Sunday, 25 January 2026

Live में छलक गये कट्टर आंसू धर्म पर सर्वोच्च बलिदान देना सीखो हिन्दुओं Satya Sanatan Ankur Arya

है और महर्षि जी के चेहरे द उसे टाइम आज आपके साथ में दोनों चीज हो रही है आपकी लैंड भी जा रही है और आपकी महिलाएं भी जा रही है तो आपको प्रत्येक में भगवान कृष्ण और भगवान राम एक साथ होना मांगता है [संगीत] तो वहां मंदिरों पर हमला जब शुरू होना तो आर्यवीर दल के yoddhaon ने और gurukulon में क्योंकि आर्य समाज गुरुकुल में स्थापना ही 1875 में होगी तो फिर गुरुकुल चलने शुरू हुए तो वहां पर सबसे ज्यादा ध्यान शारीरिक स्वास्थ्य पे रहता था और गुरुकुल में सिर्फ यह था की सबसे पहले बंद होती है आर्य समाज की वजह से वह बहुत डिफेंड करने की कोशिश करते हैं आज तक कोई भी कोई विश्वास सुधारक sansthaon की बात कर रहा हूं जिन्होंने आजादी के समर में इतना बड़ा योगदान दिया किसी धार्मिक संस्था ने भी इतनी बड़ी संख्या में योगदान नहीं रहा जितना आर्य समाज का रहा और उसकी प्रेरणा से महर्षि दयानंद सरस्वती जी जिन्होंने यह कहा की जो हम गुरुकुल बनाएंगे उसकी जो prusthbhoomi होगी जिसका सिलेबस होगा वो ये होगा की हम पहलवान तैयार करेंगे फिर आर्यवीर दल निर्माण जब हुआ था तो उसका भी यही कॉन्सेप्ट उसके निर्माण से भी पहले की मैं बात कर रहा हूं आर्यवीर दल के निर्माण से पहले की बात कर रहा हूं की उसे टाइम पे भी ये था की हम एक ऐसी विंग तैयार करेंगे जो पुरी तरीके से हथियारों से लेस हो क्या आप जानते हैं की ग्रुप की झज्जर के जो स्वामी ओमानंद जी द तो वह सवेरे ही तलवार हाथ में लेकर के और अपनी जो तगड़ी थी वह पुरी की पुरी इस वक्त कस के बंद लेते द टाइट कर लेते उसको ताकि मेरी तलवार ना छूट और जो 47 आया तो 47 में पटौदी बहादुरगढ़ झज्जर दिल्ली इन sthanon से malekshon का अगर किसी ने पुरी स्टोर पर किया उन्होंने और कहा की यहां कोई नहीं बचेगा कोई नहीं रहेगा [संगीत] कौन था कातिल हमारा व्यक्ति था हमारा व्यक्ति होगा अगर कुछ भी करेगा तो अपने को samjhaenge भी bujhaenge भी नहीं मानेगा तो कोने में ले जाकर पीठ भी देंगे सब कम कर लेंगे लेकिन अगर इस धरती कॉम होगी तो हथियार हाथ में लेकर के ऊपर से उसको बंद लिया जाएगा बक्शीश नहीं होगी फिर मा बक्शीश ने होगी यह विचारधारा का यदि कोई उत्पादक रहा तो वह महर्षि दयानंद सरस्वती है जिन्होंने कहा की अपने व्यक्ति को हम छोड़ देंगे खुद मेरा भी कातिल होगा तो मैं बंदी छोड़ हूं मैं छोड़ दूंगा लेकिन सामने वाला नहीं क्योंकि वह इस लायक नहीं उल्लास लिखूंगा तो मेरी हत्या के प्रयास होंगे सब कुछ जानने के बाद में लिखा था हम जब इस रास्ते पर कभी भी कदम बढ़ते हैं तो हम यह सब chijen सोच कर चलते हैं बिल्कुल जिस समय रामप्रसाद बिस्मिल जी ने यह रास्ता पकड़ा था छोटी उम्र में तो उसे टाइम उन्होंने यह बात पहले तय कर ली थी राम प्रसाद बिस्मिल झील लाल लाजपत राय जी हो भगत सिंह को गुरुदत्त हूं और इन सारी के जितने भी महान क्रांतिकारी रहे हैं सरस्वती जी की मृत्यु ने सभी आर्य samajon में एक नया खूब एक नई जो ज्वाला होती है मरने को भी एक फंक्शन एक तरीके से फेस्टिवल उन्होंने बनाया उसको सेलिब्रेट करना शुरू कर दिया था महर्षि जी के मरने के बाद में उन्होंने कहा की इसको सेलिब्रेट करना है गुरुदत्त वहां बैठे हुए द बहुत छोटे द उसे टाइम और गुरुदत्त जी की आंखों से झज्जर पानी चल रहा है तो उन्होंने कहा ऐसा व्यक्ति लाजवाब इंसान द पूरे शरीर के ऊपर फफोले हैं और जिनसे पीप चल रहा था उसे टाइम और पानी चल रहा था उसे टाइम और महर्षि के चेहरे है और लेकिन वह बैठे और उन्होंने कहा की मेरी जो मेरे बाल साफ कर दिया जाए और दाढ़ी मेरी और मेरे सर के बाल तो जिस टाइम कट रहे द उसे टाइम तो लेकिन चेहरे के ऊपर नहीं तो सारे के सारे स्तब्ध रहेंगे है तो वैसा ही हुआ गुरुदेव हमारा तो जो की व्याकरण होती है संस्कृति व्याकरण स्टार्टिंग है उसके नजदीक ही ईश्वर है और उसके बाद में जितने भी क्रांतिकारी द अगर आप इमेजिन करो की किसी को फांसी की सजा हुई है और उसका वजन बढ़ जाए तो क्या इंस्पिरेशन रही होगी यार उसके पीछे कौन रहा होगा उसके पीछे इंस्पिरेशन जरा सोचो तो मैं एक ऐसे व्यक्ति को मानता हूं मैं कैसे व्यक्ति को अपना गुरु मानता हूं और मैं डंक के चोट बनाता हूं और चाहे मुझे लोग बहुत सारे लोग हैं जो aryanamaji बोलते हैं मुझे मुसलमान बोलते हैं और कहते हैं की हिंदू धर्म द्रोही हैं अंकुर आर्य तो मैं शहर से इस बात को स्वीकार करता हूं क्योंकि हमने ऐसे लोगों को बहुत झेल है और महर्षि हमारे अगर पूरे अपनी जिंदगी जी जाते हैं और कोई बीच में आकर के व्यक्ति हिंदू व्यक्ति उनको जहर ना देता तो हम आई थिंक आज एक अखंड भारत होते और जिस तरीके के विचारधारा उनकी थी और जिस तरीके के साथ में जरा सी भी मर्जी हमें नहीं करनी है क्योंकि उन लोगों के अंदर से नहीं है तो अगर उनके विचारधारा पर चलते तो वाकई में आज मुक्त राष्ट्र होते लेकिन फिर भी usmein आकर के भी आप एक लोग द जो हमें तो लोग द जिन्होंने जहर दिया था जिनकी खुद के कॉन्सेप्ट क्लियर नहीं द उन्होंने ही तो अड़ंगा लगाया तो हम तो आप लोगों को jhelate आए हैं तो वह इंस्पिरेशन है हमारे के जिसने हमें मरना सिखाया है हमें जीना नहीं सिखाया हमें जिन्होंने मरना सिखाया है आप अपने जीने के लिए उनकी जान के टाइम अपनी kathaon को रोक दो चलेगा हमें कोई फर्क नहीं पड़ता यार हमें कोई दिक्कत नहीं है लेकिन हमारे गुरु ने हमें नहीं सिखाया उसने तो ये कहा की मेरी 10 के 10 ungaliyon को मोमबत्ती की तरह जला दो तो भी मैं सच को झूठ और झूठ को सच नहीं कहूंगा और मार दूंगा यही होगा बट हमारे लिए इंस्पिरेशन वही है हम अपने अंतिम समय तक हर नहीं मानेंगे और अपने लोगों के दिए हुए सारे दश जो है वह जो उनकी गलियां को ₹500 देकर नेपाल bhaagane का पूरा मौका भी देंगे लेकिन जब भी हमारे सामने पटौदी बहादुरगढ़ और दिल्ली के मलिक होंगे तो हम ओमानंद बनेंगे और अपने हाथों पर चादर भांग के निकलेंगे वैसे ही कपड़े के ऊपर और ये यात्रा कभी रुकने वाली नहीं है और इसको जब तक तब तक जब तक हम अपने सपनों का भारत पुरी तरीके से नहीं बना लेंगे जब तक हमारा जो उद्देश्य है वो हासिल नहीं कर लेंगे और जब तक हमारी पुरी धरती जो हमने कोई है उसको पुरी तरह नहीं कर लेंगे नाता रहूंगा बार-बार आता रहूंगा और मैं भगवान श्री कृष्ण महाराज के एक वचन पुरी तरीके से अटल हूं अर्जुन तो चिंता मत कर यार यह पुराने कपड़े दीपावली ए गई आप लोगों से का रहा हूं कम से कम एक श्लोक पढ़ लो ठीक है वह एक चीज पढ़ लो की यह शरीर मैं नहीं हूं मैं अपने आप से सवाल करता था की यह क्या है आंख किसकी इमेजिन करके दर गया की मैं यह नहीं हूं भाई अपने घर यह नहीं बता रहा था की मेरे हाथ में मेरे को चोट लगी मेरे हाथ में चोट लगी मेरे माथे में चोट लगी तो मैंने कहा यार यह तो एकदम क्लियर है की मैं और मेरा अलग-अलग होते हैं तो मैंने कहा मैं मैं कुछ और हूं मैं कोई और हूं मैं सबको बोलता था तो मेरे को हंसते द तो मैं फिर मैंने उसका बहुत मैं सोचा उसके बारे में की इनको क्या आंसर करूं तो फिर मैंने उनको यह बताना शुरू किया यह क्या है कैमरा हाथ मैंने कहा ये तू नहीं है ये तेरा है ये शरीर ये पेट तेरा है मेरे पेट में दर्द हो रहा है यानी की तेरा पेट है ये तू नहीं है तो तू भी तू नहीं है जो तू दिख रहा है ना तू तू वो नहीं है तू कुछ और है तो मैं उसे उलट खोपड़ी का इंसान हूं जिसने अपने पर्दा था की रेडियो सिर्फ इसलिए तोड़ दी थी क्योंकि मुझे usmein से छोटे-छोटे हाथ में ढूंढने द जो बोलते हैं तो वो बोलते द की हम सोचते द इसके अंदर कोई है तो हमने खोलते खोलते खोलते खोलते उसको तोड़ ही दिया पर हमें मिले ही नहीं दिमाग को भी इसी तरीके से खोलता हूं तो जब आप जो हो वह अजहर हो अमर हो अविनाशी हो यह शरीर है इसी धरती से मिला है है यह सब कुछ हमें ऐसे मिला है यह पंच तत्व ईश्वर प्रदत्त प्रकृति जैसी थी वैसी रहेगी इसको ना घटाया जा सकता ना बढ़ाया जा सकता है तो यह हम सनातनी परंपरा हम rakshsi प्रवर्तक परंपरा के नहीं की जो एक ही बार आते हैं तो हमारे सामने दुश्मन कौन है हमारे सामने दुश्मन वह है जो सिर्फ एक बार आता है तो एक ही बार सफाया करना है एक बार में ही शांति हो जाएगी हम लोग बार-बार आते हैं भाई हम लोगों को मिटाना आसान नहीं है और सनातन इसी वजह से सनातन है और शून्य है डॉक्टर स्ट्रेंज ने यह कर दिया इंटर्नल्स ने यह कर दिया हल्क ने यह कर दिया भीम के सामने है कुछ हल्क यह सब हमसे चुराया गया है ये dhartiyan ये देश ये paramparaen ये sanskritiyan यह जो अलग-अलग मजहब में अच्छी बातें भी लिखी गई हैं कहीं कहते हैं की usmein अच्छी भी तो है तो क्या वो अच्छी उन किताबों के आने से पहले नहीं थी हमसे चुराई गई है और वह दूध दिखा करके विश पिलाने का कार्य किया जा रहा है वो जो दूध भी है वो हमारी गे का ही लिया हुआ है जो अच्छी बातें भी हैं वो आज मैं किताब लिख डन चलो usmein बहुत अच्छी-अच्छी बातें लिख डन सत्य बोलो अहिंसा का पालन करो और मैं अपने फॉलोअर्स बना लूं तो मैं तो अपने फॉलोअर्स की कनपटी में मार गई मैं खुद ही इतना तरकीब हूं मैं अपनी बात ना चलूं मैं ही का डन की यार मेरे से पहले के लोगों ने लिखा नहीं है जी कुरान है बाइबल है तो रात है इनसे पहले भी यह सब बातें थी ऑलरेडी तो हम क्यों सब चीजों के पीछे पद रहे तो हम वह हमेशा हमेशा के लिए हैं और हम वो हैं जिनको कभी भी इस शरीर का मोह नहीं करना चाहिए जो भगवान कृष्ण को मानते हैं जो गीता को मानते हैं चाहे वो इस्कॉन वाले हो चाहे वो कथा वाचक और vachikaen हो उसी गीता जी में तो यह भी लिखा हुआ है ना की कपड़े बदलने हैं धर्म युद्ध कर वहां जाकर के भी वो अगर धरना प्रदर्शन करते बैनर लगा लेते चरखा चलाने लग जाते और वहां जाकर के भी कहते कोरबो तुम हथियार दल दो हमारी लैंड हमें दे दो नहीं होता अगर प्रभु श्री राम भी चरखा चलाने जाते हैं धरना देने लग जाते और कहते हैं यार प्लीज कर देना ट्विटर ट्रेन चला रहा हूं प्लीज यार कर देना तो सीता मैया को वापस ना देते और आज आपके साथ में दोनों चीज हो रही है और आपकी महिलाएं भी जा रही है तो आपको प्रत्येक में भगवान कृष्ण और भगवान राम एक साथ होना मांगता है एक साथ होना चाहिए है लेकिन आप तो कम से कम में लगे हुए हो तो कम से कम पर भी मैं का रहा हूं कम से कम पर भी एक दो श्लोक भी अगर आप याद कर लोग गीता जी के तो भी आप इस युद्ध को जीत जाओगे बत्ती की लड़ाई लड़नी है जो इंटरनल हमारे लिए बनी है वह सूर्य हमें कुर्सी पर तशरीफ़ ठिकाने जितनी जगह भर के लिए लड़ाई हमें इस पूरे के पूरे पृथ्वी के लिए लड़ाई लड़नी है ईश्वर प्रदत्त इस्पर वैभव के लिए लड़ाई लड़नी है है और उसके तैयारी हमारी कैसी होनी चाहिए वह आप लोगों को बताने की आवश्यकता नहीं है छोटी-छोटी फिल्म वीडियो में पता लग जाता है की भाई एक छोटी सी फाइट जितने के लिए मैं कितनी taiyariyan करनी पड़ती है

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😲 अपना Point साबित के लिए इतने कुतर्कआइये कुछ Cross Questions करें।

में एक बार क्या हुआ कि उनका खूब सारा लोगों ने आप जैसे यह दोनों ने बहुत विरोध किया और उन विरोध करने वाले लोगों ने महर्षि दयानंद सरस्वती जी...