अगर बेटों को आजादी के किस्से ना सुनाए तो हनी सिंह याद रख लेंगे भगत सिंह भूल जाएंगे अरे कोई तो उन वीर योद्धाओं का भी अनुयाई हो कोई हो जिसके जहन में देशभक्ति छाई हो अरे कोई हो जो यूं कहे मैं आज का बलिदान हूं भीड़ से निकले और बोले मैं ही हिंदुस्तान [संगीत] हूं हमारे उभरते युवा विद्वान आदरणीय गौतम खट्टर जी को आमंत्रित करना चाहती हूं व भी अपनी बात पाच से सात मिनट में हमारे समक्ष रखें ओम विश्वानि देव सवित दुरिता परा सुवा य भद्र मंच पर उपस्थित श्रद्धेय आचार्य मुनि सत्यजीत जी आज के हमारे कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं आचार्य अंकुर जी आचार्य प्रशांत जी मीनाक्षी जी आचार्य कुलदीप जी एवं अंकित जी और सभी हमारे आर्य जगत के विद्वान भद्र पुरुष सामने बैठे नौजवान आर्य आर्याव और साथ ही विशेष रूप से इस आर्य समाज के प्रधान इस आर्य समाज में नए कार्यक्रम के सूत्रधार हमारे आर्य समाज के प्रधान श्री राजकुमार आर्य जी एक बार आप सबसे मैं निवेदन करूंगा उनके लिए विशेष रूप से आप ताली [प्रशंसा] बजाए आज हम सब विभिन्न विषयों पर बात कर रहे हैं और देश भर में आर्य समाजों में आर्य समाज से जुड़ी प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से संस्थाओं में एक विषय प्रधान रूप से चल रहा है कि यह वर्ष ऋषि दयानंद के द्वितीय जन्म शताब्दी का वर्ष है यह वर्ष ना तो आपके जीवन में पुनः लौट कर के आएगा ना मंच पर बैठे किसी व्यक्ति के जीवन में लौट कर के आएगा यह एक अवसर के रूप में हमारे सामने विद्यमान है हम में से किसी भी व्यक्ति के जीवन में ऋषि दयानंद का 300 वा जन्मोत्सव लौट के आने वाला नहीं है इसीलिए यह हमारे लिए एक सौभाग्य है कि हम जितने भी नौजवान है जितने भी वयोवृद्ध जन है वे सब अपने सामने अपनी नजरों के सामने ऋषि दयानंद के कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए जो उन्होंने एक पौध रोपित किया था उसमें जितना भी जल दे पाए जितनी भी खाद दे पाए विचारों की वो दे दें क्योंकि अगर दयानंद नहीं होते अगर दयानंद नहीं होते तो वेद के भेद कहां खुलते और पुराण की प्रति थ होती ना होती खुलती ना गप्पो की पोल धड़ाधड़ और खोटे खरे की कसौटी ना होती ना हिंदू ना हिंदी ना हिंद रहे था तन पर फटी ये लंगोटी ना होती और राम और कृष्ण के वंशजों पर गौ बोटी तो होती पर चोटी ना होती ऋषि दयानंद ने राम जी की वास्तविक परंपरा क्या है भगवान श्री कृष्ण का वास्तविक स्वरूप क्या है वीर हनुमान का असली चरित्र क्या है मां दुर्गा का भारत माता का वास्तविक जीवन क्या है यह हम सबको दिया यह हम सबको बताया अन्य किसी भी स्थानों पर हम जाएं तो वैसे विचार वो तर्क शक्ति और वह वैज्ञानिक आत वैज्ञानिक अध्यात्म वाद वोह सनातन को देखने की वैज्ञानिक दृष्टि जो ऋषि दयानंद ने दी आज हमारा दायित्व है हमारा कर्तव्य है कि उस परिपाटी को हम आगे बढ़ाएं अभी पिछले दिनों श्रद्धेय मुनि जी ने एक कार्यक्रम आयोजित किया 140 व बलिदान दिवस पर अजमेर की धरती पर जहां ऋषि दयानंद के अंतिम राजस्थान की धरती पर समय गुजरा अजमेर में वहां एक विशेष चीज हम सबको आकर्षित करती है और आज क्योंकि तकनीक से जुड़े हुए सभी नौजवान यहां आर्य समाज के मंच पर विद्यमान है जो आर्य समाज का ऋषि दयानंद का सत्यार्थ प्रकाश का ऋग्वेद आदि भाष्य भूमिका का संस्कार विधि का जितना भी प्रचार सोशल मीडिया मीडिया के माध्यम से करते हैं वह करते हैं लेकिन हम सबको एक प्रेरणा होनी चाहिए आज के इस युग में ऋषि दयानंद की वह प्रेरणा जो ऋषि उद्यान में आज भी संजो करके रखी गई है आप सोच करके देखिए ऋषि दयानंद के तीन माध्यम थे प्रचार के एक माध्यम था प्रवचन दूसरा माध्यम था लेखन और तीसरा माध्यम था शास्त्रार्थ उस काल में 18753 धर्म के प्रचार के लिए संस्कृति के उत्थान के लिए समाज के पुनर्जागरण के लिए लंदन से मंगवा कर के मशीन छपाई के लिए साहित्य का प्रचार किया अगर आज ऋषि दयानंद होते क्योंकि उस दिन मुनि जी ने कहा था उस समय कि ऋषि दयानंद यदि आज होते तो आर्य समाज तकनीकी रूप से इस संसार में सबसे विकसित संस्था होती यह वो मशीन जो रखी हुई है वो इस बात का प्रमाण है उस समय जब किसी के पास कुछ नहीं था तब ऋषि दयानंद ने उस परंपरा को उस परिपाटी को आगे बढ़ाया तो हमारा तो केवल इतना कार्य हमें नया कुछ नहीं करना नया कुछ नहीं लिखना नया कुछ प्रचार नहीं करना जो महर्षि दयानंद ने लिख दिया जो महर्षि दयानंद कह गए जो महर्षि दयानंद ने अपनी परंपरा को आगे बढ़ा दिया जो महर्षि दयानंद ने अपने उन स्तंभ लह पुरुषों को तैयार कर दिया आज बस केवल हम उन लह पुरुषों की उस वाणी को उनके कार को नौजवानों तक जनजन तक पहुंचाने का कार्य करें हमारा कार्य सफल हो जाएगा हमें नया कुछ भी नहीं करना ऋषि दयानंद के प्रताप से भगत सिंह पैदा हो गए लाला लाजपत राय पैदा हो गए महात्मा हंसराज पैदा हो गए गुरुदत्त विद्यार्थी पैदा हुए पंडित लेखराम पैदा हुए और सोच कर के देखिए इन लोगों ने कितना सर्वोच्च बलिदान दिया लेखराम के सीने में चाकू उतार दिया गया श्रद्धानंद के सीने में गोली उतार दी गई महा से राजपाल के सीने में चाकू दाग दिया गया और भगत सिंह आदि के गले में फांसी का फंदा डाल दिया गया हमें केवल और केवल इन महापुरुषों के इन क्रांतिकारियों के जीवन को याद करके अपने नौजवानों के बीच पहुंचाना है क्योंकि जरा सी कामयाबी मिल गई तो भूल जाएंगे क्योंकि प्रधान जी का यह आर्य समाज एकमात्र मेरे को ऐसा आर्य समाज दिखा जहां बच्चों का आवागमन प्रतिदिन होता है नहीं तो अन्य स्थानों पर बच्चों की तो गेट पर एंट्री नहीं है तो जरा सी कामयाबी मिल गई तो भूल जाएंगे वो दौलत और शोहरत के झूले में झूल जाएंगे अगर बेटों को आजादी के किस्से ना सुनाए तो हनी सिंह याद रख लेंगे भगत सिंह भूल जाएंगे इसीलिए आर्य समाज केवल एक मात्र ऐसी संस्था है जो देशभक्ति के बारे में भी बताती है जो राष्ट्रवाद के बारे में बताती है पराक्रम शलता के बारे में बताती है अध्यात्म वाद के बारे में बताती है वैज्ञानिकता के बारे में बताती है पारदर्शिता के बारे में बताती है सत्यवादी के बारे में बताती है यह पूरा का पूरा जो संगम है वह केवल और केवल एक संस्था है एक संगठन है आर्य समाज इसीलिए मैं नौजवानों से अक्सर कहता हूं कि जानो क्या तुम जानते हो एक युग तक झेल करर संताप को रक्त अपना क्रांतिकारी दे गए हैं आपको अरे चाहते यदि वो कि अपनी जिंदगी सुख में जिए होटलों में मौज काटे शाम को मदिरा पिए तो वो दुश्मन से मिलाकर हाथ जीते शान से जिंदगी सी होती न जाते जन से किंतु वो लड़ते रहे बस आपके मेरे लिए वो लोग पागल थे जिन्होंने मौत से फेरे लिए और बड़ी कीमत चुका करर आज का भारत बना कष्ट जो उनको मिले अरे कष्ट जो हमको मिले उनको मिले थे 100 गुना चाहता हूं यह नहीं पीढ़ी छुए आकाश को पहले पढ़े इतिहास को और फिर रचे इतिहास को अरे कोई तो उन वीर योद्धाओं का भी अनुयाई हो कोई हो जिसके जहन में देश भक्ति छाई हो अरे कोई हो जो यूं कहे मैं आज का बलिदान हूं भीड़ से निकले व बोले मैं ही हिंदुस्तान हूं भीड़ से निकले व बोले मैं ही हिंदुस्तान हूं मेरा समय समाप्त हो गया मैं अपनी वाणी को यही विराम दूंगा और आप सबसे कहूंगा हमें बहुत अधिक करने की आवश्यकता नहीं है केवल और केवल अपने बच्चों को यदि हम संस्कारित कर दें तो एक व्यक्ति निर्माण से एक परिवार का निर्माण हो सकता है एक परिवार के निर्माण से एक समाज का निर्माण हो सकता है और एक समाज के निर्माण से एक राष्ट्र का निर्माण हो सकता है और एक राष्ट्र के निर्माण से ऋषि दयानंद के उस वेद वाक्य को हम सार्थक कर सकते हैं जिसमें ऋषि दयानंद ने कहा था इंद्रम वर्धन तो अतु किव तो विश्व रावणा केवल हम नारा लगाए और आर्य राष्ट्र बन जाए ऐसा संभव नहीं हो सकता इसलिए एक बार जोरदार जयघोष लगा दीजिए जितने भी नौजवान सारे नौजवान यहां बैठे हैं सारे नौजवान जो यहां बैठे हैं उन सबसे कहूंगा एक बार जयघोष लगा दीजिए और जो लोग यहां नहीं भी आए हैं आसपास के और संडे एंजॉय कर रहे हैं उनको पता चल जाए कि आर य समाज का कोई उत्सव चल रहा है बोलिए मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम की जय योगेश्वर भगवान श्री कृष्ण की जय ब्रह्मा से लेकर जमनी पर्यंत ष मुनियों की भारत माता की जय भारत माता की जय महर्षि दयानंद की जय बहुत बहुत धन्यवाद बहुत बहुत आभार बहुत बहुत धन्यवाद भाई चाणक्य महाराज ने कहा था नाभिषेको न संस्कार सिंस कयते वने विक्रमा राजस स्वय मृगेंद्रता कोई शेर को जाकर के हल्दी चंदन और मुकुट नहीं पहनाने जाता कि आज से तुम्हारा राज्य अभिषेक किया जा रहा है तुम जंगल के राजा हो तो इसलिए अगर हम अपने क्रियात्मक अपने क्रियात्मक सकारात्मक क्रियाएं करते रहेंगे तो समाज स्वयं ही चमकेगा और राष्ट्र स्वयं ही चमकेगा हम स्वयं चमकेंगे तो अपना अपना सहयोग अपना अपना योगदान सभी लोग करते रहे
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😲 अपना Point साबित के लिए इतने कुतर्कआइये कुछ Cross Questions करें।
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