Monday, 26 January 2026

Malala के हलाला पर हुए Signature तो दुनिया ने मारा ठहाका Satya Sanatan Malala Marriage Bond

है वैसे-वैसे अली अ कि अली अब्दुल तेज कौन सा थोड़ा पाकिस्तान पाकिस्तान है कि यह कहां है इंडिया के बारे में है बिल्कुल सही कहा कि पंजाबी जत्ती है आज हम आपको एक ऐसी शादी में लेकर चलेंगे जिसकी चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है और वह है मलाला की शादी आप 24 वर्ष की मलाला यूसुफजई के निकाह की यह तस्वीरें देखिए ब्रिटेन के बर्मिंघम में रहने वाली मलाला ने 24 वर्ष की उम्र में पाकिस्तान के वसीम मलिक से निकाह कर लिया है असीर पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड में मैनेजर है और यह नेफा इस्लामिक रीति-रिवाज के साथ हुआ इस दौरान निकाहनामा भी पढ़ा गया और निकाहनामे पर मलाला और उनके पति ने दस्तखत भी किए जबकि आज से कुछ महीने पहले ही मलाला ने एक अंतरराष्ट्रीय फैशन मैगजीन में एक इंटरव्यू दिया था क्योंकि उनके इंटरव्यू तो छपते रहते हैं कवर पेज पर उनकी तस्वीरें छपती हैं इस इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि वह यह नहीं मानती कि शादी के लिए दो लोगों का किसी कागज पर साइन हुआ था जरूरी है मलाला ने बड़े क्रांतिकारी विचार रखे थे और पूरी दुनिया की जो महिलाएं कि उनके विचारों को सुनकर बड़ी प्रभावित हुई थी महिला ने तब कहा था कि दो लोग बिना शादी के भी सारी उम्र साथ रह सकते हैं यानी कि उन्होंने शादी को गैरजरूरी बताया था तब पाकिस्तान में मलाला के इस बयान की बहुत आलोचना हुई थी लोगों ने यहां तक कह दिया था कि मलाला ने इस्लाम विरोधी बयान दिया है इस्लाम का अपमान किया है क्योंकि इस्लाम में एक महिला और पुरुष बिना निकाला किए एक साथ नहीं रह सकते इसलिए आज भी मलाला यूसुफजई पाकिस्तान में तो ट्रेंड कर रही है हालांकि आज ने पाकिस्तान से बधाइयां मिल रही हैं लेकिन दुनिया भर में बड़ी संख्या में लोग आज उन्हें तोल कर रहे हैं है लेकिन जब मलाला ने शादी को गैरजरूरी बताया था तब पश्चिम के मीडिया ने मलाला के इन क्रांतिकारी विचारों की बड़ी तारीफ की थी और कहा था कि अच्छा हुआ मलाला ब्रिटेन में आकर बस गई वरना पाकिस्तान में तो उन्हें बहुत कम उम्र में ही शादी करनी पड़ती लेकिन जिस ब्रिटेन में महिलाएं औसतन 35 वर्ष की उम्र में शादी करती हैं और जाए इस बात का कोई दबाव नहीं होता कि शादी धार्मिक रीति-रिवाज से ही होनी चाहिए होनी भी चाहिए या नहीं होनी चाहिए वह मलाला ने 24 साल की उम्र में शादी की है बल्कि यह नेफा इस्लामिक रीति रिवाजों के साथ हुआ जहां एक मौलवी ने मलाला और उनके पति से ने कहा कुबूल करवाया एक बात हम यहां पर स्पष्ट करना चाहते हैं क्योंकि आगे चलकर कोई हमें मिसकोट ना करें हम ना तो मलाला की शादी के विरोध में है ना ही हमें इस बात से कोई समस्या है कि उन्होंने शादी किस रीति-रिवाज से की है और ना ही हमें वापिस समस्या है कि उन्होंने 24 साल की उम्र में ही शादी क्यों कर ली और ना ही उनके निजी जीवन में कोई दखल देना चाहते हैं हम कि आज सिर्फ आपको यह बताना चाहते हैं कि मलाला जीवन भर जिस कट्टर इस्लाम से भागती रही जो इस्लाम उन्हें पढ़ाई-लिखाई की इजाजत नहीं देता था जिस कट्टर इस्लाम के वजह से तालिबान उसके सिर में गोली मार दी थी उनकी हत्या करने की कोशिश की थी और जिस कट्टर इस्लाम के विरोध में वह यह कहती रही कि महिला और पुरूष बिना शादी किए भी सारा जीवन साथ रह सकते हैं आखिरकार मलाला खुद उस पिंजरे को तोड़ने में नाकाम रही और आखिरकार उसी पिंजरे में जाकर कैद हो गई मूल रूप से पाकिस्तान के रहने वाली मलाला यूसुफजई को वर्ष 2012 में तालिबानी आतंकवादियों ने सिर में गोली मार दी थी तब मलाला सिर्फ 15 वर्ष की थी मलाला को गोली इसलिए मारी गई क्योंकि वह चाहती थी कि लड़कियों को भी स्कूल जाने का अधिकार दिया जाए पाकिस्तान में जिसके बाद उन्हें इजाजत इलाज के लिए ब्रिटेन ले जाया गया और जहां वह इलाज के बाद पूरी तरह से ठीक हो गई इसके बाद 17 साल की उम्र में ही यानि वर्ष-2014 में मलाला को शांति के नोबेल शुक्र से सम्मानित किया गया नोबेल शांति पुरस्कार से जो कि बहुत बड़ा सम्मान है दुनिया का शायद सबसे बड़ा सम्मान माना जाता है और दुनिया के बड़े-बड़े लोगों को यह सम्मान नहीं मिलता पूरा जीवन इंतजार करने के बाद भी पूरा जीवन लगातार काम करने के बाद भी लोगों को यह नोबेल पुरस्कार नहीं मिलता सपना देखते हैं लोग इस नोबल पुरस्कार का लेकिन मलाला को 17 साल की उम्र में ही यह पुरस्कार मिल गया था को सबसे कम उम्र में यह पुरस्कार हासिल करके मलाला ने इतिहास रच दिया था इसके बाद मलाला ने ब्रिटेन की मशहूर ऑक्सफर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की और वह सब कुछ हासिल किया जिसका सपना दुनिया का हर युवा या हर लड़की देखती है फिर उन्होंने यह कहकर कि शादी गैर जरूरी है उन लड़कियों का हौंसला बढ़ाया जिनके मां-बाप जबरदस्ती उनकी शादी करा देते हैं खास तौर पर पाकिस्तान जैसे देशों में जिस संयुक्त राष्ट्र में मलाला यूसुफजई को अपना विशेष दूत बनाया था उसी की एक रिपोर्ट कहती है कि पाकिस्तान में 21 पर सेंट लड़कियों की शादी आज भी 18 साल से पहले ही उनकी मर्जी के बिना ज़बरदस्ती करा दी जाती है जिस पाकिस्तान में मलाला ने लड़कियों की शिक्षा के लिए कथित लड़ाई लड़ी वह आज भी पचास परसेंट महिलाएं पढ़ नहीं सकती लिख नहीं सकती स्कूल नहीं जा सकती कॉलेज नहीं जा सकती लेकिन मलाला ने शायद ही इन स्थितियों को बदलने के लिए कुछ किया यह जरूर है कि वह बड़े बड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में हिस्सा लें अपनी पूरी दुनिया घूमने लगी टीवी पर आने लगी सोशल मीडिया पर उनके बारे में छपने लगा और दुनिया के बड़े-बड़े न्यूज़ चैनल्स में और मैगजींस उनकी तस्वीरें छपने लगी है और वो एक बहुत बड़ी सेलिब्रिटी बन गई है पूछिए पाकिस्तान की जो लड़कियां मलाला के इन बयानों से प्रभावित होकर अपने परिवार से जुड़ी होंगी जिन्होंने मलाला के इस बयान से प्रेरणा ली होगी और जिन्होंने अपने घरवालों से कहा होगा कि मलाला को देखो वह शादी कोर्स गैर शादी को गैर जरूरी मानती है जरूरी नहीं मानती आज वह लड़कियां शायद खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही हूं कि ऐसा जरूर हुआ होगा मलाला को उनके निकाह पर सबसे पहले बधाई देने वालों में स्वीडन की पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटर थन भक्ति बेटा को भी रातोंरात ऐसे ही लोकप्रियता मिल गई थी जब वर्ष 2019 में उन्होंने यू एंड क्लाइमेट चेंज समिट में एक भाषण दिया था और बेटा आज भी सिर्फ 18 वर्ष की हैं यानी मलाला और बेटा मैं दोनों में समानता यह है कि दोनों बहुत ही कम उम्र में बहुत बड़ी सेलिब्रिटी बन गई और पूरी दुनिया उन्हें पर्यावरण को बचाने वाले सबसे बड़े चेहरे के तौर पर आज भी देखती है रिटर्न्ड बैक वाला थी वह छोटी बच्ची है कि आज की तारीख में नोबेल पुरस्कार हासिल करने का सपना देखने वालों की लाइन में लगी हुई है और अगर अंतरराष्ट्रीय मीडिया और दुनिया के कथित लिबरल्स की अनुकंपा रही तो उन्हें भी एक न एक दिन नोबेल पुरस्कार जरूर मिल जाएगा जबकि ग्रेटा की असली रूचि पर्यावरण को बचाने में नहीं बल्कि अपना चेहरा चमकाने में वह भारत के मामलों में अक्सर दखल देती हैं में किसान आंदोलन को भड़काने के लिए टूल किट तैयार करती हैं वह किसान आंदोलन के पक्ष में ट्वीट करती हैं अपना समर्थन देती हैं और भारत सरकार का जबरदस्त विरोध करती है भारत की चुनी हुई लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई सरकार का विरोध करती है लेकिन गठन बा की एक भी उपलब्धि ऐसी नहीं है जो भारत की तुलसी गोंडा या आर रंगवा की उपलब्धियों का मुकाबला कर सके लेकिन फिर भी ग्रेटा और मलाला जैसे लोग पुरस्कार गैंग की सबसे लेटेस्ट पीढ़ी का हिस्सा बन जाते हैं यह कैसा अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार गैंग है जो दूसरे देशों की सुरक्षा और अखंडता को भी सिर्फ इसलिए ताक पर रख देता है क्योंकि उन्हें किसी भी कीमत पर अपना चेहरा चमकाना है और बड़े-बड़े पुरस्कार हासिल करने हैं जबकि 73 वर्ष और 105 वर्ष की उम्र में चेहरे पर झुर्रियां लिए साधारण से दिखने वाली भारत की एक साधारण महिला है जीवन भर अपना कर्तव्य निभाते हैं बिना इस बात की चिंता किए कि इन्हें उनके कामों के लिए कभी कोई सम्मान मिलेगा या नहीं है और पैसे की तो उन्होंने कभी कोई चिंता ही नहीं है हैं इसलिए आज हम आपसे ये कहना चाहते हैं कि आप आंख बंद करके अपने देश के इन दो महिलाओं पर विश्वास कर सकते हैं आज आपको यह जो बात करेंगी कभी भी उससे पलटेंगी नहीं कभी भी अपने विचारों को बदलेगी

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