूल में यह बातें सिखाईं जारी इस समस्या के दोनों पढ़ने के लिए भेजते हैं वह इस मशहूर इस आयत के बारे में बताने जा रहा हूं सब बातें और उन्होंने उसी टाइम पर संकल्प लिया कि मैं कन्याओं के लिए अलग से विद्यालय गुरुकुल बनाने का प्रयास आरंभ करूंगा तो मैंने आपको बताया कि उन्होंने जो रैगर समाज है जो बिल्कुल अतिपिछड़ा समाज है उनकी बच्चियों के लिए अलग से गुरुकुलों की स्थापना की और शिक्षा के क्षेत्र में उनका बहुत बड़ा योगदान है आज की तारीख में जितने भी गुरुकुल है और आप सबको शायद पता लग गया हो नहीं भी हो तो मैं भी यह बता दूं कि जो वैदिक शिक्षा बोर्ड जिसके डिमांड पिछले पांच साल से चल रही थी वह पूरी हो गई है उसको भारत के शिक्षा बोर्ड का नाम दिया गया है जिसके अंदर अब सभी गुरुकुल आ जाएंगे और जितने भी हमारा जिप वह इतिहास है और जो हमारे आज भी ऐसे बहुत सारे इतिहासकार ने को यह आम बहुत सारे काम नहीं जानता लेकिन आए दिन मेल उनके बारे में सुनता रहता हूं कि उन्होंने बहुत जो हमारा प्राचीन इतिहास है या जो आजादी के टाइम का इतिहास है या जो फिर नेहरू से लेकर को यह राहुल गांधी तिलक के जो पूरी की पूरी डायनेस्टी चल रही है इसमें जो छिपाया हुआ इतिहास उसको सब को कुरेद-कुरेद कर बाहर निकालकर लेकर आ रहे हैं उन्होंने तो हमारे समाज का हमारे शिक्षा तंत्र का बहुत-बहुत सत्यानाश किया है लेफ़्टिस्ट है वह तो अब वाकई में सच्चा इतिहास जो हमारा वह सामने आ रहा है तो इस तरीके से अभी जो सबसे पहले उनको संस्थान में देख जिस संस्था को सौंपा गया वह पतंजलि योगपीठ को दिया गया है उनका ड्यूक विश्वविद्यालय हैं तो सबसे पहले वह रिसर्च कर रहे हैं उसके ऊपर हां तो उसमें बहुत सारी संस्थाएं मिलेगी लेकिन उसमें सबसे पहला जो काम दिया गया है पतंजलि योगपीठ को दिया गया है तो शिक्षा के क्षेत्र में उनका बहुत बड़ा योगदान और खासतौर पर महिलाओं की शिक्षा के लिए यह वह झोपड़ी हैं जो आप देख रहे हैं और यह स्वामी जी खड़े हुए हैं और स्वामी जी के पास दोनों की जो सहयोगी हमेशा उनके साथ रहते थे यह थे और इस झोपड़ी से उन्होंने यह शुरुआत की थी सबसे पहली बार यह गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय आज भी है जो अपने हरिद्वार में तो यह उसकी बिल्डिंग यह सबसे उसका जो प्राचीनतम फोटो में रह गए प्रशासन और प्रबंधन मैनेजमेंट है कि उनका मैनेजमेंट बहुत गजब था मैंने आपको बताया कि संकल्प को था लेकिन मैनेजमेंट बहुत गजब का था और उनके जो मैदा शक्ति थी और एकदम प्रेजेंस ऑफ माइंड जबरदस्ती ही इस टाइम होने जमीन पर के पास नहीं थी ₹3000 सिर्फ बिल्डिंग खड़ी करने के लिए दिए गए थे तो उस समय जब यह जमीन को मिली तो वह पूरा जंगल था 12 बताएं लेकिन वह पूरा जंगल तक वापस से रहते थे इधर रहते थे ढूंढ रहते थे तो ऐसे टाइम में लोगों ने एकदम मना कर दिया सब अपने हाथ पीछे खींच लिए हम अपने बच्चों को वहां पर नहीं भेजेंगे स्वामी जी ने अपने दोनों बच्चे वहां ले जाकर छोड़ दिए हैं है उन्होंने कहा कि यदि कोई बाद आता भी है बच्चों को खाता है तो सबसे पहले मेरे बच्चे हैं तो मेरे बच्चों को खा जाए तो मुझे कोई समस्या ग्रस्त मेरे बच्चे बन जाते हैं तब तो आप देख सकते हो ना अपने बच्चे अ कि जिस तरीके से गुरु गोविंद सिंह साहब बच्चों को लेने के लिए आते थे ना अपनी सेना के लिए पैसे श्रद्धानंद घर घर पहुंचते थे अपने बच्चों को गुरुकुल में भेजो अपने बच्चों को गुरुकुल मिले जो इसी तरीके से उनके मैनेजमेंट के एक बहुत गजब की बात है कि संस्था को चलाने के लिए उस टाइम जिस टाइम पैसा नहीं हुआ होता था और लोगों के पास में तो बहुत अच्छा आपको पता ही अंग्रेजी का हिस्सा था कि हमारे पास में इतना ज्यादा पैसा नहीं आ तो उन्होंने उसका एक बहुत अच्छा तरीका निकाल लिया उन्होंने कहा कि सबके घरों में हम छोटा-छोटा पात्र रखेंगे और उसमें रोजाना आप जो खाना बनाओगे उसी में से ही आपको वह नहीं खाना है एक मुट्ठी थोड़ा सा अनाज हो या आटा हो वह आप इसमें डालते हैं और आप जो भी पत्र पढ़ते हो जो भी आपके घर की वृद्धि हो वह आप उठा कर उसके बराबर में रखते रहेंगे एक महीने में हम एक बार सब छाया करें गांव और हम सारे को कलेक्ट कर लेंगे जो गरीब से गरीब था उसने भी कुछ ना कुछ उसमें दिया अब वह क्या करते थे उसका रद्दी को बेच देते थे तो कि गेहूं तथा एक्सेस होता था समाज से जो एक्सेस होता जो गुरुकुल सक्सेस होता तो उसको बेच देते थे और वहां से वह धन का अर्जन करते थे अब देखो कि अगर आप किसी के पास में भी जाऊं तो कहते हैं ₹10 पर क्लिक करता हूं तो भी चलेगा जब कोई संस्था खिलाड़ी होते तो ऐसे ही चलती है पर उस टाइम पर ₹10 भी नहीं थे तो आपके घर में अगर कुछ भी वृद्धि बचती आप उसको रखो बस सहमत तो इस तरीके से ऐसे और भी बहुत सारी बातें हैं ऐसे बहुत सारे तरीके हैं जिसको उन्होंने अपनी किताब में लिखा है कि किस तरीके सुनो धनार्जन किया यह उस समय जोन के आचार्य थे जो सबसे पहला स्थान बीच में जो आप देख रहे हैं वह स्वामी श्रद्धानंद जी हैं और यह उनका सबसे पहला आचार्यों का स्टाफ का जो भी ने गुरुकुल को स्टार्ट किया चलाया बहुत बड़े नेता थे नेता वही होता जो नेतृत्व करता है और रोलट एक्ट का कि जिस टाइम विरोध करने की बात आई एक गोली चली और सब लोग बाहर गए थे तकरीबन 25 हजार लोग इस आंदोलन में शामिल हुए स्वामी जी के साथ हैं लेकिन वह नहीं हटेंगे डटे रहे चाहे वह स्वदेशी का आंदोलनों चाहे वह असहयोग आंदोलन हो चाहे वह साइमन कमीशन की बात हो चाहे वह अंग्रेजों को भगाने की बात हो चाहे क्रांतिकारियों को शरण देने वाली बात हो हमारे देश के बहुत सारे ऐसे क्रांतिकारी योर गुरुकुल कांगड़ी में शरण लिए करते थे तो कि चाहे कुछ भी हो वह हमेशा नेतृत्व में सबसे आगे रहे यह आप देख रहें हैं सिंधु नदी के पास में यह गांधी खड़े हैं है तो यह उन आंदोलनों की बात है एक्चुअली मैं आपको एक और सच्चाई बता दूं कि अगर गांधी जी को जैसा उनका नाम नहीं है महात्मा उनका नाम है मोहनदास करमचंद गांधी पर हम कहते हैं कि वह उनके नाम में महात्मा की उपाधि जो सबसे पहली बार मिली थी वह स्वामी श्रद्धानंद जी को मिली थी और व्यक्तिगत जीवन में मोहनदास करमचंद गांधी स्वामी श्रद्धानंद जिसे बहुत जलते थे बेहद नफरत करते थे है और यह आप देखेंगे अमृतसर कांग्रेस के प्रतिनिधि बैठे हुए सारे के सारे 1916 और आप अपने लेफ्ट से देखिए यह नेहरू जो बैठे हैं यहां सरदार जी से उधर एक तरफ मामा जी बैठे हुए हैं और यह मोतीलाल एक तरफ दूसरी तरफ मोतीलाल जी हैं तो यह उस टाइम कांग्रेस में एक बड़ा वर्चस्व था बड़ा नाम था लेकिन कांग्रेस की रीति-नीतियों को देखते हुए स्वामीजी ने समय रहते ही उसका बहिष्कार किया और वहां से त्यागपत्र देकर के वह अपने खुद के जो उनके कार्य थे गुरुकुल आदमी के उसमें लगे निष्कर्ष और शिक्षा हमको यही मिलती है कि है पहले चीज के हम अपने जीवन में जो भी चीज जो भी फैसला ले उसको बहुत सोच-समझकर लें दूसरी चीज जो स्वामी जी के जीवन से में सीखने को मिलती है वही चीज़ सीखने को मिलती है जो कभी कि गुरु गोविंद सिंह साहब ने कही थी कि आप अपना हाथ पहले तेल में डुबो फिर स्कूल में डूब जाओ और अपने हाथ पर जितने तिल चिपक जाएं उतनी बार भी यदि कोई मंशा को यह कहे कि मैं सच्चा हूं मैं ईमानदार हूं मैं देशभक्त हूं और मैं तुम्हारा साथ दूंगा तो भी उसका यकीन मत करना कोई भी उसका यकीन मत करना तीसरी कि हमें कभी भी हम कोई संकल्प लें तो उसमें विकल्प नहीं आना चाहिए हमने पा लिया है तो हम उसको करते जाएं चाहे कुछ भी आडे क्यों ना जाएं नेक्स्ट के हुए देश से बढ़कर और कुछ भी प्यारा नहीं है धर्म और अपना देश में है और स्वामी जी पारिवारिक कार्यों में लगे रहे उन्होंने कभी भी किसी के जाति भेद को नहीं माना यह भी हमें सीखने को मिलता है मानवतावादी का मानवता का मतलब क्या होता है सच्चे देश भक्ति का मतलब क्या होता है हमें सीखने को मिलता है ऐसे और भी बहुत सारी बातें हैं जो हमें स्वामी जी के जीवन से सीखने को मिलती हैं उसमें सबसे बड़ी चीज है के जो स्वदेशी बने में जो आनंद है वह अन्यत्र नहीं है हम जो स्वदेशी में यानी कि अपनी शिक्षा नीतियों में चाहे वह अपना देश का कुछ भी हो मैं डिटेल में जाऊंगा फिर चाहे वह कुछ भी हो जो उसमें है वह विदेशी चीज जो मैं आपको नहीं मिलेगा स्वामी जी की मृत्यु हुई किस तरीके से तय शेड्यूल की वजह से धोखे की वजह से हुआ यही के बीमार पड़े हुए थे शुद्धि आंदोलन के बाद मुसलमानों में बहुत रोष था व्यक्ति को जीने का कोई अधिकार नहीं है जो हमारे कुरान के खिलाफ हो यह हमारी हदीसों के खिलाफ हो यह मोहम्मद साहब के खिलाफ हो जो उनकी उम्र के खिलाफ हो जो उनके सुन्नत के खिलाफ हो ऐसे व्यक्ति को मार देना चाहिए लेकिन ऐसे व्यक्ति को सामने से नहीं मार सकते थे थे तो जिस मकान के जिस कमरे की अन्य वीडियोस और स्टार्टिंग आपको दिखाई थी मौसी कमरे में ही बीमार पड़े हुए थे और एक अब्दुल रशीद नामक व्यक्ति आता है बंदूक छिपा करके और वह कहता है कि मुझे उससे बात करनी है उन्हें स्वामी जी के सहयोगी को बोलता है कि मुझे पानी चाहिए वह पानी लेने के लिए आता है और वह स्वामी जी के सीने में सीधे तीन गोली दाग देता है तो यहां पर स्वामी जी का जो जीवन है वह समाप्त हो जाता है और एक बार फिर से तो समाज को एक नई दिशा देने का जो कार्य था वह यहां पर फिर से रूक जाता है यह आयुक्त जी उसको सहयोगी ने ही पकड़ लिया था और उसको कुछ ही समय के बाद में फांसी दे दी गई थी यह उनकी अंतिम शव यात्रा का चित्र है हां जी सुप्रभात नहीं वह थोड़ी सी कुछ हफ्तों की बातें हैं हां मैं उसके बारे में नहीं कह सकता कुछ द बहुत-बहुत धन्यवाद अपना है है झाल झाल

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😲 अपना Point साबित के लिए इतने कुतर्कआइये कुछ Cross Questions करें।

में एक बार क्या हुआ कि उनका खूब सारा लोगों ने आप जैसे यह दोनों ने बहुत विरोध किया और उन विरोध करने वाले लोगों ने महर्षि दयानंद सरस्वती जी...