कि अनंतरम् हरीम विद्या गरीब से विनम्र एवं चतुर्थ और अनंतरम् मित्र उदासीन तैयार हो परम मनुस्मृति का यह श्लोक सातवें अध्याय श्लोक संख्या 158 आप सभी को बताया कि माइकल मनुस्मृति स्वाध्याय कर रहे हैं और इस श्लोक के माध्यम से महाराज कह रहे थे कि जो हमारी राज्य की सीमावर्ती जो राज्य होते हैं वह हमारे शत्रु होते हैं लेकिन उससे पहले जो राज्य हैं वह हमारे मित्र होते हैं जैसे कि पाकिस्तान हमारा शत्रु है लेकिन उससे जो दूसरी तरफ का राज्य है अर्थात अफगानिस्तान व हमारा मित्र है जिस प्रकार से हमारी सीमा से सटा हुआ चीन वह हमारा दुश्मन है लेकिन उसकी सीमा से परे गा ताइवान उसकी सीमा से दूसरे छोर पर रहने वाला हॉन्ग कोंग यह हमारे मित्र हैं मनु महाराज बहुत स्पष्ट तरीके से जो हमारे विदेश विदेश की नीति है उसको समझाते हैं और आज हम डिटेल में बात करेंगे उन लोगों के बारे में और ताइवान के बारे में और बताएंगे आपको के भारत के अंदर जो कुछ चल रहा है अंदर बैठे शत्रु और बाहर बैठे मित्र किस प्रकार से इस होने वाले संभावित युद्ध में हमारे साथ हैं विडियो को अंत तक जरुर देखिएगा अच्छी लगे तो सबके साथ शेयर अवश्य कीजियेगा [संगीत] कि हमने देखा कि किस प्रकार से दवाइयां भारत के ऊपर यह आरोप लगा रहा है राहुल गांधी कॉल करके भारत सरकार के खिलाफ बोलना शुरू कर दिया है किस प्रकार से हमारा जो पूरा बिकाऊ मीडिया तंत्र है उसने भारत की जड़ें खोदने शुरू कर दी हैं लेकिन इसके विपरीत अमेरिका ने भारत के साथ में पूरे तरीके से सहयोग करने का अपना वादा दे दिया है साथी साथ इज़राइल ने भी इस मामले को दौड़ाया है साथ-साथ दूसरी सीमा की तरफ बैठे हुए ताइवान और हमको ने भी भारत से इस विषय में सहायता मांगी है पूरी बात को समझते हैं जो अभी फिलहाल तात्कालिक घटनाएं हैं उन सबको तो आप न्यूज़ चैनल पर देखते रहते हैं लेकिन आज हमारा महत्वपूर्ण विषय है कि तालिबान और हांगकांग से चाइना की क्या दुश्मनी है किस प्रकार से यह लोग चाइना के दुश्मन बने और क्या यह सब लोग भारत के साथ मिलकर के चाइना को आज डाल सकते हैं अपनी विस्तार और वर्चस्व वाली नीति में कारण से कुख्यात चीन को दुनिया ड्रैगन का नाम भी देती है चीन अपनी नोएडा पॉलिसी और कम्युनिस्ट विचारधारा के कारण अपने आस-पास के तमाम क्षेत्रों पर बलपूर्वक और कुटिलता से नियंत्रण स्थापित करने का प्रयास सदियों से करता आया है इसी के तहत इसमें इसको मकसद चीन कहते हैं भारत से उसको छीना है और जिसको हम मानसरोवर यात्रा कहते हैं वह भी आज चाइना में है अब हुआ क्या है भारत को चाइना जाने के लिए यानि कि मानसरोवर यात्रा जाने के लिए सिक्किम के दरों से निकलते हुए लंबी यात्रा करनी पड़ती है इसको छोटा बनाने के लिए और दिल्ली के समीप लाने के लिए एक नया मार्ग जो नेपाल के बॉर्डर पर बनाया जा रहा था उसको लेकर कि पूरा का पूरा झगड़ा हुआ और भगवान पर इसी वह सब ऐसा ही में इसी झड़प में ही हमारे 20 सैनिक बलिदान हो गए हैं कोई 4045 खबर चाइना किसी भी आ रही है लेकिन इस पूरे मैटर के अंदर यदि हम इसको गहराई से यदि हम समझेंगे पूरा मैटर क्या है तो इसमें हमें पता लगेगा कि किस प्रकार से चाइना के द्वारा पहले ही जो ताइवान हांगकांग और दी जो क्षेत्रज को कब्जा हुआ है वहां पर भी लगातार विद्रोह चल रहा है हांग कांग में अभी जो आक्रमण हुए उनसे वह लोग भी त्रस्त हैं इस प्रकार चारों तरफ से घेरकर के चाइना को दबाया जा सकता है उस पर कंट्रोल किया जा सकता है ताइवान न्यूज़ की वेबसाइट ने पोस्टर अभी जारी किया है जो कि सोशल मीडिया पर आकर्षण का केंद्र बना हुआ है ताइवान न्यूज़ पर प्रकाशित इस पोस्टर में भगवान राम ने रावण को मारते हुए नजर आ रहे हैं ऐसा कि हम सब जानते भी हैं कि भगवान राम बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक हैं यही नहीं ताइवान के लोगों ने भारत से चीन के घमंड को खत्म करने की अपील भी की है जो कि सोशल मीडिया पर बहुत तेजी से यह सारे मैसेजेस वायरल भी हो रहे हैं चीन ने ताइवान को हमेशा सही ऐसे प्रांत के रूप में देखा है जो उससे अलग थलग हो गया है चीन मांग कि भविष्य में ताइवान चीन का हिस्सा बन जाएगा जबकि ताइवान की एक बहुत बड़ी आबादी है जो अपने आप को स्वतंत्र देखना चाहती है और भारत के साथ में इनके बहुत अच्छे और गहरे संबंध भी है और यही वजह है दोनों के बीच में तनाव की ओर इस्त्री क्या है वर्ष 1642 से लेकर के 1661 तक ताइवान नीदरलैंड के कॉलोनी था उसके बाद में चीन का चिन्ह राजवंश वर्ष 1683 ले करके 18 को पिचानवे तक उसने तालिबान पर शासन किया इस पूरे राजवंश ने लेकिन साल अठारह सौ पचानवे में जापान के हाथों चीन की हार के बाद ताइवान जापान के हिस्से में चला गया था और आप भी जानते हैं कि जापान भी भारत का मित्र है और वह मित्र होने के कारण पीछे से उसका रिवीजन वही है जो मैंने मनुस्मृति का श्लोक आपको बताया था सातवें अध्याय का दूसरे विश्वयुद्ध में जापान की हार के बाद में अमेरिका और ब्रिटेन ने यह तय किया कि तालिबान और उसके सहयोगी चीन के कि राजनेताओं और जो मिलिट्री कमांडर च्यांग काई शेक को सौंप दिया जाना चाहिए चैन की पार्टी उस टाइम पर चीन के बड़े हिस्से पर नियंत्रण करता था लेकिन कुछ साल के बाद में चैन का विषय की सेनाओं को तो मिनट सेना से हार का सामना करना पड़ा था तब चैन और उसके सहयोगी चीन से भागकर के ताइवान चले आए थे और कई वर्षों तक लगभग 15 लाख की आबादी वाले इस ताइवान पर उनका प्रभुत्व रहा कई साल तक चीन और ताइवान के बीच में बेहद करीबी संबंध रहे बाद में उन्नीस सौ अस्सी के दशक में दोनों के जो रिश्ते थे वह थोड़े बहुत मधुर होने शुरू हुए तभी जैसे ही मधुर हुए वैसे ही वन कंट्री टू सिस्टम के तहत चीन ने एक प्रस्ताव ताइवान के सामने रखा था लेकिन उस को ठुकरा दिया गया था और चीन को बताया था कि हम एक स्वास्थ्य कंट्री हैं और आपके साथ मिल नहीं सकते हैं और साल 2002 चेंज वयन ताइवान के राष्ट्रपति चुने गए जिन्होंने पहले आम ताइवान की स्वतंत्रता का समर्थन कर दिया यह बात चीन को नागवार गुजरी तब से ताइवान और चीन के बीच में संबंधित है वह तनावपूर्ण पी रहे हैं बीच-बीच में जरूर तालिबान ने चीन के साथ में कुछ व्यापारिक संबंध बेहतर बनाने की कोशिश की है जैसे कि भारत और पाकिस्तान में भी होती रहती है अब बात करते हैं हॉन्ग कोंग कि हांगकांग ताइवान की तरह चीन से दूर नहीं बल्कि चीन से कम सटा हुआ है और इसमें झगड़ा क्या है चीन इसको अपने अंदर सम्मिलित करना चाहता है लेकिन हांगकांग और वहां के छात्र और युवा है वह चाहते हैं कि हम स्वतंत्र रहें यह प्रॉब्लम कहां से शुरू हुई 99 साल की लीज पर जब लिया गया था दरअसल हॉन्ग कोंग अन्य चीनी शहरों से काफी अलग है 150 साल पहले ब्रिटेन के औपनिवेशिक शासन के बाद में हांगकांग को निर्णय साल की लीज पर चीन को सौंप दिया गया था होंगे द्वीप पर 1842 से चीन का नियंत्रण रहा जबकि द्वितीय विश्व युद्ध में जापान का इस पर अपना नियंत्रण रहा था जिस प्रकार कि हमने पिछली स्टोरी में आपको बताया था यह है एक व्यस्त व्यापारिक बंदरगाह बन गया और 1950 में विनिर्माण का केंद्र बनने के बाद में इसकी अर्थव्यवस्था में बहुत बड़ा उछाल आया था चीन में और स्थिरता गरीबी या उत्पीड़न से भाग रहे लोग इस क्षेत्र की ओर रुख करने लगे 1984 में एक सौदा हुआ पिछली सदी के आठवें दशक की शुरुआत में जैसे-जैसे निर्णय साल की लीज की समय सीमा पास आने लगी ब्रिटेन और चीन ने हांगकांग के भविष्य पर बातचीत करनी शुरू कर दी चीन की कम्युनिस्ट सरकार ने तर्क दिया कि हांगकांग को चीनी शासन को वापस कर देना चाहिए दोनों पक्षों ने 1984 में एक सौदा किया कि एक देश दो प्रणाली के सिद्धांत के तहत हांगकांग को 1997 में चीन को सौंप दिया जाएगा इसका मतलब यह था कि चीन का हिस्सा होने के बाद भी पंखों 50 व टाटा विदेशी और रक्षा मामलों को छोड़कर स्वायत्त आनंद लेता रहेगा अब होता क्या है 1997 में जब हांगकांग को चीन के हवाले किया गया था तब बीजिंग ने एक देश दो व्यवस्थाओं की अवधारणा के तहत कम से कम 2047 तक लोगों की स्वतंत्रता और अपने कानून व्यवस्था को बनाए रखने की गारंटी दी थी लेकिन 2014 में हांगकांग में 79 दिनों तक से या तक चले अंब्रेला मुमेंट के बाद लोकतंत्र का समर्थन करने वालों पर चीन सरकार कार्रवाई करने लगे विरोध प्रदर्शनों में शामिल लोगों को जेल में डाल दिया गया एक पार्टी के ऊपर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगा दिया गया अब हांगकांग का अपना कानून और सीमाएं हैं साथ ही खुद की विधानसभा भी है लेकिन हांगकांग में नेता मुख्य कार्यकारी अधिकारी को 1220 रघु दीक्षित चुनाव समिति चुनौती है समिति में ज्यादातर लोग जो है वह बीजिंग समर्थक सदस्य होते हैं अ क्षेत्र के विधाई निकाय के सभी 70 सदस्य विधान परिषद सीधे-सीधे हांगकांग के मतदाताओं द्वारा नहीं चुने जाते हैं बिना चुनाव चुनी गई सीटों पर बीजिंग इनके चाइना के समर्थन में सांसदों का कब्जा रहता है और क्या हुआ चीनी पहचान से नफरत हो गई है इन लोगों को हांगकांग में ज्यादातर लोग चीनी नस्ल के हैं चीन का हिस्सा होने के बावजूद हांगकांग के अधिकांश लोग चीनी के रूप में पहचान नहीं रखना चाहते हैं वह स्वतंत्र हांगकांग वाली फीलिंग लाना चाहते हैं खासकर युवा वर्ग केवल 11 फिसल खुद को चीनी कहते हैं जबकि 71 फीसद लोग कहते हैं कि वह चीनी नागरिक होने पर गर्व महसूस नहीं करते हैं और यही कारण है कि हांगकांग हो और चाहे ताइवान हो यह सभी के सभी आजाद होना चाहते हैं तो यह अमेरिका इजरायल जापान या फिर भारत की तरफ एक निगाह देखना चाहते हैं उनकी सपोर्ट चाहते हैं सारी लड़ाई की शुरुआत है वह होती है नेहरु चाचा के यहां से नेहरु चाचा यदि यह ना कहकर के के जमीन बंजर है इसको चाइना को सौंप देना चाहिए जो कि हमारा एक पवित्र स्थल मानसरोवर जिसको यात्रा पर हिंदू लोग जाते भी हैं यदि उसको ना सौंपा गया होता तो आज यह सारे के सारे जो लड़ाई है जड़े हैं यह नहीं हो रहे होते बिल्कुल इसमें भी हमको नेहरु चाचा को ही जिम्मेदार माना चाहिए और हमें यह सोचना चाहिए कि जिस प्रकार से कांग्रेस के लोग आज नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार को कोस रहे हैं क्या कभी अगर वह चाचा नेहरू को इस प्रकार से आइना दिखाने का काम करते तो क्या झगड़ा होता मैं आशा करता हूं कि इन सभी प्रश्नों के उत्तर आप भी कमेंट बॉक्स में अवश्य देंगे इस वीडियो में सिर्फ इतना ही यह वीडियो अच्छी लगे तो इसको सबके साथ शेयर अवश्य करें मेरे रंगोली सत्य सनातन वैदिक धर्म की जय कि जय हिंद वंदे मातरम
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😲 अपना Point साबित के लिए इतने कुतर्कआइये कुछ Cross Questions करें।
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मैं ये पूछना चाहती हूं जो ये भी पौराणिक जो ये कहते हैं कि महिलाओं को वेद पढ़ने का अधिकार नहीं है तो मुझे बता दो क्या तुम्हारे घर में सरस्...
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