कि नमस्कार दोस्तों पिछले कुछ वीडियोस में हमने जाना किस प्रकार से तबलीग जमात से जुड़े हुए लोगों ने जहां पत्थर मिला वह पत्थर जांच उर्मिला माथुर जहालत मिली मजा गलत गालियां देना या अश्लील बातें करना यह सब कुछ जहां तक करना था वह किया पशुओं को बोतल में भरकर के फेंका गया लोगों के द्वारा यह सब कुछ हुआ यहां तक कि गलत जानकारी फलों करके फायदा करके यह भी कहा गया इंदौर जैसे जगह पर के जहर का इंजेक्शन लगाए जाएंगे उत्तर प्रदेश मुरादाबाद में यह कहा गया कि तुम लोग तो खाने के लिए ही नहीं देते हैं आप इस वीडियो से जस्ट पिछली वीडियो देखिए उसमें खुद मुसलमानों ने खुद वीडियो बनाया है उनको रेंटेड हाउस का जहां से मुसलमानों के खुद के वीडियोस आए हैं और वह खुद बता रहे हैं कि उनको होटल जैसी जगह में रखा गया और बहुत अच्छा खाना यहां पर दिया जा रहा है और हमारी बहुत से यहां पर की जा रही है उन लोगों ने खुद इस बात को स्वीकार किया आप उन वीडियोस को जरूर देखें ताकि आपको पता लग सके कि यह जो जैल जमाती हैं यह लोग किस प्रकार से गलत अफवाह पैदा करके जो टैक्स पेयर संघ की गाढ़ी कमाई जो इनकी सेवा में खर्च की जा रही है उसको भी गलत बता करके यह लोग उसी गाढ़ी कमाई से सैलरी पाने वाले डॉक्टर्स और पुलिस वालों को पीट रहे हैं लेकिन दोस्तों इससे भी बड़ी जो खबर है वह है तबलीगी जमात के ऊपर क्राइम ब्रांच का छापा अभी जो अभी तक कि जितने भी खबर है वह मैं आप लोगों के साथ में शेयर करना चाहता हूं निजामुद्दीन के तबलीगी जमात के मरकज मामले में क्राइम ब्रांच की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है वैसे-वैसे कहीं सारे चौंकाने वाले खुलासे भी हो रहे हैं क्राइम ब्रांच को अभी तक अपनी जांच में पता चला है कि मरकज को साल 2005 के बाद हवाला के जरिए सऊदी अरब और बाकी के जितने भी गर्ल्स फॉर मुस्लिम कंट्रीज है वहां से मरकज में आने वाले जमातियों के खाने-पीने के नाम पर नकद पैसा आता था इसी बात को पुख्ता करने के लिए क्राइम ब्रांच ने मरकज को 19 CR इसी के तहत नोटिस भी जारी किया था और मरकज के बैंक अकाउंट और बैंक स्टेटमेंट मुहैया कराने के साथ-साथ वहां पर काम करने वाले कर्मचारी मरकज के खर्चों समेत काफी सारी जानकारी मांगी थी क्राइम ब्रांच के सूत्रों की मानें तो मरकज में ज्यादातर फंडिंग हवाला के जरिए ही हो रही थी अलग बाहर से पैसा यहां आना और वह भी कशमकश तक पहुंचना बुधवार को क्राइम ब्रांच की एक टीम एक बार फिर से मरकज के अंदर गई और फिर पूरे मरकज की तलाशी ली गई आपको पता है कि आप उस तरीके से सील कर दी गई है क्राइम ब्रांच की टीम तकरीबन तीन घंटे तक वहां पर रही आसपास के लोगों तक से बातचीत की मौलाना साद की मरकज का अमीर बनाने की जो कहानी है वह बेहद ही रोचक है निजामुद्दीन के तबलीगी जमात के मरकज के मुखिया है उसको अमीर बोला जाता है मोहम्मद साद तब लिख के संस्थापक इलियास कांधला विकल्प होता है इसकी पैदा ऐसा 1965 में यू छावनी में और नवंबर 2015 से तब लिख का सबसे ऊंचे और रेखा अमीर भी वही है तब लिक की सबसे बड़ी एडवाइजरी काउंसिल को सूरा कहते हैं और आपने एक बात सुनी होगी कि जब हम देश के शासन करने वाले व्यक्ति की बात करते हैं तो वहां पर प्रधानमंत्री राष्ट्रपति की बात आती है लेकिन अगर हम इस्लाम की भाषा में कहें तो अमीर ही शौक होता है शासक को ही अमीर कहा जाता है इसी लिए जो निजामुद्दीन की मरकज है उसको उनका संसद कहा जाता है और जो साद है इसके खिलाफ जरा सा भी अगर आप कुछ बोलेंगे तो मुसलमान आपके ऊपर टूट पड़ेंगे क्योंकि आज की तारीख में साथ ही इनका अमीर है अर्थात् उस संसद को चलाने वाला इन लोगों का प्रधानमंत्री है इसीलिए यह लोग हमेशा जो भारत में एक कानून की बात की जाती है यह इसका विरोध करते हैं और अपने शरिया क़ानून को अपने हिसाब से लागू करवाना चाहते हैं साथ कबीले की का अमीर बनने पहले 1995 से लेकर के 2015 तक सूर्य का केवल एक सदस्य रहा है शादी के बाद मौलाना इलियास कांधलवी पहले अमित रहे हैं बाद में इलियास के बेटे मौलाना मोहम्मद यूसुफ मंडावी और मौलाना इनामुल हसन यह लोग अमीर बने थे 1995 से पहले जुबेर के पिता अमीर थे लेकिन 1995 उनकी मौत के बाद में उसके बेटे जुबैर को अमीर बनना था लेकिन मौलाना साद ने मेवात से अपने लोगों को बुलाकर के रूप में और उसके समर्थको के साथ में हिंसा की और ऐलान कर दिया कि मरकज में अब कोई अमीर नहीं होगा यानी कि जिस प्रकार से पहले मोहम्मद साहब के मरने के बाद में इन लोगों की लड़ाइयां उस गत दिवस खलीफा के लिए चली थी वही सेम डिट्टो आज भी ज्यों की त्यों है क्या इस्लाम को वाला इस्लाम कहा जा सकता है जो हमेशा छोड़कर गए होंगे बिल्कुल भी नहीं कहा जा सकता है क्योंकि उसकी तो ऐसी तैसी उनके खुद के परिवार वालों ने कर दी थी अभी कंधाली 15वीं तो उनके यह क्या है यह बात तय कर देने के बाद चमक जाएं अब कोई अमीर नहीं होगा का यह तय किया गया कि एक कमिटी इसको चलाएगी जिसमें जुबेर मौलाना साद के अलावा कई और भी सदस्य होंगे लेकिन 2014 में ज्वैलर की मौत के बाद में मौलाना साद अपने आपको मरकज का अमीर घोषित कर देता है स्वं ही है क्योंकि यहां पर इस्लामिक हुकूमत के अंदर लोकतंत्र की कोई अवधारणा होती ही नहीं है मैं पहले बता दें कि जो मरकाजी अब संसद है और अमीर इनका राजा है और उस बात का विरोध करने वाले लोगों की जिन चार जून 2016 को बुरी तरह से पिटाई भी की गई थी इसके बाद मौलाना साद के हाथ में मरकज वह पूरी तरीके से आ गया था इसकी बागडोर मौलाना साद के रसूख का आलम यह है कि इलाके की पुलिस भी बिना इजाजत के मरकज में नहीं पहुंच सकती थी इलाके के डीसीपी भी मौलाना साहब से मिलने के लिए 2 घंटे तक इंतजार करते थे पहले मरकज में मजहब के प्रचार के लिए जमा थी अपने पैसों को खर्च करते थे लेकिन 2005 के बाद मौलाना साद ने सऊदी अरब समेत अन्य देश के दौलतमंद तबलीगी जमात के लोगों को इस नजर के प्रचार-प्रसार के लिए नगद पैसा देने को कहा तो उन देशों से ज्यादातर पैसा हवाला के जरिए मरकज पहुंचता रहा है लेकिन यह पैसा मंगवाया क्यों गया इस बात के पीछे कोई भी जाने के लिए तैयार नहीं है बात असल में यह है कि मरकज के द्वारा जितने भी जमा थी निकाले जाते हैं यह लोग जमात ले करके निकलते हैं इस पूरी ट्रेनिंग के बाद में यह लोग घर घर पहुंचते हैं वहां से बच्चों को मानते हैं उन लोगों को ले जा करके भी मरकज में भर्ती कराया जाता है वहां से जो ट्रेंड लोग होते हैं वह लोग घर-घर में जाकर के बच्चों को ट्यूशन देते हैं जो बच्चा आपका बच्चा यह जिस स्कूल में पढ़ता है यदि आप अपने बचपन में स्कूल में पढ़े हो यदि आप अभी 12th किया बीएससी के आस-पास हूं तो आपके घर थोड़ा सा बैक में जाएंगे थोड़ा सा ध्यान करेंगे कि जो आपके साथ के मुस्लिम बच्चे थे उन्होंने कहीं ना कहीं इस बात को स्वीकार किया होगा कि घर जाने के बाद में एक अध्यापक अलग से आता है जो उनको अरबी या उर्दू भी सिखाता है उनको कुरान पढ़ आता है या उनको एक घंटे-डेढ़ घंटे के लिए कहीं ना कहीं मदरसे में जाना पड़ता है यह है प्रत्येक मुसलमान के लिए बेहद ही इंपोर्टेंट क्लास होती है और यह सारे के सारे तबलीग से ही निकलते हैं वहीं पर उन बच्चों को उन नफरत सिखाई जाती है जो गैर मुसलमानों से की जानी चाहिए इनके अनुसार वह सब वहां से की जाती है साथ ही साथ जो कन्वर्जन का काम होता है मेवात हमने पिछले दिनों नीरज खत्री जी से बात की थी और वह हमको पता लगता कि पूरा का पूरा जो मेवात था वह राजपूतों का क्षेत्र था और वहां पर भी छोटी सी मस्जिद भी बनी थी वह भी उनसे अछूती नहीं थी वह कभी भी अगर इसको तोड़ डालते थे लेकिन तब लीक की जो स्थापना की थी कंधमाल भी ने उसकी शुरुआत की थी मेवात से ही मेवात में स्वयं जो मुसलमान बन चुके थे वह लोग हिंदुओं की तरह थे और शुद्धि आंदोलन में जो अरे समाज के द्वारा चलाया था उसमें काफी लोग वापस भी आ गए थे उसी मेवात में इन लोगों ने अपना गढ़ बनाया और उसी आपके आधार पर उसी की शक्ति का आधार पर बलपूर्वक इस मौलाना साद ने पूरी की पूरी तब लेकर ऊपर अपना कब्जा कर लिया था अब आप जरा यह सोचिए कि यह जो लोग है वह जो कन्वर्जन के लिए जाते हैं वह देश का कितना बड़ा नुकसान कर रहे हैं इस देश में कितने भी तरीके के जो जी हां चलो हुए हैं इन सब की फंडिंग कहां से होती है मगर असद के पास में सत्या प्लान था कि सारे जितने भी अरब कंट्रीज थे उन लोगों ने इसको कैश में पैसा देना शुरू कर दिया कैश में ही देना शुरू क्यों किया हवाला के माध्यम से ही देना शुरू क्यों किया हलाला सर्टिफिकेशन की बात यहां पर उठती है कि उसके द्वारा जितनी भी की हुई कमाई है वह कितनी हवाला के माध्यम से इन तब्लिओ को पहुंचती है कि क्या ऐसा प्लान दिया क्या ऐसा पॉइंट दिया क्या ऐसी अपनी तरफ से कैसे कौन से आश्वासन दिए और कंट्रीज को कि वहां से इतनी बड़ी मात्रा में पैसा आना शुरू हो गया यह सब चीजों के ऊपर गौर करना बहुत ज्यादा जरूरी है अगर इस तरह को और ज्यादा गहराई तक लुढ़क गया तो हमें जल्दी ही मौलाना साद और उसके जितने भी गिर गए हैं इन सबके बारे में अच्छे तरीके से पता लग जाएगा जैसे मैं आपको बता दूं कि मौलाना साद अभी तक भी अपनी जांच रिपोर्ट है वह सरकार को सुपुर्द नहीं कर पाया है केवल अपनी जांच में बता रहा है कि वह निगेटिव पाया गया है जबकि दूसरी बात यह है कि उसके नजदीक के सबसे नजदीकी दो लोग पॉजिटिव पाए गए हैं और वायरस के ऐसे में मौलाना साद जा छिपा रहा है अब उसने क्या का छिपा रखा है अपने बारे में और यह जितना भी लेनदेन हुआ है इस देश को बेचने के बारे में मैं सिलाई दूंगा के यदि हवाला से पैसा आता है तबलीगी जमात में लगता है लोगों को वहां पर फ्री में बुलाया जाता है और फ्री में बुलाया था इसलिए तादाद ज्यादा बढ़ती जा रही है इन सब के पीछे का षड्यंत्र किया था इन सब के पीछे के षड्यंत्रों का खुलासा होना चाहिए तभी जाकर के हमारा देश इस अंदेशे से बाहर निकल सकता है इस संदेश से बाहर निकल सकता है कि भीतरघात में मौलाना साद इसकी पूरी की पूरी तबलीगी जमात और इस देश के तथाकथित अल्पसंख्यक मुसलमानों का बहुत बड़ा क्षेत्र यानी कि बहुत बड़ी संख्या इस देश को बेचने के लिए कौन-कौन से अंदर घात भीतरघात की प्लानिंग कर रहे थे इस देश के खिलाफ ही स्लीपर सेल बनाकर के इस वीडियो में सिर्फ इतना ही मैं आशा करता हूं यह वीडियो आपको अच्छी लगी होगी आप इसको सबके साथ शेयर अवश्य करेंगे मेरे संग बोलिए सत्य सनातन वैदिक धर्म की जय जय हिंद वंदे मातरम
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😲 अपना Point साबित के लिए इतने कुतर्कआइये कुछ Cross Questions करें।
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