Tuesday, 3 February 2026

हर वायरस का इलाज व रोकथाम Home Care & Remedy For Every Virus.

कि हो ओम भूर भुवाह स्वाह तट सावितुर भरे हम भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न प्रचोदयात् स्वाहा ओम त्रंबकम यजा माहे सुगंधिम पुष्टिवर्धनम उर्वारुकमिव बंधनात् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् स्वागत है अजय को कि नमस्कार दोस्तों मैं अंकुर आर्य आप सब का स्वागत करता हूं आज हम यज्ञ हवन की विधि यहां से बताने वाले हैं और इसका एक मुख्य कारण यह है कि विदेश से आया हुआ एक वायरस भारतवर्ष में फैल चुका है डिग्री तक पहुंच चुका है यूपी में भी नोएडा तक पहुंच चुका है और हम जानते हैं कि कहीं से भी आने वाला कोई भी आक्रमण हो उन सबका इलाज भारतवर्ष में पहले से पहले ही विद्यमान है जो हमारी वैदिक सभ्यता है उसकी पहचान है यह 10 और ए यदि हम जो आज आपको जो बताने वाले हैं कि किस प्रकार से आपको यह ज्यादा करना चाहिए उसी प्रकार से आप अपने घर में करें जो-जो पदार्थ बताने वाले हैं जो जो विधि बताने वाले हैं और जो सामान्य प्रक्रिया होनी चाहिए वह सब हम यहां से बताने वाले हैं तो सबसे पहले हम देखेंगे कि किस प्रकार की हमारी यह साला होनी चाहिए द्विवेदी होनी चाहिए और उसमें हम किस प्रकार से शुरुआत भी लकड़ियों को सजाएं कैसे उसमें उसकी शुरुआत करें ताकि बाद में वह दुआ दुआ ना हो कई बार यह देखने में आता है कि अजय करना शुरू कर देते हैं लेकिन बाद में वृद्धि हो जाता है वहां जहां वातावरण की शुद्धि होनी चाहिए वहां पर प्रदूषण फैल जाता है जबकि इसका मुख्य कारण यह है कि वायु में वातावरण में फैले हुए जितने भी वायरस है उन सबको नष्ट करना और इन सबको नष्ट करने का जो उपाय है वह केवल और केवल अग्नि में है यह यहां पर अभी अग्नि प्रज्वलित है और उसमें मैं लाल मिर्च डाल दूं तो यहां आस-पड़ोस के सब लोग परेशान हो जाएंगे इस घर के लोग परेशान हो जाएंगे उसी प्रकार से यदि हमारे पास में ओषधियों से भरपूर सामग्री है तो अगर उसको हम आग में डालेंगे तो इससे क्या होगा यह जो ठोस पदार्थ यह है गैसीय अवस्था में परिवर्तित होकर के इस पूरे के पूरे वायुमंडल में जो कि एक गैस यह फॉर्म में है तो इसमें मिक्स आपके जहां-जहां पर भी वह विषाणु उपस्थित होंगे उन सबको नष्ट कर देती है किसी भी प्रकार का कोई भी वायरस हो वह फैलता ही तब है जब हमारी इम्युनिटी कम होती है इसी मिट्टी को बढ़ाने के लिए सुबह-सुबह योग प्राणायाम करें टाइल पहले एक्सर्साइज करें कसरत करें फिर उसके बाद में आने के बाद में आप गिलोय आदि का जो कपड़ा है यह देखिए यह गिलोय हैं गिलोय तुलसी हल्दी और काली मिर्च इन का काढ़ा बनाकर के पीछे गए और हवन करें यह करें अपने वातावरण की शुद्धि के लिए क्योंकि भोजन तो हम सुबह-शाम करते हैं दोपहर में करते हैं दो तीन टाइम करते हैं लेकिन वायु का जो वह तो हम हमेशा करते रहते हैं सोते-जागते उसके बिना तो हम एक पल भी नहीं रह सकते इसलिए उसका शुद्ध होना भी आवश्यक है उसी के लिए हम यह करने जा रहे हैं सबसे पहले हम लकड़ियों को इस तरीके से अपनी हवन कुंड के अंदर इस तरीके से बचा लेंगे उसके बाद में हम इस कि थोड़ी सी जो है सामग्री डाल देंगे मैं अक्सर हम यह करते हैं कि हवन एकदम से शुरू कर देते हैं उसकी कोई पूर्व की तैयारी नहीं होती अब हम इसके ऊपर समिधाओं को थोड़ा थोड़ा सा जाएंगे इस प्रकार से कि उनमें वायु का आवागमन होता रहे हैं कि मेरे सभी लकड़ियां व्यायाम की है और यह आप कहीं से भी आरा मशीन से ले सकते हैं इनका फायदा यह होता है कि मैं छिलके नहीं होते तो उसमें कीड़े आदि नहीं बन पाते हैं देखिए अब यहां से पूरा का पूरा जो हवा जाने का स्थान है वह पूरा का पूरा बन जाता है इतना बनाने के बाद में अब हम आगे की प्रक्रिया को शुरू करेंगे तो इस प्रकार से अब हम यहां से हवन को शुरू करते हैं तो सबसे पहले आता है इसमें ब्रह्म जगत् ब्रह्ममय गिवर होता है जिसको हम संध्या भी कहते हैं जो हम सुबह-शाम करते हैं जिसको अक्सर कहते हैं कि भगवान का नाम ले रहे हैं तो वह चीज होती है उसमें शन्नो देवी रजिस्टर यहां से आरंभ होता है जहां पर हम आचमन करते हैं शुद्धिकरण करते हैं शरीर की शुध्दि करते हैं उसमें शुद्धि मंत्र होते हैं ईश्वर की प्रार्थना मंत्र होते हैं और उसके बाद में इसमें प्राणायाम होता है प्राणायाम आदि करके हम उसके बाद में अगर मरण मंत्र की मंशा परिक्रमा मंत्र यह सब कुछ करने के बाद में हम फिर करते हैं अग्निहोत्र अग्निहोत्र शुरू करने से पहले मैं आपको एक और चीज थोड़ा से यहां पर ध्यान देने दिलाना चाहता हूं कि कईं बार हमको मंत्रोच्चरण आदि नहीं आते हैं मंत्रोच्चरण यदि नहीं आते हैं और आपको शुद्ध उसका मंत्रोच्चारण करने का नहीं पता है तो आप जो भी आपका नजदीकी आर्य समाज है वहां पर जाना आरंभ करें वहां पर आप इन मंत्रों के उच्चारण की जो सही-सही विधि है मुझको सीखेंगे क्योंकि मंत्रों का उच्चारण करना मात्र ही हमारा उद्देश्य नहीं होना चाहिए उसका जो अर्थ पूर्ण अभाव है उसमें लीन होकर के हमको मंत्रों का उच्चारण करना चाहिए अभी जिस प्रकार की यह जो महाव्याधि फैली हुई है इससे बचने के हेतु यदि आपको गायत्री मंत्र आता है या कोई भी मंत्र आता है क्योंकि यहां पर हम को आरंभ किया स्लो है कि हम किसी एक आधि-व्याधि महाव्याधि को दूर करने हेतु वातावरण की शुद्धि हेतु यह कार्य कर रहे हैं जब हम मंत्रोच्चरण का भाव पूर्ण व्यवस्था अपने मन में करते हुए मंत्र उच्चारण करते हैं और आहुतियां देते हैं उस समय पर हमारे मन की शुद्धि होती है लेकिन क्योंकि हम एक स्थूल जगत की शुद्धि हेतु एक स्थूल कर्मकांड कर रहे हैं तो उसमें हम सारी की सारी आहूतियां जो है वह गायत्री मंत्र से भी दे सकते हैं लेकिन पूर्ण विधि वही है जो मैंने आपको बताई है उसको भी वे अपने बैकग्राउंड में सीखते रहें अभी हाल फिलहाल तत्काल आप जो भी आपके पास में है उससे ही शुभ शुरू कर सकते हैं अभी से हम जब जैसे कि हम अग्निहोत्र शुरू करने वाले हैं उससे पहले हमें यह ज्ञात होना चाहिए कि हमारे पास में जो भी घी है चाहे वह थोड़ी मात्रा में ही क्यों न हो लेकिन वह पूर्ण शुद्ध होना चाहिए पहली चीज इस बात का ध्यान रखें ऐसा ना हो कि एक कहावत है यहां से जुड़ा चूर्ण पितरों के नाम का वैसा नहीं होना चाहिए जो सामग्री है उसको भी 2030 रुपए किलो वाली लेते हैं वह भी गलत है अच्छा होगा कि यदि आप जो पतंजलि की सामग्री आ रही है वह बहुत अच्छी सामग्री है अगर वह किसी को ना मिले तो शांतिकुंज वालों की सामग्री भी बहुत अच्छी सामग्री है वह ले याग्निक मेरे कहने का अर्थ यह है कि एकदम जो जड़ी-बूटियों से पूरी हो उसमें इसमें देखिए इसमें बादाम डाले हुए हैं इसे मुनक्का भी डाली हुई है इसमें जो भी है इसमें चंदन का चूरा भी है और उसमें बहुत सारी ऐसी जो ओषधियां होती हैं वह सब मिली हुई है अलग से हमने अलग से हमने इसमें यह जो तेज पत्र है वह आपकी रसोई में मिल जाता है व है इलायची है लॉन्ग है काली मिर्च है सूखी हुई तुलसी क्योंकि जो तुलसी के पत्ते होते हैं वह है इसमें गुड है और यह देखिए जो विशुद्ध बिल्कुल कपूर है वह रखा हुआ है और यह कि हमने इसमें लोबान रखा हुआ है लोहान के बारे में अक्सर लोग यह कहते हैं कि तो भूत-प्रेत को भगाने के लिए होता है वह भूत-प्रेत कोई भटकती हुई आत्मा आदि उसको भगाने के लिए रखा हुआ है तो उसमें कईं बार लोग बाद जो है वह तंत्र-मंत्र और यह काला जादू के विषय में भी कई बार लोहान के विषय में गलत धारणा सोच लेते हैं इसको आप ज़ूम करके देखना पुराने टाइम में जो अगरबत्ती आती थी और धूपबत्ती आती थी उसकी खुश्बू के जैसा है यह पहले एकदम बुद्धू बना करती थी अब तो केमिकल डालकर भिन्न-भिन्न प्रकार की जो खुशबू है वह डाल दी गई है धो वह तो प्रदूषण से भी ज्यादा खतरनाक है जो दो बत्तियां आप लोग आजकल जलाते हो जो हम भूत-प्रेत की बात करते हैं कि तो भूत-प्रेत से अगर जनसामान्य में देखा जाए तो क्या होता है कोई बीमार जाता है बुखार हो जाता है चेहरा लाल हो जाता है भूत-प्रेत वह भी आपने नहीं देख सकते उन्हें बीमारियां फैलती हैं और यह जो विषाणु है यह भी कुछ दिखाई नहीं देते हो प्रिंसेस बीमारियां फैलती हैं एक तो यह समानता भूत-प्रेत अंधेरे में रहते हैं नमी में रहते हैं वहां जहां गंदगी कुमार रहते हैं तभी माताएं बहनें कहती है कि घरों में साफ-सफाई अदरक को हल करने में साफ-सफाई रखो ताकि यहां पर कोई ऐसी जो भी जाती है प्राणी है वह ना सके कोई ऐसी प्रॉपर्टी हवा जिसको कहते हैं वह ना सके तो उन सब का इलाज जवाब वहां पर इसी लोबान से करते हैं तो इन्हें बहुत समानता है और मैं तो यही कहता हूं कि भूत-प्रेत ही विष्णु है इनको नष्ट करने के लिए हवन आदि करना और उसमें इस प्रकार के जो भी पदार्थ हैं लोन है हल्का सा गंधक भी डाल सकते हैं यह सब चीजें जो है वह अत्यंत आवश्यक है मंत्रोच्चरण से मनवीर जो हमारा शुद्ध होता है और वातावरण में भी सुधर जाती है और जिनको जो नेगेटिव एनर्जी है उनका भी ह्रास होता है कि वह अपने घर से भाग हैं इसलिए मंत्रोउच्चारण करना अत्यंत आवश्यक है यह जो शुरू की जो मेन जो हमारी तैयारी होनी चाहिए उसके बारे में अभी तक मैंने आपको बताया है तो मिर्च पानी देव सवितर्दुरितानि परासुव विषय भद्रम तन्नो आसुव व अगुंठा सुपथा राए अस्मान् विश्वानि देव वयुनानि विद्वान् योद्धा समाज चूर्ण मे नो भोग्य शांति नमक टीम विदेशी मां दोस्तों इस प्रकार से हम ईश्वर स्तुति प्रार्थना उपासना करते हैं अब हम जिस प्रकार से यह एक तांबे का पात्र है इसमें हम कर लेते हैं और यह इसकी एक चम्मच है वह भी तांबे की है इस प्रकार से हम पांच मन करेंगे पांच मन के बाद में हम शरीर की जो है सुधार करेंगे उन मंत्रों के बाद अग्न्याधान करेंगे इनके अग्नि को प्रज्ज्वलित करेंगे तो झाल जय हो ओम भूर भुवाह स्वाह हो कि अब इस प्रकार से अग्नि को यहां प्रज्ज्वलित करने के बाद में हम आगे की जो प्रक्रिया है उसको करेंगे और यह वीडियो जो है आपको बहुत शॉर्ट में इन सब चीजों को बताने वाली है हम किस प्रकार से अपने घर में बैठ करके भी किसी अन्य के आश्रित न रहकर भी अपने घर में ही स्वयं हवन करके वायुमंडल को शुद्ध कर सकते हैं ओम अयंत इध्म आत्मा जाता वे दस्ते ने यशवर्धन अध्यक्ष नंद समय स्वाहा इदं अग्नए यह जाति-धर्म का ओम प्रजापत यह स्वाहा इदं प्रजापतए ढंका हुआ था ओमेंद्र यस स्वाहा इदं इंद्र इधर नामा जय हो ओम सूर्य ज्योति ज्योति सूर्य स्वाहा समिति आदि का पूरा ध्यान रखें जो संविदा है बीच-बीच में डालते रहें हैं कि घर के सभी सदस्य साथ आ सकें तो इतना ही हवन पूजा है देर तक चलता है और उसमें फिर घी मात्रा का भी ध्यान रखें एक भी पूरा का पूरा डालते रहना चाहिए समय-समय पर खास बात यह ध्यान रखें के मंत्र के साथ ही मंत्र का जिसे यंत्रों स्वाहा बोले स्वाहा के साथ-साथ सभी के सभी डालें आधा भी ना करें बिल्कुल पूरा एक जो एक डेकोरम है उसको बना करके रखें शिष्टाचार के साथ में कोई भी सामग्री घी आदि इसके बाहर नहीं डाल जाना चाहिए सारा कुछ अंदर ही आना चाहिए ओम भूर अज्ञेय प्राणाय स्वाहा इदं अग्नए यह प्राणायम इधर नमः ओम भूर वायव्य पावन त्यौहार ज़िद एमवाय व्यापार नारायणा ॐ विवादित यौन स्वाहा इदं मृत यौवन नाम था कि हो ओम भूर्भुव स्व अग्नि वायु आदित्य बेरा प्राणापान है ख्याल स्वाहा इदं अग्नि वायु आदित्य प्राणापान व्याख्यान नमः ॐ अग्ने नय सुपथा राए अस्मान् विश्वानि देव वयुनानि विद्वान् अयोध्या समाज चूर्ण विश्व शांति नमक कि देश भर स्वाहा ओम भूर भुवाह स्वाह तट सावितुर बहरे नंबर भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न प्रचोदयात् स्वाहा ओम भूर भुवाह स्वाह तट सावितुर भरे हैं यह पड़ेगा देवस्य धीमहि धियो यो न प्रचोदयात् स्वाहा ओम त्रंबकम यजा माहे सुगंधिम पुष्टिवर्धनम उर्वारुकमिव बंधनात् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् स्वाहा ओम स्तुता मया वरदा वेदमाता प्रचोदयात् अ पावर इन थे विजन आफ आयु प्राण प्रजा पशु कीर्ति द्रविणम् ब्रह्मवर्चस महत्याम दत्त व ब्रम्हलोक कम स्वाहा ॐ ब्रह्म ब्राह्मणों ब्रह्मा वर्चस्व की विजयता नाम आरा स्ट्रीट रॉकर्ज 400 आरएस व्यक्ति महारत हो जायत आम 2 धीर वो ड्वार्फ नष्ट हो सकती है पुरंधीर योशो जिष्णु रेथेष्टा सबहेयो युवस्या येजमानस्य वीरो जायत आम निकम्मे निकम्मे न परिजनों वर्षा ऋतु फल व त्यूना रोशन अधीनता योगक्षेम और यह कल प्रताणित स्वाहा इदं राष्ट्राय यह इधर नाम था ओम राष्ट्रीय स्वाहा इदं राष्ट्राय इदन्न मम हां यह महाराष्ट्र यस स्वाहा इदं राष्ट्राय इदन्न अभिमान अब हम शुष्कता देंगे इस कृत्य में हम कुछ भी जो गर्म हमारे मीट आदि होता है वह देते हैं लेकिन हम यहां पर इस अध्ययन में विशेष आहुति गुड से देंगे गुड़ के जो बहुत सारे गुण है जो अंत में जो आहुति डालते हुए इदं उसमें डालते हैं तो उससे घर में वह विषाणु जो टाइफाइड को पैदा करते हैं वह सब नष्ट हो जाते हैं है तो ओम सदस्य कर्मणो हत्यारे सम्यक्त्व न्यूनतम यह कर्म अग्नि तत्व विस्तृत विद्या सर्वं सिस्टम सुतम करो तुम्हें यज्ञ शिफ्ट करते सुते सर्वर प्रायश्चित था होती नाम का मानव समृद्ध इतिहास रौनक सामान समृद्ध यह स्वाहा इदं अग्नए शिफ्ट करते हुए इधर पधारे की स्वाहा इदं प्रजापतए यह धर्म का ॐ सर्व मुंबई पूर्ण स्वाहा ओम शरण मुंबई पूर्ण स्वाह ओम शरण मुंबई पूर्ण स्वाहा इस प्रकार से मित्रों हमारा यह यज्ञ यह पूर्ण होता है इसमें हमने जितनी भी सोशल यह थी वह सब डाल दी हैं कईं बार क्या होता है कि बीच में ही अग्नि अग्नि जो है वह चली जाती है प्रज्वलित जो हो रही होती है वह बंद हो जाती है इसमें क्या करना चाहिए जो हमारे पास में कपूर है इसकी छोटी सी छोटा सा टुकड़ा तोड़ लीजिए और उसको हम इस चम्मच में रख लेते हैं और दिए में लगा करके इसके बीच में छोड़ देते हैं थोड़ा सा कपूर यदि चाहे तो चारों ओर बर्फ बन सकते हैं सबसे खास बात यह होती है हवन कि वह यह होती है कि उसमें दुआ ना हो उसमें अग्नि हमेशा प्रज्वलित रहनी चाहिए यह अर्थ होता है कि हमारा जीवन जो है वह भले ही छोटा हो लेकिन पूर्णता प्रदीप होना चाहिए ज्वलंत होना चाहिए ना कि हुए दें इस प्रकार से एक सड़ी हुई जिंदगी होती है वह लंबी चले तो भी बेकार है लेकिन छोटी जिंदगी को भले ही प्रज्वलित हो वह सबसे सही है तो अब हमारा पूरे सही समय पर जो संविदा कि वह जल चुकी है और हमारा यहां पर यह जो भी समाप्त होता है तो वैदिक प्रार्थना यह जो प्रार्थना के साथ में हम इसको समाप्त करेंगे और आप लोग भी अपने घरों में इसी प्रकार से हैं यदि करते रहें यह के विषय मैंने पहले भी एक वीडियो में बताया था किस प्रकार से जो भोपाल की गैस त्रासदी हुई थी उस समय पर एक परिवार ने यह करके ही अपने पूरे परिवार को बचाया था और उसके बाद में वह जो रिसर्च थी वह यूके तक गई फिर उसके बाद में रसिया तक गई और अब पूरे विश्व में आज की तारीख में य चिकित्सा जो है बहुत प्रचलित है लोग उसको करते रहते हैं तो अपने घरों की शुद्धि के लिए लेकिन भारतवर्ष का और खास तौर पर सनातन का हिंदुओं का यह बड़ा ही दुर्भाग्य रहा है कि उन लोगों ने अपनी ही संस्कृति को ठुकरा दिया है और विदेशों की संस्कृति को अपनाया है भोपाल गैस त्रासदी की तरह ही जब-जब भी मनुष्य जाति पर जो जो भी इस प्रकार की त्रासदी आएंगी जूस की प्राणवायु करने का प्रयास करेंगी तब अब यह जो यह चिकित्सा है यही उनके लिए कारगर और सबसे बड़ा रामबाण सिद्ध होती रहेगी सर्वे भवंतू सुखिनाह सर्वे संतु निरामया सर्वे भद्राणि पश्यंतु मा कश्चिद शुभ अवे कि इस प्रकार से प्रार्थना दी के बाद में हमारा पूरा का पूरा जज जो है वह समाप्त होता है इसी प्रकार से आप भी अपने घरों में अवश्य किया करें मेरे संग बोलिए सत्य सनातन वैदिक धर्म की जय जय हिंद वंदे मातरम

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