Sunday, 25 January 2026

Live अजमेर 92 और अजमेर फाइल्स की असली कहानी Sameer With Ankur Arya Satya Sanatan

सबसे पहले तो आपका स्वागत है जय हिंद जय श्री राम प्रणाम बड़े भैया सनातन जी सत्य सनातन अंकुर आदि जी स्वागत है आपका कैसे हैं आप एकदम बढ़िया हूं नमस्ते भाई जितने भी हमारे दर्शन साथ में जुड़े हुए हैं उनका भी धन्यवाद है और स्वागत है और आपका भी बहुत-बहुत आभार और स्वागत है और मैं आपका हार्दिक आभार करता हूं की आपने अपनी कीमती समय से निकाल कर के समय दिया निकाला हमारे दर्शकों के लिए और हमारे लिए तो हमारे सभी दर्शन और ये चैनल आपका आभारी है तो चर्चा का शुरू करते हुए मैं सबसे पहले बड़े भैया आपसे ये जानना चाहता हूं की आखिर ऐसा नहीं है की हमारे पास एक ऐसा मुद्दा है या हमारे पास एक ऐसा टॉपिक है जिसके बड़े में जब हम सोचते हैं तो यह हमें कहानी ना कहानी झकझोर कर रख देता है यहां मैं सोने पर मजबूर कर देता है की आखिर हमने किन लोगों के लिए अपनी अपनी जमीनों में अपने घरों में अपने देश के अंदर किन लोगों के लिए हमने बहन खोल करके वेलकम किया उनका और कहा की ठीक है जी प्रकार से हम ईश्वर को मानते हैं आप भी मानते हो आप अपने स्वर की पूजा अर्चना करना चाहते उसकी इबादत करना चाहते हो उसका प्रचार करना चाहते हो खुलकर कीजिए क्या आपको नहीं लगता बड़े भैया की यही हमारे पूर्वजों का सबसे बड़ा गलत डिसीजन था की एक ऐसी आईडियोलॉजी को उन्होंने अपने जैसा धर्म या अपने जैसी संस्कृति समझ करके उसको जगह दिया जिसका खानदान आज तक भगत रहे हैं अलग-अलग घटनाओं के रूप में देखिए बिल्कुल यह सही बात है और क्योंकि देव दोनों का युद्ध काफी प्राचीन है सृष्टि का आरंभ से ही जितनी भी आसुरी शक्तियां हैं वह जितनी भी देख शक्तियां हैं उनके साथ में युद्ध करती आई है और हमारे स्वयं के इतिहास को भूलने के करण करते हैं और जो लोग सरल स्वभाव के होते हैं वो कहते हैं की इसको पकड़ कर के ले आओ हम राज महल में जब वापस जाएंगे हनुमान जी जी समय पर संजीवनी बूटी लेने के लिए जा रहे थे उसे समय पर कल निमी नाम के एक रक्षा ने गायत्री कर लिया था और जी समय पर यह इस प्रकार की आसुरी शक्तियों वाले लोग स्वीकार धारा के लोग भारतवर्ष में प्रारंभिक कल में आए उसे समय पर उन्होंने भी कल्याणी रावण और स्वर्ण एचआईवी हिरण की तरह ही अपना स्वरूप दिखाए और वह चीज हमारे लोग क्योंकि सदियों से चले ए रही उसे पर जो परिपाटी है इस में अंधे हो गए फस गए हालांकि रामायण के बाद में इस प्रकार के चल आदि को समझना और रखने की जो परिष्कृत बुद्धि थी उसका विकास हुआ था आप देखेंगे द्वापर कल में जो महाभारत युद्ध हो रहा है उसे समय पर इस प्रकार के छालों से बच्चा गया जी प्रकार से धृतराष्ट्र ने उसके बाद में दुर्योधन ने या दुशासन ने या फिर अन्य जितने भी लोग थे जब जब उन्होंने चल कपाट करने का प्रयास किया तब तब भगवान श्री कृष्णा जी ने पांडवों को उनसे बचाया आपने देखा होगा लाक्षागृह में भी आज लगा दी गई थी लेकिन उससे ठीक पहले सारे जितने भी हमारे पांडव थे उनको बच्चा लिया गया था यह कहां से सीखना है कोई व्यक्ति अपने इतिहास से क्योंकि त्रेता युग्म इस प्रकार के अनेक अनेक छलक हो चुके थे और द्वापर कल में हमने देखा की लगातार सनातनयों में इस प्रकार की बुद्धि का विकास हुआ लेकिन फिर से एक बार फिर से कलयुग में वह द्वापर की जो शिक्षा थी जो त्रेता की शिक्षा थी यह कहानी ना कोई सनातनियों के द्वारा अपने ग से दूरी अपने इतिहास से दूरी अपनी स्मृतियां से दूरी अपनी संवैधानिक पुस्तकों से दूरी यही है की वह इन असुरों के पास में उनके जंजाल में एक बार फिर से और उनका देख लीजिए किस प्रकार से इन व्यक्तियों ने इन राक्षसों ने हिंदुओं को नाचना चाहिए किस प्रकार सुनके सभ्यता को विनाश किया और किस प्रकार से अपनी राक्षसी सभ्यता को इस पवित्र सनातनी भारत भूमि पर फैला करके इसको अपवित्र किया इसके खंड खंड जो लोग कहा करते थे फिर से 1947 में फिर से हमारे साथ हिंदुओं का लगातार नरसंहार हुआ उसके बावजूद भी 47 में फिर से हिंदुओं के साथ चलूंगा और इनको कहा गया की मजहब और धर्म के नाम पर जो बंटवारा हुआ है देश का हम मजहब को प्राथमिकता ना देकर के अपने भारतवर्ष को प्राथमिकता देते हैं और यहां पर रुकेंगे उन लोगों ने जिन्होंने मजहब के नाम पर अलग देश बेट उसके लिए वोट किया था वही लोग इस्लामिक देश में नहीं गए यह गुमली दाढ़ी वाले लोग यह लोग कहते हैं की संविधान से पहले हमारी कराने यह लोग भूल गए उसे उन बटन को और भूले नहीं बल्कि मैं गलत हूं यह लोग भूले नहीं वो लोग जिन्होंने बंटवारे के वक्त अपने आप को यहां संरक्षित किया वो लोग इनको सीखने चले गए की जब हमारी तादाद ज्यादा हो जाएगी फिर से हमें यही प्रोपेगेंडा करना है 47 में फिर हम लटके फिर हमने मार खाई और आज फिर से भाईचारे के नाम पर गले लगाने के नाम पर सेक्युलरिज्म के नाम पर राजनीतिक रोटियां तोड़ने के नाम पर के कर वोट हमें फालतू मिल जाएगी हालांकि मिलती नहीं इसके नाम पर एक बार फिर से हिंदू लोग सनातनी परंपरा के लोग भारत के लोग उनका ग्रास बने के लिए तैयार है 90% हमारे भारतीय सनातनी ही होते हैं हमारे भारतीय हिंदू भाई ही होते हैं जो 90% इन दरगाहों पर जाते हैं वहां डोनेशन देते हैं वहां चंदा चढ़ते हैं और इससे बड़ी दुख की बात तो ये है की जो हमारे बॉलीवुड अभिनेता है वो वहां जाकर के सरों पर चंद्रे लाड करके ले जाते हैं वो चादर चढ़ते हैं वहां पर और लोगों को कहते हैं की भाई आप भी जो हमको फॉलो करने वाले हैं आप लोग भी वहां जो क्योंकि हमारी मां लेते तो यहां से पुरी हो रही है तो एक ऐसा नेगेटिव बिल्ड किया गया है पूरे भारत के अंदर और यह ऐसा नहीं की आज से है ये बहुत प्राचीन कल से बहुत प्राचीन समय से चला रहा है जब से ये इन्वेंशन हुआ है आपको नहीं लगता की हम लोगों ने अपना खुद का पैसा अपने खुद के परिवार के लोग अपनी खुद के बच्चे ले जाकर के बैठा दी है और इनको पैसा भी दिया इनको मजबूत किया और इन गाड़ी नशों को इतना पावरफुल किया की इसके साथ-साथ इनको वोट भी दिया और वोट देकर के इनको अपना नेता भी चुनाव और इनको पावर भी दी इसके इसके लिए की भाई तुम आओ और हमारे साथ यह जो है और हमारी बच्चों के साथ तुम यह घिनौना कम करो और हमारी बच्चों की इज्जत को खराब करो और हमें मारो और हम पर रूल करो और हमारा उपहास उड़ाओ आपको नहीं लगता यह सब कम के लिए जिम्मेदार सनातनी भारतीय हमारे खुद बिल्कुल देखिए मैं यह मानता हूं की सनातन जो एक परंपरा है या सनातन वैदिक धर्म जो है सनातनी जो व्यक्ति होगा वो कभी भी इस प्रकार के मन्नाटवाड़ में फैंस हैं मैं ये कहना चाहता हूं की जो मन्नाटवाड़ी लोग हैं जिनको हम आम भाषा में हर एक जिन जो हर एक को ही मां लेते हैं क्योंकि जो सनातनी है खाने के लिए तो वो भी सनातनी है सनातनी का अर्थ ये ले लिया गया है सामान्यतः की बस जो हिंदू है हिंदू में तो क्योंकि मांसाहारी भी है शराब पीने वाला भी है बाली देने वाला भी हिंदू कहलाता है शराब चढ़ाने वाला भी हिंदू कहलाता है हवन करने वाला शाकाहारी मांसाहारी सर्वाहारी साइन को पूजने वाला मजार पर जान वाला भी हिंदू है क्योंकि उसके सर्टिफिकेट में उसका सर्टिफिकेट जो भीम आर्मी वाले लोग हैं यह सारे के सारे जो अपने आप को कहते हैं हम हिंदू नहीं है तो सनातनी कौन है सनातनी वह है जो अपनी वैदिक परंपराओं को वैदिक आदेशों को शिरोधार्य करता है और वह कभी मिलेगा लेकिन जो कलंक है जो मन्नाटवाड़ी मन्नाटवाड़ी लोग अर्थात क्या होते हैं मन्नाटवाड़ी लोग वो लोग जो की अपनी मन्नत मांगने के लिए मजारों पर पहुंच जाते हैं किसी के साइन धाम पर पहुंच जाते हैं यह लोग व्यक्ति थे यह परमेश्वर नहीं है जो परमेश्वर की पहचान नहीं होती व्यक्ति को तो वह इसी प्रकार से निर्जीव वस्तुओं में माता भट्ट है और अपनी मन्नत जहां से पुरी हो जाए वहीं पर जाना आरंभ कर देता है जैसे की वो भी हिंदू है जो ईसाइयों के चंगाई सकता है मजारों पर जाकर के पैरों में कल धागे जो होते हैं लड़कियों का बड़ा वो चल रहा है आजकल बड़ा यह क्या बोलना है फैशन के पैरों में कल धागा बंधवा लेती है इनको क्या बोलते हैं यह हिंदू नाबालिग बालिकाओं को उठा लेते थे और उनके पैरों में भेड़िया डलवा देते थे और वह बेड़ियां कट्टी थी कब जब उनके साथ में सब दुष्कर्म हो जाते थे मजारों के जिनको सूफी और संत बताया जाता है इस प्रकार के जो लोग हुआ करते थे यह लोग उन बेटियों को काटकर के फिल्म को मुक्त किया करते थे लेकिन हिंदुओं के अंदर क्या है यह आप देखेंगे कभी नॉर्थ इंडिया में बहुत साड़ी जगह ऐसी हैं और पागल हुए फिरते हैं लोग वहां पर जाते हैं चूरमा चढ़ते हैं प्रसाद लेकर के वहां पर खाता हैं और ये साड़ी मजारें उन लोगों की हैं जिन्होंने भारत को गुलाम बनाने के लिए मुगलिया शासको का साथ दिया जिन्होंने मोहम्मद गौरी का साथ दिया अब डाली का साथ दिया खिलजी का साथ दिया मुगलो का साथ दिया ऐसे लोगों की है साड़ी तो यह मन्नाटवाड़ है इस मन्नाटवाड़ से पैर जो विशुद्ध सनातनी है जो अपने परमपिता परमेश्वर में विश्वास रखना है वह कभी इनके चक्कर में नहीं आता है और आपने सत्य कहा की 90% से अधिक मंत्र में वही लोग जाते हैं हिंदू ही जाते हैं जिनकी बुद्धि खराब हो चुकी है और इसका एक और करण बताता हूं की यह जो एक फैक्ट है मुसलमान में जो मजार पूजा करता है यह आदात में काफी कम है लेकिन मजारों की जो संख्या है वो बहुत ज्यादा है अब ये ज्यादा क्यों भी किसके आधार पर हुई है यह इन हिंदू बहुसंख्यक लोगों के आधार पर हुई है क्योंकि नहीं तो जो मुसलमान उनको पूजते हैं या उनमें विश्वास रखते हैं उनकी तादात भारतवर्ष में ज्यादा नहीं है एवं दूसरा जो इस्लामिक कल्ट है वो खुद इनके खिलाफ है उनके खिलाफ बहुत कुछ बोलते हैं तो ऐसी स्थिति में हिंदुओं का वहां पर जाना केवल और केवल एक ही चीज करते हो की इनको फ्री में कोई चीज मिल जाए सिर्फ लालची जो बहुत अत्यंत लाल और अपनी इज्जत और बेइज्जती से भी ज्यादा केवल और केवल मो माया सांसारिक सुख भौतिक सुखों को महत्व देता है कल इनकी बहन बेटी के साथ में यदि किसी भी प्रकार का दुष्कर्म हो जाए उनको उठा लिया जाए उनको ब्रेनवाश कर दिया जाए उनके साथ में कल कोई भी व्यक्ति आकर के निकाह कर जाए उनका हलाला करवा दें या फिर पत्थर से कुचल करके मार दे या सूटकेस में पैक करके फेक दे या फिर कहानी बीच दे इनको कोई फर्क नहीं पड़ता है इनको क्षणिक सुख चाहिए और यह मन्नत वड़ी इन हिंदुओं को इन मजारों पर जाकर के माता रगड़ना के लिए मजबूर करता है और मैंने बताया की त्रेता युग के बाद में भी हजारों वर्षों तक एक पूरा का पूरा एक समूह है हमारे समाज का उसे समाज का यह पूरा का पूरा समूह आज तक नहीं सुधा है लेकिन आपसे आपके बड़े में मुझे पता है मैंने आपके कुछ और वीडियो भी देखें हैं इसके ऊपर आपको इस विषय की बहुत गंदा से जानकारी अल में बात यह थी की मैं स्टार्टिंग यहां से करूंगा की सबसे पहले बात की यह पूरा का पूरा स्कैन है एक्चुअली ये लोगों को किस प्रकार से बहकाया गया किस प्रकार से मन्नत वाद के चक्कर में इन लोगों को लाया गया किस प्रकार से हिंदुओं की बहन बेटियों को वहां लाया गया किस प्रकार सुन के मां-बाप को फसाया गया मन्नतवाद के ही चक्कर में फस करके उन लोगों को बुलाया गया आपने एक बात बहुत सुंदर कहीं की इसमें फिल्म इंडस्ट्री का बहुत बड़ा योगदान है देखिए पहले फिल्म इंडस्ट्री में इन मजारों का योगदान है इन लोगों ने पैसे को वहां पर प्लांट किया पहले क्या होता था पहले फिल्मों में आर्तियां प्रभु की भक्ति के लिए को लेकर के संकेत हुआ करते थे उसे प्रकार की बातें होती थी उसके बाद में जो आदरणीय गुलशन कुमार जी हैं उनकी निर्माता के साथ में क्या करवाई गई फिर प्रोजेक्ट किया गया इन मजारों को उसके बाद में आपने देखा फिल्म में लगातार ये सब चीज बढ़नी चली गई हिंदू समाज अपने बालक बालिकाओं पर सीधा सीधा तो कोई ध्यान देता नहीं है एकेडमिक एजुकेशन को वो सर्वोपरि मानता है धार्मिक शिक्षा उन्होंने आज तलाक अपने बालक बालिकाओं को दी नहीं है मैं जंबूज करके बच्चा और बच्ची शब्द उसे नहीं कर रहा हूं क्योंकि इस्लामी को बच्चा और बच्ची स्लेव्स को कहा और बच्ची कहते हैं उन पर वह ध्यान नहीं देते अभी जो हमारे लाइव को लोग देख रहे हैं उनके अड़ोस पड़ोस में या परिवार ने रिलेटिव्स छोटे-छोटे बालक बालिकाओं को जब वह अपने मां-बाप का अटेंशन चाहते हैं उनसे बात करना चाहते हैं तो उनके हाथ में मोबाइल पड़ा देते या टीवी चला करके बैठ जाते हैं आज की तारीख में आप किसी भी रिलेटिव के यहां पर जाएगा तो पर्सनल बातें खत्म हो गई है जो पहले इंटरेक्शन हुआ करता था समाप्त हो चुका है अब टीवी चला करके बैठ जाएंगे आप भी टीवी देख रहे हैं वह भी टीवी देख रहे हैं सब टीवी देख रहे हैं मजा ए रहा है तो इस करण से जो जिहादी लोग हैं उन्होंने इस बात को बड़े ध्यान से देखा की हिंदू समाज में इस प्रकार के शिक्षाओं का अभाव है और इसका लाभ उन्होंने आप इस बात को जानते होंगे की किस प्रकार से इस्लामिक लोग अपने बालक बालिकाओं को अपनी मजहबी शिक्षाएं देते हैं उन मजहबी शिक्षाओं को अकादमी एजुकेशन के दौरान भी चाहे मौलवी को घर बुलाना पड़े चाहे उनको मदरसे भेजना पड़े भले ही उनका मदरसे में शारीरिक शोषण बड़े भैया केवल शिक्षा ही नहीं देते बल्कि जो बकरी ईद पर बाली चढ़ाने की जो प्रथम है उसमें छोटे-छोटे बच्चों के कुर्बानी से पहले हाथ भी लगवाते हैं अपने जानवर पर तुम हाथ रखो ताकि तुमको भी इसका और जैसे ही वो बच्चा थोड़ा बड़ा होता है 12 14 साल का होता है तो उसका हाथ पकड़ कर के जो है गला भी काटना सीखने हैं इस तरीके से तैयार करते हैं अपने बच्चों को तो अब वो अपने लोगों को इस प्रकार से तैयार कर रहे हैं और हिंदुओं को इस प्रकार की कोई शिक्षा दीक्षा नहीं है तो ऐसी अवस्थित में उन्होंने यह देखा की वो अपने बालक बालिकाओं को ट्वीट कैसे कर रहे हैं वो अपने बालक बालिकाओं को ट्वीट कर रहे हैं टीवी के मध्य से सीरियस के मध्य से और वो टीवी सीरियस और फिल्म में उन्होंने मोती मंत्र में पैसे का इन्वेस्टमेंट किया और वहां से उन्होंने सनातन वैदिक धर्म और हिंदू सभ्यता भारतवर्ष की जो सभ्यता है जो वर्षों पुरानी और युगों पुरानी है उसका भोंडा प्रदर्शन आरंभ कर दिया उसका अपमान आरंभ कर दिया और इससे आपका जो शिक्षक है वो कौन है आपके मलिक बालिकाओं का शिक्षक वैदिक धर्म में कुछ नहीं हिंदुओं के पास कुछ नहीं है अमिताभ बच्चन ही गली दे रहा है की जब तक आपने हिंदू धर्म के अनुसार पूजा पाठ की कब तक तो आपके कार्य नहीं हुए हालांकि इतिहास इस बात का गवाह है इस्लाम का इतिहास हो गया तो जो बालक बालिकाएं हैं हिंदुओं के उनका तो ब्रेनवाश होना ही है और यह ब्रेनवाश हुआ और आप यकीन नहीं मानेंगे की अजमेर का जब सोफिया गर्ल्स कॉलेज कांड हुआ ढाई सो से अधिक लड़कियों का यो शोषण हुआ और लगातार सीरियल वाइस उनका गैंग रेप हुआ और उसमें भी चिश्ती से लेकर के जो उसे टाइम की जो खादिम हुआ करते थे उनसे लेकर के उनके ड्राइवर ने उनके बाल काटने वाले ने उनके कपड़े धोने वाले ने उनके फोटोग्राफर ने पत्रकारों ने भी ब्लैकमेलिंग के नाम पर उन बालिकाओं के साथ यो शोषण किया उन लड़कियों को उनके परिवार वालों को मरना पड़ा और बहुत सारे परिवार तो ऐसे थे की इस समस्या से निजात अपने के लिए फिर भी वो उन्हें मच्छरों पर देखने को नहीं मिलेगा जी प्रकार से वैचारिक और मानसिक अंधता इस हिंदू समाज के मन्नाटवाड़ी लोगों में है इतना अंधा समाज क्या आप अपने कातिलों से गुहार लगा रहे हैं की हमारे साथ में कुछ मंगल हो जाए इस प्रकार से शतुरमुर्ग की जान भी बैक जाए यदि वह अपने शिकारी को देखकर के अपने गार्डन रेट में दशा ले एक बार को कबूतर भी बैक जाए जो बिल्ली को देखकर के आंख बैंड कर लेट है लेकिन इस प्रकार के मन्नाटवाड़ी हिंदू कभी नहीं बैक सकते और ना बच्चे और अंततः सब लोगों को आत्महत्या करनी पड़ेगी सैकड़ो लोग इसमें मारे और फिर भी आप यकीन मानेंगे की एक बालिका के साथ में मुस्लिम बालिका के साथ में कुछ हुआ अथवा नहीं लेकिन धरती आसमान सब एक कर दिया गया था एक लड़का चल रहा है हो जाते लेकिन किसी को भी पुरी सजा नहीं मिल पता अजमेर में अगले दर्शकों तक किसी हिंदू के घर में शादी नहीं की गई थी लोगों को ये शक राहत था कहानी इस लड़की के साथ भी ना हो गया उन हिंदुओं को वहां से विस्थापित होना पड़ा देश के कोनी कोनी में जाकर के रहना पड़ा और अपनी बहन बेटियों के विवाह दूर दराज के प्रदेशों में करने पड़े जहां की वह भाषा भी नहीं जानते थे ऐसी स्थिति अपने इस बहुसंख्यक हिंदू राष्ट्र के अंदर हुई हिंदुओं की लेकिन किसी ने एक कंकर भी उसे अमृत शरीर के ऊपर बनी हुई ईंटों के उसे देर के ऊपर नहीं मेरी उसे पत्थर से बने हुए उसे पत्थर दिल व्यक्ति की मजार की तरफ किसी ने आंख खोल करके यहां फाड़ करके नहीं देख उसकी तरफ किसी ने आज तक नहीं निकाल और उन लोगों ने उन बहन बेटियों की आंखें जो लटकती पंख से जो फैंसी पर झूम रही थी लड़कियां बार-बार मिसमैच को कहता हूं जो लोग अपने आप को सनातनी योद्धा हिंदू राष्ट्र हिंदू हृदय सम्राट कहते घूमते हैं उन्होंने क्या आज तक अजमेर पर एक शब्द बोला जिन लोगों ने बोला बाद में माफी मंगनी पड़ी थी मैं न्यूज़ एंकर्स की बात कर रहा जिन्होंने इन शब्द इन विषयों पर बात करने का प्रयास किया उनको बाद में माफी मंगनी पड़ी थी एक मेव अंकुर आर्य सब व्यक्ति जिसने स्टार्टिंग में कहा और आज भी अपनी बात पर अटल है उन्होंने धराई बढ़ाएं हमें टॉर्चर किया वारंट्स निकले पीछे पुलिस लगे मेरे परिवार को परेशान किया जा रहा है कंटिन्यू लेकिन हम पीछे हटे वाले नहीं है एक अकेला जब हमने आवाहन किया की हम मजारों पर नहीं जाएंगे जितनी अवैध कहानी पर भी आपको दिखाई दे उनको उखाड़ करके देखिए अंदर कोई है क्या किसी कुत्ते की हड्डी तलाक नहीं मिली ऐसी सैकड़ो में जा रहे हैं जो हमने अपने खेतों से साफ करवा हिंदुओं के खेतों में थी कोई मतलब ही नहीं बंता है दूसरा हमने कहा जितनी पर जाना छोड़ दीजिए कंबल डालो प्रसाद दे दो कोनी में जाकर के और लाइट आने से पहले साफ हो जो वहां से जब उनकी सुन की हड्डियां ग जाएगा भारत की केंद्र की सरकार कांग्रेस की थी उनकी सहायता की किसने जी पर हम मन्नत मांगने के लिए जा रहे हैं किसकी मन्नत पुरी कर रहा है वो अपने लोगों की मदद पुरी किया भाई हमारी एक ही है अरे कोर्ट का मैं क्या करूं जब आप लोग लोगों को बका करके यहां पर इसलिए ला रहे हो की लोगों की मन्नत पुरी होती है लोगों का विश्वास है तो मुझे यह तो बताओ ढाई सो लड़कियों के मन्नत इसने पुरी क्यों नहीं की भाई उन 2500 लड़कियों की क्या दोस्त हां क्या गलती थी उन लोगों की जो उनके साथ में थे तो इस प्रकार का अगर आप दोगलापन दिखाएंगे कहो ना कहो तो लड़कियों के साथ में होता हुआ हिंदू मूर्ख बन रहा है और फिर फिल्मों को देखकर के फिर जा रहा है लेकिन एक मजेदार बात और अच्छी बात का संज्ञान लिया गया था पत्रकारों के द्वारा मीडिया के द्वारा की वहां पर 90% तक हिंदुओं का जनक कम हुआ है की आप जब इसके विषय में बात कर रहे हैं चिश्ती के बड़े में दरगाह के बड़े में आप बात कर रहे हैं तो यहां पर यह पॉइंट रखना भी अति आवश्यक हो जाता है बड़े भैया की आप अपनी मन्नत मांगने जा किसके पास रहे हैं जिसने हमारे सर के ताज राजा पृथ्वीराज चौहान की पत्नी संयोजकता को इसलिए सैनिकों को सोप दिया था की उसने इस्लाम धर्म काबुल नहीं किया उसका विचार करवाया उसका अपमान करवाया करके पूछ रहे हैं वह अल में उनके पूर्वजों उनकी मां बहनों की इज्जत का सौदागर है इसलिए इस्लाम कुबूल नहीं किया उनका सौदा करवाया और उनको भेड़ियों के आगे फेक दिया तो ये सनातनी शायद उधर थूक ना भी पसंद नहीं करें परंतु अपना हिस्ट्री पढ़ने हैं ना अपने धर्म ग्रंथ पढ़ने हैं ना अपने पूर्वजों के बड़े में पढ़ने हैं मन्नत मैंने पहले ही इस बात को संज्ञान में इसी वजह से दिलवाया था की मन्नाटवाड़ उनके लिए सर्वोपरि है ये इस्लामिक जिहाद एक पुस्तक है इसका जो लेखक है वो एक मुस्लिम व्यक्ति हम एक खान है जो इस्लाम watch.org के एडिटर भी हैं इन्होंने इस पुस्तक में बहुत स्पष्ट तोर पर जो मोहम्मद गोरी है उसके भारत में आने का प्लेन जो ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती है कुछ और पुस्तक हैं मेरे पास में जो की आपको बताती है किस प्रकार से इस्लामिक लोगों ने यह जो पुस्तक यह जो पुस्तक हैं इनमें भी उन सब चीजों को खोल खोल करके बताया गया है की किस प्रकार से सूफियां के द्वारा भारत वर्ष के इस्लामीकरण का मार्ग खोल दिया गया और मन्नाटवाड़ी हिंदुओं इसमें बाढ़ चढ़कर के योगदान भी दिया जिन लोगों ने अपने शासको के द्वारा कहीं है के जो अजमेर के अंदर जो सरोवर था जिसको की महाराजा पृथ्वीराज चौहान जी के नाना जी ने जिसका निर्माण जो थे इस्लाम के जो नबी उसे समय से साहब हुआ करते थे जो उनकी बटन को बताते हैं की याद किया करते थे बाद में उसका उसको जुबानी किसी को बताया करते थे फिर लेखन पर हम पर आई और फिर उन्होंने लिखा और उसके करण से ही जितनी भी हदीस है बनी इस का इस प्रचलन का अनुकरण करते हुए जितने भी इस्लामिक शासन हुए हैं उन लोगों ने इसी प्रकार से अपने साथ में कुछ साहब लोग रखें जो इन चीजों का स्मरण रखें या फिर बाद में उनको लिख सके अभी मोहम्मद की कब्र पर जाकर के इस बात का प्राण लिया रिटर्न हिस्ट्री का हिस्सा है लेकिन हिंदू को फिर भी इस बात का कोई अफसोस नहीं होता है कोई वो लोग इस बात को सुनने तिलक को तैयार नहीं होते तो फिल्मों के मध्य से आपने कहा की जो एक्टर एक्ट्रेस सिद्धार्थ जी हैं जो बात कर रहे हैं जो सिद्ध करती हैं जो आपके दिमाग के बैंड कपाट खोलता हैं खिड़कियां क्या है लोगों से छुड़वाया और जो नहीं छोड़ते उनके ऊपर कंबल डालो जो भीम है यह प्रतियोगिता है

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