आप लोग बहुत क्वेश्चन करते हैं कि भाई जी जो आपकी ढाई मोर्चे का चक्र पुस्तक आई है उसका लिंक आप प्रोवाइड नहीं करते जबकि हमने अब हर एक वीडियो पर ऐसी सेटिंग कर दी है कि वहीं पर बुक पॉप अप होकर उसका लिंक आता है क्लिक करेंगे तो पहुंच जाएंगे ₹ की छूट अभी भी चल रही है हिंदू इजम के मैं एक्चुअली में मुझे इतनी जानकारी थी नहीं इंटरेस्ट आने लगा जब मैं थोड़ी थोड़ी में जानना में मैंने शुरू कर दिया हिंदुओं के बारे में असल में मे सबसे अच्छी बात लगती है कि हिंदुओ ने कभी किसी को परेशान नहीं किया बेवजह कि किसी के किसी के देश के ऊपर वो अतिक्रमण नहीं किया कभी हमला नहीं किया कुछ मतलब कुछ दबाया नहीं कुछ नहीं किया यही सबसे बड़ी खूबी है और मैं समझती हूं एक्चुअली मैं हिंदू लोग को बेवकूफ इसलिए समझती हूं क्योंकि वो अभी भी सो रहे हैं जी इसलिए आप बिलकुल बुरा मत माने क मैं सनातन लोगों को कभी बेवकूफ नहीं बोलूंगी मैं उन लोगों को बेवकूफ बोलूंगी जो अभी भी य ये पत्थरों के मूत के सामने माथा फकते हैं अंधविश्वास में भटके हुए ना गीता पढ़ते हैं ना वेद पढ़ते हैं ना सनातन को मानते हैं बस चल रही है हिंदू हो अच्छा चलो ठीक है यहां प मंदिर है माथा टे होगा धार्मिक हम हिंदू है चलो जय श्री राम बोलो हो गया ये बगवास बात है इससे कुछ नहीं होने वाला जी नहीं व तो हमारे लोग हमारे लोगों की बात बात ही कुछ अलग है वो तो एक नंबर के बेवकूफ है अच्छा बक लगता जी हमें ये लगता है कि वो बहुत सारी चीजों को निभाते हैं जैसे कि पांच वक्त की नमाज हो गया कुरान पढ़ना हो गया अपने जितने सुन्न अदा करना कोई पांच वक्त की नमाज पढ़ेगा अगर वो सोचता है कि मैं ये मैं खुदा के पास जाऊंगा अल्लाह के पास जाऊंगा जन्नत मिलेगी एक नंबर का अंधविश्वास इंसान है वो मैं एक बात बताती हूं वो पाच टाइम की नमाज पढ़ता है एग्री अगर वो पाच टाइम की नमाज पढ़ता है वो कितनी भी कुछ भी करे लेकिन उस वो कुछ हासिल नहीं कर पा व वो अल्लाह को पाने का कुछ नहीं है एक बात बता वो मैं नमाज को जब मैं मैं जब छोटी थी तोब मैं नमाज को इतनी मैं समझ नहीं पा रही थी लेकिन नमाज में मुझे थोड़ी गड़बड़ क्या लगती है एक्चुअली अब मैं ऐ सब बोलूंगी क्योंकि आप बोलेंगे ये क्या बोल रही है क्योंकि यह सवाल मेरे दिमाग में हमेशा आता मैं मैं जैसे मैं आपको पहले भी बता चुकी हूं ज हमारे घर में भी आते हैं वो मुझसे डरते हैं उनको पूछ ये जो नमाज ये ऐसा नहीं हो सकता वो बोले क्या मैं क्या बोलती कि इस खुदा का एक ही पैगंबर नहीं हो सकता वो मतलब आखरी नहीं हो सकता जब तक य दुनिया है तब तक कोई ना कोई आता रहेगा ता दिखाने वाला हा ये प्रकृति ऐसे लोग को जन्म देती है और देती रहेगी आगे भी इस्लाम के लोगों ने इस पृथ्वी को ही सब कुछ समझ के रखा है पथ मतलब बता ग पथवी खत्म हो गई सब बाबा पृथ्वी कुछ नहीं है पथ अं छोटा सा हि हिस्सा भी नहीं छोटा सा एक क्या बोलते उसको पॉइंट है छोटा सा लेकिन हा जैसे कल आपने मुझे बताया था कि इस्लाम में बाकी ग्रहो के बारे में नहीं मैं खोजी उसम बकल नहीं कुरान में नहीं है ना पढ़ी थीरान लेकिन मैंने उसने उस जो है व बात कभी सोची नहीं जब हमारी डिबेट हुई ना मैं आपके एक एक बात को मैं सुन रही थी और आप यकीन नहीं करोगे मैं लिख रही थी पता है और मैं आपको जो गुसा रही थी ना मैं जान बुझ कुसा रही थी मैं जानना चाहती थी कि आपके पास ब सवाल है या नहीं है ठीक ठीक ठीक और मैं हिंदू लोग को बेवकूफ बोल रही थी मैं आपको बेवकूफ नहीं बोल रही हिंदू लोग को जो वो सोए हुए हैं जी जी जी नहीं हमारे लोग ब 5000 साल से सोए हैं 5000 सा अ की बात नहीं है अभी भी चल रही है पूजा अर्चना बलि देना ये वो हमारे लाम में भी वही चल रहा है बिल्कुल कभी नहीं सुधरेंगे लोग कभी नहीं जब तक आप जैसे लोग नहीं होंगे ना जी तब तक ये आप बिल्कुल एक काम कर रहे हो ये जारी रखो ये बस हिंदुओ के लिए आप नहीं कर रहे हो आप पूरी दुनिया के लिए कर रहे हो बहुत-बहुत धन्यवाद मैं आपके बहुत शुक्र गुजार हूं जो आप ये काम कर रहे हो और आप जैसे लोग भी अगर धरती पर रहे बरकरार रहे तो मैं मैं मानता हूं कि ये एक तरफा लड़ाई ना हो और ये एक तरफा सुधारना हो दोनों तरफी हो और किंतु सनातन धर्म की खूबी क्या है मैं आपको बता द वो न्यूल है वो कभी मतलब ये ये पकड़ो ये छोड़ो ये छोड़ो ये पकड़ो ऐसा नहीं करता जब भी मैं भगवत गीता की शरण में आई हूं ना तब तब मैंने बहुत बातें सीख असल में सनातन धर्म क्या है ये मैं समझ रही हूं बहुत अा आपने गीता स्वाध्याय किया है गीता में आपको सबसे सबसे अच्छी जो बात लगी है सबसे बेहतरीन जो बातें लगी है वो आप बताएं कि ताकि हमारे भी लोगों को जो नहीं पढ़ रहे हैं मतलब जो नहीं पढ़ रहे हैं उनको नजरिया पता लगे कि मतलब एक दूसरे मजहब का एक इंसान है जिसने गीता पढ़ी है तो उसने उसमें क्या-क्या पाया है अच्छा देखो गीता को समझने से पहले हमें चाहिए कि कृष्ण का जो व्यक्तिमत्व है ना जी वो वो समझे जो इंसान कृष्ण का व्यक्तिमत्व जो समझ गया है उसको गीता पढ़ने की भी जरूरत नहीं आई थ मुझे ऐ लगता है कृष्ण का व्यक्ति मत्व इतना खूबसूरत है ना क्योंकि व खूबस उसकी उनकी व जो खूबसूरती की पहली बात है ना अ हमें लगता है कि वो पास्ट में हुए कृष्ण जी हुए लेकिन वो ऐसा लगता है कि वो भविष्य में ही है ऐसा लगता है जब भी मैं उनकी उनका जो व्यक्ति सब कुछ पढ़ी उनका जन्म कैसे हुआ क्या हुआ मैं ये भी सुनी हूं कि उनका जन्म जब हुआ तो ह में ब बच्चे का जब जन्म होता है तो रोता है न कृष्ण जी बहुत अ उने वो हसे थे असल में उनकी हसी से उनका मतलब उनकी गीता शुरू हो गई मुझे तब से ऐसा लगता है और कृष्ण को मैं इसलिए समझती हं कृष्ण की जितनी तारीफ कर उतनी कम है ऐसे कृष् मतलब ऐसे इंसान ऐसे व्यक्ति मत है ना कि जो धर्म की ऊंचाई पर बड़े होकर भी कभी गंभीर नहीं है मायूस नहीं है कभी उदास नहीं है कभी कभी रोते हुए नहीं है य आम असल में आम इंसान जो होता है वो हमेशा उदास है जिंदगी से हारा हुआ भागा हुआ लेकिन कृष्म क्या जो व्यक्ति वो अकेले ऐसे इंसानी जो नाचते हुए हमेशा हसते गाते हुए मैं समझती हूं कि हसता हुआ जो धर्म होता है जो सनातन धर्म जैसे सनातन धर्म मतलब क्या होता है मुझे कृष्ण के व्यक्तिमत्व से समझ गई जी असल में इसको वर्ड में पढ़ी थी जो सब कुछ एक्सेप्ट कर लेते है कृष्ण मतलब समग्रता उसको बोलते है समग्रता का मतलब है ना कि वो कुछ भी मतलब ये मत करो ये मत करो ये अपनाओ ये मतलब जैसा भी है उसको एक्सेप्ट करो ये फिलोसोफी मुझे बहुत बढ़िया लगी और मैं कृष्ण से मैं कृष्ण की फिलोसोफी पढ़कर ही मैं समझ गई ये फिलोसोफी क्या है और कृष्ण के बारे में जितना मैं बोलू उतना बहुत कम है अगर एक बात बताती हूं कि बाकी धर्म ऐसे विचारधारा है कि इस पृथ्वी को छोड़कर हमें जन्नत और जहन्नम जैसी जगह ऐसे बहुत अ हमारे इस्लाम में भी है इस पृथ्वी को नहीं इतना लेकिन जन्नत की बहुत उनको ये है डिजायर रखते है बहुत ज्यादा बहुत ज्यादा तो पूरी जन्नत के लिए सब जीते है लेकिन कृष्ण को व्यक्तिमत्व अगर पढ़े या समझे ना कृष्ण कभी इस तरह की फालतू बात नहीं करते ये क्या बोलते है मोक्ष यही है अभी है इसी वक्त है बिल्कुल बिल्कुल बस तुम समग्रता से सब कुछ एक्सेप्ट करो ये बात मुझे सबसे बढ़िया लगी कृष्ण जी के व्यक्ति बहुत बहुत ही और वैसे भी अगर जब कृष्ण अगर ऐसे पूरी जीवन को समग्रता से अपनाते ना वैसे ही इंसान ने अगर ये करना शुरू कर दिया ना माशाल्लाह मैं समझती हं पूरी धरती पूरी ये स्वर्ग में बदल जाएगी अगर आप बोलते ना जन्नत स य भी बन जाएगी अब जैसे हमारे इस्लाम में पता है कैसे कि ये एकली हमारे इस्लाम में गलत बात लगती है मुझे वो मतलब एक ये हराम है ये हलाल है इसको मत ये करो ये मत करो फिर ये करोगे फिर ये होगा ये करो फिर ये होगा न्यूट्रल नहीं है न्यूट्रल मतलब पक्ष लेते ये करो ये करो कृष्ण कृष्ण के बारे में ऐसे नहीं कृष्ण निष्पक्ष होते हैं हमेशा मुझे इसलिए ना भ के साथ में निष्पक्षता बिलकुल बिल्कुल निष्पक्षता अगर ये इंसान के अंदर होना तो यही और यही इंसान का असली धर्म है मैं समझती हूं और इसलिए हिंदू लोगों ने आई थिंक मैं जानती हूं कि बाकी जितने भी आप लोगों के अवतार आप मान सनातन लेकिन हिंदू लोग जो मानते हैं कि हमारे इतने नौ अवतार है दशावतार क्या बोलते हैं पता नहीं जी लेकिन बाकी सब जितने भी अवतार हो ना तो इनको आंशिक अवतार बताया गया है जी आंशिक लेकिन भगवान कृष्ण को आंशिक नहीं उनको पूर्ण अवतार जैसे खुदा ही है वो जैसे खुदा आया उ ईश्वर स्वामी ही प्रकट हो गए असल में खुदा धरती प नहीं आया असल में खुदा ही है सब कुछ मतलब खुदा कोई धरती से ऊपर नहीं आता ना ऊपर से नीचे आता है मैं उस दिन आपसे पूछ रहा था ना कि आप कह रहे थे ना कि ऊपर वाला तो मैंने आपसे पूछा था कि भाई ऊपर वाला और नीचे वाला कौन है वो तो सम समस्त ब्रह्मांड उसी में ही है अभी देखो मैं भगवत गीता में इसका मैं जवाब ही में नहीं आपने उसका जवाब दे दिया था कि ये पूरा समुद्र है और हम उसकी एक एक बूंद है और हम ना उससे बाहर है ना हम उसके अंदर है हम उसी में मिले हुए हैं हां उसका जवाब आपने दे दि था मैं ऐसे समझती हूं य ये जो फिलॉसफी यय सनातन परंपरा की ही फिलॉसफी है जिसमें कहा गया अहम ब्रह्माम मैं उससे अलग नहीं हूं यस हां तो मैं मैंने मंसूर की मैंने आपको हम सनातन सनातन म कोई धर्म सनातन म एवर लास्टिंग कभी जम अब वैसे भी हम सब कोई भी इंसान हो इस्लामिक हो क्रिश्चन हो सनातन है अगर वो चाहे कितना भी वो ठुकरा दे नहीं हम इस्लामिक है वो बेवकूफ है वो कुछ नहीं जानता सनातन का मतलब ही है ना जन्म ना मृत्यु य भी बात भ भगवत गीता से सीखी तो यही बात मैं इसीलिए मैं बोलना चाहती हं कि हिंदू जितने भी लोग है ना वो इतने सोए हुए हैं वो अपने धर्म की वो मतलब उनकी तरफ ध्यान ही नहीं देते उनके पास ऐसे हीरे पड़े ना वो पता नहीं व कहा व किससे पीछे लगे हैं वो क्या कर रहे हैं पैसों के पीछे भाग रहे बकुल नहीं मतवाद में है हमारे लोग मन्नत वाद में है कि यहां मथा पटको यहां से कुछ निकल आए वहां मथा पटको वहां से कुछ निकल आए बस ये है अपनी जो फिजिकल डिजायर्स है ना उनके पीछे पड़े हुए हैं जब मैं गुरुकुल में पहली बार गया और हमारे गुरु जी ने हमको सबसे पहले जब गीता पढ़ाई ना आप यकीन नहीं मानोगे मैं पहले आठ घंटे सोता था और मैं अब गीता के बारे में सोच सोच के इतना ज्यादा मतलब मेरे रोंगटे खड़े होने लगे थे कि मैं चार घंटे मुश्किल से सो पाता था और मुझे कोई थकावट नहीं होती थी मैं कह रहा ऐसा आदमी हो सकता है मतलब इतनी बात कहने वाला और वो भी एक मतलब बिना रुके बिना रुके और वो जवाब देता चला गया और कुछ हमारे जो गुरुजी हैं प्रद्युमन जी वो इतना अच्छे तरीके से एक्सप्लेन करते हैं ना मतलब आप कभी उनके मुह से गीता सुनोगे ना कभी वो एक श्लोक को पूरा एक दिन में मतलब एक क्लास में पूरे में एक श्लोक को ही एक्सप्लेन करते हैं और उसमें इतना डूब जाते इतना डूब जाते हैं बोले कृष्ण ये कृष्ण की इस वाणी में यह बात है इसमें यह बात है और पूरा मतलब नहला देते हैं और हमारे लोग पता नहीं किस तरफ जा रहे हैं मैं सच बता रहा हूं कि गीता यदि हम उसको समग्रता से उसम अंदर उतरे तो हमारा रोम रोम ऐसा हो जाए कि जैसा कृष्ण में है गीता गीता में मैं खुद बोलती इतना बड़ा समंदर है गीता इसम अगर जिसने इस समंदर का पानी चक लिया ना मतलब वो जीते जी व जन्नत में जी रहा है जीते जी मोक्ष में जी रहा है जीते जी उसको मरने की जरूरत ही नहीं है यही ज पा रहा यही सब पा र यही बात और यही खूबी मुझे बहुत अच्छी लगी कृष्ण जी हमेशा वैज्ञानिक उत्तर देते रहे साइंटिफिकली हाइपोथेसिस में कभी नहीं मतलब अर्जुन को बताते य जन कुछ नहीं बताते वो बोलते हैं बेटा तुझे अभी युज करना है अभी यस और य और ये तेरा कर्तव्य है और कुछ नहीं बाकी तुम सब छोड़ दो परमात्मा के ऊपर बस तुम्हारा कर्तव्य ये बात मुझे सबसे बढ़िया लगे अपना काम कर बस उससे फालतू मत सोच बिल्कुल त अपना कर्म कर बकुल ये ये वैज्ञानिक ये पूरा जो मैं भगवत गीता ये कोई ऐसी धार्मिक किताब नहीं हम बिल्कुल भगवत गीता का जो धार्मिक किताब बोलता है ना पाखंड क्योंकि धार्मिक किताब बोलती ना उस पर मथा टेकना हाथ जोड़ना और बस लाल कपड़े बांध के रख देना यही जा एक बात बताती हूं बहुत आसान है मतलब कृष्ण की पूजा करना बहुत आसान है कृष्ण की पूजा करना कृष्ण के सामने उनकी स्तुति करना वो जो जितने भी मंदिर में जाते घंटा व आरती रती बहुत आसान कृष्ण की राह प चलना ना वो असली धम बाकी सब बकवास और यह लोग सोचते क्या है अच्छा यह तो हमसे हमारे बस का नहीं तो भगवान कर सकता बस आप उसकी मूर्ति बनाओ मुह में उसके थोड़ा पेड़ा लगाओ आरती उतारो अपना घर जाओ और जो अया करनी है जो काम करना वो करो बस यह हमारा काम नहीं है बाकी मैं खुद बोलती हिंदू लोग जब सनातन आपका या सबका मेरा भी ठीक है मेरा भी मतलब मैं कभी मैं इस्लामिक लड़की मुस्लिम लड़की हं जा लेकिन मैं जब से भगवता पढ़ते आ खुद को ना इस्लामिक मानती हूं ना हिंदू मानती कुछ भी नहीं बस सनातन मानती हम आत्मा है जसे भगवत गीता में बता हम रूह है यही बात है हम हम बस रू है यह बात मुझे बहुत बढ़िया लगती है भगवत गीता जिसने पढ़ना शुरू कर दिया और व अमल में लाता है ना माशाला उसकी लाइफ वो कभी जीवन में कभी उदास नहीं होगा ना मरते वक्त होगा ना कभी नहीं उसको कुछ मिले या ना मिले वो अपने ही में नाचता रहेगा वो जैसे कृष्ण थे बुरे विचार हमारे मन में क्यों आते हैं बुरे विचार हमारे मन में आते हैं असल में मैं इसका भी मैंने मैंने जो सवाल आपने पूछा है ये सब ये भी मुझे इसका सवाल भगवत गीता से मुझे मिला है पूरे विचार एक्चुअली हमारी कृष्ण जी अर्जुन को पूछते बोलते कि ये जो पूरा जो दुनिया हैय ये तीन हिस्सों में आइ उसको सतम से बोलते हैं तोय इंसान के अंदर भी यही तीन गुण होते हैं और मैं पढ़ी हूं जो कृष्ण उसको बोलते कि जो स मतलब जो ल रता है मतलब पवित्र रहता है रखता है और जो बज बोलते उसको मतलब टट का मतलब लालच उस उसको रहता है हर बात का लालच गुस्सा करता है और जो तीसरा होता है तामसिक वो तो वो राक्षस हैवान मतलब कत्ल करना झूठ बोलना मास पच्छी मतलब किसी को मारना ये होता है आप मानस छोड़ दि जी जब से मैं भगवत गीता पढ़ती हूं तब से मुझे हर एक चीज में मुझे लगाव प्रेम प्यार मोहब्बत जागी है मेरे अंदर तो इस इन तीनों गुणों के कारण से हमारे अंदर अच्छे और बुरे एक्चुअली इन तीनों में जो भी अपर हो जाता है ऊपर नीचे चलता रहता है य सुबह से लेकर शाम तक और उनकी वजह से हमारे अंदर मीन टू से अच्छे और बुरे विचार आते रहते हैं अभी ये जो सवाल पूछा इससे मुझे याद आया तो हमारे घर में जो हमारे हमारे घर में एक मौलवी आते हैं मौलवी जी मेरे अब्बा के बहुत अच्छी फ्रें वो आते हमारे घर में तो हमेशा उनको सवाल पूछते रहती ह इलाम के बारे मेंचु मुझे पढ़ने का ब शक है इस्लाम के बारे में हो या कोई किताब हो मैंने फ मुझे फिलोसोफी पढ़ना बहुत अच्छा लगता है तो मैं मोहम्मद साहब की भी फिलोसोफी में मैं पढ़ती हू इस तो मेरे दिमाग में ऐसे सवाल आए यही सवाल जो आपने मुझे पूछा था कि इंसान को इंसान चाहता कि वो गलत ना करेस वो गलत रास्ते प ना जाए फिर भी वो गलत क्यों कर उसको पता है कि वो गलत है फिर भी क्यों करता है मैं मुझे लग रहा कि वो जो हमारे मौलवी साहब है वो ठीक से उसका जवाब दे देंगे वो तो इतने को इतना विद्वान मानते इस्लामिक स्कलर बोलते हैं और वो हमेशा वो वो वो हमेशा मस्जिद में रहते हैं वो अल्लाह का य वो बहुत ये करते हैं मतलब हमारे इस्लाम में उनको मतलब हमारे जितने भी पहचान वाले उनको बहुत अच्छा मानते कि ये अच्छे हैकी वो बहुत अच्छे मतलब ऊंचे लेवल के है वो मतलब वो कुरान को बहुत अच्छे से समझते हैं सब मैं उनसे पूछी मैं हैरान हो गई उन्होंने मुझे जो जो जवाब दिया वो क्या बोलते हैं जी कि ये ये शैतान करता है अच्छा तो मैं हां तो मैं उनको पूछ रही थी अ शैतान करता है फिर तो शैतान करता है तो फिर अल्लाह नहीं करता कुछ मतलब अल्लाह फिर उस शैतान का कुछ नहीं करता तो फिर इसका मतलब ये हो गया फिर वो शैतान अल्लाह से भी ज्यादा ताकतवर हो गयास फिर वो मुझसे बोलने लगे कि तू कुछ नहीं समझते बेटा ये तुम्हारी समझ के बाहर है ओ फिर मैं अब मैं इसका जवाब मैं पहले से भगवत गीता में पढ़ी थी हम मैं जानती और मैं ऐसा ही एक्सपेक्ट कर रही थी ये भी कुछ ऐसा कुछ बोले कुछ फिर मैं उनको बोली कि ये असल में ये ऐसा होता है क्या मतलब तीन हिस्सों में टूटता है वो बोले ऐसा नहीं होता मैंने कहा ठीक है चलो फिर मैंने साइंस का भी उनको बोला कि पश्चिम के लोग भी मान चुके हैं कि ये पूरी दुनिया तीन हिस्सों से कटती है यस ये जो प्रोटॉन न्यूट्रॉन इलेक्ट्रॉन ये बिल्कुल सच है यस और उनके अब मैं क्वालिटी बताऊ आपको अब मैं उनकी क्वालिटी बताता हूं जो इसमें न्यूट्रॉन होता है ना वो न्यूट्रल होता है जिसको हां मैं जानती हूं फिर हां जो जो प्रोटोन होता है वो पॉजिटिव होता है और इलेक्ट्रॉन नेगेटिव होता है तो पॉजिटिव नेगेटिव और न्यूट्रल तीन ही तरीके के विचार हमारे मन में होते हैं आते हैं या तो हम किसी चीज को लेकर बहुत ज्यादा अग्रेसिव होंगे कि हम इस काम को करेंगे या तो हम बिल्कुल नहीं करेंगे और या बस बीच में पड़े रहेंगे करें ना करें बस छोड़ो ना यस अब मैं इतने साल से भगवत गीता पढ़ रही हूं और मेरा भगवत गीता पढ़ने का जब मैं भगवत गीता पढ़ने शुरू की थी हम ब शुरू में पहला अध्याय आता है वो दुर्योधन होता है वो दुधन के सा संजय होता है तराश जी होते हैं असल में भगवत गीता के जो स्टार्टिंग जो है ना वो बोलते धर्म क्षेत्र कुक्षेत्र इस बात मुझे मैं सोची धर्म क्षेत्र तो युद्ध क्षेत्र है मैं सोची थी ऐसा कैसे हैय धर्म क्षेत्र बोल रहे धर्म क्षेत्र युद्ध क्षेत्र और युद्ध क्षेत्र में जो मतलब लड़ाई होगी जंग होगी थोड़ी धर्म होता है इंसान का असल में पूरी गीता का जो ज्ञान है ना वही है धर्मक्षेत्र जो धर्म वहां प बताया गया है ना वही धर्म क्षेत्र है गीता की एक एक लाइन एक एक वर्ड माशाल्लाह यूनिक बहुत ही बहुत ही बहुत बकुल मैं इतनी मैं इतने साल से गीता पढ़ रही हूं मैं खुद को अभी भी समझती हूं मैं गीता के बारे में और मुझे जानना है मैं कुछ नहीं समझ पाई और मैं इतना पढ़कर कुछ नहीं और कुछ जानने को बाकी है कृष्ण वैसे ही गीता कृष्ण इंसान की समझ के बहुत बाहर है तभी समझा जा सकता है जब इंसान खुद के अंदर डुकी मारता है और यही मतलब यही कृष्ण ने अर्जुन को बताया सब छोड़ दे तुम सब तु सब मुझ पर तुम भरोसा रखो तुम बस अपना काम करो अब देखो इस्लाम में अगर ऐसे समझे जाए फिर भीतर जाने की अंदर जाने की कोई कोई रास्ता नहीं है यह सब अ मैं कुरान को मैं मानती हूं ठीक है लेकिन कुछ कुछ बातों की गिया उड़ाती हूं अ मैं ऐ बोलूंगी ठीक है लेकिन मैं कोई मतलब छोटी बच्ची नहीं हूं मुझे मतलब मैं इने साल से पढ़ रही हूं मुझे बचपन से पढ़ने का शौक है पढ़ती हूं ऐसे पढ़ती नहीं हूं मैं सोचती हूं इसके बारे में और जितने भी मुझे कुरान के बारे में मुझे कुछ डाउट्स से मैंने जितने भी मौलवी को पूछे ना उनको समाधान काक जो उत्तर चाहिए ना जवाब m
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😲 अपना Point साबित के लिए इतने कुतर्कआइये कुछ Cross Questions करें।
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मैं ये पूछना चाहती हूं जो ये भी पौराणिक जो ये कहते हैं कि महिलाओं को वेद पढ़ने का अधिकार नहीं है तो मुझे बता दो क्या तुम्हारे घर में सरस्...
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