Tuesday, 20 January 2026

#MANTHAN LGBTQAI हिन्दू महिला सशक्तिकरण और षडयंत्र Dr. Ach. Kalpana Satya Sanatan Ankur Arya

एलजीबीटी क्य हमारे यहां पर क्यों स्टैंड कर रहा है देखिए वही बात है कुछ लोगों ने कहा कि हम देश को तलवार से नष्ट कर देंगे दूसरों ने कहा हम कन्वर्जन कर लेंगे एक तीसरी शक्ति हमारे बीच में घूम रही है जो बहुत बड़ी ताकत लिए घूम रही है वो कह रही है कि ना तो हम तलवार से करेंगे ना हम तुम्हें कन्वर्ट करेंगे हम तुम्हें रहने ही नहीं देंगे तुम्हारी पीढ़ियां ही नहीं होंगी वेस्टर्न कंट्रीज है उनमें महिलाओं का कोई अधिकार था नहीं वहां तो चर्च से पूछ करके ही विवाह होता था विवाह नाम की चीज ही नहीं थी अगर आपको किसी से प्यार भी करना है तो भी पादरी महोदय बताएंगे अगर आपको कहीं से मतलब बच्चा भी पैदा करना है तो भी चर्चा आपको आया देगा कि आपको बच्चा पैदा करना चाहिए अगर आपने बिना पूछे कर लिया है तो व फिर कहां जाएगा वो अनाथालय में जाएगा जिसको कॉन्वेंट कहते हैं तो इस तरह से वहां पे व्यवस्था चल रही थी जब ये शुरू हुआ था ना फेमिनिज्म वाला बहुत सारी पढ़ी लिखी बहनें उसमें बह गई और आज वो बुढ़ापे में जी रही है बहुत दुखी जी रही और जब वो परिवार वाली महिला को देखती है तो जलती है ईर्ष्या करती है बो ये सुखी कैसे हैं हम तो अकेले रह गए जेंडर इक्वलिटी का मतलब यह नहीं है कि केवल लड़की का सम्मान होना चाहिए लड़के का सम्मान होना चाहिए जेंडर इक्वलिटी अब इस स्तर पर आ गई है अगर एक लड़के को ऐसा फीलिंग आ रही है कि अगर मैं लड़की बन जाऊं तो तो उसका भी टीचर को ध्यान रखना होगा कि आप अच्छा आपको फीलिंग आ रही है ओहो तो इसका कोई अपमान ना करें साथ ही साथ मैं आप सभी से अपील करना चाहूंगा कि विश्वानी सेवा फाउंडेशन को आप सभी डोनेट अवश्य करें क्योंकि हमारी यह फाउंडेशन आप लोगों से बूंद-बूंद भर के जो हमारी गगरी भरती है वह हम किसी ना किसी गुरुकुल या फिर गौशाला या गाय के लिए कार्य करने वाले लोगों को प्रदान करते हैं अपनी तरफ से आपका निमि बनकर सप्रेम भेंट करते हैं तो आपकी जो भी इच्छा हो हमें वह भेज सकते हैं महिला सशक्ति ण क्या है और उसकी आवश्यकता ही क्यों पड़ी जैसे कि इसका नाम है महिला सशक्तिकरण शक्ति के साथ महिला का अवतरण होना तो शक्ति कई प्रकार की है महिला अनेक रूपों में दिखाई देती है वह एक बालिका है तो कैसी होनी चाहिए उसके पास शक्तिया क्या होनी चाहिए व युवती है तो उसके पास क्या शक्तिया होनी चाहिए और वो जब गृहस्थ में जा रही है के रूप में है तो उसके पास क्या शक्तिया हो और एक मां के रूप में क्या शक्तियां हो राष्ट्र संचालन कर रही है तो क्या शक्तिया हो समाज को देखते तो क्या शक्तिया हो यह महिला सशक्तिकरण है यह तथाकथित फेमिनिज म का रूपांतरण नहीं है यह हमारा भारतीय सशक्तिकरण है अभी बात की संस्कारों की जो हमारी माताए होती है हमारी निर्माता होती है तो इससे रिलेटेड प्रश्न है य है की बहुत सारे हम देखते संस्कार देने सारी चीज दे तो क्या वास्तव में आज जो हमारा देश पात संस्कृति को अपना रहा है तो उसको देख करके क्या लगता है कि हमें किस प्रकार से लोगों को संस्कार देने चाहिए या क्या चीज बदलाव की है सबसे पहला तो संस्कार जो देने का का है वो मां का कार्य है लेकिन कहीं पर भी यह नहीं लिखा गया है कि केवल मां का कार्य इसमें अंतर है एक तो मां का कार्य है और दूसरा का केवल मां का कार्य है नहीं पूरा परिवार पूरा समाज जितने भी बंधु जुड़े हुए हैं सब रिश्तेदार संस्कार सबसे मिलकर बनते हैं कोई भी बच्चे का निर्माण सबसे मिलकर के होता है और आज जो इक्वल इक्वल की बात हो रही है यह शब्द ही बाहर का है यह भारत का है ही नहीं है भारत में संतुलन की बात है संतुलन कैसे होगा बोले जब आपका लक्ष्य होगा अब लक्ष्य क्या है लक्ष्य के हिसाब से संतुलन होगा ना जी कार्य का बंटवारा तो लक्ष्य के हिसाब से होगा हम केवल कार्य का बटवारा कर रहे कोई लक्ष्य ना हो तो भी हर किसी को अपना कार्य बोझ लगेगा तो सबसे पहला तो लक्ष्य निर्धारित होता है क्या निर्धारित होता है भाई सबसे पहले जब गृहस्थ में जा रहे होते हैं उन्हीं कोई कहा जाता है कि भा मम तेते हृदयम धाम मम चित्तम अनुचित अस्तु दोनों तरह से कहा जाता है पति भी यही कह रहा होता है और पत्नी भी यही कह रही होती है कि आज से जो मेरे संकल्प है जो मेरा लक्ष्य है ना वो आज से आपका है और पत्नी भी यही कह रही होती है जो मेरा लक्ष्य है ना आज से वो आपका है मतलब दोनों का लक्ष्य एक हो गया है अब अब जब दोनों का लक्ष्य एक हो गया है तो परिवार का लक्ष्य एक आराम से हो जाएगा जी अलग से परिवार तो जाएगा नहीं तो जो ये कहा जाता है कि महिला बराबरी बराबरी नहीं है कोई भी बराबर नहीं होता है हर किसी के पास अपना अपना सामर्थ्य है बस हर कोई समाज को चलाने का जिसका लक्ष्य है समाज चलाने के लिए वो अपना 100% सामर्थ्य लगाता है 100% सामर्थ्य राष्ट्र को ल चलाने में लगाया जाता है और 100% सामर्थ्य परिवार को चलाने में लगाया जाता है 100% सामर्थ्य हर किसी का अपने बच्चे के निर्माण में लगाया जाता है अगर हम यह कहे कि एक का दायित्व है एक का नहीं है या दोनों का बराबर है बराबर कभी हो ही नहीं सकता कभी नहीं हो सकता इसीलिए हमेशा हमारे यहां ऋषि मुनियों ने कहा कि अगर कन्या है ना उन्होंने कहा बोले कन्या निरुक्त का कहते कन्या क्या हो बोले कन्या कनीन केवर रक्षण या कन्या की इस आंख की पुतली की तरह रक्षा करनी चाहिए क्यों कहा वोह लोग पागल तो थे नहीं बुद्धि तो उनके पास भी थी उन्होंने बालक को तो नहीं कहा लेकिन कन्या की व्युत्पत्ति करते हुए जब यासक महर्षि इतने ऊंचे विद्वान कह रहे हैं ऋषि कह रहे हैं कि कन्या की इस आंख की पुतली की तरह रक्षा करनी चाहिए तो कोई बात होगी एक बहुत अच्छी बात आती है जब हम व्याकरण भी पढ़ते हैं उसमें ये आता है कि आप ऋषियों की बात कही हुई को उहापोह करिए सब कुछ करिए लेकिन बाद में आपको समझ में आएगा कि कहीं ना कहीं अच्छा कह रहे थे वो ठीक कह रहे थे क्योंकि उनके कुछ अनुभव रहे होंगे उन्होंने कुछ रिसर्च किया होगा दूसरा यह है कि आज जो है संस्कार देने की बात है तो सबका ही उत्तरदायित्व है कोई भी एक नहीं कर सकता सबके बराबर है सबको लेना पड़ेगा अपना अपना उत्तरदायित्व लेना होगा और जब लेते हैं सब अपना समझते हैं ये काम मेरा है तो बस मेरा है तो मेरा है चल पड़ता है वो चाहे एक सामान्य गृहस्थ चलाना हो या फिर समाज चलाना या राष्ट्र या पूरा संसार चलाना हो मुझे करना है तो करना है तो उसमें ना किसी से शिकायत ना किसी से शिकवा कुछ नहीं होता और ये जो हम बार-बार ये कहते हैं ना कि महिला का उत्थान होना चाहिए महिला का उत्थान होना चाहिए हमें लगता है कि भारतीय परिप्रेक्ष्य में उत्थान शब्द ना कह कर के हमें यह कहना चाहिए उसको उत्तरदायित्व बोध कराना चाहिए और केवल महिला नहीं सबके लिए उत्तरदायित्व का बोध होना चाहिए हर कोई पदे पदे कभी हम बच्चे होते हैं हम स्टूडेंट होते हैं तो स्टूडेंट का क्या दायित्व है क्या करना चाहिए जब हम और बड़े हो जाते हैं तो हमारा क्या दायित्व है उसका बोध होना चाहिए और उसका बोध महर्षी दयानंद ने जब कहा था कि आप वेदों की ओर लौट तो वेदों की ओर लौटने का मतलब यही था कि जब वेदों में सारी शिक्षाएं दी गई है तो वेदों से ही आप प्राण लेंगे ना जीवन वही से लेंगे तो वहां पर कितने सुंदर सुंदर मंत्र है कितने सुंदर मंत्र हैं जो केवल बच्चे के लिए नहीं है जो केवल बालक के लिए नहीं है बालिका के लिए भी पूरे वही मंत्र है कि आप विदुषी बनाइए अपनी बच्ची को बच्ची अगर विदुषी है तो वो आचार्या के गुरुकुल में पढ़े गी बहुत सुंदर शब्द है अगर हम यह कहना चाहते हैं कि आचार्य की पत्नी तो उसके लिए शब्द आएगा बोले उसके लिए जो प्रत्यय आप करेंगे वो है आचार यानी आचार्य की अगर पत्नी है तो आचार यानी कही जाएगी अगर स्वतंत्र आचार्य है अगर वो स्वतंत्र अपना गुरुकुल चलाती है छात्राओं को उपदेश कर रही है तो उसको हम आचार्या कहते हैं तो इस तरह से हर शब्द डिवाइड है मतलब हर शब्द ही अपने पीछे कहानी लिए कन्या क्या है कनु दीप्त धातु से बनता है जो दीप्तिमान है कांति मान है जिसकी बहुत सुंदर कांति है उसके गुणों की चर्चा है उसके स्वरूप की चर्चा है वो कन्या है अभी प्रशस्ता शब्द आता है तो वो आता है संस स्तुत अर्थात जिसकी स्तुति की जा सके जिसकी प्रशंसा की जा सके जिसको कुछ कहा जा सके और मन्य ते ति माता जिसका मान किया जा सके वो माता है पत्नी क्या है जो पालन करने वाली है और जिसका पालन जो पालन करने योग्य है और जो पालन कर सकती है वो दोनों तरह से पत्नी है तो बहुत सारे शब्द बहुत मंत्र है जो कि बराबर नहीं है अब ये इस बात समझ लीजिए हम बराबरी की बात बिल्कुल नहीं कह रहे हम तो 100% की बात कह रहे हैं अगर कहीं महिला कार्य कर रही है तो वो 100% है कहीं पुरुष कार्य कर रहा है तो वो 100 पर है बराबरी में तो हम उसको कम कर देंगे 50 पर हमने निकाल दिया उसके जीवन से एलजीबीटी क्यू इस्लाम में प्रतिबंधित है पर हमसा जैसे संगठन को एलजीबीटी क्य का सबसे ज्यादा सपोर्ट मिल रहा है तो इस पर आप क्या कहना चाहेंगी हम आपने जिसकी बात की है मैं उसके विषय में कोई चर्चा नहीं करूंगी क्योंकि उनके यहां प्रतिबंधित हलाल भी है उनके यहां प्रतिबंधित तलाक भी है उनके यहां प्रतिबंधित दूसरी महिला को देखना भी है जी ठीक है तो जितना उनके यहां प्रतिबंधित है ना उसकी सत्यता हम सबको पता है कि उनके यहां क्या प्रतिबंधित है तो उसमें नहीं जाएंगे कि वहां पर क्या है लेकिन एलजीबीटी क्यू हमारे यहां पर क्यों स्टैंड कर रहा है देखिए वही बात है कुछ लोगों ने कहा कि हम देश को तलवार से नष्ट कर देंगे दूसरों ने कहा हम कन्वर्जन कर लेंगे एक तीसरी शक्ति हमारे बीच में घूम रही है जो बहुत बड़ी ताकत लिए घूम रही है वो कह रही है कि ना तो हम तलवार से करेंगे ना हम तुम्हें कन्वर्ट करेंगे हम तुम्हें रहने ही नहीं देंगे तुम्हारी पीढ़ियां ही नहीं होंगी एक ने कहा तलवार से काट देंगे राज हम करेंगे दूसरे ने कहा कन्वर्ट कर देंगे तो तुम्हारे राज्य तुम्हारा देश हमारा हो जाएगा सारी संपत्ति हमारी हो जाएगी तीसरे ने कहा जब तुम्हारी पीढ़ियां नहीं रहेंगे तुम बुढ़ापे में किसकी तरफ देखोगे तुम चिल्लाओ ग एंबुलेंस एंबुलेंस तो कहां फोन करोगे बोले हमारी व्यवस्था में फोन करोगे क्योंकि तुम्हारे बच्चे नहीं होंगे जब अगली संतति नहीं होगी तो किसको चिल्लाओ ग बोले हॉस्पिटल करप्ट हो गया है और क्या व पुलिस प्रशासन सब समाप्त हो गया है जब हमने व्यवस्था करने वाले बच्चे ही हमारे पास नहीं है तो फिर व्यवस्था जो लोग देख रहे हैं फिर उस व्यवस्था को बिगाड़ने का जिम्मेदारी भी तो उन्हीं की है ना वो पहले बिगाड़ फिर प्रशासन अपने हाथ में लेंगे तब वो यहां राज करेंगे तब वो उनकी सारी संपदा को अपने पास रखेंगे राज करना मतलब केवल डंडा चलाना नहीं होता राज करने का मतलब सारी अर्थव्यवस्था उसके हाथ में आ जाना होता है सारी लड़ाई अर्थ को लेकर के है सारी लड़ाई भू संपदा को लेकर के है तो वो संपत्ति चाहते हैं अब उसमें हो ये रहा है कि जो वेस्टर्न कंट्रीज है उनमें महिलाओं का कोई अधिकार था नहीं वहां तो चर्च से पूछ कर के ही विवाह होता था विवाह नाम की चीज ही नहीं थी अगर आपको किसी से प्यार भी करना तो भी पादरी महोदय बताएंगे अगर आपको कहीं से मतलब बच्चा भी पैदा करना है तो भी चर्च आपको िया देगा कि आपको बच्चा पैदा करना चाहिए अगर आपने बिना पूछे कर लिया है तो व फिर कहां जाएगा वो अनाथालय में जाएगा जिसको कॉन्वेंट कहते हैं तो इस तरह से वहां पे व्यवस्था चल रही थी वहां महिलाएं घुट रही थी वहां महिलाएं अपने अंदर ये कह रही थी बोले बताओ हर चीज तो हमें पूछनी पड़ती है हर चीज बताओ हम स्वतंत्रता से नहीं जी सकते हमारा राज्य में कोई कंट्रीब्यूशन नहीं है हम वोट नहीं दे सकते जितने भी वेस्टर्न कंट्रीज हैं उनमें वोट महिलाओं को देने का अधिकार 1920 30 40 45 50 के बाद हो रहा है अब सोचिए जहां हमारे देश में रानी दुर्गावती रानी चेनम्मा रानी लक्ष्मीबाई इतनी सारी रानी करुणावती रानी दुर्गावती रानी दुर्गाबाई रानी द्रोपदी बाई इतनी सारी रानियां रही हो वहां पर वोट डालने का भी अधिकार नहीं था और सब अधिकारों की तो बात दूर छोड़ दो फिर हुआ ये कि उन्होंने आवाज उठाई कि भाई हमें कुछ तो दो तो महिलाओं ने वोट डालने का अधिकार मांगा फिर महिलाएं वोट डालने से और आगे बढ़ी अब आजादी की बात चल पड़ी थी तो आजादी शब्द ऐसा गूंजा कि उनको फिर उनको लगा अरे हमें ना थोड़ा सा जो शारीरिक सुख होता है ना उसमें केवल पुरुष ही संतुष्ट हो रहा है हम नहीं संतुष्ट हो रहे हैं तो भाई वो भी संतुष्टि चाहिए उनको तो उन्होंने कहा कि ठीक है एक पुरुष जो है हम एक ही पुरुष के साथ क्यों रहे कि जो शादी वाला बंधन है वो तो हम नहीं जिएंगे क्योंकि उसमें तो महिला को ज्यादा बच्चा भी पैदा करना पड़ रहा है तो उत्तरदायित्व उसी के ऊपर आ जा रहा है बोला हम नहीं करते विवाह हम शादी नहीं करेंगे तो शादी नहीं करोगे तो कहां रहोगे बोला हम तो जैसे मतलब एक महिला जो है एक पुरुष से बंधी हुई नहीं है पूरी जिंदगी भर उसी की दासी बनी रहेगी बताओ तो उसी के सुख के लिए काम करती रहेगी बोले नहीं महिला भी अब एक पुरुष को छोड़ कर के कई पुरुषों से भोग करेगी तो वहां पर बोले कि शारीरिक सुख मुख्य है अब शारीरिक सुख मुख्य है तो शारीरिक सुख के लिए तो एक एक की आवश्यकता नहीं है ना वो कई को अपना चलता है एक को छोड़ा दूसरे को पकड़ा दूसरे को पकड़ा तीसरे को पकड़ा तो वो फिर वहां से शुरू हुआ फिर उन्होंने कहा अरे ये पुरुष से भी अगर हम शारीरिक सुख ले रहे हैं तो उन्होंने एक नया ईजाद किया बोले शारीरिक सुख तो महिला के साथ भी हो सकता है बोले शारीरिक सुख ही पहुंचना है ना तो उसके लिए पुरुष की आवश्यकता नहीं है उसके लिए तो आप जो समलिंग वाला है उसके साथ भी आप रह सकते हो क्योंकि उनका कोई उद्देश्य नहीं है जीवन का कोई उद्देश्य नहीं हमारे यहां तो कहा बोले धर्म अर्थ काम और मोक्ष तो व हम लोग चार सीढ़िया चलकर जाते हैं और कहां पहुंचना हमारा परम लक्ष्य मोक्ष का हमारे यहां काम मतलब इच्छाएं इच्छाएं कितनी हो बोले जो मोक्ष में साधक हो बाधक ना हो उसके लिए सबसे पहले धर्म करना पड़ेगा अब जब सबका चरम लक्ष्य परम लक्ष्य केवल कामनाओं की ही पूर्ति करना है तो उसके लिए धर्म की बात आती ही नहीं है उसके लिए सबसे पहले अर्थ चाहिए उसके पहले सबसे पहले अर्थ बो खाओ पियो मजे करो मस् से रहो तो वहां से शुरू हुआ समलैंगिकता का प्रकरण अब क्या है कि जो बिगाड़ आता है ना एक नक कटा संप्रदाय चला था बोले गुरु जी ऐसा ज्ञान देते हैं उसमें नाक कटवाने पड़ती है अब एक ने कटवा ली उसको पता चला कि भाई अगर तेरी कट गई है तो फिर बोले सबकी कटनी चाहिए उसने बता गुरु जी बहुत बढ़िया ज्ञान देते हैं जाओ एक बार दूसरे की भी कट गई दो की वो बन गई अब तो दो हो गए दो ज्ञान फैला रहे बोले भाई नाक कटवा लो ज्ञान ही ज्ञान है इससे ऊपर कोई बात नहीं है पता चला हजारों आदमियों ने अपनी नाक कटवा ली तो वो बात है कि मैं तो अब इसमें आ चुका हूं अब उनकी सारी ऊर्जा लगी कि भाई यह तो समलैंगिकता जो है ना ये वो सब जगह होनी चाहिए उसमें सबसे ज्यादा बाधक है भारत का परिवार सिस्टम समलैंगिकता के लिए भारत का परिवार सिस्टम सबसे ज्यादा बाधक है उसके लिए फिर वो लिविन ले आए कि भाई परिवार खत्म करना है और लड़कियों को आजादी किस तरह की चाहिए केवल शारीरिक सुख की आजादी चाहिए केवल शरिक सुख क्योंकि उनके यहां पर दूसरा कोई लक्ष्य नहीं है तो केवल शारीरिक सुख जैसे भी हो सकता है वो वैसे चाहिए बहुत सारे बहुत सारे जब यह शुरू हुआ था ना फेमिनिज्म वाला बहुत सारी पढ़ी लिखी बहने उसमें बह गई और आज वो बुढ़ापे में जी रही है बहुत दुखी जी रही है और जब वो परिवार वाली महिला को देखती है तो जलती है ईर्ष्या करती है बो ये सुखी कैसे हैं हम तो अकेले रह गए तो वो अकेलापन बोले अकेले में हम सुखी हैं हम जैसा चाहे वैसा सुख भोगे पता चला अकेले ही पड़े हैं डिप्रेशन हो रहा है दुनिया भर की बीमारी हार्ट अटैक हो रहा है एक माता को पूछ के देख लो डिप्रेशन है क्या माता जी नाती पोतो के बीच में जब घूम रही है महिला तो पता पता चल रहा डिप्रेशन किसी ने सुसू कर दी किसी ने पोटी कर दी उसी से ही फुर्सत नहीं है ठीक है उसने संभाला उसकी कच्छी बदली उसकी नेकर बदला उसका कपड़े बदले उसने गीले कर दिए उसने खाना खाया नहीं खाया खाया तो सारा कर लिया खराब फुर्सत ही नहीं है टाइम ही नहीं है डिप्रेशन लाने के लिए तो वो क्या किया उन्होंने 100 बीमार शारीरिक ले आए दवाइयां लेकर के आए और दूसरा अब जो सबसे बड़ी समस्या यह आ गई है उसमें जो कि आप अपना जेंडर चेंज करिए एक महिला अपने आप को महिला वाले कॉस्ट्यूम में फिट नहीं मान रही है कि मेरा तो दिमाग लड़का बनने का कर रहा है तो वो लड़का बन जाए उसके लिए दवाई आ गई एक लड़का है उसका दिमाग कह रहा बोले मेरे को तो फीलिंग नहीं आ रही है आपको बताऊं बड़ी-बड़ी यूनिवर्सिटी में कोर्स है सिलेबस नहीं आप आपके जो अकडम सिस्टम है ना उसके अंदर आपको टीचर्स ट्रेनिंग में बताया जा रहा है कि आप जेंडर इक्वलिटी का मतलब यह नहीं है कि केवल लड़की का सम्मान होना चाहिए लड़के का सम्मान होना चाहिए जेंडर इक्वलिटी अब इस स्तर पर आ गई है अगर एक लड़के को ऐसा फीलिंग आ रही है कि अगर मैं लड़की बन जाऊ तो तो उसका भी टीचर को ध्यान रखना होगा कि आप अच्छा आपको फीलिंग आ रही है ओहो तो इसका कोई अपमान ना करें उसकी भावना आहत ना हो और सब बच्चों को टीचर समझाएगा कि देखो इसको अलग फीलिंग आ रही है इसके लिए अलग टॉयलेट बनाए जा रहे हैं तो अब जेंडर इक्वलिटी और ये सब कुछ बहुत आगे जा चुका है एक बच्चा कह रहा है कि मेरे को फीलिंग आ रही है अभी एक घंटे की एक घंटे की फीलिंग आ रही है मैं शी में होना चाहता हूं और वो शी हो गया है अब उसको फीलिंग आ रही है बोले नहीं अब तो मैं ही होना चाहता हूं तो वो ही हो जा रहा है तो उसमें घंटे घंटे में परिवर्तन हो रहा है तो यह जो समस्याएं हैं ये केवल इसीलिए कि लक्ष्य खत्म हो चुका है केवल काम वासना है और वासनाओं की पूर्ति कभी नहीं हो सकती ये तो था है भोगा न भुगता वयम एव भुगता तपो न तम वयम एव तता तृष्णा न रणा वयम वजना ये तृष्णा कभी खत्म नहीं होती काम वासना कभी खत्म नहीं होंगी हम ही खत्म हो जाएंगे तो इसीलिए हमारे यहां परिवार की व्यवस्था है उसे तोड़ने के लिए उसे तोड़ने के लिए महिला भी टारगेट होगी उससे तोड़ने के लिए ये हमारा भाई भी टारगेट हो रहा सोचो मैंने बच्चे पैदा किए हैं और मेरा बच्चा कल को कहने लग जाए मैंने बेटा पैदा किया वो कहे मैं तो लड़की बनू सोचो कि मैं तो इसकी दवाई खाऊंगा कि मुझे तो फीलिंग अलग-अलग सी आ रही है मतलब इतना बिल्कुल एकदम ध्यान देना है सब सबको बताया जा रहा है ऊपर लेयर में जो काम कर रहे हैं ना लोग उनको सबको समझाया जा रहा है ट्रेनिंग प्रोग्राम चल रहे हैं उनके कि अपने बच्चों को जिसको पढ़ा रहे हो ना उनकी फीलिंग समझो कि बैठा बैठा कहीं लड़की वाली फीलिंग में तो नहीं आ गया है तो इस तरह का मतलब विनाश लीला बचाने के लिए ये सब कुछ लाया जा रहा है अब जो वो नकटे संप्रदाय वाला हाल हो रहा है तो वो भारत में भी लाया जा रहा है अब भारत चूंकि पारिवारिक रूप से अभी तक भी मजबूत खड़ा हुआ है इसलिए बहुत ज्यादा असर नहीं हो रहा पर चूंकि जो जो कि नियम बनाने वाले लोग है कानून बनाने वाले लोग हैं वो वहीं से पढ़ कर के आते हैं उन्हीं के ग्रंथ पढ़ कर के आते हैं उन्हीं की सेवा कर रहे हैं वहां पर खूब उनको ले जाया जाता है वहां से उनके हित बंधे हुए हैं तो यहां पर किसका अच्छा बताइए आप शराब बंदी के लिए सबने कानून बनाने की घोषणा की है ना करते हैं ना जी आज शराब बंदी दिल्ली में बंद होना चाहिए हम सब कूद पड़ेंगे ठीक है हजारों लाखों आदमियों ने खूब प्रदर्शन कर लिया शराब बंद हुई क्या नहीं बंद हुई अच्छा एक बात बताओ कौन ऐसा आपके घर का लड़का था कितने लड़के गए बोले मुझे अलग फीलिंग आ रही थी मेरे लिए कानून बनाओ कितने लड़ गए भाई कहीं देखा ऐसा प्रोटेस्ट नहीं देखा व गिने चुने दो चार लोग हैं जो यूनिवर्सिटी में घागरा पहन कर के घूमते हैं दो चार लोग है वही कैमरा लिए घूमेंगे उनके लिए कानून बनाया जा रहा है अब पति पत्नी एक साथ नहीं रह सकते कैसा कानून बनाया जा रहा है कि पत्नी के अगर बाहर संबंध है बच्चा होने के बाद भी बच्चा होने के बाद भी अगर पत्नी बाहर संबंध रखती है तो लीगल कर दो अगर अगर बे वो जो पति है ना अगर सब कुछ परिवार बसा बसाया है तो वो क्या हो रहा है कि अगर वो भी बाहर संबंध रखता है महिला के साथ में तो उसको भी क्या कर दो लीगल कर दो अब एक बात बताओ बच्चे कौन देखेगा भाई वे दोनों तो बाहर किसी और के साथ अटैच हो गए हैं बच्चे कौन देखेगा बोले बच्चे लावारिस होंगे तभी तो हमारी दुकान चलेगी तुम्हारे बच्चे लावारिस करने यही तो हमारा उद्देश्य है तो उसके लिए कानून बनाए जा रहे हैं अच्छा महिला के अधिकार के लिए कानून बन रहे हैं कैसे कैसे अधिकार बन रहे हैं कानून बन रहे हैं एक सामान्य सी बात बताती हूं आधे से ज्यादा परिवार इसलिए समाप्त हो रहा है भारतीय हिंदू परिवार के विवाह होने के बाद भी उनकी बेटी का अधिकार उसके घर की संपत्ति में है और ये क्या दिया बोले महिला सशक्तीकरण के नाम पर दे दिया कानून बना के बड़ा अच्छा लगा भाई बेटी का अधिकार भी बराबर का अधिकार है ठीक है जब तक उसका विवाह नहीं होता वो ठीक से बस नहीं जाती तब तक अधिकार हो बहुत अच्छी बात है लेकिन कानून यहां तक है कि अगर नाना नानी मर गए हैं नाना नानी गुजर गए हैं और यहां भी मामा मामी के बेटे हैं और उधर वो देवती देवता है उनके भी मां-बाप मर गए हैं अगर वो भी अपने मामा की संपत्ति में अधिकार मानना चाहे तो उनको भी अधिकार दो यहां तक कानून बना रखे आप सोचिए कि भारतीय परिवार व्यवस्था बचेगी या खत्म होगी संबंध खत्म हो जाएंगे जो प्यारा संबंध है वो खत्म हो जाएगा तो यह सब बहुत बड़ा दुश्चक्र है और इसके लिए हमें एक मैं नाम सजेस्ट करूंगी आप लोग हमेशा पढ़िए ऐसे कु चक्रों को ध्यान करने के लिए एक कैट मिलेट है उसकी बहन हुई मैरी मिलेट ठीक है उन्होंने अमेरिका में यही फेमिनिज्म वाली क्रांति फैलाई और कैसे फैलाई बोले इन्हो पुरुषों को सबको खत्म कर दो एक महिला तो बोली बोली जैसे ही मैं एक बेटा पैदा करती हूं मैं चाहती हूं कि मैं उसको मार दूं इतना बड़ा ठीक है कि बेटा पैदा ही ना हो अरे मगर बेटा पैदा ना हो तो वो गर्भ में कैसे आ रहा है तो जब वो इतना सब कुछ करने के लिए तैयार है तो हमें समझना पड़ेगा अपने परिवारों को बहुत समझदारी से रखना होगा नहीं तो यह लोग यह कहने के लिए तैयार हैं भारत में तो कोई व्यवस्था ही नहीं थी बोले भारत की महिलाएं तो पढ़ती लिखती नहीं थी ये जब से अंबेड वो अंबेडकर जी नहीं ये जब से बौद्ध मत आया और जैन आया तब से थोड़ा-थोड़ा सा आने लगा था उसके बाद कुछ लोगों ने इनको भी दबाने का प्रयास किया यह तो बाद में हमारे अंबेडकर जी आए तो इनको इनके द्वारा अधिकार मिला है महिलाओं को पढ़ने का आजकल मैं बच्चों के साथ थोड़ा डिबेट करने लग जाती ह एक बच्ची कल आंखों में आंसू ले आई बोले मैम हमारा तो इतना गंदा सिस्टम था कि महिलाए पढ़ नहीं सकती थी अब यह सोचिए कि सिस्टम में घुला हुआ है जब आप बच्चे को सिलेबस ही यही पढ़ा रहे हो कि आपके भारत में तो कुछ था ही नहीं तो वो तो वहां से देख रहा है कि जहां कुछ था भाई वहीं से कॉपी कर लेते हैं तो हम भी समलैंगिक हो जाते हैं हम भी एक घंटे का ही और एक घंटे का शी हो जाते हैं तो इसमें बहुत बड़ी समस आई एक देश का भी मैं पढ़ रही थी उसमें एक ने अपने आप को कहा कि मैं शी हूं मैं तो महिला हो गया हूं उसके बाद उसको फीलिंग आई ही वाली अब वो पुरुष हो गया पुरुष होते ही बलात्कार कर बैठा अब बलात्कार का केस चला तब तक उसको फीलिंग आ गई शी वाली अब अब वो कोर्ट वहां परेशान है कि सजा दे किसको सजा दे किसको अब ये तो शी बन बैठा इसने बलात्कार किया था तो इस तरह की जो समस्याएं हैं यह बहुत बड़े स्तर की समस्याएं हमारे देश में ना बने इसलिए अपना परिवार संभाले अपने बच्चों को संस्कार दे धन्यवाद

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