Sunday, 25 January 2026

Live With अमी गणात्रा महाभारत सत्य या मिथक हर सवाल का जवाब Satya Sanatan Reveals Mahabharata

झाल घ्र नमस्कार दोस्तों आप सभी का एक बार फिर से स्वागत है आपके अपने YouTube चैनल जनता दरबार पर आपको यहां पर लोगों को दिख रहा होगा सत्य सनातन लेकिन यह चैनल है जनता दरबार क्योंकि सत्य सनातन पर अभी दो हफ्ते का बैन लगा हुआ है आज हमारे साथ में मेहमान है अमी गणात्रा जी जो कि एक सुप्रसिद्ध लेखिका है और सबसे पहले अमित जी आपका बहुत-बहुत स्वागत है हमारे इस चैनल पर आ कि अमित जी आपने एक पुस्तक लिखी है जो कि काफी क्लियर प्रचारित-प्रसारित है और इसकी मौत को क्लीन सिटी बहुत ज्यादा हो रही है मैंने कहीं पर भी इसका जो प्रचार-प्रसार है वह डिजिटल माध्यमों से नहीं बल्कि एक दूसरे के बताने से ही मैंने अभी तक देखा और मेरे पास में भी काफी लोगों का मैसेज आया मेल आया कि आपसे एक बार बात की जाए तो यह जो पुस्तक आपने लिखी है अ महाभारत अनरेवल्ड इसको लिखे जाने के पीछे ऐसी क्या वजह थी कि है तो अब अंगूठी महाभारत जो है वह महाभारत की कथा हम सबके कोई भी भारतीय आप लोग तो हमारे जीवन में उसका बहुत प्रभाव भी रहा है और हमें बहुत प्रिय भी है वृद्धि होगी जिसे भारत को लेकर कोई ना कोई मंतव्य हमारे साथ फेवरेट कैरक्टर सबसे अच्छा मुझे तो पसंद है और इतने हो जाता है कि लड़ाई हो जाती है मित्रों को चेतन यह हमारे दूसरे को नहीं मानते हैं और हमारे इतिहास अगर हम डेफिनेशन शब्द का अर्थ दूसरा क्वेश्चन आता है वह धर्म अर्थ काम मोक्ष राणा को उपदेश अस्मिता पूर्व संयुक्त समिति है संप्रति तब हुआ है है तथा मतलब जो थोड़ा-बहुत तथा के रूप में बताया गया है तो जिंदा है एक घटित घटनाओं कथाओं के रूप में बताया गया है कि उद्देश्य केवल तथा बताने के लिए एंटरटेनमेंट आज हम बात करते हैं वह एंटरटेनमेंट के लिए नहीं था वह हमें चतुर्विध पुरुषार्थ का ध्यान देने के लिए कि हमारा हमारे जीवन को धर्म संयुक्त कैसे जी तो यह सब कारण अच्छा अब ऐसे ग्रंथ से अगर हम अश्लील तो इस ग्रंथ के पात्रों को सही से समझ कर उसके रचयिता व्यास मुनि उनकी कथा को समझकर उस पर एक और दृष्टिकोण को समझ कर ही हम हमारे जीवन में शिक्षा ले सकते हैं और इसीलिए उसे पीस जितने हद तक हमारे पास यह नहीं कहते कि ऐसा कुछ मैंने जितने अवेलेबल को जो ट्रेडिशनल माना जाए वह तथा तो हम समझे तो यह था कि रहा है कि इसको समझाएं तीसरा कारणों से यह है कि आज के अंदर हम सोशल पॉलीटिकल सिनेरियो को देखें तो कई बार ऐसा होता है कि हमारे एक तरफ तो ग्रंथ को कहेंगे कि लाइट हो रही है ठीक है इसलिए इसको इस तरह दूसरी ओर जहां उनको लगे कि यह प्रसंग जो है वह हिंदू समाज के सामने एक क्रिएट कर सकता है उसको उसको बिल्कुल बिल्कुल बिल्कुल और दूसरी बार जब मन करे तब उसको उठाकर बता दूंगी और अ क्यों नहीं पड़े तो भी बहुत सारी क्लिक करें कुछ अवधारणा जो है वह थोड़ा बहुत बार फिर से शुरू करें अच्छा जी तो आपने में किन-किन बिंदुओं को रखा है क्योंकि हमने तो कई बार देखा है कि सोशल मीडिया पर अधिकतर जो यूअर रहते हैं उनके सामने भी यह समस्या आती है कि पहले बीआर चोपड़ा और राही मासूम रजा के लिखे हुए जो डायलॉग्स पर आधारित थी एक जो सीरीज थी उसको देखकर के कुछ अवधारणा बनी थी उसके बाद में फिर एकता कपूर ले आई कुछ स्टेप्स लड़के उठाए उसने और उसके ऊपर एक स्टोरी छापने शुरू कर दी जिसमें काफी सारा बीएफ एक्स लेकर आए और वही अपना कभी सांस भी बहुत ही वाले जो सीरियल के रोना धोना और यह नौटंकी अंधी होती है वह देखा हमने वहां पर खूब उसका खींचातानी में हालांकि केवल इसी में नहीं ब्राह्मण के साथ में भी इसी प्रकार के दुरुपयोग चल रहे हैं महाराणा प्रताप जी के जीवन के विषय में भी इसी प्रकार के दुरुपयोग चले जैसे कि उनकी लव स्टोरी तो 12 13 साल के थे तभी से शुरू हो गई थी पृथ्वीराज चौहान जी के बारे में भी सुना है कि इसी प्रकार के आने वाली है सम्राट अशोक के विषय में भी इसी प्रकार से दिखाया गया तुम कि भारत पर जिस पर कि आपने बुक लिखी है उसका जवाब देखते हैं समाज में इस प्रकार से एकता कपूर जैसे डायरेक्टर्स हैं जिसका दोहन करने का प्रयास करते हैं आपके मन में कुछ टीस आती है उठती है यदि आपको लगता है प्रकार्य उर्दू के बहुत अच्छे झंकार राही मासूम रजा और महाभारत जो कि हजारों साल पूर्व की भाषा का अब लेखांकन कर रहे हैं तो लगता है धक्का कुछ उनको देखने के बाद में मैं अब तुम्हें एक बात यह कहना चाहती हूं कि जब तक मुझे मैंने स्वयं अध्ययन नहीं किया था तब तक तो मेरे लिए भी वही था मुझे भी व्यक्ति ज्ञान प्राप्त हुआ था वह आज भले ही मैं कहूं कि उसमें यह गलत था और हमें यह करने की आवश्यकता है तो कहीं ना कहीं उसका एक आम पॉजिटिव करतब दिखाए कि हम भारत के विषय में बात करने लगे और समाज यस तो घर में रखना चाहिए मैंने यह मैंने अपनी फैमिली में अलग है लेकिन पर्यावरण खत्म है उसको समझ में नहीं चाहिए तो गैस है हैं परंतु आज जब हम जान चुके हैं और आज जब हमारे पास आ सारे स्क्रिप्चर अवेलेबल भी है माध्यम भी अवेलेबल है तो मैं थोड़ा सा उसके पीछे जाकर क्या है वह समझने की भी आवश्यकता है तथा के वीरों से इतिहास समझकर तो केवल टीवी सीरियल पर रुकने के आवश्यकता नहीं है केवल एकता कपूर का सीरियल देख करके और अवधारणा बनाने की आवश्यकता है इस वजह से भी उसका दिन स्वाध्याय करके उसके जो भी फैक्स हैं उनको तोड़ने की आवश्यकता है ऐसा आपने कहा है तो आपने कहा कि करना चाहती हूं कि आज की बात नहीं क्योंकि टेंशन जो और होता है और वह है एंटरटेनमेंट तो उसके दृष्टि से करते हैं पर यह आज की बात नहीं है अब मैं आपको बहुत पुराना डांस रचित शाकुंतल जय हो युक्त अपना दुश्मन और उनके पुत्र भरत वहां से ही आती है यह तथा महाभारत में पुराणों में भी आती है बट महाभारत में एक कथा है कि भरत जो है वह कौरव पांडवों के वंशज वह इस आए तो भारत हम जो कहते हैं तो अभिज्ञान शाकुंतल की जो शकुंतला है और महाभारत की शकुंतला है उसमें भी बहुत फर्क है वह अन्याय सहन कर जाए यह बिलकुल नहीं कहते हैं वह जाती है तब उनसे कहती है कि एक पति अपनी स्त्री की ओर अपनी पत्नी को कैसा व्यवहार करना चाहिए और दुश्मन कहां गलत है तो मैंने पुस्तक पहला चैप्टर है उसका नाम शकुंतला सिगरेट इसमें बड़ी कहानी बताइए अच्छा पर जाओ अब कालिदास लिख रहे थे तो वह बीच प्रेम रस के बारे में थोड़ा सा अलग आधुनिक पर दलित और नाट्य तो नाटक ड्यूटी ली जा सकती है अगर हमको समझ सकते हैं और मेन चाहिए जो यह हुआ है क्योंकि अ में आ मैं चाहूंगा कि महाभारत के आधार पर सबसे पहले अगर हम बात करें तो मैं चाहूंगा कि योगेश्वर श्री कृष्ण महाराज के विषय में बात करते हैं क्योंकि उनके विषय में तो बहुत सारी ऐसी बातें बताई गई है वह ऐसे थे वैसे थे और उनका काफी चरित्र हनन भी किया गया है और आजकल के समय और वह कोई और बाहर के लोग नहीं करते मुझे लगता है कि हमारे ही वो लोग हैं जो उनको एक रूप में पूछते हैं लेकिन जिस तरीके से काम पर चरित्र-चित्रण कहकर के किया जाता है वह कहीं ना कहीं इस प्रकार से एक विवादित छवि लेता है महाभारत में क्या उसी प्रकार के कृष्ण का ही जिक्र अ या फिर यह भी कहीं से कुछ कथावाचकों ने उठाकर के बीच में से और कैरेक्टर घर दिया है जो है न वह तथा के बजाय धर्म की समझ का धर्म है वसुंधर महक वह शांत होता है वह जो फोल्ड करते हैं मस्से ने विनती की बात करते हैं तो ऐसा प्रिंसिपल जो समाज को धारण करता है समाज के समृद्धि के लिए प्रगति के लिए जो आवश्यक है ऐसा कार्य जो सस्टेनेबल समाज का निर्माण करता है वह धार्मिक है और ऐसा कारण जो उसके विरुद्ध जाता है वह धार्मिक है यह तो बहुत सुना कैसी होती है समझने की बुद्धि हम सबवे नहीं होती है उस दिन यह एक किस्म के लोगों की आवश्यकता होती है तो इसका अर्थ यह है कि वह अजय बुद्धि एकदम योग अस्थाई व्यवस्था है किस तमाम समर्थक जितने हैं और जो करते हैं इसलिए करते हैं क्यों करना चाहिए निष्काम कर्म करना चाहिए क्योंकि हमारे संकुचित दृष्टिकोण में हमें हर संदर्भ का पर महाभारत में कृष्ण ने हर बार उनका ज़ुल्फ़िकार जो है वह उन्होंने धर्म के परिपेक्ष में और धर्म संयुक्त और वह यह बात बार वार एक्सप्लेन करते जैसे अगर हम व्यक्ति के कारण वह इसलिए सबसे पहले होने का कारण क्या है कि युद्ध को अचानक न हो गया था युद्ध इसलिए हुआ क्योंकि बचपन से कौरव दुर्योधन जो था वह कभी पांडवों को अपने भाइयों के तौर पर एक्सेप्ट नहीं कर पाया वह मात्र यह जो था वह बहुत अधिक था जब से पांडव पांडु की मृत्यु के बाद जैसे कि हम अस्तर पूरा थे तब से मैं कुछ ना कुछ ऐसा करता था कि वहां से दूर चले जाइए और वहां उनकी उनका उनकी मृत्यु हो जाए ना तो चले आ रहा है चले या ना चले आ रहा है यह लोग में कुछ नहीं कहा यह अपना काम करने जा रहे पांडेय फिर वह वस्त्रहरण वाला वह जो दूसरा वाला सारा प्रसंग बनता है उसके बाद भी चुके हैं यह हार गए हैं तो यह रोक चले जाते हैं वनवास ने तेरह वर्ष वनवास में बताते हैं कि बाद भी दुर्योधन को उनको अपना राज्य नहीं देना है वहीं सूर्य ग्रहण वृद्धि तभी भीम है ना आप रफ्तार इंतजाम सूची के अग्रभाग सेट टुब किया जाए उतनी भूमि देने की तो क्या बात है युद्ध के बिना ना कि जीवित नहीं रह सकता यह इंग्लिश के साथ नहीं जा कि बदमाश होना रूबी नहीं देने वाला परिस्थिति में बार-बार नेगोशिएशंस हुए इतने व्यवस्थित शहर और गांव के गांव अगर यह हम कर सकते हैं तो पांच गांव दे दो क्योंकि जब तक में बहुत-बहुत बहुत सारे लोग आरक्षण नाम से 90 के हिसाब से तो वे नहीं माने न माने तो बिल्कुल नहीं हुआ तो हर धर्म में तो फिर दूसरी बात उनके लिए आती है कि जब हुआ तब उन्होंने छाल से सबको मरवाया कंधार शहर से मरवाया धुंध से कहा जाता है यह कह रहा है कि आप लोग अपना धर्म करो मुझे नहीं चाहिए तब कृष्ण कहते हैं कि अब तक में उनके साथ थे तुमने जिस तरीके से आप जिस तरीके से को फिर कहते हो कि मैं आपसे बात नहीं कर सकते अभी कुछ दिन पहले दोनों को मिलकर था जब बच्चा था तब और उनका क्लियर यह धर्म तथा धर्म और अश्लीलता व धर्म एव हतो हंति धर्मो रक्षति रक्षीताह अगर आप धार्मिक आरक्षण करा है तो धर्म आप करेक्शन करेगा आपने धर्म का रक्षा नहीं किया है तो धर्म आपका रक्षा नहीं करेगा यह उनकी बहुत ही क्लियर समझ है और वह उस तरीके से चीजें हैं हमारी संकुचित वृद्धि के कारण धर्म को ही नहीं समझ पाते और उनके एक्शंस को हम छल-कपट समझते थे जबकि ऐसा नहीं है है लेकिन मैं कृष्णा यह बहुत अच्छी आपने बात बताई है कृष्ण जी के विषय में जो बताया जाता है कि क्योंकि जहां तक हमें लगता है तो वह यही है कि वह संदीपनी मुनि के गुरुकुल में गए और उस साइड की जरूरत है वहीं थे कि बाल्यकाल से ही गुरुकुल में चले जाते थे लेकिन उनके बारे में बताया है उनकी बहुत सारी गोपी की ओर रास रचाते रहते थे और बस उनके एक लव स्टोरी होती है जैसे कि मतलब आजकल बॉलीवुड में बहुत बढ़िया से एक लव स्टोरी जैसे चलती है और में बहुत सारी गोपियां है आजकल के युवा लड़कों को मैंने इसे सूंघते हुए देखा है कि हमारे तो भगवान खुद गोपियों के पीछे रहे हैं उनके साथ डांडिया खेलते रहे हैं तो यह जो चाहिए क्या यह सारी चीजें जो मूल महाभारत है उसमें भी कहीं पर लिखा है मैं यह क्वेश्चन इसलिए कर रहा हूं क्योंकि कालिदास ने अलग तरीके से लिखा है महाभारत से एक ट्रैक्टर में पता लगता है महाभारत से क्या एक्चुअल कार्यक्रम शिक्षण का भी डिसाइड कर सकते हैं क्योंकि अलग पहने तो बहुत है महाभारत अगर मिले तो क्या मिलता है महाभारत में अगर हम जो 18 पर्व महाभारत के उसमें तो यह बात कही नहीं आती पुराण में काफी सारे कृष्ण की कथा क्योंकि वह भागवत पुराण उनके जीवन पर अधिक है परंतु यह न जानती हरिवंश पुराण में माना जाता है कुछ लोग मानते हैं कि भारत का अनशन पर 18 ऊपर वाला है यह कहने वाली रासलीला दिवाली कहीं नहीं आती मैंने खुद भी इसी वजह से पड़ा क्योंकि मेरे सामने यह सवाल कि और हमारे लोग कहते थे कि हम तो इस वजह से यह सारे काम कर रहें हैं मुझे कॉलेज लाइफ में यह सवाल उठा था कि क्या कि फिल्मों से प्रभावित होकर के लड़कों के पीछे-पीछे चलना स्टॉकिंग करना तो वह मुझे थोड़ी कहीं ना कहीं चुनौती थी आप धर्म का नाम लेकर कि हमारे महान नायकों का नाम लेकर भगवान का नाम ले करके और किसी लड़की को परेशान करने के लिए जाएंगे तो आपके मन में टीस आएगी और यह ऑफिसर कड़वी सच्चाई है मैं इसको इसी वजह से कह रहा हूं और मैं बहुत बदनाम हूं कड़वी सच्चाई बोलने के वजह से ही तो यह यही वह वजह थी जो मैंने सोचा के अगर हमें किसी का रियल कैरेक्टर कहीं समझना है तो वह एक-मात्र महाभारत हो सकती है तो मैं गीता प्रेस का महाभारत खरीद कर लेकर और मैंने श्री कृष्ण महाराज के जीवन को ही पढ़ने के लिए भारत सबसे पहले खरीदी थी मुझे कहीं पर भी उसमें यह सारी चीजें नहीं मिली सेंटेंसेस बनाने के लिए एक लव स्टोरी ट्रायंगल और यह सब चीजें जैसे कि आजकल इमरान हाशमी की मूवीस बनती है उसमें समझा घुस जाती है वैसा ही स्टोरी मुझे वहां पर मिलती है और जिससे कि हम एक जो योगेश पर एक सुदर्शनधारी जो चक्र धारी ईएस आश्विन कृष्ण महाराज है जो कि कहते हैं धर्मो रक्षति झाल जो कि कहते हैं यह कर्मसु कौशलम् तो यह सारी चीजें कहने वाले श्री कृष्ण महाराज वह कहीं ना कहीं भूल जाते हैं तो एक तो यह चीज पे अपने कर्ण का विषय लिया कर्ण के ऊपर भी अलग से सीरियल्स बने और फिर जैसे आ देखा गया कि अमिताभ बच्चन की मूवी भी लावारिस जो कि हिट हो गई थी और अमिताभ बच्चन के बहुत सारे करेक्टर ऐसे हैं जिसमें कि वह लावारिस टाइफी रहा ह की सारी फिल्में आई और जिसमें उसके प्रति ना एक तय क्या कहते हैं कि एक दया भाव बने या कुछ भी जो देखने वाले सुनने वाले बढ़ने वाले हैं तो उस कैरेक्टर को निखारने की कोशिश की जाती थी ठीक वैसे ही करेक्टर कहीं ना कहीं पुराणों में से निकाला गया और वह कर्ण को बनाया गया और उसके पर्सपेक्टिव से दिखाने कोशिश की गई कि वह बहुत दयनीय स्थिति में आ को फेंक दिया गया धर्मा आदि वह बहुत जानता था वह बहुत बड़ा दानवीर तथा उससे अच्छा तो कैरेक्टर ही नहीं था कर्ण के विषय में महारत में रहता है को अच्छी तरह को अगर महाभारत में देखो तो करने के लिए हमें बिलकुल भी कोई भी टाइपिंग प्रति संवेदना नहीं होती गणित के साथ करने का जो पतन हुआ वह घंटे के लिए और महाभारत में हुए दुकान से अंत तक यही देखने मिलता है कि जैसा होगा वैसा ही कर्मों का फल भोगना होगा बहुत अच्छा अगर हम सारे उनके साथ हुआ तो उनको उनको भी अपने मां-बाप के घर नहीं पड़ी हुई थी वह भी अपने पिता के मित्र के यहां उनको यह डॉक्टर दिया गया था तो उनके यहां उनका नाम था तो उनकी उनका तो उनको छोड़ कि पनीर वो जिनके घर बढ़े हुए अधिरथ और राधा कुंड के परिवार में क्या को प्रेम ने मिला था और उनका परिवार ऐसे था कि खाने-पीने की व्यवस्था जो उनकी कहा जाता है कि यह उपयोग भारत और संयुक्त राष्ट्र के अच्छे मित्र थे यह कहा जाता है ठीक है पर यहां तो सूत पुत्र और किसी-किसी में पलने वाले कोई घोड़ा वाले थे वह बहुत गरीब परिवार था जहां वे पहले व्यक्ति की मित्रता थी अगर हम ड्राइवर ड्राइवर से उस तरीके से कि नहीं कि अगर ऐसा हो सारथी का फैट होता तो अर्जुन ऑल द बेस्ट द्वारका जाते हैं कृष्ण को शांति बनाने के लिए और किसी को श्रीकृष्ण जाते यह पहली बात अच्छा चलो कृष्ण और अर्जुन तोड़ मित्र है तो हम मान भी सकते हैं जब कर्ण को अर्जुन से युद्ध करना था तब शल्य जो एक स्वयं राजा थे उनको पता है कि आप साथियों साथियों ऐसा होता जैसा हम इसे इस तरीके से [संगीत] युद्ध क्षेत्र में युद्ध क्षेत्र में मैं मानता हूं कि सारा थी और जो राजा या जो प्राणी है मारत यह उन दोनों की ट्यूनिंग तो मैं वन तो पति-पत्नी से अधिक होनी चाहिए तो बीज यह एक छोटी आपने बिल्कुल सही कहा है कि उनकी मित्रता बहुत अच्छी थी क्योंकि हिसार हिसार थी ना समझे तो तीर नहीं लग सकता है हमें कौन सा किला भेजना है कौन सा भी भेजना है यह सा रखी जिस प्रकार से मन कि शरीर का तारतम्य है कहां गया शरीर का भी एक सारथी है तो वहीं इतना ही मजबूती संबद्ध एक बार थी और एक राजा होना चाहिए ठीक है दूसरी बात आज के परिपेक्ष में हम समझते हैं कि मतलब कोई शब्द का उपयोग करना है सब कुछ समझ में आ जाती जिसको मैंने कहीं देखा है शूद्र ब्राह्मण उनके अगर किसी माता-पिता और ब्राह्मण का विवाह हो जो बच्चे आ जाते हैं वह सब कुछ कहा जाता है ठीक है और हमारी व्यवस्था उस समय अतिथि किसी भी प्रकार के लोगों सबको अपनी रोजी-रोटी के लिए अर्थ फुटपाथ को उपार्जन के लिए व्यवस्था होनी चाहिए इसलिए इस टाइप के जो हैं जिसमें क्षत्रिय गुण और ब्राह्मण को दोनों एक बहुत ही ज्यादा पराक्रम का काम है वह समझ आ रहा है जैसे भारत उग्रश्रवा उनके पास शुक्रवार की शाम ढले तो सूत्र भी नहीं होता है वह तो वैसे देखा जाय चाणक्य कंबाइन है जिस दूसरी बार कहा जाता है कि जो कि वह छोटी जाति का क्योंकि इसलिए द्रोणाचार्य उनको पढ़ाने से मना कर दिया अब यह भी गलत है बहुत ही नहीं दिया गया है कि वह द्रोणाचार्य कशिश था परंतु दुर्योधन दुर्योधन पांडवों ने हमेशा दुर्योधन के आश्रम में रहकर वह अर्जुन के साथ करता था इससे तो फिर मैं दूंगी और जानते हैं इसको कहते हैं तो फिर ठीक है और गुरु द्रोणाचार्य उसको खाने से मना कर दिया इसी बात पर अपने ठीक है तुझे ब्रह्मास्त्र तो हमेशा सुपात्र को ही दिया जाता था जो एकदम सुपात्र वैसा नहीं के भाई पृथ्वी गिरफ्त वंशी कर दो उसको उनके पुत्र अश्वत्थामा को पूरा सिर्फ वापस लेना फिर से शादी करूंगी ऐसा भी अच्छा तो इसमें बहुत इंटरेस्टिंग बात है कि अगर ये नोट असली उसमें 23837 ज्योति पर्व करते हैं कि इन पर 235 माइल्स उसमें से केवल पांच महसूस करते थे जिसमें यह प्रकरण आता है कि द्रौपदी ने कहा सुतम नगरिया में अच्छा 3355 उन्होंने कि यह बहुत अजीब सा क्योंकि इसके पहले लोग कह रहे हैं कि कारण कोई नहीं प्रत्यंचा चढ़ा ठीक है फिर को वह जब लेकर जाते हैं नौकरी को और रूपा रूपा ने एक पेग यह पंडित जी को कहते हैं जिनको के पास चली गई है क्योंकि वह तो एक कुम्हार के घर में रह जाते हैं पंडित जी और पूछते हैं कि आप कौन हो आप कुल गोत्र क्या है कि तुअर कहते हैं कि आपको कि आप पहली बात तो आपको पूछना चाहिए क्योंकि जब आप अपने स्वयंवर रचा था तब आपने ऐसा कोई स्पेसिफिक नहीं किया था कि कौन से स्कूल का हो वहां से गोत्र है उसको तो हमने किया परंतु आपको आपको चिंता करने की आवश्यकता नहीं है तो ऐसे भी कोई स्पेसिफिक किया ही नहीं था तो फिर क्यों करें और अगर हम स्त्रियों के हक की बात करते तो अगर उनको चॉइस थी कि उनको किससे शादी करनी ना कर रही हूं तो उसमें क्या हुआ उनका हक विश करने के लिए उन्हें उन्होंने केवल पांडे ओं हुआ था तो बाकी समझ कर दिया ना तो यह मैंने स्क्रिप्ट के हिसाब से तो शायद नहीं था वह किसी अ MP3 त्वचा रंग तो बस हो गई जब यह सारा कुछ हुआ ही नहीं है तो और तू आऊं अगर आप देख ना कुछ तो दुर्योधन को उकसाने वाला पात्र युद्ध के नियुक्त करने की तो मैं हूं है उसको हमेशा यहीं रहता था कि मैं किसी भी तरीके से यह बात को सिद्ध कर दूं एक देश में महाभारत को लेकर के बाद बार-बार आती है कि महिला की वजह से युद्ध हुआ था और आदमी कई बार इस तरीके के ताने कोई मार देते हैं कि देखो मैंने बताया कि इतिहास के कुछ प्रमाणों को लेकर कई पुस्तकों के प्रमाणों को ले करके आज भी यह बातें होती हैं तो महिलाओं की वजह तो महाभारत हो गया है तो कई बार यह चीज है कई महिलाओं को पीछे हटाया जाता है और तुम मत बोलो तुम यह मत करो महिलाओं के लिए तो महाभारत हो गया महिलाओं के इस रामायण हो गया जो युद्ध हुए हैं बड़े-बड़े युद्ध महिलाओं की वजह से हुए तो इसमें कितनी सच्चाई है कि महाभारत एक महिला की वजह से हुआ है बिल्कुल गलत है नया मौर्य क्षमता पृथ्वी क्योंकि आप इसका कारण होते हैं कि महिला के कारण क्यों क्योंकि राष्ट्रपति ने कहा अंधे का पुत्र अंधा है है इसीलिए है और इसीलिए सब कुछ हुआ था कि पहले हुआ था भीम को मारने से पहले हुई थी पांडवों को अपना नाम देने की तो दुर्योधन पांडवों ने द्रौपदी के कारण तो पहले तो वह स्टूडेंट दूसरी बात यह कि ही नहीं कोई भी एक नुस्खे में यह बात नहीं आती है ठीक है तो इसलिए नहीं आ कि अगर कह दे दिया होता तो क्या दुर्योधन का रिएक्शन एक बस थाने के कारण इतना बड़ा था कि आप स्त्री को स्वभाव मिलाकर निर्वस्त्र करने का प्रयत्न ग्रुप अच्छा उसके बाद शुरूआत होने का कारण यह था कि एक तो पहले दुर्योधन कर्ण को पांडवों से थी दूसरी नियुक्ति हुई इसके बाद भी उन्होंने वनवास पूरा बताया और कहा कि पांच गांव दे दो वे नहीं माने तो इसके कारण अगर इसमें भी ना करें यह जॉब कहां पर करते हो तो आप क्या चाहते थे कि जो करते जा रहे थे और दुर्योधन वध तो पढ़ाई करते जा रहे थे ओके जाए यह क्या-क्या उसे बस स्टैंड करते जाना था यह सब चिपक क्या आपके बारे में बात करें तो नहीं हुआ था यह युद्ध हुआ दुर्योधन और कर्ण के मात्र यह लोग और को दिखा दो हां जी आ एक बार की बात है जाकिर नायक अपने एक वीडियो में बोल रहा था कि देखो महाभारत जो है वह भाई से भाई को लड़ाने के लिए आ सिखाती है भाई भाई के साथ में पड़ता है और यह है उसके लिए प्रेरित करती है उसका उत्तर देते हुए कहा था कि धर्म युद्ध जिस समय पर होता है तो उस महाभारत इस प्रकार यह बात बताती है कि यदि आपका भाई भी अधर्म के रास्ते पर हो तो आपको उसके खिलाफ युद्ध करना चाहिए यहां पर इतनी अच्छी बात बताई गई है यहां पर यह नहीं कहा गया कि यह आपके फिर के का है यह फिर आपके मजहब का है तो चाहे वह कितना भी गलत हो हमेशा उसका साथ दो से बैक पैनल के पीछे खड़े हो ऐसा नहीं कहा गया कहा यह गया है कि आपका भाई भी अगर अधर्मी हो रखा है तो उसके खिलाफ जा उसके खिलाफ भी आपने उतरना है महाभारत हमें क्या बताता है कि जो धर्म युद्ध है क्या यही उसमें संदेश है या फिर यह भी है कि और भाई के भाई भाई से भाई को लड़ाने दिया है और उसी तरीके की केवल प्रेरणा देता है क्योंकि जब अब हमारे अलग-अलग रोल्स हम तो यह हम पति घ्र जी के साथ-साथ राज्य के साथ-साथ आपके अगर हम तो हम कई सारे धर्म संघ कि कौन सा जूस करना चाहिए जो भी अधिक उम्र के सामने प्रस्तुत हुआ था युद्ध के समय जी ने और फिर दूसरी ओर मेरा क्षत्रिय लेकिन यार यह बिल्कुल धारण कर सकते हैं करता है अगर प्रेसिडेंट गलत तो जो सबसे ज्यादा उसकी बात मानते नहीं हो सकता पूर्वक कि मुझे चाहिए तो चाहिए ही नहीं सकता अगर ऐसा व्यवहार में एक बड़ी मछली छोटी मछली हमेशा खा जाएगी कोई नियंत्रण इसीलिए सबसे पहले धार्मिक आरक्षण आता है और धार्मिक आरक्षण करने के लिए प्रभु कोई भी हो कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि समाज छोटे परिप्रेक्ष में नहीं देखना है समाज को चलते रहना है उस सनातन समाज की बात करते हैं सनातन धर्म करते हैं उसको उसके लिए जो पोषक है वैसा कार्य हमें करना चाहिए पूरा हमारा और इतनी करना चाहिए कि सामने वाले पर गुस्सा आ रहा है यह में सामने वाले से देश है नहीं कृष्ण यही कहते हैं दूं एक रात त्यागकर इसलिए मत करो कि दुग्रेश है तुम जितना चाहो तो भी कोई बात नहीं है तुम्हें इसलिए करना चाहिए क्योंकि धर्म संस्थापना तुम्हारा कर्तव्य है इसमें करना है MP3 वो तो आपकी बात जी जी जी जी महिलाओं के विषय में बताया गया कि महिलाओं का बड़ा ही शोषण हुआ महिलाओं को देखो कहीं पर उठाकर ले गए उसको बेच दिया उनको कोई स्वतंत्रता ही नहीं थी मीणा भारत के समय में और किसी भी प्रकार से उनको एक तरीके से सामान्य नागरिक तिलक की भी एक वह नहीं थी अगर हम देखते हैं कुंती के विषय में तो क्योंकि पांडु रोग ग्रस्त थे संतोष की प्राप्ति के लिए उनको पूर्ण स्वतंत्रता थी और स्वयंवर के समय से उनको पूर्ण स्वतंत्रता थी मीण यदि हम विदुर धृतराष्ट्र और पांडु के जो माताएं तक उनको देखें तो वहां से भी शांतनु को अगर हम देखें तो वहां से भी too But सीरीज पूरी की पूरी चली आई है अब देखते हैं कि महिलाओं को पूर्ण स्वतंत्रता थी ना केवल वर चुनने की बल्कि संतान के जो पिता है उस तिलक को भी चुनने की तो इन दोनों चीजों में हम तरीके से सामाजिक समता हैं यह लोग जो सवाल उठाते हैं कौन से ऐसे मुद्दे हैं जिनको डालते हैं क्या उन्हें भारत में वास्तव में है क्या कॉन्ट्रैक्टर है या फिर चीजें तो एक ही फाइल में थी लेकिन कुछ बाहरी मिश्रण या फिर सीरियल्स देखकर के सारे जो हैं मुझे लगता है कि हम लोग आज के परिपेक्ष में से पांच को देखते हैं और हमको क्योंकि ऑफिस नहीं जाती है कि स्त्री का ही हो सकता है वह भी हो सकती है सशक्तिकरण में ऐसा नहीं सिगरेट पिए सशक्तिकरण का अर्थ यह है कि वह अपने निर्णय स्वयं ले सकती थी जो भी तमाम व्यवस्थाओं को भी अपना कर्तव्य निश्चित थे तो अगर हम अरे यदि कहीं जाकर काम नहीं कर सकती तो आपको अगर आप उस पर एक मुद्दे पर कर दो यह बात नहीं है एक तो है कि करने की जो अपने तारे का वर चुनने की संतान प्राप्ति की तो उनको उनको उनको इस मामले में निर्णय स्वयं अपने हफ्ते लिए मैंने आपको शकुंतला की बात अभी थोड़ी देर पहले ही जाती हैं उनके पास और जो पूरा डायलॉग शकुंतला और दुष्यंत शकुंतला दूसरे से बात करती है वह इतना सुंदर है क्योंकि पुरुष की अर्धांगिनी है और पुरुष का कर्तव्य है कि वह उसका भरण-पोषण करें उसका रक्षा करें तो आप ही नहीं कर रहे हो ठीक है तो पूरा हो जाती है जिस तरीके से भरी सभा में यह कह रही है अगर इतनी दबी-कुचली महिला थी इतनी अवधि तो इसको इस तरीके से बात करने को अधिक ठीक है तुम्हारे जैसे झूठे के साथ ऑनलाइन नहीं रहना चाहती तुम सबके सामने झूठ बोल रहे हो तुम मुझे तुम्हारे साथ जाने दो मैं देखूंगी मेरा मुझे पूर्ण विश्वास है कि मेरा कोई पुत्र भरत है वह इतने समय न करें और महान राजा बनेगा तुमको नहीं माना कि इतने हद तक कहते हैं तो यह कर सकते हो तो चलो डिब्बा है मत्स्यगंधा है बिल्कुल और कि उलूम इस वायर रहती है कि मुझे आई ड्यूरिंग आप मुझे संतुष्ट कीजिए उस व्यक्ति को कहते हैं कि मुझे आपके पुत्र से विवाह करना है क्योंकि आप जानती है कि स्त्री के शरीर में होता है तो आप अपने पुत्र को समझाइए कि बहुत से करें और और तो यह उस समय अपने-अपने हित की भावना प्रकट कर सकते प्रकट कर सकती थी उस समय उनके बहुत प्रैक्टिकल पति-पत्नी और उनके साथ उचित रूप को संवाद करके एक तरफ सत्य हों जब वह महारानी थी इंद्रप्रस्थ की तब वह कैसे कैसे काम करती थी उसका पूरा उल्लेख वह करती हैं तो उसमें हम पता चल जाए कि आज हम चीप एडमिन एडमिन ऑफिसर करेंगे कोई भी बड़े कॉर्पोरेट करेंट उनसे भी बड़ा काम द्रौपदी का था शुरुआत से लेकर रात तक सारे जो इतनी अग्रिम वहां पर खाते थे जो रहते थे जो उनके राज राज का पार्टनर जिनको राज्य का पैटर्न जिनको प्राप्त था वह लाख जितने लोग रोज खाते थे उनके महल में उनकी पूरी देखभाल उनको संभालने के लिए जो कितने सारे हंसते वक्त हर एक को द्रौपदी नाम से जानती थी और उनका भी अपना ख्याल रखती थी उन्होंने कहा कि सफेद सुधि ले जेरी कितना आया कितना कितनी एक सर्वे हुआ इसकी समझ में द्रौपदी को थी जब राजा जो पांडव थे वह कभी कोई और राधे जाने वाले उनके साथ बहुत सारे रात घोड़े वगैरे-वगैरे जाएंगे इनका पूरा हिसाब-किताब ही रखी थी उनको सब पूरा मैनेजमेंट ऊपर निर्भर और दो में कारण यह है कि मैं कि आप आप पांडव पुत्र मानते कहते हैं आपके पास आतंकवाद मंत्र है वशीकरण मंत्र नहीं करता हूं और करें और आगे बढ़कर पूरे राजमहल के सारे काम को और पैरों को अपने कर्तव्य से बात करती तो यह करें तो क्या यह अरे निगेटिव व अबला नारी ऐसा कुछ नहीं लगता है कि कितनी भी उन्हें अपने आप पर सर्वे में ऐसी क्यों से वह सब अपने आप को समझती थी अपने शक्ति को भी तरीके से रहती है कि अ जी हां बहुत सारी चीजें आज इस समाज में हमारी कमर हुई है बहुत सारे सवाल हो सकता है अभी बचे हुए वह मैं चाहूंगा कि जिनके भी सवाल अभी भी बचे हुए हैं वह मैं कमेंट करके जरूर बताइएगा हम गणात्रा जी के साथ में फिर से एक बार और संवाद करेंगे और जो आपके सवाल होंगे उनको जरूर लेंगे हम जो हमने आपको काफी बार संवाद करते हुए देखा और बहुत बड़े-बड़े आप लोगों के समाज चलते हैं और काफी सारे प्रश्नों के आपने वहां पर भी उत्तर दिए हुए हैं और आपकी बुक भी आई है और मैं चाहूंगा कि जो भी इस बुक को करना चाहते हैं मैंने डिस्क्रिप्शन बॉक्स और पिंग कमेंट में इसका लिंक का यह वहां से जाकर कि आप इस बुक कर सकते हैं संभोग पढ़ सकते हैं बाकी आपके सवाल आमंत्रित रहेंगे और जिन सवालों के जवाब अभी तक नहीं मिले हैं हम उनको अमित जी से आगे पूछने

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