कि नमस्कार दोस्तों आप सबका एक बार फिर से स्वागत है आपके अपने YouTube चैनल सत्य सनातन में आज हम उन सभी डबल स्टैंडर्ड्स दुल्हनों के पर बात करेंगे जो कि सोशल मीडिया पर छाए हुए हैं इजरायल और फलस्तीन के युद्ध के बाद में हम बात करेंगे किस प्रकार से मुसलमान हो चाहे स्वरा भास्कर जैसे तथाकथित एक्टिविस्ट और फूहड़पन को बिखेरने वाले बॉलीवुड एक्टर एक्ट्रेसेस यह क्यों बार-बार नरेंद्र मोदी को ना जी कहते हैं कि आपको पता है कि नाज़ी कौन थे और नाजियों ने यहूदियों पर कितना अत्याचार किए थे ना Jio ने अपने कार्यकाल में लगभग 60 लाख से ज्यादा जिसमें कि 15 लाख बच्चे थे उनको जान से मरवा दिया था अगर हम यह मानकर चलें कि नाजी गलत थे तो यह मानना ही पड़ेगा कि यह दी शहीद है इजरायली बिल्कुल सही है लेकिन अगर हम आज की तारीख में ट्विट्स देखें लोगों के तो यह कहते हैं कि इजराइली आतंकवादी हैं हैं तो या तो नरेंद्र मोदी नाथ जी नहीं और या फिर इज़राइल लोग आतंकवादी नहीं लेकिन आप लोगों को पता है कि ब्रांड हैं इनका अपना कोई लॉजिक होता नहीं उनको सिर्फ वह बोलना होता है जिसमें कि उनको बोलने मजा आए और उनको लगे कि सामने वाला डीमोटिवेट हो गया है दूसरी चीज क्या आप लोगों को पता है कि मोहनदास करमचंद गाजी कब हुई इजराइल के पक्ष में यह जो के पक्ष में नहीं रहा उसने हमेशा ही फुल स्क्रीन का साथ दिया और आज जो मुसलमान नरेंद्र मोदी को ना जी इजरायल को आतंकवादी बता रहे हैं यह वही लोग हैं जो कश्मीर से कश्मीरी पंडितों को भगाए जाने के बाद में खुशियां मना रहे थे और आज जब भगाए हुए यहूदियों ने वापस अपना देश बना लिया तो अब वहां पर विधवा विलाप कर रहे हैं और लंबे से जिस प्रकार हम आपको बताते आ रहे हैं कि रमजान के महीने में मुसलमानों को युद्ध करना बड़ा ही पा कार्य और सुन्नत बताया गया है और यही नहीं इस दौरान काफी घरों मुश्रिकों गैर मुस्लिमों से युद्ध करते हुए यदि कोई व्यक्ति मरता भी है तो उसको अल्लाह के ऑर्बिट में तुरंत एंट्री मिलती है वह 70 हूरों के पास में एंट्री मिलती है इसी कारण और से अधिकतर युद्ध रमजान के दौरान और खासकर अंतिम दिनों में ही होते हैं इन सब पर हम विस्तृत चर्चा करने वाले हैं इतने सारे दोगलेपन के बावजूद एक बात सभी भूल जाते हैं कि पाकिस्तानी मुसलमान जिया उल हक ने और जॉर्डन के अम्मान शहर में छिपे हुए फलस्तीनी मुसलमानों को पकड़-पकड़ कर के गोलियों से भून दिया था जो कि जॉर्डन में भी इस्लामिक शासन था फलस्तीन के मुसलमान शरणार्थी सम्मान शहर में छिपे हुए थे उनको मरवाने वाला जिया-उल-हक खुद मुसलमान था तस्वीरों को शुरुआत करते हैं और शुरुआत में हम आपको बताते हैं कि अब पाकिस्तान इजरायल के खिलाफ खुलकर के सामने आ चुका है ट्रैक्टर की पहले ही आया हुआ था दोस्तों पाकिस्तान के अलग-अलग मंत्रालयों ने यहां तक कि प्रधानमंत्री ने भी ट्वीट करके इजरायल को धमकी दी है और उन्होंने खुलकर फिलस्तीन का साथ देने की बात की है अपील की है यही नहीं पाकिस्तान के शिक्षा मंत्री ने तो यहां तक कह दिया कि फिलस्तीन के लोग अभी भी पथराव क्यों कर रहे हैं उनके लिए जो पैसा जुटाया गया था क्या वह उन्हें बंदूक के नहीं खरीद पाए अर्थात खुल्लम-खुल्ला आतंकवाद की घोष हुआ था कर दी गई है भारत में भी बहुत सारे लोग बैठे हुए हैं जो पुलिस टीम को केवल इसलिए सपोर्ट कर रहे हैं क्योंकि वह एक मुसलमानों का देश है वहां के आस-पास के देश भले ही पुलिस टीम को सपोर्ट करें या ना करें लेकिन भारत में बैठे कुछ पंक्चर पुत्र उसका सपोर्ट करने के लिए जरूर जाएंगे लेकिन इजरायल यह बखूबी जानता है कि भारत में जो सपोले भारत की स्थिति में पढ़ रहे हैं उन सब को दरकिनार करते हुए पूरा भारत वर्ष एक साथ इजराइल के साथ में खड़ा हुआ है यह वहीं भारतीय हैं जो इजराइल को गाली दे रहे हैं जो कि केरल की एक महिला की मृत्यु के बाद में जिन्होंने अभी तक छू तक नहीं किया हमास के एक हमले में इजरायल की एक बस को निशाना बनाया गया जिसमें कि भारतीय मूल की एक महिला की भी मृत्यु हो गई है इसके बारे में कोई भी बात करने को तैयार नहीं है और हम आपको कोई भी आतंकवादी संगठन कहने के लिए तैयार नहीं है क्योंकि वो एक मुस्लिम संगठन है इजरायल है जहां पर टिक फॉर टैट किया वहीं पर हमें याद आता है 1967 का वह दिन जिसको कि हम ब्लैक सेप्टेंबर के नाम से भी जानते हैं बात की शुरुआत इजरायल के कुछ खिलाड़ियों को बंधक बनाने से शुरू होती है इसके बाद में इस्राइल और फिलिस्तीन के संगठन पीएलओ यानि के फल स्टीन लिबरेशन ऑर्गेनाइजेशन के बीच में लगातार युद्ध चल रहा था पुलिस तीन बार बार हार रहा था युद्धों का देश आगे बढ़ता चला गया पुलिस टीम ने वहां से भागकर के जोड़ में जा छिपे दोस्तों मैं आप लोगों को पहले बताया था कि जॉर्डन के जो फिलहाल के किंग है वह खुद को मोहम्मद पैगंबर के 40वें उत्तराधिकारी बताते हैं और मैं आपको यह भी बताया था कि किस प्रकार से एशियाई मुसलमान जो उनकी अब हालत देखें तो किस प्रकार से कलेक्ट तंबू में तन आपके रहते हैं लेकिन जॉर्डन के योग्य मुसलमान है कि जो कटिंग और प्रिंस और प्रिंसेस है इन सबको यदि आप देखेंगे कि पूरी तरीके से योरुप वासी और पूरी तरीके से खुले विचारधारा के लोग लगते हैं यह किसी भी एंगल से मुसलमान नहीं लगते वह समय पर जो वहां के राजा यानि के किंग अब्दुल्ला के जो पिता थे किंग हुसैन उनका शासन हुआ करता था 1948 यानि के इजराइल की आजादी के बाद फुल स्क्रीन नागरिकों से जॉर्डन के कई शहर भर चुके थे वहां पर शरणार्थियों ने काफी गंध भी मचाई हुई थी यही नहीं 1967 में पीएलओ की हार के बाद में बीएलओ के अधिकतर आतंकवादी जो रण के अम्मान शहर में छिपने शुरू हो गए थे साथी साथ उन्होंने इन शरणार्थियों के साथ मिलकर के वहां के किंतु सेंड को भी मारने के कई बार प्रयास किए लेकिन वह असफल रहे इस के बाद में हुआ क्या इसके बाद में बीएलओ ने कुछ और लोगों के ऊपर हमला करना शुरू कर दिया और इसमें अमेरिका के ढेर सारे नागरिक मारे गए हुआ ऐसा के दस सितंबर 1972 को पीएलओ ने तीन हवाई जहाजों को किडनैप किया और वह उनको जोड़ के इजहार का शहर में ले करके आ गए वहां पर उन्होंने एक-एक करके सभी प्लेंस को बम से उड़ा दिया इन जहाजों में सबसे ज्यादा मात्रा में अमेरिकन स्कूल और यहूदी थे अमेरिका का दबाव किंग हुसैन के ऊपर बढ़ता गया उन्होंने कहा कि इन आतंकवादियों को ढेर कर खत्म करो इसी समय पर यहां पाकिस्तान के एक ब्रिगेडियर की नियुक्ति के रखी थी उसको किंग हुसैन ने अपने पास में बुलाया और उन्होंने कहा कि आपके पास में यह पूरी की पूरी बटालियन है आप यहां से अम्मान खैर जाइए और वहां पर ढेर कर आतंकवादियों को मारिए जिया-उल-हक की सेना में काफी सारे पा पाकिस्तानी सैनिक भी थे पाकिस्तानी सैनिकों ने आतंकवादियों को ढेर कर मारने की बजाय जो शरणार्थी वहां पर आए हुए पड़े थे उन लोगों को ही गोलियों से भूना शुरू कर दिया उन लोगों को टैंक से उड़ाना शुरू कर दिया और घरों में घुसकर के उनकी महिलाओं को उठाकर उनके साथ दुष्कर्म करना शुरू कर दिया घरों को बढ़ाने से पहले उनका जितना भी कीमती सामान था वह सब कुछ वहां से उठा लिया गया अब आप खुद सोचिए कि यह सभी जो शरणार्थी थे यह फलस्तीनी मुसलमान थे जिया उल हक और उसकी फौज पाकिस्तानी मुसलमान थे और जिसमें सलमान ने यह आदेश दिया था वह खुद और पिंग हुसैन जॉर्डन का राजा था और उसके ऊपर जिन लोगों का दबाव था वह अरेबियन कंट्रीज थी खुद मुसलमानों ने मुसलमानों के कहने पर मुसलमानों को बेरहमी से मारा था 25000 फलीस्तीनी केवल 10 दिन के अंदर सोलह तारीख से 27 तारीख के बीच में बेरहमी से मार दिए गए जिनकी लाशें कई दिन तक सड़कों पर ही सड़ती रही थी यही नहीं इसके बाद में किंग हुसैन ने खुश होकर के जिया उल हक को अपने देश का सर्वोच्च सम्मान दिया उसको ढेर सारा पैसा दिया यह वही जियाउल हक है जो बाद में पाकिस्तान का राष्ट्रपति बना और वहां का तानाशाह बना और पाकिस्तान की जनता ने इसको शहर स्वीकार भी किया था अब आप खुद सोचिए कि मुसलमान यदि मुसलमान को मारता है तो उसके बाद में कोई चूं तक नहीं करता लेकिन जहां एक तरफ पुलिस अपनी लोगों ने इजराइल के ऊपर हमला किया उनकी अ इस चिंता को भोली-भाली जनता को निशाना बनाया और यही नहीं अपनी खुद की जनता के ऊपर भी बम छोड़ करके अपना खुद ही रोना रोना शुरू कर दिया उन आतंकवादी संगठनों के ऊपर यदि इजरायल ने कुछ गोल दाग दिए तो पूरे विश्व के मुसलमान खुद ब खुद ही रोने लगा और सबसे ज्यादा रोने की आवाज़े आई भारत और पाकिस्तान से उस पाकिस्तान से जिन्होंने खुद पुलिस टीमों को मारा और उस भारतवर्ष से जो खुद अपने देश का नहीं हुआ वह दूसरे देश का होगा ही क्या भारतीय मुसलमानों को इस वीडियो को देखने के बाद में हो सकता है कि उनकी आंखें खुलें स्वरा भास्कर जैसी महिलाओं की भी शायद खोलें और वह पूरे विश्व के अंदर अहमद यह शियाओं हुई घरों मुसलमानों के खिलाफ वो जो कुछ भी घटना से पूरे विश्व में हो रही है हो सकता है कि वह उस तरफ भी अपना ध्यान केंद्रित करें जिस प्रकार से अभी यहूदियों ने इजरायल ने फलस्तीन को ना को शुक्रवार रखे हैं जिस प्रकार से 56 के 56 देश पीछे हाथ बांधे इस पूरे के पूरे घटनाक्रम को देख रहें हैं इस बात से हम यही पता लगता है कि जो भी आगे बढ़कर ईंट का जवाब पत्थर से देता है जय जयकार उसी की होती है जीत उसी की होती है इज़राइल ने पिछले दिनों से लेकर अभी तक पर जिस प्रकार का पराक्रम दिखाया है पूरा विश्व उसका अनुकरण इस्लामिक आतंकवाद से लड़ने के लिए अवश्य करेगा तो दोस्तों इस वीडियो में सिर्फ इतना ही यह वीडियो आपको जानकारी से भरपूर लगे तो इस विडियो को सब के साथ में Share अवश्य कीजिए का यह मेरे संग बोले सत्य सनातन वैदिक धर्म की जाए जय हिंद वंदे मातरम
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