पत्रकारिता भारत का एक सबसे खतरनाक व्यवसाय बन चुका है ऐसा खाने में आ कोई मैं पीछे नहीं हटूंगी और क्या होगा भारत के पत्रकारिता का भविष्य वो आने वाले दर्शन में वो हम जानेंगे आज के हमारे नेक्स्ट पैनलिस्ट की और से और साथ में और भी एक कई गहन मुद्दों पर बात करेंगे तो मीडिया और जर्नलिज्म के हमारे आए हुए मेहमानों को मैं मंच के ऊपर आमंत्रित करना चाहूंगी जिसमें सबसे पहले मैं बुलाना चाहूंगी अजीत भारती जी को जोरदार तालिया के साथ स्वागत करेंगे उनका श्री अजीत भारती जी जर्नलिस्ट और वंस अगेन इनका इंस्ट्रूमेंट दे डन वह कहते हैं जो कहूंगा सच कहूंगा और किसी ने बोला था आज ही कहूंगा तालिया के साथ स्वागत करें अजीत भारती जी का [प्रशंसा] [संगीत] अभी जो लेटेस्ट वह हुआ है हालांकि हम लोग कहते हैं की भारत में फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन और फ्रीडम ऑफ स्पीच को ऐसे राइट से जो बहुत ज्यादा सुपीरियर फोल्ड करते हैं हम लोग खासकर जब लेफ्ट की बात आए तो लड़ते हैं वो लोग बहुत लेकिन एट प्रेजेंट वे आर इन टाइम्स वन एक लिस्ट निकाल गई है कुछ जर्नलिस्ट की आ जिनको बॉयकॉट कर दिया गया है एक पुरी की पुरी लाइंस नाम आई एन दी आई ए जो अपने आप को कहते हैं तो आप सबसे जानना चाहूंगी की फ्रीडम ऑफ स्पीच और फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन के आज के पॉलीटिकल एनवायरनमेंट पे एक्जेक्टली एन क्या मेन हैं और आपका क्या कहना है उसके बड़े में गैर भाजपा वाला समूह है हिंदी एलाइंस या जो भी जिसको कहना है उसका पूरा का पूरा मतलब आप यह जी बात का विपक्ष पर लगाते हैं अपने विपक्ष पर भाजपा पे एक्जेक्टली वही सारे कम यह संस्थागत तरीके से अभी कर रहे हैं फासीवादी होने की बात करते हैं फासीवादी कौन है ममता नहीं है स्टालिन नहीं है या कर्नाटक में भी जो सरकारी मां नहीं है केजरीवाल ने इन सब के जगह पे देखिए जनरलिस्टों के ऊपर केवल मतलब प्रतिबंध या बॉयकॉट नहीं है रेंडम केसेस चलाएं जाते हैं उसके बाद आप देखिए ये फ्रीडम ऑफ स्पीच और एक्सप्रेशन की बात करते हैं कोई कार्टून बनाया उसको जय में डालेंगे इस तरह की बातें तो मूलत वही है की जितने मतलब प्वाइंटर्स थे मीडिया मैनेजमेंट को लेकर प्रोपेगेंडा के लिए यह लोग सारे वो प्वाइंटर्स फॉलो करते हैं और एकदम फॉलो कर रहे हैं और उसका आप लगाते हैं भाजपा पर तो यह वही हो गया की जब आप नंगे हो चुके हैं तो उसके बाद और उतारने के लिए बच्चा क्या तो अब नाच रहे हैं नंगा होकर और कुछ नहीं [प्रशंसा] लोगों के साथ नेक्स्ट क्वेश्चन से पहले एक पत्रकार की पहले निष्ठा जनता के प्रति हनी चाहिए और उसे स्वतंत्र रहना चाहिए किसी भी प्रकार के व्यक्तिगत दालों संगठनों के दबाव में नहीं आना चाहिए बल्कि सच्चाई को उजागर करना चाहिए सुबह नेक्स्ट क्वेश्चन तू जो ऑफ यू इस एन आर देवर लाइंस ड्रॉन वेरी क्लीयरली बिकॉज़ जर्नलिज्म इस ऑलवेज बिन नॉन तू बी एन प्रोफेशन वेयर आई यू हैव तू बी न्यूट्रल यू हैव तू तेल डी न्यूज़ तू पीपल अपनी पर्सनल ओपिनियन और बायोसिस को साइड में रख के जो सच है या जो दिखे रहा है वो लोग लोगों तक पहचान पहचाने का कम जो है हम पत्रकार्यता को आज तक कहते आए हैं बट आज के टाइम पे आज के पॉलीटिकल एनवायरनमेंट में क्या एक जर्नलिस्ट के लिए बहुत दिक्कत वाला हो गया है की आप न्यूट्रल रहे या सेंटर पोजीशन ले के अपनी पर्सनल बायोसिस को सामने लाना सही है गलत है या अगर कोई एक साइड कस करता है तो उसकी क्या पहलू या क्या रीजन रहते हैं किसी भी पत्रकार के लिए आप सबसे पूछना चाहोगे देखिए मैं जर्नलिज्म का छात्र भी रहा हूं प्रोफेसर भी रहा हूं और प्रैक्टिस भी कर रहा हूं तो मुझे ग रहा है की तीनों तरह से थ्योरी प्रैक्टिकल सब में और थोड़ा बहुत अनुभव है तो बता सकता हूं जान लीजिए अब न्यूट्रॅलिटी तभी तक रहती है जब तक नेचर मतलब मीडियम मीडिया का मीडियम क्या प्रयोग में ए रहा है अखबार जब छपता था लिमिटेड स्पेस होता था एडवरटाइजिंग से जर्नलिज्म का आरंभ होता है बंगाल गैजेट आता है 1885 ऐसे करके उसमें कपड़ों के व्यापार के छठे थे और वहां से पिक करता है उससे पहले जर्नलिज्म का मोस्ट क्रूड फॉर्म था वो ढोलक बजा करके लोगों को बताना अब क्या है की धीरे-धीरे सोसाइटी वाल्व करती टेक्नोलॉजी इवॉल्व करती है तो केवल न्यूज़ तो आदमी कहानी से भी पढ़ेगा ट्विटर पर न्यूज़ मिल जा रहा है अखबार में पढ़ ले रहा है टिकट चल रहे हैं टीवी के तो वहां पर आप एक व्यक्ति को अजीत भारती को या किसी को स्क्रीन पर यह नहीं की लोरी ने मेरी टक्कर तीन आदमी की मौत यह नहीं चलेगा और यह जो एक रवीश कुमार टाइप के लोगों ने जो आरंभ किया नई परिभाषा एस्टेब्लिशमेंट अच्छा कम कर रहा है तो आप अंतरप्लेसमेंट हो जाओगे मुझे याद मुझे सबसे घटिया तब लगा था मतलब रवीश कुमार का तो पूरा करियर ही वैसा ही रहा है लेकिन उसमें भी नीचता की पराकाष्ठा तब थी जब हमने अचीव क्या 100% इलेक्शन मोदी सरकार ने वो आदमी 40 मिनट के शो में तीन ऐसे गांव पूरे भारत में खोज के लता है की यहां भाई पाल पहुंच गया तार नहीं खींची वहां तार पहुंच गया पुल आप सोचिए मां लेते हैं ठीक है 100% नहीं हुआ 99.9997% ही हुआ तो क्या तुम्हें इस बात की प्रसन्नता नहीं हनी चाहिए थी की 70 वर्ष ग गए वहां तक हमें पहुंचने में और तुम यार 5 मिनट बोल देते की हालांकि क्लेम किया जा रहा है लेकिन कुछ ऐसे गांव हैं जहां पर नहीं पहुंचे और ऐसा भी नहीं था की वहां की अथॉरिटी ने माना कर दिया की नहीं तुम्हारे गांव नहीं लगेगा सड़क टूटी हुई है ढोल बजाकर बोलो सड़क टूटी हुई और कोई एक्सप्रेस वे बावा रहा है तो इस तरह से इस तन्मय तक साथ बताओ की हां भाई आते लेने और 16 लेने के एक्सप्रेस भेज भी बन रहे हैं अब जो आपने बोला न्यूट्रॅलिटी की बात आप हर बात पे न्यूट्रल नहीं र शक्ति हैं किसी का रेप हो गया उसे न्यूज़ में न्यूट्रॅलिटी नहीं होती है उसे न्यूज़ में हमेशा एक पक्ष होता है जो सही पक्ष होता है टेररिज्म है उसमें कोई न्यूट्रॅलिटी नहीं है उसमें आप यह एंगल के नए हेड मास्टर का बेटा था अब हेडमास्टर के बहुत बेटे हैं सभी के 47 ले घूम रहे हैं क्या तो न्यूट्रॅलिटी भी वही होता है ना की विवेक नील विवेक होता है और हर आदमी के पास होता है ऐसा नहीं है की यह कुछ लोगों को भगवान देता है और रवीश कुमार को देना भूल गया ऐसा नहीं हर व्यक्ति को विवेक देता है भगवान वह चूज करता है उसकी पसंद होती है की इस विकल्प का उपयोग करें की नहीं भगवान ने जैसे दिमाग दिया वैसे लोटा देना बिना उसे किया हुए तो वह कुछ लोग कर रहे हैं और वैचारिक रूप से टिल्ट लेना स्लेंट लेना वह आज के समय की आप पहले की वह प्रैक्टिकल बात है संदर्भ में आपको देखना पड़ेगा है की हमने ऑफ इंडिया क्यों शुरू किया इन्होंने अल्टरनेटिव मीडिया जो है उसने धनिया वो राखी थी पुरी अगर उन लोगों ने अपना आत्मा अपनी गिरवी नहीं राखी होती मानसी मीडिया में तो ना मुझे लिखने की आवश्यकता थी नहीं इन्हें बोलने की आवश्यकता थी ना सागर को मतलब माइक लेकर जा रहा है गांव-गांव में जहां-जहां पे कुछ कुछ हो रहा है उसकी कोई आवश्यकता नहीं हम लोग इंडिविजुअल लेवल पे और हम जानते हैं की हम जो बोल रहे हैं अभी जो मैं बोल रहा हूं उसको कोई रेंडम आदमी बोलेगा यह हिट्स पीछे है और वो मान्य भी हो जाएगा फिर भी हम इतना रिस्क लेकर क्यों बोल रहे हैं क्योंकि वैचारिक कॉन्टेक्स्ट जो है अभी के भारत का हमें यह देखना पड़ेगा की हम अपने बच्चों के लिए अपने समाज को बचाने के लिए हम क्या कर रहे थे क्या हम न्यूट्रॅलिटी का लवाड़ा उड़े हुए थे जब दूसरा पक्ष बिल्कुल ही साइलेंटेड हो चुका था तो जब स्थिति आदर्श नहीं है तो मुझे तुम आदर्श पत्रकारिता की उम्मीद क्यों कर रहे हो जब सामने वाला बाईक चुका है तो मैं उसके बिकाऊ होने के करण इसलिए मुझे एक वैचारिक टिल्ट लेना पद रहा है यह मेरी व्यवस्था मेरी चॉइस नहीं है जर्नलिज्म के साथ एक फीयरलेसनेस हमेशा से एक शब्द अटैक हुआ है की जर्नलिस्ट शुड बी फीयरलेस और अजीत आपसे पूछना चाहूंगी नूपुर के सेशन में भी मैंने देखा राजनीति पर बात कर रहे थे लेकिन काफी बातें हमारे लॉस और ज्यूडिशरी पर हुई और जी तरह की प्रॉब्लम्स हमारे समाज में हमारे जुडिशल ढांचे के लाचारी होने की वजह से हो रही है वो हमें इमेजिन भी नहीं कर सकते वेदर आईटी इस फैमिली वेदर आईटी इस रहल्चरल वालुज मतलब सब चीजों की बहुत बड़ी खिचड़ी बन गई है लेकिन जहां तक लीगल जर्नलिज्म का मेरे ख्याल से मटर आता है वहां पे सिर्फ आजकल जजमेंट को रिपोर्ट करना जर्नलिज्म हो गया है क्रिटिकल नहीं है कोई भी हमारी ज्यूडिशरी के लिए मेंस्ट्रीम मीडिया भी नहीं है कितनी भी जुझारू पत्रकार हो वो भी कभी जायज की जो जजमेंट है चाहे बिल्कुल भी खराब ना हो एक एग्जांपल लूपर शर्मा का लिया गया पिछले वाले सेशन में भी की उनको किस तरह से ब्लेम कर दिया गया ये इतना ज्यादा जर्नलिज्म जर्नलिज्म में ज्यूडिशरी को क्रिटिसाइज करने का डर क्यों है अजीत और आप इस डर से कैसे ओवर कम करते हैं मैंने पिछले सेशन में भी बोला था की स्टार्टिंग से ही हमने चाहे फिल्मों के मध्य से या अन्य त्रिकोण से भी देखा है की जज का नाम लेने से पहले भी माननीय माननीय यह सारे शब्दों का प्रयोग होता है और जब तक सोशल मीडिया नहीं था तब तक यह जो मतलब बकाया करते थे वह सामने नहीं आता था किसी के वो दिखता नहीं था हमें हैडलाइन पढ़ लेते थे और उसे पर मीडिया भी बहुत ही कंजरवेटिव हो के की फलाने जज ने यह यह कैसे था ऐसे ऐसे करके दूसरा एस्पेक्ट पता ही नहीं चला था की जो पीड़ित है उसका क्या है और कई बार अपोजिट डायरेक्शन में जजमेंट हो रही वामपंथी बड़े अच्छे शब्द का प्रयोग करते हैं यहां तो फैसला होता है निर्णय नहीं होता तो वह जब उनके हिसाब से नहीं होता है तब बट मोर और ली हमेशा इसी तरह से होता है की मतलब जिसकी भी रोजी रोटी या धंधा जो मलिक है या सीईओ है उसका अगर उसको अगर पता है की यार हम बोलेंगे तो कोई रेंडम की मेरे ऊपर पहले कंटेंप्ट का कैसे कहां से आया पता है एटर्नी जनरल वेन्यू गोपाल को एक फर्स्ट एयर की डॉ की छात्र ने पत्र लिखा लॉयर भी नहीं डॉ पढ़ने वाली छात्र ने सोचिए उसको क्या पता होगा यार कंटेंप्ट क्या होता है उसको लगा क्या रे ऐसे कैसे बोल देगा न्यायाधीश के ऊपर उसके आलोचना कैसे कर सकता है की हम कैसे करता है गरिमा गिरी इस तरह की शब्दावली तो आप सूची वहां से लिया और 92 साल का था वो बुद्ध एटर्नी जनरल वेन्यू गोपाल आप सोच 60 साल में कोई भी व्यक्ति रिटायर कर जाता है उसके 32 वर्ष बाद में पानी और पेशाब में मुझे लगता है फर्क नहीं कर पता होगा और ऐसे लोग जो है बोल रहे हैं की नहीं चलाओ कंटेंट चलाओ जी व्यक्ति को हिंदी समझ में नहीं आई है देखिए फर्स्ट लैंग्वेज हिंदी नहीं है वह हिंदी का कटाक्ष कैसे समझ जाएगा तो नहीं समझेगा और उसके बाद वह व्यक्ति इस बात का संज्ञान लेट है की नहीं मैंने ट्रांसलेट करवाया आप सोचिए सितार को ट्रांसलेट करवाया तो मैं भी मुझे भी लगता है की मुझे इंग्लिश में भी ट्रांसलेट करके अपना चलाना चाहिए कुछ कमाई तो उधर से भी हो जाएगी सताई डीएजेंस क और वैसे करके यह करते हैं तो जब एक आदमी पे इस तरह का आता है जब एक रेंडम जो इंडिविजुअल लेवल पर स्वतंत्र पत्रकारिता कर रहा है अजीत भारती उसके ऊपर आता है तो कोई मलिक तो डरेगा ही की यार मेरा एक दिन के लिए बोल दे की नहीं तुम्हें जो है खाली चलाना है स्क्रीन ब्लैक करके की हम माफी मांगते हैं सुप्रीम कोर्ट से और इस तरह के एपिसोड डिसीजन ही कांटेक्ट में आते हैं उसके मलिक को बुलाकर बिठा देगा लास्ट बेंच पर की पूरे दिन की प्रोसीडिंग्स देखो इस तरह अभी तक किसी के ऊपर एक्सरसाइज नहीं हुआ है उसका परिणाम फिर भी की क्या हो सकता है इस करण से मीडिया कभी रिस्क नहीं लेती जब ऑर्गेनाइजेशन रिस्क नहीं लगी तो रिपोर्टर भी रिस्क नहीं लगा वह ट्विटर पर खाली वारंट बेंच में क्या चल रहा है जस्टिस जोसेफ स्माइल आप सोचिए की आत्मा मा चुकी होगी उसे पत्रकार की जिसने खाली छोड़ दिया होगा उसके बाद कोई हम में से उठाता है की हो इन सेंसेटिव था गे कैन बी और तब जाकर हम उसे पर कंट्री करते हैं वीडियो बनाते हैं उसे समय भी माननीय जज ने यह कहा कथित तोर पे यह कहा इस तरह के शब्द हम डर-डर करके प्रयोग करते हैं तो मेरा जो था मतलब मुझे कल भी मेरा एक इंटरव्यू मैंने वो विवेक अग्निहोत्री का लिया था तो उन्होंने मुझे यह प्रश्न पूछा मेरा उसमें उत्तर यही है की फेयरनेस जब तक एक आदमी खड़ा नहीं होगा ना तब तक बाकी लोग खड़े नहीं होंगे अब देखिए जाकर के कैसी कैसी गलियां पड़ती है इन लोगों को चंद्रचूड़ के नाम किस तरह से डिस्टोर्ट होते हैं तो मुझे लगता है की उसका क्रेडिट तो मुझे ले लेना चाहिए और यह बहुत अच्छी बात है यह हेल्दी डेमोक्रेसी की निशानी है की चाहे मोदी हो या चंद्रचूड़ हो गली सबको बराबर मंत्र में पड़ती है कोई एक इंस्टीट्यूशन रिपोर्टिंग का चेहरा बादल जाएगा गुड जब आई थिंक वे बिल जो गिव डी क्रेडिट तू यू अजीत एक नया ट्रेड जो देखने को है जो की न्यूपुर शर्मा के कैसे में भी आई थिंक बहुत इंपॉर्टेंट जिसमें रोल प्ले किया था विद इस देवर आर स्पेसिफिक जर्नलिस्ट तू कॉल डेम सम जर्नलिस्ट टारगेटिंग अदर जर्नलिस्ट यू नो ट्रू सिचुएशंस लाइक दिस राइट और दें एक्चुअली दे डोंट मन एवं आईएफ आईटी कॉम तू एन सिचुएशन जहां पे किसी की जान को खतरा हो जाए व्हाट इस दिस ट्रेड और वही इस दिस हैपनिंग एन आईएफ यू कूद अलसो एड आज यू कैन एन राहुल लेट यू रिसीव और दिस इस टारगेटिंग ऑफ जर्नलिस्ट बाया डी जर्नलिस्ट बिकॉज़ के लिए वो वही अभी अनूपपुर बता रहे थे ना अपने स्टेटमेंट के पहले हिस में की जैसे न्यूट्रल शब्द का प्रयोग वो करते हैं जिनकी रेट की हड्डी नहीं होती है तो जिनको जो बोलना चाहिए था इस पूरे प्रकरण पर चाहे नूपुर शर्मा वाला हो या नो मेवात दिल्ली या जो भी इस तरह का होता है क्योंकि उसमें तो एक ही पक्ष है किसी शहर में पत्थरबाजी हुई है तो आप बताएं खेड़ा में तो अब उसे समय तो दूसरा पक्ष है ही नहीं ना उसमें वीडियो दिखे रहा है इतना बड़ा बड़ा पत्थर ए रहा है उसमें अब जो लेफ्ट वाले जर्नलिस्ट है लेफ्ट या लेफ्ट नमिंग वो बोलेंगे क्या अब यह भी तो जिस चुका है ना की नहीं वो अनपढ़ है वो गरीबी में प्रताड़ित है इसलिए उन्होंने पत्थर उठा लिया अब ये भी नोबडी 22 * 10 किड ऑफ सहित तो अब यह क्या कर रहे हैं दूसरे पे जो क्वेश्चन कर रहा है उसको तुम नफरत फैला रहे हो तुम हते फैला रहे हो तो यह भी अब मुझे लगता है की नोबडी बिलीव इन डेट पर्टिकुलर सीट आज वेल उसमें भी किसी को विश्वास नहीं सब जानते हैं इसीलिए ये लोग रवीश कुमार को अगर 6 लाख व्यूज ए जाते हैं या वो एक पोस्ट लिखना है कमेंट 1600 ए गया अब जाकर पढ़िए 1400 कमेंट गलियां होती है तो किसी को यह लगता हो ऊपर से किया रिच बहुत अधिक है इंगेजमेंट बहुत अधिक है है तो क्वालिटी ऑफ रिच देखिए की कोई गलियां सुन रहा है उसे बढ़िया तो वेश्या है की कम से कम वो बोलती है की मैं वेश्या हूं मेरे यहां आप आनंद करने के लिए आई मुझे देखिए सर ये नाश्ते देखिए उसमें सत्य निष्ठा है लेकिन ये का रहे हैं की नहीं नहीं नहीं मैं तो एकदम उदाहरण हूं और मैं संध्या और प्रातः पूजन करती है और वो भीतर में कुछ और ही चल रहा है इनके तो इस तरह के लोग हैं अब यहां पर मतलब बोलना वही बात है की जब आपके पास खाने के लिए कुछ नहीं होगा दें यू स्टार्ट तू अटैक अदर साइड क्यों क्योंकि पॉलिटिकल आपके स्टेटमेंट को फिर ये 14 पत्रकार का जो लिस्ट निकलते हैं वही है ना की हते फ्लेट हैं वह नहीं फ्लेट हुए एक्चुअल रिपोर्टिंग कर रहे हैं उनके सर पर तो बोल दिया जाता है की नहीं तुम समझे नहीं हिंदू है वह तो मरना जायज है उसका मुसलमान के हाथ में गंदा पत्थर है जो हम लोग जेल रहे हैं तो वही चल रहा है इस तरह से लोग चला रहे प्लीज प्लेटफॉर्म आई नो इन दिस स्पॉट लेकिन फिर भी निवादी हूं यू रियली एडमिरे कोई भी मैं दो-तीन अपार्ट फ्रॉम मतलब ये तो बेस्ट हो जाएगा ऑफ इंडिया को मैं नाम लूं तो उसमें से एक तो सागर है मतलब क्या होता है कई लोग जो है ना अब आप अंग हीरो का लेने या जो भी खाने उनको उसे तरह से कभी हाईलाइट नहीं किया जाता है उनका कम एक ही तरह का है हर बार एक ही तरह का कम करता है लेकिन वह कम करना आवश्यक है सागर कर रहा है या फिर स्वामी गोयल शर्मा है ठीक है उनका दलित को लेकर के एक तिल है बट उसकी भी रिपोर्टिंग आप देखेंगे वह कहां तक जाति है वह बॉर्डर तक चली गई जैसलमेर में वह प्रवासी पाकिस्तानियों का था तो इस तरह के कुछ लोग हैं जो ग्राउंड रिपोर्टिंग बहुत अच्छा कर रहे हैं क्यों कई बार क्या होता है ना की पहुंचाना भी अपने आप में एक अचीवमेंट आप मां सकते हैं और पहुंच करके क्या कहें एक एक्स एम्पलाई है केशव मालन करके उसके वीडियो कभी-कभी वायरल होते हैं वह भी यार 15-20 मुसलमान के बीच खड़े होकर के और उसको पूछ रहा है की तुम्हें दिक्कत क्या है इस तरह से डेट टैक्स एन लोट ऑफ करेज तो ऐसे यंग काफी अभी तो मुझे दो-तीन नाम याद है बट जी रेलटाइनस मतलब एकदम सतत निरंतर लगातार जी प्रखरता के साथ कुछ लोग आगे बाढ़ रहे हैं उसमें एक सागर तो सागर के लिए एक बार तालियां आप लोग बजरी बहुत बहुत धन्यवाद आ मेरा क्वेश्चन आप सभी से आप कोई भी आंसर दे सकते हैं पिछले सप्ताह पर पहले ही हमारे भारतीय क्रिकेट टीम के जो भूतपूर्व बॉलर है वेंकटेश प्रसाद जी उन्होंने सिंगल हैंडेड ली जुबेर और उसके पूरे गृह की बजा डाली है उन्होंने कुछ ट्वीट किया था बीसीसीआई में करप्शन को लेकर तो जुबेर ने कुछ उनको गुगली डाली उन्होंने पूरे उसके गैंग को लपेट दिया तो उन्होंने जैसे उनकी हैबिट है ये जो क्लिप कटवा है उसकी हैबिट है उसने उनके जो अकाउंट मैंने करता है अमृतांशु गुप्ता करके है शायद उसका नाम तो उसकी पुरी डॉकिंग करके उसने डिटेल एन पब्लिक में कर दी जैसे उसने पहले प्रीवियस वीक में भी किया था कोई बच्चे का पूरा डिटेल उसने बाहर कर दिया था उसके ऊपर उसके फिर भी हो गई उसने नूपुर शर्मा के कैसे में भी से किया उसकी रिसेंट टारगेट अपना काजल दे दी है तू इन लोगों को हम काउंटर किस तरीके से कर सकते हैं काउंटर वही है आप लोग ने जी तरह से जुबेर के पर्याय शब्द कुछ लोगों ने बताया वही काउंटर है हां तो बस वही ट्रॉल ट्रॉल का जवाब ट्रोलिंग से ही होता है इसलिए बहुत सारे लोग हमारी विचारधारा के हैं वो बोलना है जीत भारतीय आपकी भाषा जो है उतनी अच्छी नहीं है आप जो है आपको थोड़ा सा सौम्या होना चाहिए लोग सीरियसली लेंगे मुझे तो काफी लोग सीरियसली लेते हैं इतने लोग सीरियसली बैठ के सुन रहे हैं तो मुझे यही लगता है की युद्ध में जय बोलने वालों का भी महत्व होता है हम लोग दिनकर की एक मतलब लेख था इस में ये लाइन थी तो जो जिन्हें 2 रुपीस ट्रॉल और यह सब बोला जाता है ना तो चाहे जुबेर हो या जो भी हो उसे तरह के लोग उनके टाइमलाइन को फ्लर्ट कर दो जी तरह से जी जी क्षेत्र के आप हैं और जहां भी उसे जो भी आपकी भाषा शब्दावली में जो भी प्रयुक्त होता है ऐसे लोगों के लिए शब्द बिना खौफ के अब तो एलन मस्क के पास ट्विटर है अब तो जैक डोर से के पास है नहीं तो इसका एक ही है उपाय और इसका देखिए इंस्टीट्यूशन जवाब नहीं है कैसे आप कर नहीं सकते हैं कैसे करोगे तो वही आपका पोपट बन जाएगा जो दो बार कैंसर का और उत्तर प्रदेश सरकार का बन चुका है आप नहीं कर सकता अनलेस कैसे बनाया ढंग का टेंपो मोटर का चार्ज लगे है उसे पर तुम्हारे ट्वीट लिखने के करण क्या-क्या हो रहा है आगे छह लोग जो है आगे मा गए तो पुलिस अपना जांच करें कनेक्शन क्रिएट करें उमर खाली टाइप है या जो भी है इस तरह का करें वह है दूसरा मतलब सबसे सही उपाय यही है की इनको इतना फ्लर्ट करो अपने अपने क्षेत्रीय भाषण के शब्दों के प्रयोग से धीरे-धीरे कम हो जाएगा [प्रशंसा] नमस्ते यहां पर आप दिखे नहीं सकते मेरा ये क्वेश्चन था की यह जो नेक्सस राहत है बॉलीवुड और मीडिया का जैसे की हमारी जो कितनी फिल्म पिछले 2 साल में इनके ना मदद के बिना भी हिट हुई जैसे की डी कश्मीर फाइल है या फिर डी केरला स्टोरी तो ये जब ये फिल्म में हिट होती है जनता हिट करती है तो यह मीडिया का एक अलग स्टैंड राहत है जैसे की गदर तू अभी हिट हुई तो उसके दूसरे दिन ही इनके कुछ एन सनी देओल के एसबीआई बैंक का कुछ लोन वगैरा निकाल दिया इन लोगों ने या फिर ये कर लेते उससे से सीधा उल्टा ब्रह्मास्त्र ले लो या फिर कोई भी फिल्म जवान ले लो या फिर पठान ले लो तो ये लोग इतना फ्लो करते हैं तो ये नेक्सस का एक्जेक्टली कोई तोड़ है या फिर ऐसे ही चलने वाला इनका नेक्सस फिर वही जवाब है 10 ट्रॉल है तो आपके पास भी स्ट्रॉल होना चाहिए उनका नेक्सस है आपके पास बड़ा नेक्सस होना चाहिए और जो बार-बार हमारा जो नॉन लेफ्ट वाले इकोसिस्टम की बात करते हैं तो इकोसिस्टम यार उनका 150 वर्षों का है हमारा 10 वर्ष भी नहीं हुआ है और उसमें भी इंस्टीट्यूशन फंडिंग लगती है वह हम लोग पांच आदमी इकट्ठा बैठ गई है एक सिस्टम नहीं है हमारे यहां कुछ व्यवसायिक जो उद्योगपति हैं उनका समूह हो या कोई सॉन्ग हो कोई पार्टी हो यह जब तक निस्वार्थ भाव से की अजीत भारती इतना पैसा लो तुम जो कर रहे बहुत अच्छा कर रहे हो यह अप्रोच जब तक नहीं आएगा ना तब तक आपके पास ना तो 10 लॉयर्स का ग्रुप होगा ना 10 पत्रकार का ग्रुप होगा मतलब आप समझ रहे की एक सिस्टम क्रिएट नहीं होगा मीडिया में भी आपके लोग नहीं होंगे तो वह क्रिएट करने के लिए आपको संस्थागत फंडिंग की आवश्यकता होती है अर्थ तंत्र जब तक हमारे लिए सुदृढ़ नहीं होगा जिसमें आप रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट अकाउंट मत कीजिए यह विचारधारा की लड़ाई इसमें टेजिबल जो है ना पकड़ सकते योग्य परिणाम नहीं आएंगे इन टाइम टेबल ही रहे रहेगा तो उसके लिए एक तो जिगर चाहिए वो मुझे नहीं ग रहा है की अभी डेवलप हुआ है इस हिसाब से तो एक सिस्टम शब्द के रूप में तो बन गया है इसी आस ऑस्टन बट उसमें जान फूंकना भी पैसा लगाएंगे तो जो आप बात कर रहे हैं नेक्सस का हो तो मिनट शब्द नहीं टिकेगा लोग दिखाई दे रहे हैं बिजनेस करके किसका पठान झलक खुद ही खरीद के टिकट खुद ही एड करवा रहा हूं मंगल ग्रह पर भी चल रहा है तो उससे कोई फायदा है नहीं हां पेपर में मजे लेने के लिए बोल दो हजार करोड़ हमने काम लिए वह ठीक है कमली रखो जब में क्या फर्क पड़ता है [प्रशंसा] आप सभी को बहुत-बहुत धन्यवाद [प्रशंसा]
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