को नमस्ते दोस्तों मैनपुर आप सबका एक बार फिर से स्वागत करता हूं आपके अपने YouTube चैनल सत्य सनातन में सबसे बड़ी खबर दिग्विजयत्रिवेदी जी जो कि पालघर में नृशंस हत्या व लिंग हुई थी दो संतों और उनके ड्राइवर की योनि की तरफ से पैरवी करने के लिए जा रहे थे उनका एक रोड एक्सीडेंट में उनकी मृत्यु हो गई है लेकिन जिस प्रकार से पालघर के पक्ष में बोलने वाले पत्रकारों लोगों के ऊपर अभी तक कार्यवाइयां हुई हैं 12 12:30 12 घंटे तक उनसे पूछताछ हुई है ना कि उन लोगों से जिन्होंने इस हत्या को अंजाम दिया है इसलिए सिंह को अंजाम दिया है बल्कि उन लोगों से पूछताछ हो रही है जो लोग इसकी आवाज को उठा रहे थे ऐसे समय में दिग्विजयत्रिवेदी जी की इस मृत्यु पर इस दुखद मृत्यु पर लोगों को विश्वास नहीं हो रहा है और उनका यही कहना है कि जिस प्रकार से महाराष्ट्र के अंदर लगातार वह काम हो मैं इसके लिए कभी भी महाराष्ट्र को जाना ही नहीं जाता था ऐसे समय में कांग्रेस का पांव जिस समय पर सत्ता में है उस समय पर वह कुछ ना कुछ वह कार्य कर सकती है जिसके लिए वह जानी जाती रही है कि आप कोई पता है कि कांग्रेस के आलाकमान के लीडरान तक भी इस तरीके की संदिग्ध मौत थे उनकी होती रही हैं ऐसे समय पर यदि वह पालघर का पक्ष रखने के लिए जा रहे थे उसी समय पर इस तरीके का एक्सीडेंट के उनकी मृत्यु हुई हो जाती है यह कहीं ना कहीं सकी जो स्विच है वहां की सरकार की तरफ मानती है इसमें जल्द से जल्द एक निष्पक्ष जांच हो सीबीआई जांच हो इसके लिए लोग कह रहे हैं लोगों की तरफ से और भी बहुत सारे कमेंट है लेकिन सिर्फ और सिर्फ इतना हो जाए कि क्राइम ब्रांच की जांच हो जाए इसके पीछे इसकी तह तक पहुंचा जाए साथ-साथ पालघर में जो संतों की निर्मम हत्या जो लिंचिंग हुई है उसकी जांच भी क्राइम ब्रांच से ही हो ऐसी हम सब की डिमांड है हुआ है कि अगर हम एक तरफ देखें कि मुस्लिमों के तुष्टिकरण की राजनीति को लेकर के पूरे भारतवर्ष में जो बयार चली हुई है वह वापस हमें 2000 12 13 14 की याद दिला रही है ठीक उसी के अनुकूल एक और बयान जो आया है वह है मुनव्वर राणा का लोग कह रहे हैं कि बहुत मशहूर है लेकिन मैंने इसका नाम पिछले कुछ समय से सुना है जब मैंने देखा है कि हिंदुओं के खिलाफ कहीं ना कहीं किसी ना किसी अलग-अलग भाषा में जहर उगलने का काम करता रहता है इसने अपनी बहुत ही सक्रिय भूमिका निभाई थी जब शाहीन बाग में धरना प्रदर्शन हुआ था जब दिल्ली के अंदर हिंसा हुई थी आगजनी हुई थी तब भी अब एक्टिव था और अब एक बार फिर से आकर गेट्स ने कहा कि इस देश के अंदर 100 करोड़ इंसान रहते हैं और 35 करोड़ सूअर रहते हैं इसके इस बयान से कहीं ना कहीं वह सच्चाई भी पता लगती है लेकिन आप हमेशा एक बात को नोटिस करें कि है जो शो से अलग वाला आंकड़ा है यह कभी 15 जाता है कभी 25 रहता है कि बीती रात आखिरी 35 है लेकिन इस वाला कपड़ा है यह हमेशा एक का एक ही रहता है इससे आपको समझ में आना चाहिए यानि के उसका कहने का मतलब यह था क्योंकि जो इंसान होते हैं वह तो वोट कर सकते हैं लेकिन जो शुगर है उसका तो कोई आई कार्ड ही नहीं बनता तो वोट कर भी नहीं सकता है इसलिए ऐसी गलत सरकार चुनने में उन 35 करोड़ सुअरों का कोई योगदान नहीं है इसलिए जो 35 करोड़ सूअर है वह पूरी तरीके से निर्दोष साबित होते हैं हम मानते हैं कि 100 करोड़ लोगों ने वोटिंग किया है और उन्हीं की वजह से सरकार बनी है और बाकी जो 35 करोड़ सूअर है वह सिर्फ खड़े होकर के देखते रहे लेकिन हमें यह पता होना चाहिए कि सूअरों के ऊपर किसी भी तरीके का कोई भी क्वॉरेंटाइन कोई भी लॉक डाउन किसी भी प्रकार का कोई भी फॉलो काम कर ही नहीं रहा है सर खुला घूमते हैं और खुला ही घूम रहे हैं वह शुगर जो होते हैं वह गंदगी में मुंह मारते फिरते हैं और जो गंदगी उनके ऊपर चिपट जाती है वह दूसरों के घरों पर जब जा करके भ्रमर रगड़ते नट्स जो किसी की दीवार के ऊपर तो वहां तक दो फैला देते हैं तो सूअर वही काम करते हैं और सुअर वही काम लगातार कर रहे हैं तो उसमें हमें कुछ भी सोचने की आवश्यकता नहीं है लेकिन जिस प्रकार से हम देख रहे हैं कि देश के अंदर मुसलमानों का रवैया अचानक से बदलता जा रहा है हम देख रहे हैं कि जिस प्रकार से मौलाना साद लगातार भाग रहा है उसको एक हीरो बताया जा रहा है क्योंकि उनकी नजर में तो दाउद इब्राहिम गिरोह है क्योंकि वह विभाग ही रहा था क्योंकि उनकी नजर में तो जाकिर नाइक देखिए जो है क्योंकि वह विभागीय रहा है मौलाना साथ जो आजकल भाग रहा है क्राइम ब्रांच उसके पीछे पड़ी हुई है कैराना का रहने वाला को रोना सरगना को बीड 786 को फैलाने वाला यह आतंकवादी आजकल जो भागा फिर रहा है इसके ऊपर लगातार छापे पड़ रहे हैं अब हमने पिछले जून आपको बताया था किस प्रकार से तकरीबन 700 से 800 विदेशी नागरिकों का जिनका कि वीज़ा पूरी तरीके से कैंसिल कर दिया गया है उन ऑफिस जाने नहीं दिया गया है उन लोगों से भी पूछताछ हो रही है और उनके साथ-साथ जॉब 166 तकरीबन जमातियों से पूछताछ की गई तो उन्होंने बताया है कि 20 मार्च के बाद मरकज में रुकने के लिए मौलाना साद ने ही हमको बोला था ज्यादातर जमात योनि क्राइम ब्रांच को यह बताया है कि वह खुद से मरकज से निकलना चाहते थे लेकिन मौलाना साद ने उन्हें ऐसा करने से मना कर दिया था क्राइम ब्रांच के सूत्रों के मुताबिक मौलाना साथ जान-बूझकर अपना को 119 टेस्ट सरकारी अस्पताल में नहीं करवाना चाहता है क्योंकि वह जानता है कि जैसे ही सरकारी अस्पताल से कराए हुए कांटेस्ट की रिपोर्ट नेगेटिव आती है तो क्राइम ब्रांच मौलाना सादिक को पूछताछ के लिए तुरंत ही बुला लेगी और अगर पॉजिटिव आता है तो उसको तुरंत ही कोरेनटाइन कर लिया जाएगा इसलिए वह बचता भागा फिर रहा है मौलाना साहब को इस बात की जानकारी है कि जब तक वह अपनी करो ना नेगेटिव वाली रिपोर्ट नहीं देगा तब तक क्राइम ब्रांच मेडी प्रोटोकॉल के तहत चाहकर भी पूछताछ के लिए उसको नहीं बुला सकती है इसी बात का फायदा उठाकर के मौलाना अब अपने वकीलों के जरिए मीडिया के एक वर्ग में झूठी खबरें छपवा करके सेल्वा रहा है अपने पक्ष में सबूतों को इकट्ठा करने की कोशिश कर रहा है ताकि अखबार की कटिंग अदालत में पेश करके अपना पक्ष मजबूत कर सके क्राइम ब्रांच के सूत्रों के अनुसार उसके पास में काफी सारे सबूत है जिससे यह पता लगता है कि निजामुद्दीन के मरकज में लोगों को पुलिस द्वारा नोटिस देने के बावजूद भी जान-बूझकर के रोका गया था जिसको साबित करने के लिए क्राइम ब्रांच में 166 जमातियों के बयान विदेश से जमातियों के साथ-साथ दर्ज कर लिए हैं इसके अलावा क्राइम ब्रांच ने 700 विदेशी यात्रियों के पासपोर्ट पूरी तरीके से कैंसल कर रखे हैं ऐसे समय में हमें इस बात को समझना होगा कि जिस प्रकार से हमारा जो सिस्टम बना हुआ है है उसको यह लोग कितने अच्छे तरीके से खेलते हैं हमने पिछले दिनों आप लोगों को यह वीडियो में बताएं कि था कि किस प्रकार से भारत में ही रहने वाले भारतीय मुसलमान जो राजनीतिक पार्टियों से जुड़े हुए हैं वह ही लोग संविधान का अपमान करते हैं और शहरियार को सबसे ऊपर रखते हैं ऐसे समय में हमें भी इस बात को समझना चाहिए कि जिस प्रकार लगातार इस तरीके की घटनाएं हमारे सामने आ रही हैं उन से हमें क्या शिक्षा मिलती है जिस प्रकार लगातार भारतवर्ष में ही हिंदुओं के ऊपर हमले हो रहे हैं उनकी हत्याएं हो रही हैं उनके घरो को जलाया जा रहा है यही नहीं अगर कोई मुस्लिम भी इस पक्ष में बोल देता है तो उसकी भी ऐसी तैसी आ जाती है अगर हम नजदीकी मामला देखे तो रुबिका लियाकत के मजहब पर अभी प्रिंट का हमला हुआ है द प्रिंट जो कि एक वेब पोर्टल है उसने कहा है कि मुसलमान व है जो देश से पहले अपने मजहब को कोट किराणा संकट के इस दौर में द प्रिंट रुबिका लियाकत और सईद अंसारी जैसे पत्रकारों का अच्छे और बुरे मुसलमान में वर्गीकरण करने लग गया है वामपंथी मीडिया पोर्टल द प्रिंट ने दिलीप मंडल का एक लेख छापा है इस लेख में बुद्धिजीवी लेखक ने शोध करने की अपनी ताकत एबीपी न्यूज़ की बनकर रुबिका लियाकत और आज तक एंकर सईद अंसारी जैसे मुस्लिम बैंकों की रिपोर्टिंग समझाने में झोंक रही है पाठकों को यह बताने की इसमें कोशिश की गई है कि भारत में दो तरह के मुसलमान है एक वह जो खुलेआम उनके प्रोपैगंडा को बढ़ाने में हवा का काम करते हैं और अपने अस्तित्व को बचाए रखते हैं दूसरे वे हैं जो उनके खिलाफ जाकर के भाजपा का मुखपत्र बन रहे हैं और अपने लोगों में अपनी पहचान खो रहे हैं The प्रिंट के इस लेख में जिसका शीर्षक है रुबिका लियाकत और सईद अंसारी जैसे हिंदी समाचार एंकर भाजपा के मुस्लिम नेताओं की तरह है इस आर्टिकल में उसने रुबिका लियाकत पर केंद्रित होकर के उनके बारे में है कि मीडिया में कुछ एक ऐसे पत्रकार हैं जो अपनी अंतरात्मा अपने जमीर और वजूद को खतरे में डालकर उसे बचाने की कोशिश कर रहे हैं यानी कि अपना कैरियर बचाने की कोशिश कर रहे हैं वरना बहुत सारे मुस्लिम पत्रकार तो ऐसे हैं जो मीडिया में विविधता न होने के कारण ऐसे पेड़ से कोई छोड़ चुके हैं या फिर News रूम में सांप्रदायिक माहौल देखकर के त्रस्त हो जाते हैं लेकिन रूबी का और शहीद जैसे पत्रकार ऐसे हैं जो सार्वजनिक प्रोफेशनल काम और निजी विचारों और जीवन के साथ साथ सामंजस्य बिठा रहे हैं आपने देखा भी होगा कि दोनों पत्रकार ही जहां पर राष्ट्रवादिता की बात होती है कॉल करके उसके पक्ष में आते हैं लेकिन कुछ पत्रकार ऐसे भी हैं जो कि देश का माहौल खराब करने के लिए आपने देखा होगा पिछले दिनों सी एक ऊपर झूठी खबरें फैला रहे थे जो NRC आया ही नहीं उस पर भी झूठ फैला रहे थे जिसमें कि अ खानम शेरवानी का नाम सबसे ऊपर आता है बाद में उस क्वार्टरों की लाइन बहुत लंबी है और ऐसे लोगों को ही द प्रिंट प्रेस कर रहा है अर्थात मुस्लिमों की नजर में वह हर एक मुसलमान भी काफिर के ही बराबर है जो लोग इस देश के विषय में बात करते हैं इसमें लेखक की मानसिकता पर नहीं हमें द प्रिंट की मानसिकता पर जाना चाहिए द प्रिंट कि हमने देखा है कि घोर हिंदू घोर सनातन विरोधी पोर्टल की तरह यह काम करता है द प्रिंट हो तक हो दवा पर हो या लल्लनटॉप हो यह सारे के सारे इस्लाम की बखान के लिए अपनी पूरी जान झोंक देते हैं और वायरस के समय में भी जब पूरा का पूरा देश एक साथ खड़ा हुआ था उस समय पर यह दोनों पत्रकार भी देश के साथ में खड़े हुए थे लेकिन कुछ नीम-हकीम थे कुछ ताबीज वाले थे जो रोड पर घूम रहे थे ऐसे लोगों का विरोध करने पर द प्रिंट की बहुत ज्यादा सुन ली है और उसने इसको बहुत ही जो झाल चिंताजनक बताया है कि ऐसे मुसलमान मुसलमानों के लिए खतरा है लेकिन झूठ फैला करके आगजनी करवाना इनके लिए सही है इन सभी खबरों के पीछे मेरा उद्देश्य सिर्फ इतना बताना है कि जिस प्रकार से लगातार देश के अंदर एक से एक घटनाएं घटित हो रही हैं इन सब के पीछे एक चैन है एक बहुत अच्छा और गहरा संबंध है इन संबंधों को समय रहते सीखना जांचना-परखना समझना और लोगों को समझाना अत्यंत आवश्यक है क्योंकि हम किसी एक खबर के ऊपर केंद्रित होकर के रहते हैं और आसपास घटित होने वाली दूसरे खबरों को नहीं देखते हैं जो कि उसी से लिंक है इन लिंक सभी खबरों से ही इतिहास रचा बदला और बनाया जाता है इन वजह से मैं जब भी आप लोगों के सामने आता हूं कुछ लिंक पर बहुत सारी खबरें ले करके ही आता हूं यह खबर यदि आपको अच्छी लगे तो इसको सबके साथ शेयर अवश्य करें सत्य सनातन को आप का दिया हुआ खैर इसी तरीके से फलता और फूलता रहे और यह आवाज पूरे भारतवर्ष की पूरे सनातन समाज की आवाज बनकर के उग्र ऐसी हमारी कामना है मेरे संग बोले सत्य सनातन वैदिक धर्म की जय जय हिंद वंदे मातरम
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