आप जरा सोचिए के क्रांति में 80 प्र क्रांतिकारी कौन थे जिन्होंने कि भारत को आजादी दिलाई आपको क्या लगता है कि चरखा चलाने से आजादी आ गई होगी कि साबरमती के संत तूने चरखा चलाया और आजादी आ गई अगर चरखे से आजादी आती तो मैं कहता हूं कि 51 हज चरखे रूस के बॉर्डर पर भिजवा दो और 51 हज चरखे इजराइल और फिलिस्तीन के बीच में रखवा दो वहां चलवा के लिए अपने गांधीवादी लोग भी हो सकता है कि युद्ध बंद हो जाए हमने देखा कि बहुत सारे कथावाचक बोल रहे हैं कि कंधों से ऊंची छाती नहीं होती और धर्म से बढ़कर जाति नहीं होती उसी जाति प्रथा पर सबसे पहला वार करने वाला यदि कोई था तो महर्षि देव दयानंद सरस्वती जिन्होंने 1 स साल पहले यह उद्घोष किया जिस समय पर कृष्ण तेरी गीता जलानी पड़ेगी पुस्तक लिखी गई उस समय पर कोई कृष्ण भक्त सामने नहीं आया था उस समय पर एक आर्य समाज ही सामने आया था जिसने उसका जवाब दिया था और परिणाम क्या हुआ कि उस व्यक्ति की हत्या कर दी [संगीत] गई [संगीत] ओ आपने जो एक बात कही उस मुझे बीच में याद आ गया कि आपने कहा कि मनुष्य और जानवर में जो फर्क होता है वो और वाणी का होता है लेकिन हम जो मनुष्य बन गए और पाणी और वाणी आ भी गया उसके बाद हमने क्या किया देखिए ईश्वर ने मनुष्य को जो बनाया है बहुत सोच समझ करके बनाया है मान लीजिए कि यह एक मनुष्य है तो इसमें सबसे ऊपर क्या दिया है दिमाग फिर आंखे फिर कान फिर नाक फिर मुंह फिर गला फिर दिल फिर पेट दिया और फिर जनन इंद्रिया दी लेकिन मनुष्य ने अपने आप को ऐसे बना लिया है भगवान ने हमें ऐसा क्यों बनाया था कि हम सब सबसे पहले कहां से सोचे कहां से कार्य ले दिमाग से दिमाग से कार्य ले विवेक से कार्य ले अपनी आंखों से देखें प्रत्यक्ष प्रमाण को देखे कानों से श्रुति प्रमाण को हम सुने फिर उसका एहसास करें अर्थात जो कहते है ना कि मुझे एक ऐसी इंटू आ रही है मुझे ऐसी सूंघ आ रही है कि यहां कुछ निष्ट या अनिष्ट होने वाला है और उसके बाद में बोले लेकिन हम क्या करते हैं सोचते समझते नहीं है पहले बोल पढ़ते हैं उसके बाद हमें कंठ दिया उसके बाद में हृदय दिया उसके बाद में पेट दिया सबसे बाद में हमें जननेंद्रिय दी जानवर के साथ में क्या होता है जानवर ऐसे होता है उसका दिल दिमाग वाणी जननेंद्रिय सब एक सीध में होती है आप चौपाई जानवर को देख लिए किसी को भी आप देखिए वो सब एक सीध में होती हैं उसी सीध में उसके कान है उसी सीध में आंख है उसी में मुह है तो कुत्ता भोकने से पहले सोचता नहीं है लेकिन मनुष्य ने अपने आप को उल्टा कर लिया और सबसे पहले व इंद्रिय सुख लेने में चलता है उसके बाद पेट भरता है उसके बाद दिल की दिल की जो कामनाएं है उनके बारे में सोचता है उसके बाद में बोलता है उसके बाद में व सुनता है उसके बाद व उसको देखता है अथवा नहीं भी देखता है और सबसे बाद में किसका काम लेता है वो दिमाग का बोले सोचूंगा सबसे बाद में यह हमने स्वयम किया हुआ है ईश्वर ने कहा कि यह शरीर ही तेरा मंदिर है अब यहां कोई छोटा बालक बैठा है कोई हां बेटा आप खड़े हो जाओ अब आप मुझे यह बताओ आपने क्या पहना हुआ है किसकी है ये और यह क्या है ये किसका कान है ये और यह क्या है यह किसका है और यह क्या है यह किसके हैं तो आप क्या हो आप कौन हो यह सब कुछ आपका है यह फोन मेरा है यह कपड़े मेरे हैं यह मैं नहीं हूं लेकिन आपने एक चीज कही कि मेरा यह हाथ आपका यहीं पर क्यों गया आपने ये क्यों नहीं कहा के यह मेरा है यह जैकेट तो मेरी है यह जैकेट तो मेरी है ऐसा क्यों नहीं कहा आपने यही क्यों कहा कि यह मेरा है यह क्यों कहा आपने यहीं पर हाथ रखकर क्यों कहा यदि आप किसी को बुलाते हैं कोई रमेश है मान लो किसी का नाम तो कहो रमेश इधर आना अब वहां चार रमेश खड़े हैं उनमें से कगा मैं यह हाथ यही क्यों जाता है यह हमारा हृदय प्रदेश है और जहां हम अर्थात आत्मा निवास करते हैं अर्थात यह शरीर क्या है यह मैं नहीं हूं यह मेरा है यह वाहन है गाड़ी यह मेरी है यह एक साधन है ना कि मैं हूं जब हम सामान को ही सम्मान समझ लेते हैं सारी समस्याओं की जड़ वही से आरंभ होती है हम सब श्रीमद् भगवत गीता जी के विषय में बहुत बड़ी बड़ी बातें पूरा समाज आज कह रहा है कि श्री कृष्ण भगवान को मानो और वही श्री कृष्ण भगवान कह रहे हैं किय शरीर एक साधन है यह तेरी एक नाव समझ ले गाड़ी समझ ले एक साधन है इस पर चढ़ कर के तुझे कार्य करना है किसका पहले सबसे पहले धर्म का अर्थ का काम का और सबसे अंत में मोक्ष का लेकिन हम धर्म भी भूल गए हम मोक्ष भी भूल गए और हमारे सर्वोपरि क्या है काम कामनाए और कामनाए क्या थी वो कामना थी मोक्ष की लेकिन हमने उसको काम को काम वासना समझ लिया है देखि परिभाषा का बड़ा महत्व होता है जब हम एक परिभाषा को किसी रूप में समझ लेते हैं और अर्थ होता है उसका दूसरा अब जैसे कि अर्थ के भी कई सारे अर्थ है जो यहां पर अर्थ दिया गया है व अर्थ अलग है और हम अर्थशास्त्र को समझते हुए क्या समझते हैं अर्थशास्त्र अर्थव्यवस्था और उससे मतलब रुपया तो हमने धर्म को भी छोड़ दिया मोक्ष को भी छोड़ दिया और हम क्या कर रहे हैं काम और अर्थ इन दो में हम लगे हुए हैं और यदि इन दो में हम लगे रहेंगे तो हमारा कल्याण नहीं होगा भगवान श्री कृष्ण ने भी कहा के यह शरीर एक उपयोग की वस्तु है पुराने कपड़े फेंक देने हैं नए हमें धारण करने हैं तो ऐसे में अभी दीपावली गई है तो छोटे छोटे बालकों को बड़ा अच्छा लगता है नई नई चीजें आती है उसमें तो आप ये बताओ आपका शुभ नाम रवीश नवीश एल लवीश लव वाला लवीश तो जब आपको यह कहा जाए कि आपकी टीशर्ट जो पुरानी हो गई है और एक नई रखी है तो आप कौन सी का चयन करोगे कौन सी को चूज करोगे नई को या पुरानी को नई को लेकिन हम नया शरीर धारण करने से पहले जब पुराने शरीर को छोड़ रहे होते हैं तो उससे ज्यादा हम कभी नहीं रो रहे होते हैं मैं मानता हूं कि जिस प्रकार से आज आपने बताया कि ऋषि दयानंद जिस समय शिवा एक साइड बैठ जाओ पिछले वाला को दिख नहीं रहा इसे सेट करके छोड़ दो बस बारबार ना टच करो नहीं बस एक बार छोड़ दो बस फिर पीछे बैठ जा वहां से देखते रहना ऋषि दयानंद अंत में यही वैदिक मंत्र कहते हुए गए विश्वानि देव सवित दुरिता परास और ओम का उच्चारण करते हुए बड़े प्रेम से इस संसार से उन्होंने विदा ली हमारे गुरु जी आचार्य प्रदुम जी महाराज और उनके गुरुजी स्वामी सोमदेव जी उन्होंने कहा अपने शिष्यों से बुला कर के जिस समय मेरे प्राणा हो रहे होंगे यदि उस समय मेरे चेहरे पर जरा सी भी शिकन हुई तो मुझ मेरे को गुरु मानना छोड़ देना मेरे अंदर कोई गुरुत्व नहीं क्योंकि जो शाश्वत सत्य है यदि मैं उसको भी स्वीकार नहीं कर पा रहा तो समझ लो कि मेरे अंदर अभी भी लोभ मोह मत्सर कुछ ना कुछ बचा हुआ है इस शरीर से एक लालच बचा हुआ है मेरे पिताजी हमेशा कहते हैं कि शरीर से जितना काम लेना है ले लो क्योंकि जानवर से अच्छे हैं जिनका मरने के बाद में कम से कम जूता तो बन जाता है हमारे इस खाल का तो जूता भी नहीं बनेगा इसलिए इसका जितना प्रयोग करना है जितना घिसना है इसको घि सो और धर्म का कार्य करो धर्म पूर्वक कार्य करने से जो अर्थ मिलता है उससे अपनी कामनाओं की पूर्ति करो और उसे वापस धर्म में लगाओ यह कार्य करते हुए मोक्ष की तरफ चलो कैवल्य की तरफ चलो जब हमने ओम का उच्चारण किया तो उसके बाद में एक ऐसी अद्वितीय शांति अपने मन और मस्तिष्क में आती है और आप सोचिए कि उस ओम का उच्चारण यदि हम निरंतर करते रहे आज भगवान के नाम पर ईश्वर के नाम पर बहुत सारे मत मता बने पड़े हैं कोई कह रहा है मेरा अल्लाह ही सबसे सही है कोई कह रहा है सिर्फ राधे राधे करो कोई कह रहा है कि हरे रामा हरे कृष्णा करो लेकिन ओम का कोई नाम लेने तक को तैयार नहीं जबक वेद दर्शन उपनिषद सब कह रहे हैं तस्य वाचक प्रणव त जपस तदर्थ भावनम उस एक ईश्वर का निज नाम क्या है कहते हैं ओम प्रणव और श्रीमद् भगवत गीता जी में भी यही कहा गया है कि व एक अक्षर नाम ही ओम ही प्रणव जिसको हम कहते हैं वही एक ईश्वर का नाम है मेरी एक से ऐसे ही बातचीत चल रही थी तो वो कह रहे ह रामा हरे कृष्णा कहा करो उसी से ही आपका कल्याण हो जाएगा मैंने कहा रामा है क्या रामा किसका नाम है तो उन्होने कहा कि भगवान राम का नाम मैंने कहा किसने कहा कि भगवान राम का नाम रामा है क्योंकि हम भारतीय लोगों को गुलामी काल में ऐसी आदत पड़ चुकी है कि जब तक कोई चीज कोई नाम कोई विद्या विदेश से बाहर से वापस नहीं आती उसको एक्सेप्ट नहीं करते कहां से आया रामा एक व्यक्ति विदेश गया उन्होंने उनको बताया राम लिखो उसने राम ना लिख कर के रामा कह दिया और आज उसी गुरु के भारतीय शिष्य जिनका जन्म भारत में हुआ जिनकी दसियों पीढ़ी भारत में ही जन्म हुई और यहीं पर मर गई खप गई वह भी कह रहे हरे रामा अरे रामा तो कोई था ही नहीं हरे कृष्णा कृष्णा कौन है कृष्णा का नाम है क्योंकि भगवान श्री कृष्ण ने उनको अपनी बहन माना और कहा के आज से तेरा नाम कृष्णा हुआ आकारांत जब नाम के बाद में आ जाता है तो वह स्त्रीलिंग हो जाता है अब आप रात दिन रामा तो ना जाने कौन है और हरे द्रोपदी हरे द्रोपदी हरे द्रोपदी गा रहे हैं और आप सोच रहे हैं आपको बैकुंठ मिल जाएगा तो ऐसा नहीं होता है और यह विद्या जो तर्क कर ने की है केवल महर्षि दयानंद सरस्वती ने ही आपको दी है अन्यथा कथावाचक बोलते हैं कि चप्पल और दिमाग बाहर छोड़ कर के आना अंदर मत लेकर के आना और वही कथावाचक वहा कहता है कि चाहे बीवी कितनी प्यारी हो उसको भेद बताना ना चाहिए और माफ करना हमारी सारी मातृ शक्ति वहां पर भेद बताना ना चाहिए भेद बताना ना चाहिए वहां गा रही है और पति जब यह कह कर के घर में है कि मेरे तो भगवान की 16108 रानिया थी तो क्या मैं एक दो भी नहीं कर सकता और वो भेद तो मैं तुझे बताऊंगा नहीं क्योंकि तो तू खुद गा रही है के भेद बताना ना चाहिए तो जब तू खुद गा रही है तो मैं क्यों बताऊ तो मैं तो चाहे एक रखू दो रखू या 16108 रखू मैं तो अपने भगवान के आदर्शों का पालन कर रहा हूं और मैं तुझे भेद बताऊंगा नहीं तो मैं पूछना चाहता हूं हमारी मातृशक्ति यहां पर बैठी है अगर आपके पति का ये भेद है तो उनको आपको बताना चाहिए अथवा नहीं बताना चाहिए बताना चाहिए नहीं लेकिन आप तो भजन कर रहे हैं कि पत्नी चाहे कि अच्छा और पति कितना भी प्यारा हो उसको भेद बताना ना चाहिए यह लाइन क्यों नहीं जोड़ी उसने अरे उसे गाने वाले को ये भी तो लाइन जोड़नी चाहिए थी नहीं जोड़नी चाहिए थी नहीं जोड़ेगा क्योंकि वो एक पुरुष है और वो नहीं चाहता कि उसकी जो भेद है वो पता लगे ऐसा क्या है भाई के वो भेद बता सकती है उसको या फिर उसको भेद पता करने का कोई अधिकार ही नहीं है एक और बैठा हुआ उसका भी महागुरु वो कथा में कह रहा है के जहां भी आपको स्त्री गायत्री मंत्र जाप करती मिले या वैदिक मंत्र जाप करती मिले या उसके गले में जिने मिल जाए या कोई संस्कार करती मिल जाए समझ लेना ये आर्य समाजी है और इन आर्य समाज ने धर्म का बिल्कुल नाश कर दिया अच्छा भाई जब आप अपने आप को आजकल तो सोशल मीडिया पर चल रहा है कि मैं मनुवादी हूं उसी मनु महाराज ने कहा कि यत्र नार्यस्तु पूज्यंते रमंते तत्र देवता तो देवता जब उसम वास करते हैं तो वह अपने वैदिक मंत्रों के बिनाई हो जाएगी क्या जहां वैदिक मंत्र नहीं वहां तो मले शासन करते हैं तो देवता कहां से आ गए उसको तो बल्कि यह कहना चाहिए था कि यदि महिलाओं अगर आप गायत्री मंत्र का जाप नहीं करते या ले सकते वैदिक मंत्र नहीं बोल सकते यत्र नार्यस्तु पूज्यंते पूज्यंते तो हट ही गया और रमंते तत्र देवता नहीं अब तो रमंते तत्र मले हो गया नहीं कहेंगे क्योंकि उन्हें आपको अपने पंडालों में बुलाना है लाखों की तादाद में और आपके मुह पर आपकी बुराई करनी है और वही मंत्र आपसे बचवा भी है वही आप बांच रहे हो रात दिन अब एक और मिल गया मेरे को वो मुझे कहने लगा कि जी आप तो मूर्ति पूजा नहीं करते आप तो मुसलमानों से बदतर हो और उसने कहा कि आप आर्य समाजी नहीं आप आर्य नमाजी हो मैं कहा अच्छा जी थोड़ा प्रमाण दो कहने लगे के जैसे कि पूरे वातावरण के अंदर जल कण तो है लेकिन हम उसको वातावरण में से नहीं ले सकते मुंह में सीधा प्यास लगेगी तो क्या करना पड़ेगा हमें गिलास में उस जल को भरना पड़ेगा साकार स्वरूप देना पड़ेगा तब हम उसको पीते हैं आप बताओ ऐसे ही ईश्वर सर्व व्याप्त है लेकिन उसको पूजने के लिए एक पत्थर की मूर्ति बनानी पड़ती है और उसमें फिर हमें प्राण प्रतिष्ठा करनी पड़ती है तो मैंने कहा अगर यही बात है उदाहरण है तो भाई मैंने भी न्याय दर्शन पढ़ा हुआ है न्याय दर्शन तर्क का दर्शन है तो तो मैंने उन्हें कहा कि अगर आप ये उदाहरण दे रहे हो तो उदाहरण ऐसा देना चाहिए तर्क शास्त्र के अनुसार और न्याय दर्शन के अनुस जो हमारी वैदिक डिबेट की जो तरीका है कि वो उदाहरण हर जगह घटना चाहिए तो ऐसे ही वातावरण में हर जगह ऑक्सीजन है तो आप उसको साकार स्वरूप दो और उसे सिलेंडर में भरो और उसे अपनी पीठ पर ला दो और मास्क यहां लगाओ और ऐसे घुमा करो क्योंकि आपको हर जगह व्याप्त ऑक्सीजन नहीं लेनी चाहिए आप उसको भी साकार स्वरूप में लो क्यों जी उदाहरण आप वही वही नहीं घटा सकते कि जहां जहां आपकी जीत हो रही हो आपको हर बात में लेकर आना पड़ेगा व अगर हम जल कण नहीं पी सकते गिलास में लेना पड़ता है साकार स्वरूप करके पीना पड़ता है तो मैं कह रहा हूं कि ऑक्सीजन तो हर जगह है आप उसको अदृश्य रूप में अगोचर रूप में क्यों लेते हो आप उसको भी अपने सिलेंडर में भर के लो कहने लगा महाराज ऐसा है भगवान के नाम पर कोई सवाल नहीं अगर कह दिया तो बस मान लो मैंने किसने कहा यह बात बताओ किस ग्रंथ में लिखी हुई है कह ग्रंथ में नहीं बता सकते हमारे पुराने पंडितो ने कहा मैंने कहा उन्होंने इसलिए कहा क्योंकि उनके पास में नॉलेज नहीं थी एक बालक के सवाल का जवाब नहीं था तो उन्होंने यही बना दिया जैसे कि महिला को भेद नहीं बताना चाहिए अब खुद का था भेद बताना नहीं था तो उसने भजन बना दिया जब सवाल का जवाब नहीं था उसने य बता दिया कि भगवान के नाम पर सवाल नहीं होना चाहिए मैं कौन से भगवान को मानते हो बोले मैं तो भगवान श्री कृष्ण को मानता हूं मैंने कहा तो 18 अध्याय श्रीमद् भगवत गीता जी के 700 श्लोकों में सवाल जवाब की ही पद्धति में बात हुई है बताओ आप क्वेश्चन आंसर में सारी बातें हुई है अरे अर्जुन जी सवाल कर रहे हैं और कृष्ण जी जवाब दे रहे हैं इसका अर्थ क्या हुआ कि वो स्वामी यह बात कहना चाह रहे हैं के हे मनुष्य अगर तुम्हारी बुद्धि में किसी बात का कोई भी सवाल खटक रहा है तो उसका तुरंत जवाब लो और तर्क के आधार पर लो अर्जुन कृष्ण से तर्क के आधार पर सवाल पूछ रहे हैं और व जवाब दे रहे हैं व भगवान होकर भी जवाब दे रहे हैं और दूसरी बात कि हमारे छह दर्शन ये पक्ष और पूर्व पक्ष टीचर और स्टूडेंट के बीच के संवाद पर ही आधारित है उपनिषद में भी प्रश्नोत्तर शैली में ही है और वही शैली महर्षि देव दयानंद सरस्वती जी ने सत्यार्थ प्रकाश में भी प्रयोग की है क्योंकि क्वेश्चन आंसर की जो शैली होती है वो किसी भी पॉइंट को क्लियर करने किसी भी कांसेप्ट को क्लियर करने के लिए सबसे बेहतर होती है अब सुनो आर्य समाजी को आर्य नमाजी कहने वालों मैंने कहा एक मिनट रुक जाओ बस अगर मैं आर्य नमाजी हूं और यह शब्द आपने मुझे दे दिया तो देखो आपको भी थोड़ी देर में मैं आर्य नमाजी ही सिद्ध करता हूं बैठो दो मिनट महर्षि देव दयानंद सरस्वती जी अकेले सत्यार्थ प्रकाश आर्य समाज को लेकर चले गए हो और उनका देहावसान हो गया ऐसा नहीं है आप यह बताओ के हवाई जहाज का आविष्कार किसने किया था तो बोले वो एकदम गदगद हो गए बोला आपको पता नहीं होगा कि पढ़ाया तो यह जाता है कि राइट ब्रदर्स ने किया था लेकिन वो शिवकर बापूजी तलपड़े थे जिन्होंने राइट ब्रदर से भी आ साल पहले हवाई जहाज बनाया था मैंने कहा उनके गुरु कौन थे बोले वो तो नहीं मुझे पता मैंने कहा उनके गुरु का नाम था कांची लाल और पूरा नाम सुनोगे तो कहोगे मैं भी आरे नमाजी हूं कांची लाल आर्य जी जिन्होंने ऋग्वेद आदि भाष्य भूमिका पुस्तक पढ़ी और उसके बाद उन्होंने कहा अपने शिष्य शिवकर बापूजी तलपड़े को के भरद्वाज मुनि द्वारा लिखित विमान शास्त्र जिसकी प्रति मेरे पास भी है लेकिन मेरे पास में उस लेवल का नॉलेज नहीं है तू बहुत ही खोजी लड़का है मेरा तू इस पर रिसर्च कर और कुछ करके दिखा और आप यकीन मानोगे कि राइट ब्रदर से भी पहले 1500 फीट की ऊंचाई पर पारे से उड़ने वाला जहाज मनुष्य रहित रिमोट से चलने वाला सबसे पहला किसने बनाया एक आर्य समाजी गुरु के चेले शिवकर बापू जीी तल पड़ने और आपको यकीन ना आए तो आप सबके हाथ में फोन है शिवकर बापू जीी तलपड़े और कांची लाल आर्य जी का इतिहास आप पढ़ लेना हर जगह य लिखा हुआ है स्वामी श्रद्धानंद जी जिस समय पर डायरेक्ट एक्शन डे हुआ मोहम्मद अली जिना ने कहा कि हमें आजादी मिले ना मिले लेकिन हम हिंदुओं को जरूर काटेंगे और रमजान के 17वें दिन 16 अगस्त 1946 के दिन उसने बंगाल के अंदर आतंक मचा दिया और वहां हिंदुओं को काटना शुरू कर दिया यह डायरेक्ट एक्शन डे की मैं आपको बात बता रहा हूं तब आर्य समाज था जिसने तलवार उठाई और हिंदुओं की रक्षा की और जिन हजारों हिंदुओं को मुसलमान मलेच्छ बना लिया गया था उनकी सबकी घर वापसी करी वो स्वामी श्रद्धानंद भी अगर तू आर्य नवाजी कहता तो वो भी एक आर्य नवाजी था उसके बाद नवा खाली में साढे लाख हिंदुओं को मुसलमान बना लिया गया था उन सबकी घर वापसी कराई आजादी के समय मेवात के अंदर 300 मेव राजपूतों की घर वापसी करवाई वह थे स्वामी श्रद्धानंद जी और उनके शिष्य राम प्रसाद बिस्मिल जी जिन्होंने आजादी की लड़ाई लड़ी उनका इतिहास पढ़ो कि उन्होंने शुद्धि आंदोलन के अंदर इतना बड़ा कार्य किया कि उनका मित्र बिस्मिल जो अफाक उल्ला खान वो भी खुद भी कहता था कि काश मैं हिंदू होता और मैं फिर से पुनर्जन्म लेकर अपनी भारत मां की रक्षा के लिए एक बार फिर से मैं जन्म ले सकता ऐसे ऐसे महापुरुष सरदार अर्जुन सिंह जिन्होंने आर्य समाज की ज्योति सबसे पहले एक पगड़ी धारी सिख जिन्होंने आर्य समाज को स्वीकार किया और ऐसे सरदार जिन्होंने की महर्षि दयानंद सरस्वती जी के हाथों से ही यज्ञ पवित पहना कौन थे अर्जुन सिंह जी वह अर्जुन सिंह थे किशन सिंह जी के पिता और भगत सिंह जी के दादाजी भगत सिंह की भतीजी वीरेंद्र सिंधु अपनी पुस्तक में लिख रही है वो लिख रही है शहीद भगत सिंह और उनके मृत्युंजय पुरखे इस पुस्तक में वो लिख रहे हैं और भगत सिंह की इससे ऑथेंटिक पुस्तक कोई नहीं है जो उनकी खुद की भतीजी लिख रही है व कहते हैं कि हमारे परिवार के अंदर एक प्रकाश एक ऐसी एक ऐसा उजियारा बन कर के महर्षि दयानंद सरस्वती जी आए के एक किसान के घर में भी उन्होंने इतना ज्ञान फैला दिया कि मेरे जो हमारे जो दादाजी थे अर्जुन सिंह जी उनके एक हाथ में हल और दूसरे हाथ में सत्यार्थ प्रकाश हुआ करती थी आप खुद सोचो के क्रांति की अग्नि ज्वाला को जागृत करने वाले महर्षि देव दयानंद सरस्वती जी के विषय में आज लोग कुछ भी कह देते हैं और हम चुप रह जाते हैं सरदार भगत सिंह 9 साल की आयु में जब यज्ञो पवित संस्कार हुआ तो अर्जुन सिंह अपने दोनों पोतों को यज्ञ वेदी पर खड़े कर कर के कहते हैं कि आजादी के समर में अपने दोनों पुत्र का मैं बलिदान आशय देता हूं अपने दोनों पत्रों को मैं देश के नाम करता हूं और उसी विचारधारा पर चलते हुए आगे भगत सिंह ने कहा कि मैं विवाह नहीं करूंगा क्योंकि मेरा विवाह हो चुका है न साल के भगत सिंह ने यह विचार अपने मन में पहले ही बना लिया था कि अब मेरा कोई दूसरा कार्य नहीं है आप जरा सोचिए कि क्रांति में 80 प्र क्रांतिकारी कौन थे जिन्होंने कि भारत को आजादी दिलाई आपको क्या लगता है कि चरखा चलाने से आजादी आ गई होगी कि साबरमती के संत तूने चरखा चलाया और आजादी आ गई अगर चरखे से आजादी आती तो मैं कहता हूं कि 5 द हजार चरखे रूस के बॉर्डर पर भिजवा दो और 51 हजार चरखे इजराइल और फिलिस्तीन के बीच में रखवा दो वहां चलवा के लिए अपने गांधीवादी लोग भिजवा दो हो सकता है कि युद्ध बंद हो जाए अगर चरखा चलाने से ही आजादी आती और क्रांति आती तो इस पूरे विश्व के अंदर शद शांति होती लेकिन यह एक प्रोपेगेंडा था जिस समय नवा खाली में हिंदू मर रहे थे उस समय पर हमारे तथाकथित महात्मा कहां पर थे वो बंगाल में हत्यारों की जान बचा रहे थे कोलकाता में जिस समय पर अमर हुतात्मा और बलिदानी गोपाल पाठा जी अपने हिंदुओं के मारे जाने के बाद बदला ले रहे थे राजेंद्र लाहिड़ी जी जो महर्षि देव दयानंद सरस्वती जी को अपना गुरु मानते थे लाला लाजपत राय जिन्होंने की सब क्रांतिकारियों के दिलों में आजादी की वो क्रांति फूंकी वो भी महर्षि दयानंद सरस्वती जी के अनन्य शिष्य थे श्याम जी कृष्ण वर्मा जिन्होंने इंडिया हाउस बनाया लंदन में और जहां से उन्होंने प्रत्येक क्रांतिकारी को जो भी असला चाहिए था जो भी साहित्य चाहिए था वो सब कुछ भिजवाया उनके विषय में ऐसे अपशब्द कहते हुए इन लोगों को क्या शर्म नहीं आती महर्षि दयानंद सरस्वती जी की विचारधारा पर चलते हुए तर्क शास्त्र को सर्वाधिक सुदृढ़ किया गुरु कुलों ने मैं बताना चाहूंगा कि आज आप जो आर्य समाजी है अपने आप को बहुत डेवलप्ड मानिए यह सोच कि आपकी विचारधारा 150 साल आगे चल रही है जिस समय पर इस देश के अंदर यह कहा जाता था के ढोल मुनादी करके लोगों को संदेश पहुंचाया जाए उस समय पर महर्षि दयानंद सरस्वती जी ने लंदन से मंगा कर के प्रिंटिंग प्रेस लगवाई थी इतने एडवांस थे वो कहने को सन्यासी थे किसी स्कूल कॉलेज में तो नहीं पढ़े थे लेकिन उनको पता था कि टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कैसे किया जाता है जिस समय पर महिलाओं को वेद गायत्री शिक्षा से दूर रखा जाता था उस समय पर उन्होंने कन्याओं की शिक्षा और गुरुकुल पर विशेष ध्यान दिया आज कहते हैं हमने देखा कि बहुत सारे कथावाचक बोल रहे हैं कि कंधों से ऊंची छाती नहीं होती और धर्म से बढ़कर जाति नहीं होती उसी जाति प्रथा पर सबसे पहला वार करने वाला यदि कोई था तो देव दयानंद सरस्वती जिन्होंने 1 स साल पहले यह उद्घोष किया आज लोग बोल रहे हैं उनकी बातों को आप सोचिए कि आप किस विचारधारा से जुड़े हुए हैं एक ऐसी विचारधारा जो हवन करती है यज्ञ करती है वैदिक मंत्रों के साथ में और उसके बाद मंथन करती है समाज में आई हुई कुरीतियों और आए हुए बिगड़ा के ऊपर ना कि तू बैकुंठ चला जाएगा तू रामधाम चला जाएगा तू स्वर्ग चला जाएगा तू मोक्ष चला जाएगा ये फिजूल की बातें नहीं करती बल्कि कहती है कि पर्यावरण खराब हो रहा है इस पर्यावरण की रक्षा करनी है मलेच्छ ने हमारे भाइयों की हत्या कर दी उसके ऊपर चिंतन करना है फलाने आदमी ने देखिए जिस समय पर कृष्ण तेरी गीता जलानी पड़ेगी पुस्तक लिखी गई उस समय पर कोई कृष्ण भक्त सामने नहीं आया था उस समय पर एक आर्य समाज ही सामने आया था जिसने उसका जवाब दिया था और परिणाम क्या हुआ कि उस व्यक्ति की हत्या कर दी गई जिस समय पर सीता का छिना नाम की पुस्तक लिखी गई और माता सीता का चरित्र हनन किया गया सारे के सारे हरे रामा हरे कृष्णा और राम मंदिर के लिए आंदोलन करने वाले लोग चुप बैठ गए क्योंकि उनके पास कोई जवाब नहीं था तब एक आर्य समाजी सामने आया और उसने उसका जवाब दिया और उसका परिणाम यह हुआ कि आर्य समाजी व्यक्ति की हत्या हो गई आप यह सोचिए कि जवाब देने के नाम पर कोई सामने नहीं आता मंदर और मूर्ति के नाम पर चंदा इकट्ठा करने वाले आपको हजार मिल जाएंगे यह एक ऐसा धार्मिक आंदोलन है कि जिसने अपने वेदों को नहीं छोड़ा और साथ ही साथ कहा कि जो रूट लेवल का काम है जो कंक्रीट वर्क है वो हमें करना है यह आलतू फालतू की बातें हमें नहीं करनी है यह आलतू फालतू की क्या है कथावाचक बैठ गया उसने भजन चलाया और माताएं हमारी बहने हमारी झूमने लग जाती और झूम झाम करके थक हार करके घर आती हैं और कहती हैं देखो जी मैं लेट हो गी जुमेटो कर लो मेरे पनी अब बस का है मेरे बस का नहीं है जमेटो कर लो सुगी कर लो खाना मंगवा लो और आर्य समाज की महिलाएं कार्यक्रम में आएंगी वैदिक मंत्रों का उच्चारण करेंगी अपने ईश्वर को याद करेंगी शक्ति का आधान करेंगी और फिर उसके बाद में समाज में निकलेंगी और कहेंगी कि समाज में ये बुराई आ चुकी है हमारी एक आर्य समाज की बहन है नाम नहीं लूंगा उनके क्षेत्र में ऐसा हुआ कि मलेच्छ का अतिक्रमण हो गया और यह क्या करते हैं कि सब्जी वाला फल वाला बन कर के आते हैं मनिहारा बन कर के आते हैं और रेकी करते हैं किसके घर में अकेली लड़की है कहां पड़ती है अच्छा बहन जी अरे नहीं आप धनिया अरे नहीं आप रप कम दे दो अच्छा अच्छा घर में कौन ककन है मेरे घर में तो एक बेटी है जी बस और कुछ नहीं है अच्छा अच्छा बिटिया कहां पड़ती है जी वो तो लेडी इरविन में पड़ रही है और जी वाह बहुत बढ़िया बहुत बढ़िया अच्छा यही आप बेटी हां जी हां जी यही है देख लिया और फिर उसने जो अब्दुल तैयार कर रखा है उसके एक बहुत बढ़िया गाड़ी दे रखी है बाइक दे रखी है वैसे तो वो टायर पंचर लगाता है लेकिन अब नाई भी उसके भाई हैं उन्होंने तामझाम जोड़ रखा है अपना एक मलेच्छ लड़की एक हिंदू लड़की की दोस्त बनाई जाएगी सबसे पहले और वो उसके साथ साथ रहेगी वो कब आना है कब जाना है ट वाला नहीं भैया मेरी सहेली खड़ी है हमें वहां छोड़ दो अब वो भैया भी ऐसा ठ वही खड़ा रहता है पिछली दीवार के पीछे व तुरंत आ जाएगा आओ दीदी आओ बैठो बैठो बड़ा संस्कारी बनक दिखाएगा और फिर एक दिन क्या होगा कि शिवानी त इसकी साथ चली जा यह तो भैया ही है मैं तो यही अरे जिसका जो अपनी सगी बहन का भाई नहीं हुआ तेरा भाई क्या होगा वो उसके साथ बैठकर जा रही है और ये पूरा प्लान तरीके से होता है उन बहन ने क्या किया कि अपने क्षेत्र में जितने भी ऐसे लोग थे सब का प्रतिबंध लगवाया एक व्यक्ति मुझे आकर कहने लगा कि जी हमारे यहां हिंदू मोहल्ले में सब मलेच्छ को मकान किराए पर दे रखे और कई बार झगड़ा हो जाता है और अब तो आक ऐसा हो गया कि वहां हड्डी फेंकने लग गए बाहर से लोगों को बुलाने लग गए गली एक दिन पूरी बंद कर दी नमाज पढ़ने लग गए मैं बहुत समझा लिया जी मानते नहीं मैंने कहा दिमाग जो है बादाम खाने से नहीं आता ठोकर खाने से आता है आप उनके ऊपर ध्यान मत दो अभी सुभाष जी हमारा वार्षिकोत्सव निपटा है कल ही न्यू मुल्तान नगर आर्य समाज का कल वह व्यक्ति आया और उसने मुझे बताया कि आपने कहा था कि उस पर ध्यान मत दो और छोड़ दो ठोकर खाने के बाद आपके बाद वापस आवेगा वो वो छ महीने उसने ध्यान नहीं दिया उसके ऊपर कुछ नहीं बोला उसने हुआ ये के एक साल हो गया उसने किराया नहीं दिया और वो मांगने के लिए आया तो तलवार लेकर उसके ऊपर चढ़ गया उसका फोन आया भाई साहब ऐसा ऐसा करके हो गया उसने कहा तो मैं क्या करूं तय तो कह रहा था सब बराबर नहीं होते तो वो कहने लग जी मैं लेक आया इनसे बात करो मैं कहा हा जी बताओ कौन सा कीड़ा था वो लिकड़ गया नहीं लिकड़ गया बोला हा सारा लिट गया मैं कहा एक बात बताऊ फिर दुनिया में सब जानते हैं कि 90 पर सांप जहरीले नहीं होते लेकिन मेरे भाई हम हर एक साप से कटवा के नहीं देख सकते कि तू जहरीला नहीं है हम हर साप से नहीं कटवा सकते हम चांस नहीं ले सकते सांप पता है तो लट लेकर भाग उसके पीछे अगर तू अपने भाई को घर देता एक तलवार उसे देता एक अपने पास रखता तो वो तेरे लिए लड़ता लेकिन व जो दूसरा है बाहर से लोगों को बुलावेगा यह वही गुड़गांव है जिसके पार्को पर कब्जा करके नमाज पढ़ी गई थी और यहां चार आदमी नहीं रहते थे आज जनसंख्या बढ़ती जा रही है मेवात तक के लोग आकर के पार्को के ऊपर कब्जा कर रहे हैं यह तो वो लोग है सांप को देखा आपने सांप को सांप चूहे के बिल में घुसता है उसको खाता है पेट भरता है और बाहर निकलकर फुप खार के कहेगा देखा मैंने कितना सोहना घर बनाया है किसी के दरा ऐ सागर उन्होंने तो बनाया किसी और ने उसको खाया भी और उसको बस नाम पट्टी तो बदलनी है अरे अयोध्या में इतना अच्छा मंदिर था क्या किया उन्होंने नाम पट्टी बदल दी बाबरी मस्जिद रख दिया मथुरा के अंदर क्या था कृष्ण मंदिर था नाम पट्टी बदल दी इगा बना दिया ज्ञानवापी मंदिर था नाम पट्टी बदली ज्ञानवापी मस्जिद कर दिया लाहौर के अंदर आय समाज की इमारतें आज भी खड़ी है उन पर पत्थर लगे पड़े हैं लेकिन ऊपर है इस्लामिया मदरसा इनका काम यही है सांप वाला चूहे को खा जाओ क्योंकि चूहे ने कभी शत्रु बोध नहीं किया चूहे ने कभी लड़ना नहीं सीखा यदि चूहा भी उछल के एक दिन मार देता तो चूहे में भी जहर होता है ऐसी बात नहीं है प्लेग चते ही फैला था बड़े-बड़े आदमी और वैज्ञानिक हिल गए थे अगर अपनी शक्ति को हम पहचानेंगे अपने स्वरूप को हम देखेंगे कि हम गीदड़ नहीं हम शेर हैं हम उस ऋषि दयानंद देखो आज तो उत्तर प्रदेश की सरकार ने हमें तो सिक्योरिटी दे रखी ऋषि दयानंद के पास तो ऊपर का एक अंग वस्त्र भी नहीं था कोपन कोपन में चलते थे और इतना बड़ा काम किया उन्होंने 17 बार जहर दिया गया उनको और उन्होंने तब वो काम कर दिया जब ये टेक्नोलॉजी नहीं थी यह मोबाइल नहीं थे हमें तो खुद अपने ऊपर शर्मिंदगी आनी चाहिए कि इतने द्रुतगामी वाहन होने के बावजूद इतने अच्छे मोबाइल इतना अच्छा फजी इंटरनेट होने के बावजूद यदि हम अपना प्रचार नहीं कर पा रहे तो शर्मिंदगी महसूस होनी चाहिए तो मैं कह रहा था ऋषि दयानंद ने ़ स साल पहले व विचार दिया जो हम आज तक फॉलो भी नहीं कर पाए पूरा का पूरा महिलाओं का उन आज कह रहे हैं कि कंधों से ऊंची छाती नहीं होती धर्म से बढ़कर जाति नहीं होती और जब ऋषि दयानंद इसी बात को कह रहे थे तब आप उसको पत्थर मार रहे थे तब आप उनको खदेड़ रहे थे जब उन्होंने कहा कि जातिवाद में इतना विश्वास मत करो अपने धर्म के लिए एक हो जाओ आप सोचो जरा कि आज जो लोग खड़े हो करर के कह रहे हैं कि हमारी आबादी दोबारा उतनी हो गई कि जितने में हमने पाकिस्तान ले लिया था और देश का बंटवारा होकर रहेगा क्या यह समस्या खड़ी होती अगर हमने 150 साल पहले य बात मान ली होती कि कंधों से ऊंचे छाती नहीं होती और धर्म से बढ़कर जाति नहीं होती लेकिन हम यह जो धर्म है ना यह जो हिंदू लोग हैं हम लोग हैं यह हमेशा हारी हुई लड़ाई के बाद ही जागते हैं लड़ाई को हारने के बाद ही क्यों जागते हैं उसके बाद हीना क्यों दिमाग में आता है अरे थोड़े फास्ट फॉरवर्ड होकर नहीं काम कर सकते क्या यह पहले अगर सोच लिया होता जब शुद्धि आंदोलन उस टाइम पर हो गया होता यदि बंटवारा अच्छे से हो गया होता यदि महर्षि दयानंद सरस्वती जी का दिया हुआ पहला शब्द स्वराज्य जिसको बाद में लाला लाजपत राय और आदि बहुत सारे क्रांतिकारियों ने कहा कि स्वराज्य मेरा जन्म सिद्ध अधिकार है क्या आपको पता है कि स्वराज्य शब्द जो है वो सबसे पहले महर्षि दयानंद सरस्वती जी ने ही दिया था उन्होंने कहा कि स्वराज्य ही चाहिए उससे कम कुछ नहीं चाहिए यदि हम उनके विचारों पर चलते तो आज हम यहां रो नहीं रहे होते आज जो लोग कह रहे हैं कि भारत का बच्चा बच्चा जय जय श्री राम बोलेगा अरे 1 स साल से हम हवन करते हैं और सबसे पहले हाथ उठाकर क्या बोलते हैं मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम की जय मैंने देखा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी आज लिख रहे हैं योगेश्वर श्री कृष्ण महाराज की धरती आज याद आ रहा है योगेश्वर श्री कृष्ण महाराज कहना सबको कल तक क्या था मनि हारे का भेस बनाया श्याम चूड़ी बेचने आया क्या था कृष्ण का स्वरूप कपड़े चुराने का अच्छा और किसी से पूछो कपड़े क्यों चुरा रहे थे तो बोले वो तो माया थी जहां कुछ समझना आया तो क्या माया थी माया बता देंगे वहा अ तलक आपने उनको इमरान हाशमी बनाकर रखा और जब भी धर्मं ने उनके आड में पूरे हिंदू धर्म को ही हाश पर रख दिया उसी को ही भाले पर टांग दि तो अब क्या याद आ योगेश्वर श्री कृष्ण महाराज अरे हम डे स साल से कह रहे वेदों की ओर लौटो एक ने तो मंजन बनाया बोला वेद शक्ति मेरे से नाम पूछने के लिए आते हैं अजी नाम बताओ कोई बढ़िया सा संस्कृत निष्ठ नाम बताओ मैंने कहा बड़े का नाम क्या है बोला की जी टिंकू मैं इसका अर्थ क्या हो वो बता दो बोले जी अर्थ नहीं पता ता जभी तो आपके पास आ संस्कृत नि नाम बताओ और नाम ऐसा हो जो वे में वेद से निकालना आज सबको वेद याद आ रहे हैं अरे डे स साल से पालन कर लिया होता तो आज हमें पूछना ना पड़ता यह हमें रिंकू टिंकू पिंकू ना करने पड़ते होते आज सब कह रहे हैं कि गौ माता का पालन करो और हम डे स साल से कह रहे हैं क्या कहते हैं जी हवन के बाद में गौ माता का और ना केवल कहा आर्य समाज की सर्वाधिक गौशाला हैं आपको अपने लिए ताली बजानी चाहिए आर्य समायो कि आपने केवल शब्द पर काम नहीं किया बल्कि उसे जमीन पर उतार कर दिखाया एक शंकराचार्य जी बैठे हुए कह रहे हमारे यहां जी गुरुकुल में एडमिशन चालू है जितने भी ब्राह्मण घरों में पैदा हुए केवल लड़के हैं वो इस पर नाम लिखवा दे अपना क्यों जी भाई दूसरों को क्या पढ़ने का अधिकार नहीं है लड़कियों को क्या अधिकार नहीं है महर्षि दयानंद सरस्वती जी ने सर्व शिक्षा अभियान चलाया और उन्होंने कहा कि गुरुकुल में प्रत्येक का बच्चा आएगा और लड़का भी आएगा और लड़की भी आएगी कन्या गुरुकुल खोलना उनका सबसे पहला सपना था आज हम सर्व शिक्षा अभियान की बात कर रहे हैं आज हम सब जातियों के बालकों को पढ़ना चाहिए सब धर्म ग्रंथ की बात कर रहे हैं लेकिन 150 साल पहले जब यही बात ऋषि दयानंद ने कही तो उनको पत्थर मारे जाते थे काशी शास्त्रार्थ जीतने के बावजूद उनको तो उस समय का सर्वाधिक बड़ा जो भी बड़े से बड़ा पुरस्कार हो सकता था सम्मान हो सकता था वो मिलना चाहिए था लेकिन ऋषि के ऊपर ईंट पत्थर गोबर तक फेंके गए लेकिन ऋषि ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा उन्होंने कहा मैं मिशन पर निकल गया हूं और मेरा मिशन कंप्लीट होगा तभी वापस आऊंगा और वैसा ही मिशन देखो लेकर के चले थे स्वामी श्रद्धानंद जी जिन्होंने कहा कि जब तक गुरुकुल कांगड़ी के लिए 300 पूरे नहीं कर लूंगा मैं वापस नहीं आऊंगा और देख लो आप हर जगह आज गुरुकुल की कमी है मेरे से पूछते हैं कि गुरुकुल में एडमिशन करवाना है मैंने कहा भाई साहब गुरुकुल में एडमिशन की संख्या पूरी हो चुकी तो जी कुछ नए गुरुकुल खोल दो तो खुलवा हो मैं कहां से खोल दूंगा आप खुलवा जमीन दो हीट दो सीमेंट दो हम खुलवा के देते हैं आचार्यों की व्यवस्था हम करेंगे क्यों कर रहे हैं ये आज कह रहे हैं कि मै कोलेने ना ऐसा कुछ 1885 में ये लिख दिया था कि यहां गुरुकुल चलते हैं कोई भी व्यक्ति भीख नहीं मांगता झूठ नहीं बोलता यहां चोरी नहीं होती क्योंकि यहां पर संस्कार दिए जाते हैं मेरे पास फोन आते हैं जी हमने लड़का अपना बीटेक करवा दिया लाखों रुपए लगा दिए लेकिन संस्कार नहीं है अब बीड़ी सिगरेट सुलफा तंबाकू जो मिलता है सब करता है हमें गालिया देता है घर से बाहर निकाल दिया कई बार तो और अंदर जो है अपने दोस्तों को बुला कर के पार्टी करता है दो-तीन बार तो जेल भी जा चुका है तो मैं कहा मैं क्या करूं आपने मे कोले शिक्षा पद्धति के अनुसार बच्चे को पढ़ाया बच्चे के गले में पट्टा डालेगा सीधी सी बात चमड़े का डलो चांदी का डलो सोने का डलो चाहे हीरे मोती का डलो डले का पट्टा ही जो आपका बालक आज पढ़ रहा है कल को क्या करेगा वो नौकरी करेगा और वेदों में उसी को ही शुद्र कहा गया है जो सेवा करता है लेकिन वैदिक शूद्र वो होता था जिसके पास में अक्षर ज्ञान नहीं था जो पूरी तरीके से साक्षर नहीं था यहां कौन नौकरी करता है जो बीटेक एमटेक फिर एमबीए कर लेगा वो दूसरे की जाकर सेवा करता है शुद्र शब्द पर भी बहुत हाहाकार मचता है कहते जी दलितो को ही शूद्र कहा गया है मैंने कहा बताओ कहां लिखा है दलित ही शूद्र है बताओ कहां लिखा है वो लाइन दिखाओ मुझे जहा यह लिखा हुआ है तो शूद्र क्या है मैंने कहा कि सरकारी नौकरिया जो निकलती है उसमें कितनी कैटेगरी निकलती बोला जी चार कौन ककन सी ए बी सी डी अच्छा ए कैटेगरी में कौन जाते हैं बोला आईएस कौन होता है आईस पांचवी पास या दवी पास बोला सब परीक्षाओं को पास करने के बाद में यूपीएससी के भी तीन चार चरण होते हैं उनको क्लियर करने के बाद में बनता है मैंने कहा सबसे पढ़ा लिखा या सबसे विद्वान व्यक्ति बनता हैज और डी में कौन आता है सफाई कर्मचारी चौकीदार मैंने कहा भी सबसे पढ़े लिखे होते होंगे बोला नहीं नहीं व आठवी पास दवी पास भर्तियां निकलती रहती है तो भाई मेरे जब आपको चतुर वर्ण आश्रम व्यवस्था की विरोध ही करना था तो कुछ ढंग से कर लेते जब विधान बनाया है तो उसमें कैटेगरी क्या तो तीन कर लेते ए बी सी या ए बी सी डी ई एफ जी एच आई ज कर लेते वे भी चार और तुमने भी ए बी सी डी चार ही बनाए और वहां भी जो सबसे पढ़ा लिखा सबसे विद्वान है वो ब्राह्मण कोटि में गया और जो सबसे कम पढ़ा लिखा है वो शुद्र कोटि में अर्थात सेवा की कोटी में गया और यहां भी आपने उ सेवा की कोटी में लगाया ऐसा क्यों ब्राह्मण नक्षत्र वैश्य शुद्र कोई जन्मना जातिया नहीं ये ऑक्यूपेशन कैटेगरी थी क्या थी ये ऑक्यूपेशन कैटेगरी लेकिन जब हिंदुओं के ऊपर सनातनी हों के ऊपर प्रहार करना होता है तो यह लोग बातों की जलेबी बना देते हैं और हम कई बार उन जलेबि में आ भी जाते हैं आजकल आप देखोगे कुछ दिनों तक कहते थे गर्व से कहो ंद कल कहते हैं गर्व से क हम सनातनी है धर्म क्या है बोलते हैं हमारा धर्म है वैदिक सनातन धर्म और हम क्या कहते हैं सत्य सनातन वैदिक धर्म की जय हो यह 1 स साल से हम कह रहे तब किसी को समझ नहीं आया था आज समझ आ रहा है कि धर्म सनातन है हिंदू एक क्षेत्रीय पहचान हो सकती है परंतु धर्म नहीं वेद में धर्म के नाम पर ये नहीं लिखा हुआ है धर्म वो है जो इटरनल है अर्थात सनातन है जो सर्वदा से था सर्वदा से है और सर्वदा तक रहेगा और इस सृष्टि के बाद जो दूसरी सृष्टि आएगी उसमें भी रहेगा यह है धर्म विचारधारा नहीं है ये यह कोई कल्ट नहीं है किसी ने मुझसे कहा कि आचार्य जी आप बड़ी-बड़ी बात करते हो लेकिन आप एक बात बताओ के बौद्ध धर्म का संस्थापक तो महात्मा बुद्ध जैन का ये इस्लाम का ये ईसाइयत का ये आपका कौन है राम जी है कृष्ण जी है कौन है बताओ मैंने कहा स्थापना केवल कल्ट की होती है मजहब की होती है समुदाय की होती है पंथ की होती है धर्म का कोई संस्थापक कर्ता नहीं होता वो स्वम से स्वयंभू होता है आप बताओ सत्य बोलना किधर से धर्म है हमारी तो धर्म की परिभाषा जो आपने बताई मनुस्मृति के हिसाब से वह कोई एक व्यक्ति तो नकारे एक व्यक्ति तो कहे कि सत्य बोलना अधर्म है बिल्कुल नहीं अब दूसरों के पास जाओ वह क्या कहेंगे नमाज पढ़ना ही हमारा धर्म है तो क्या सब बोल करते हैं क्या उसको नहीं करते बोला हज जाना ही है चलो सब चलते हैं भाई लेकिन वहां तो बड़ा बड़ा बोर्ड लिखा हुआ है कि यहां काफिरों की एंट्री नहीं हो सकती तो धर्म का पालन कैसे करेंगे भाई हम सब और देखो हम है सनातन वैदिक धर्मी के हमारे धर्म का सब पालन करते हैं पूरे विश्व की जितनी भी भी कोर्ट है सबने कह रखा है सत्य बोलने वाले को छोड़ दो असत्य बोलने वाले को जेल में डालो अहिंसा करने वाले को छोड़ दो हिंसा करने वाले को जेल में डालो सजा दो इसका कोड़े मारो फांसी भी दे सकते हो हत्या करने वाले को फांसी दे दो आत्म इसको इसकी क्या बोलते उसको मृत्यु दंड दे दो लेकिन जिसने कोई हिंसा नहीं की उसको छोड़ दो चाहे वो आपके कल्ट हो आपके 57 56 देश हो चाहे अंग्रेजों के 200 कंट्रीज हो जहां जहां उनका शासन चल रहा है किसी का भी देश हो हमारे 10 नियमों को आप नकार के तो दिखाओ ये है इटरनल यह है सनातन यह है सत्य सनातन वैदिक धर्म इस कारण से मैं कहना चाहता हूं कि आप सब लोग बहुत सौभाग्यशाली हैं कि एक तो आप सनातनी है और दूसरा आपके अंदर तार्किक बुद्धि है आपका कोई गुरु आपका कोई आर्य समाज या आपका कोई भजन उपदेशक ये नहीं कहेगा कि चप्पल और दिमाग बाहर छोड़ कर के आना वो कहेंगे कि दिमाग को यहीं पर रखना फिजिकली और मेंटली प्रेजेंट रहना क्योंकि मैं कुछ भी पूछ सकता हूं आपके विद्वान आपसे टूवे में बात करते हैं आपका कोई सवाल होगा तो उस सवाल को लेंगे जवाब देंगे नहीं जवाब होगा तो ढूंढ के देंगे लेकिन यह नहीं कहेंगे कि ये तो सब माया है यह नहीं कहेंगे कभी भी क्योंकि हर चीज के पीछे कोई ना कोई कारण होता है यही हमारे वैदिक धर्म बता ग्रंथ बताते हैं यही हमारा सनातन धर्म कहता है यही भगवान श्री कृष्ण भी सिखाते हैं कि हे अर्जुन पात्रता पैदा कर और मेरे से सवाल पूछ और जो सवाल का जवाब ना दे वही व्यक्ति अधार्वा कितनी प्यारी हो उसे भेद बताना ना चाहिए उसका दिमाग का ढक्कन जरा खोल देना और उसका दिमाग का ढक्कन खोलना इसलिए आवश्यक है क्योंकि एक नकटे समाज की संख्या बढ़ गई थ आपने कथा तो सुनी होगी नकटे समाज की महर्षि जी ने लिखी है व यदि उस नकटे समाज की संख्या बढ़ जाती है तो आजकल है लोकतंत्र वोट जिसकी ज्यादा पड़ेगी उसी की तरफ समाज हो जाता है आपने देखा होगा के बेटा तेरे घर में बहुत गलत चल रहा है तेरा लड़का आज्ञा पालक नहीं अच्छा हर एक मां बाप की है बीमारी कि जी हां मेरा बेटा तो मेरे कहे पर चलता ही नहीं बेटा समोसे खाना हरी चटनी के साथ नहीं लाल चटनी के साथ खाना बोला महाराज मैं तो लाल चटनी के साथ ही खाता हूं अच्छा दाए हाथ से नहीं खाना बाए हाथ से खाना बोला महाराज मैं तो लेफ्टी हूं बोला के तुझे जो है ना पनीर वाला नहीं खाना आलू वाला खाना बोला मैं आलू वाला ही खाता हूं बोला ट जा बस तेरा कोई सुधार नहीं कर सकता क्योंकि वह चक्कर में नहीं आ रहा वे लोगों से हमें बचना भी है और बचाना भी है आर्य समाज का एक नियम है वेद पढ़ना है और पढ़ाना है धर्म रक्षा करनी है और करानी तो यह जो करना है और कराना है हम कर तो लेते हैं पर कराते नहीं है इसका हम सब प्रण ले कि हम ना केवल स्वयं करेंगे बल्कि दूसरों को भी कराएंगे और अपने बाल की जो क्वेरीज होंगी ईश्वर के विषय में सृष्टि के विषय में अनन्य जो भी विषय हैं उनको हम शांत करेंगे यह कभी नहीं कहेंगे कि भगवान के नाम पर सवाल नहीं किया करते बेटा पाप लगता है हम कभी यह नहीं कहेंगे कि बेटा वो माया थी उसके विषय में हमने बात नहीं करनी है हम यह प्रण लेंगे कि हम ना केवल स्वय कार्य करेंगे बल्कि अपने पड़ोसी को जो महर्षि को नहीं जानते जो इस विचारधारा को नहीं जानते जो तार्किक नहीं है हम उन तक भी इस विचारधारा को पहुंचाएंगे बस इन्हीं शब्दों के साथ मैं अपनी वाणी को विराम देता हूं आप लोगों ने मुझे यहां बुलाया और बोलने का यह अवसर दिया मैं आपका बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूं [हंसी] ओ ओ
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
😲 अपना Point साबित के लिए इतने कुतर्कआइये कुछ Cross Questions करें।
में एक बार क्या हुआ कि उनका खूब सारा लोगों ने आप जैसे यह दोनों ने बहुत विरोध किया और उन विरोध करने वाले लोगों ने महर्षि दयानंद सरस्वती जी...
-
हेलो दोस्तों प्रतीक्षा समाप्त हुई सनातन से तू आ चुका है सनातन सेतु का लिंक अब हर जगह पर आपको मिल जाएगा हमारे जितने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म...
-
लुट नमस्कार दोस्तों आप सबका एक बार फिर से स्वागत है आपके अपने YouTube चैनल सत्य सनातन में बहुत समय एक बाद पाठक जब एक बार फिर से हमारे साथ...
-
मैं ये पूछना चाहती हूं जो ये भी पौराणिक जो ये कहते हैं कि महिलाओं को वेद पढ़ने का अधिकार नहीं है तो मुझे बता दो क्या तुम्हारे घर में सरस्...
No comments:
Post a Comment