कि टमाटर दोस्तों आप सबका एक बार फिर से स्वागत है आपके अपने YouTube चैनल सत्य सनातन में क्योंकि मदर टेरेसा एक कृष्ण की वेटिकन की दलाल थी इस वजह से उसको भारत में सम्मानित भी किया गया क्योंकि वह तो छूने से ही कैंसर दूर कर देती थी अभी भी उनके जो पॉइंट्स हैं वह भी हाथ लगा करके मृतक लोगों तक को भी जिंदा कर देते हैं भारतवर्ष को भारत रत्न दिया गया क्योंकि विदेश द्वारा प्लांटेड थी लेकिन भारत के ही आयुर्विज्ञान पर आधारित यदि कोई दवाई आती है तो उसको तिरस्कृत कर दिया जाता है ऐसे ही विषय में हमने आप लोगों को बताया था किस प्रकार से को रोनिल दवाई जो आयुर्वेद के आधार पर बनाई गई जिसके सभी रिसर्च पेपर्स के सामने रखे गए थे और जिसमें जो आखिरी प्रमाण था उसको भी आचार्य बालकृष्ण जी ने कल रिलीज कर दिया है लेकिन उसके बावजूद भी लोग इन सब विषयों पर मजाक बनाने से बाज नहीं आ रहे हैं और यही विडंबना है कि भारतवर्ष की उत्पत्ति इसको योग कहा गया है वह कंदराओं तक सीमित रह गया था कि जिस योग को कभी कंदराओं से बाहर निकालकर के जनसामान्य के लिए सुलभ बनाने पर स्वामी रामदेव जी और आचार्य बालकृष्ण जी की बहुत कटु शब्दों में समीक्षा भी की जाती रही है आज उसी की बदौलत है कि लोग बार यह एलोपैथिक सेट करके अपनी जो सामान्य दिनचर्या है उसमें योग को समाहित करते जा रहे हैं यदि यही हाल रहा भारतवर्ष का तो एक ना एक दिन इस पूरे भारतवर्ष के ऊपर एक बार फिर से ईस्ट इंडिया कंपनी जैसी कंपनीज का शासन होगा और हम और आप एक बार फिर से गुलाम बन जाएंगे और यह आसान क्यों होगा क्योंकि हमारे लोगों के अंदर मानसिक गुलामी कूटकर के भरी हुई है आज मैं एक ऐसा विषय लेकर आया हूं जिसको मैं इस आयुर्वेद वाली वीडियो से आगे बढ़कर कि आपको बताना चाहता हूं और मैं बताना चाहता हूं कि किस प्रकार से वर्षों की मेहनत दुनिया की सबसे बड़ी दूरबीन और अरबों रुपए खर्च करके जो चीज सूर्य को देखने के बाद में वैज्ञानिकों को मिली तु पहले ही छांदोग्य उपनिषद में बता दी गई थी इस वीडियो को बनाने का उद्देश्य इस प्रकार से नहीं ले के मैं कोई यह कह रहा हूं कि साइंटिस्ट तो कुछ भी नहीं खोजते और हमारी किताबों पर पहले ही लिखा हुआ है लेकिन जिस प्रकार से सरकारें भारतीय परंपरा को डिमोटिवेट कर रही है उसके स्थान पर विदेशियों की भांति हमारे जो ग्रंथ हैं जिनके ऊपर वह लोग शोध कर रहे हैं उन पर एक बार शोध करने की आवश्यकता है नहीं तो हमारे देश में इसी प्रकार से आर्ष ग्रंथों को जलाया जाता रहेगा और वह लोग पेटेंट कराते चले जाएंगे और तो दोस्तों में बात कर रहा हूं डेनियल के इन्हें लेबोरेटरी की जो की अमेरिका में स्थापित है और इसमें डेनियल के इन्हें के नाम पर जो एक दूरबीन रखी हुई है जिससे कि दूसरे ग्रहों तारों का अध्ययन किया जाता है और इससे इन्होंने यह खोज की है कि जो सूर्य की सतह है वह सोने के समान स्वर्ण के समान चमकती है गतिमान है उसके रंग की है और यह एक मधुमक्खी के छत्ते की भांति दिखती है लेकिन यदि हम छांदोग्य उपनिषद पढ़े छांदोग्य उपनिषद का श्लोक संख्या है 31 यदि आप वह पढेंगे तो आपको इसमें स्पष्ट पता लग जाएगा और यही नहीं अगले चार-पांच लोग हैं जिन्हें बार-बार यही बात कही गई है मित्रों हमारे यहां पर जो वैदिक मार्ग में है उसमें किसी भी मंत्र के तीन प्रकार के अर्थ लिए जाते हैं अधिदेविक आदि भौतिक और आध्यात्मिक इस प्रकार से ऋषि मानते हैं कि जो भी ब्रह्मांड में है वहीं हमारे पिंड अर्थात यथा पिंडे तथा ब्रह्मांडे है इस शहर अंदर जो भी कुछ है वहीं ब्रह्मांड का ब्लूप्रिंट भी है जिसने इस को डिकोड कर लिया समझो वह अनंत आकाश गंगाओं से बड़े उस पूरे विस्तार को जान चुका है और यही कारण भी है कि हमारे यहां पर वट वृक्षों के नीचे आंख बंद किए हुए हजारों लाखों रिसीवर ने अपने शरीर के अंदर ही झांकता है मैंने पहले भी कहा था कि योग उपासना ही सबसे बड़ी उपासना है क्योंकि हमको अंतर्मुखी बनाती है और जो व्यक्ति अंतर्मुखी हो गया उसने स्वयं को पहचान लिया आत्म साक्षात्कार के बाद में ही परमात्म साक्षात्कार होता है यही बात हमारे दृष्टिकोण जानते थे इसी वजह से वह सभी ध्यान मग्न रहा करते थे छांदोग्य उपनिषद में एक जगह पर वर्णन आया है कि वह जो आदित्य है वह ऐसा है जैसे कि एक मधुमक्खी का छत्ता किरने उसकी मधुमक्खियां हैं और यह बिल्कुल स्वर्ण में यानी कि जो सोने का रंग होता है बिल्कुल उसी की तरह ही है ओम अश्व आदित्य देव मधु तथ्य जो रेवर तिरष्कार चिन्नवर कि अंतरिक्ष अप ओं मर 16 पुत्र आह छांदोग्योपनिषद श्लोक संख्या है 31 अमेरिका यह जो लैबोरेट्री है इसमें सालों तक अध्ययन करने के बाद में अपनी नजर गड़ाए रखने के बाद में इन्होंने बताया अध्ययन करने के बाद में कह रहे हैं कि यह मानव क्षमता की सबसे ऊंची छलांग है दोस्तों यह बात सच है यह सच कह रहे हैं कि यह बहुत ऊंची छलांग है इसमें कोई संदेह नहीं है लेकिन इसका दूसरा पक्ष भी हम को साफ दिखना चाहिए खोज तो वो रहे हैं इसमें कोई संदेह नहीं है उनके पास में हमारे वेद शास्त्र ब्राह्मण ग्रंथ दर्शन उपनिषद बिल्कुल है और वह इनके ऊपर भरोसा भी करते हैं और शोध भी करते हैं जबकि हमारे भारतवर्ष में बहुत सारे ऐसे लोग हैं जो इनको चौक चौराहों पर खड़े होकर जलाते हैं जैसे कि मनुस्मृति इसी वजह से सत्य सनातन ने यह इनिशिएटिव लिया कि वह रोजाना आपको मनुस्मृति के कुछ लोग अवश्य बताएगा और बताएगा उनके पीछे छिपा हुआ रहस्य है वह क्या है दोस्तों इस लैब ने जो कुछ भी बताया है वह पहले ही छांदोग्य उपनिषद में बता दिया गया है छांदोग्य उपनिषद के केवल इसी लोक में नहीं बल्कि इससे अगले भी चार से पांच लोक में बार-बार सूर्य को मधुमक्खी का छत्ता ही कहा गया है इन साइंटिस्ट को पूरा भरोसा है कि इन किताबों में जो कुछ भी लिखा है वह 100% नहीं बल्कि हजार प्रतिशत सत्य है इसलिए वे जो भी पढ़ते हैं क्योंकि उसी दिशा में ही खोज और शोध करने लग जाते हैं और सफल भी होते हैं कहीं-कहीं पर तो यह भी लगता है कि खोज करते ही ना हो बस उपनिषद में पढ़ा और अखबार में अपना नाम निकलवा दिया आदित्य मधुमक्खी के छत्ते की तरह है उनको पता है कि जांच कोई करेगा नहीं और कल यदि कोई वैज्ञानिक जांच करेगा भी तो रिशु ने जो कह दिया है वह बिल्कुल सही ही मिलेगा क्योंकि भारतीय ज्ञान-विज्ञान पर विश्व के ज्यादातर देशों और प्रबुद्ध लोगों व्यवस्था है सिर्फ हमारे देश के कुछ कंजर भारतीयों को छोड़कर के जब बात यहां पर सूर्य की चली गई है तो मैं एक बार और आपको बता दूं कि सूर्यग्रहण के विषय में भी यदि कोई अच्छे अर्थ करना जानता हो तो वह जानता है कि जहां पर स्वभाव लिखा हुआ है स्वरभानु का अर्थ होता है जो सूर्य के द्वारा प्रकाशित हो और आंसू रह का अर्थ मेक भी लिया जाता है और चंद्रमा भी इस मंत्र के माध्यम से भगवान हमें बता रहे हैं एवं वे सूर्यम स्वरभानु उत्तम हर साल विधि दासु रह ऋग्वेद के स्नो मंत्र में आता है एवं वे सूर्यम स्वरभानु तमाशा विनयदास तरह अर्थात और विंध्य जब मनुष्य के आत्मा को ढक लेता है तो वहां पर अज्ञान का अंधकार हो जाता है लेकिन उसको ज्ञान के प्रकाश से छांट लेना चाहिए अर्थात अंधकार में अज्ञान अविद्या में नहीं रहना चाहिए इस प्रकार से सूर्यग्रहण का वर्णन करते हुए इस मंत्र में बताया गया है सूर्य की किरणों की गति क्या है इसके ऊपर भी काफी बार प्रश्न हुआ लेकिन यह भी उत्तर हमको ऋग्वेद से ही मिलता है ऋग्वेद के प्रथम मंडल में दो रिचा हैं मनोनयन योद्धा न सहित 16 17 सूर्य वसई से अर्थात मन की तरह शीघ्रगामी जो सूर्य स्वर्गीय पथ पर अकेले चलता है अर्थात जो कि रहे हैं उनकी स्पीड बहुत तेज है इसमें मन की गति से बताया गया है अर्थात यहां पर हमारे दृश्यों को पता है कि सूर्य से किरण चलती है जो कि उनकी स्पीड बहुत तेज होती है क्या स्पीड होती है उसके ऊपर शुरुआत करते हैं यह मंत्र संख्या थी एक 719 अब हम ऋग्वेद के ही एक 509 मंत्र पर चलते हैं तरह विश्व दर्शकों ज्योति त्रयोदशी सूर्य विश्व मां भाषी रोचनम् अर्थात सूर्य तुम तीव्रगामी एवं सर्वसुंदर तथा प्रकाश के दाता और जगत् को प्रकाशित करने वाले हो अब इसके भाषियों को चलते हैं और वहां पर क्या लिखा हुआ है योजना नाम सर्वश्रेष्ठ द्वे द्वे शते द्वे उच्च व्यक्ति ने एक अनुसार दैनिक रमण नमोस्तुते अर्थात् आधे निमेष में 2202 योजन का मार्ग चलने वाले है प्रकाश मैं तुमको नमस्ते करता हूं अब यहां पर योजन में बात आई है योजना को यदि हम माइल्स में कंवर्ट करेंगे तो आप अपनी स्क्रीन पर देख सकते हैं एक योजन में 9.1 नील ने इस दिन रात में आठ लाख 10 हजार अर्ध निवेश होते हैं एक सेकेंड में 9.4 एक अर्ध निमेष हुए इस प्रकार से 2202 * 9.11 अर्थात 20,000 60.22 ए मील प्रति अर्ध अनिमेष हुआ यानी के 20,000 60.22 * 9.41 इसका अर्थ गोवा 1 लाख 88 हजार 700 66.6 साथ मील प्रति सेकंड जो कि आज के साइंटिस्टों के द्वारा जो बताई गई घटी है उसके बेहद समीप मिलती है यह है उपनिषद् दर्शन वैध इन सभी आर्ष ग्रंथों की शक्ति जो हमें बताती है कि हमारा जो ज्ञान है वह वास्तविक है मैं आपको बार-बार एक बात कहता हूं कि धर्म शोध का विषय है धर्म सवाल करने का विषय है इधर स्थान का और अंधविश्वास का और आंख मूंद कर विश्वास करने का विषय नहीं है बल्कि यह तो मजहब कल्ट इनकी पहचान होती है लेकिन हजार साल की दास्तां हजार साल की गुलामी के बाद में आज सनातन धर्म से संबंधित लोगों में भी यह बीमारी आ गई है कि वह केवल और केवल अंध-आस्था पर चलकर ही अपने आपको सनातनी कहलवाना चाहते हैं क्वेश्चन करना तर्क करना तर्क शास्त्र के अनुसार ही बातचीत करना शोध करना यही हमारे धर्म की पहचान है प्लीज आप सभी से मेरा निवेदन है कि आप सब लोग इस वक्त नर्मदा को छोड़कर के अंधी आस्था को छोड़कर के हर चीज को तर्क की कसौटी पर कसने का प्रयास करते रहे जब तक आपको उत्तर नहीं मिल जाता है वह लोग पेटेंट इस लेते हैं क्योंकि उत्तर करते हैं सवाल करते हैं आप और हम सिर्फ इन लॉग इन सभी पुस्तकों को लाल कपड़े में बांधकर के रख देते हैं क्योंकि यह तो हमारी पवित्र पुस्तकों के हैं कहीं इन पर हमारा हाथ भी आ जाए इस वीडियो में सिर्फ इतना ही आशा करता हूं आपको यह वीडियो अच्छी लगी होगी यह जानकारी आपको अच्छी लगी होगी यह जानकारी आपको अच्छी लगी तो इसको सबके साथ में Share अवश्य करें मेरे रंगोली सत्य सनातन वैदिक धर्म की जय जय हिंद वंदे मातरम
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मैं ये पूछना चाहती हूं जो ये भी पौराणिक जो ये कहते हैं कि महिलाओं को वेद पढ़ने का अधिकार नहीं है तो मुझे बता दो क्या तुम्हारे घर में सरस्...
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