Tuesday, 20 January 2026

#MANTHAN क्या 15 मिनट के लिए पुलिस हटनी चाहिए थी Ach Ankur Arya Satya Sanatan

अरे हम तो वह हैं जो कभी किसी भी प्रकार से पहल नहीं करते लेकिन फिर भी असहिष्णु हो गए मैं तो कहता हूं एक बार ढंग से अणु हो कर के ही देख लो क्या पता अरे क्या पता यह खरपतवार साथ हो जाए यह जो फसल उभर नहीं पा रही इसके बीच में जो बीच में कांग्रेस घास खड़ी है यह उखड़ ही जाए असहिष्णु हो कर के देख ही लो मैं तो खुद कहता हूं 15 मिनट के लिए पुलिस हटा के देख लो [प्रशंसा] मैं तो देख रहा था व छोटे छोटे बच्चों का बो बहुत अच्छी सुंदर हूर होंगी आपको पता नहीं है कि यह अगर समंदर में थूक देंगे समंदर मीठा हो जाएगा शहद से मीठा हो जाएगा मैंने कहा मौलाना के दिमाग में थूक सके नहीं जहा इतना क थोड़ा सा अमत वहा भी आ जावे अरे थोड़ा सा वहा भी ककवा दो य तुम समंदर में क थकना चाहते हो फिल्मों के अंदर आता है जब तक बजरंगी भाईजान मोहम्मद के नाम की कवाली नहीं गाता है तब तक तो उसको सफलता भी नहीं मिलती है जब तक हनुमान जी को मान रहा है तब तक नहीं मिलती है कहता है मोहम्मद भर दो झोली या मेरी मोहम्मद अरे मोहम्मद की खुद की यार झोली खाली रही थी उसका ब था ला में वो किसकी झोड़ी भरेगा उसका खुद का खानदान कुछ साल के बाद खत्म हो गया वो किसकी झोड़ भरेगा भाई लेकिन हमारे दिमाग के अंदर ये वायरस डाला जा रहा है कि वो झोड़ी भरेगा झोड़ी [संगीत] भरेगा साथ ही साथ मैं आप सभी से अपील करना चाहूंगा कि विश्वानी सेवा फाउंडेशन को आप सभी डोनेट अवश्य करें क्योंकि हमारी यह फाउंडेशन आप लोगों से बूंद-बूंद भर के जो हमारी गगरी भरती है वह हम किसी ना किसी गुरुकुल या फिर गौशाला या गाय के लिए कार्य करने वाले लोगों को प्रदान करते हैं अपनी तरफ से आपका निमित बनकर सप्रेम भेंट करते हैं तो आपकी जो भी इच्छा हो हमें वह भेज सकते हैं अंकुल भाई भाई ने वामपंथ को भी स्पर्श किया ठीक है और हम जानते हैं अभी कुछ दिनों पहले एक भाई 20 2 वर्ष का एक युवा ऐसे बात कर रहा था कह रहा दीदी आप मानते हो आप संस्कृत के स्टूडेंट हो आप रामायण और महाभारत तो एपिक्स है ना महाकाव्य है ना वो सीधी बात जो हम कहते हैं भाई काल्पनिक कहां से आए कहानियां लिख दी है किसी ने कौन राम थे कौन कृष्ण थे ये सारी बातें होती है थोड़े दिनों पहले पिंजरा तोड़ की बात हम कर रहे थे तो पिंजरा तोड़ कहां से आया भाई लड़कियों के दिमाग में भरना कि तुम देखो कैन हो तुम्हें पिंजड़ा तोड़ना है तो ये जो वायरस इंजेक्ट किया जा रहा है ये इस्लाम भी उसके साथ-साथ चल रहा है कि दोनों मतलब जो दोनों शत्रु है वो साथ में मिलकर काम कर रहे हैं और इनका सीधा-सीधा प्रयास संस्कृति की हत्या करना है जैसे अभी आयुष जी ने बताया ना भारत से प्रतिषेध संस्कृत संस्कृति स्था तो किस तरह उस प्रतिष्ठा को उन स्तंभों को नेस्तनाबूद किया जाए उनका प्रयास है तो अंकुल भाई वो अभी किस स्तर पर है और हमें आप लोग तो हम लोग जो यो वो कार्य कर रहे हैं लेकिन य जितने भी लोग बैठे हैं हमें सामान्य स्तर पर किस रूप की तैयारी की आवश्यकता है वो आप धन्यवाद यह सवाल मेरे तक लाने के लिए क्योंकि आशीष भाई ने बहुत कुछ कहा है मैं इस यह कहना चाहूंगा कि हमारे प्रथम विधि मंत्री यानी के डॉक्टर बी आर अंबेडकर ने अपनी पुस्तक भारत अथवा पाकिस्तान का विभाजन इसमें इस विषय को बहुत अच्छे तरीके से छुआ उसके बाद या कहे कि उसके साथ ही साथ प्रथम गृहमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल ने भी भारत के विभाजन के बाद यह बात कही के जो लोग 85 प्र से अधिक मतदान करके मुस्लिम लीग का चयन कर रहे थे उनमें से तो 10 प्र लोग भी पाकिस्तान नहीं गए 90 प्र के आसपास आबादी अभी भी यहां पर है जिन्होंने वोट किया था तो ऐसा क्या हो गया कि एक रात में इनके विचार बदल गए और यह अपने विभाजित देश नहीं गए और इसी राष्ट्र में रह गए तो इसी प्रकार से प्रथम सीडीएस जनरल विपिन रावत जी ने भी कहा कि देश ढाई मोर्चे पर लड़ रहा है एक मोर्चा है एक मोर्चा है पाकिस्तान और एक मोर्चा है चाइना और आधा मोर्चा है देश के अंदर अब आधे मोर्चे के विषय पर उन उन्होंने भी कुछ खुल कर के नहीं बताया हमारी विडंबना यह है कि हम युद्ध के मैदान में तो हैं लेकिन ना तो हमारे प्रथम कानून मंत्री ना हमारे पहले गृहम मंत्री और ना हमारे प्रथम सीडीएस ने खुल कर के शब्द सह जो कहना चाहिए था उस शब्द में हमारे दुश्मन का बोध नहीं कराया स्पष्ट तया उन्होंने घटनाएं बताई उन्होंने बताया कि यहां ऐसा हो रहा है वहां ऐसा हो रहा है लेकिन खुल कर के यदि बता देते तो आज हमारे साथ में ऐसा सीन ना बन रहा होता कि सोचिए के माता-पिता एक ही बेड पर पड़े हो मरणासन्न यानी कि उनकी अंतिम सांसे चल रही हैं हम उनकी संताने हैं छोटी छोटी आ 10 साल की उनके सामने खड़े हैं वह हमारी तरफ इशारे तो कर रहे हैं अपने पीछे देखो लेकिन वो यह नहीं कह रहे कि पीछे जो तेरा चचा जान खड़ा है वही तेरा दुश्मन है और मेरे मरने के बाद एकदम वो तेरा गला घोटने वाला है और सबके ऊपर अपना झंडा गाड़ने वाला है मैं ऐसे मां-बाप का क्या करूं कि वो मुझे सूसू तो कर रहे हैं सीधे नहीं कह रहे तेरे पीछे तेरा दुश्मन खड़ा है पकड़ उसे या उससे बच या उससे भाग उन्होंने हमें स्पष्ट नहीं कहा तो यह बात हमें स्वम समझनी पड़ेगी आधा मोर्चा वो है जो इस राष्ट्र के देश के अंदर है हमारे भारत की सरकार ने बड़े-बड़े चिनूक विमान बैलिस्टिक मिसाइल और एक तो वो कौन सा जहाज था राफा ले आए बम ले आए परमाणु बम लगा दिए सब बॉर्डर पर लगा दिया और सबकी दिशाएं भारत की ओर से पाकिस्तान और चाइना की तरफ कर दी उनको तो हम बम मार करके फोड़ देंगे लेकिन उनकी आबादी से अधिक दुश्मन जो इस 140 करोड़ की आबादी के भीतर बैठे हुए हैं है उसको तो बम छोड़ दिया हम गोली भी नहीं मार सकते क्योंकि उसको पहचानना मुश्किल है व जो बालक आपके घर में है वो जो यह कह रहा है कि इस किताब को उठाकर बाहर फेंक दो इसको जला दो इसमें नारी के विरोध में है इसमें दलित के विरोध में है इसी एससी एसटी के विरोध में है यह तो छोटे बच्चों के भी विरोध में है यह हमारे अस्तित्व के ही विरोध में है इसको भी निकालो रामचंद्र जी को पूजना बंद करो कृष्ण को मानना बंद करो ऋषि दयानंद को मानना बंद करो यह हवन बंद कर दो इसमें पानी डाल दो क्योंकि इससे प्रदूषण होता है इवन ये तक हो गया कि अब तो शव दाह ग्रह भी बंद हो जाने चाहिए क्योंकि उनसे जो आनि निकलती है धुआ निकलता है उससे भी प्रदूषण होता है तो क्या करें दफना दे और हजारों हेक्टेयर भूमि को हमेशा हमेशा के लिए बंजर बना दे उसमें जहां जहां खेती भी ना हो सके ऐसा कर दे यह वो आधा मोर्चा है तो मैं इस आधे मोर्चे को दो बाप की आज्ञाकारी औलाद कहता हूं दो बाप की आज्ञाकारी औलाद कैसे देखिए हमने कहा कि दो दुश्मन तो हैं एक है पाकिस्तान एक है चीन पाकिस्तान की आइडल जीी इस्लामिक सरियाई कानून पर चलती है और चीन की जो आइडल जीी है व वामपंथी विचारधारा पर चलती है एक समय ऐसा था जब वामपंथी विचारधारा बहुत प्रबल थी जिस समय बंगाल के अंदर यह ममता बैनर्जी से पहले जो वामपंथी वहां सरकार थी ज्योति बसु जी की जो सरकार थी 10000 दलित हिंदू जब बंगाल छोड़ कर के भारत आ रहे थे और सुंदरबन में एक टापू पर बसने का प्रयास कर रहे थे ज्योति बसु ने अपने लोगों को ना कोई पुलिस ना फोर्स अपने लोगों को बंदूक देकर के उनकी हत्याएं करवा दी थी और उन लोगों को मरवाने के बाद आप समझिए कि तकरीबन 10 से 12 हज दलित हिंदुओं का नर सार हो गया और हमें और आपको पता तक नहीं है इतना बड़ा नर सार हुआ और हमें पता तक नहीं है लेकिन एक तबरेज जो बाइक चोरी कर रहा था और लोगों ने उसको पकड़ लिया और पतली पतली संटी से मार रहे थे उसकी मृत्यु पांच छ दिन के बाद झारखंड की जेल में हार्ट अटैक से होती है लेकिन वो मामला यूएन पहुंच जाता है 5000 सिखों की हत्या दिल्ली के अंदर होती है लेकिन मामला यूएन नहीं पहुंचता 15000 लोग गैस से घोट करके भोपाल में मार जाते लेकिन मामला यूएन नहीं पहुंचता लेकिन एक व्यक्ति हार्ट अटैक से मरता है तो मामला यूएन पहुंच जाता है और 10000 लोगों को सुंदरबन में मार करके फेंक दिया जाता समुद्र में लेकिन मामला हम तक नहीं पहुंचता है यह होता है इकोसिस्टम वामपंथी विचारधारा उस समय पर कैडर बहुत ज्यादा मजबूत था दूसरी तरफ इस्लामिक विचारधारा जिस समय पर लोग यह कहते हैं कि जी आपने आरंभ किया क्या आरंभ किया के बाबरी मस्जिद विध्वंस कर दिया मेरा यह बहुत पक्का एक विश्वास है कि सनातन कभी भी आरंभ नहीं करता किसी भी झगड़े की शुरुआत नहीं करता वो समापन तो करता है प्रधान जी अगर कोई भी व्यक्ति यज्ञ में आने से रह जाए तो जो अंतिम की जो पूर्णाहुति होती है वह डाल देता है हम समापन करने विश्वास करते आरंभ हो ना हो लेकिन हम यह विश्वास करते हैं कि भले ही शुद्धीकरण करके शुरुआत से आरंभ ना किया हो लेकिन यदि हम अंत में पहुंच गए तो समापन अवश्य करेंगे सनातन ने हम समापन तो किया है चाहे आप कितने दंगे देख लो लेकिन हमने कभी भी शुरुआत नहीं की तो जब यह मामला आया कि बाबरी मस्जिद विध्वंस ना होता तो मुंबई के यह दंगे ना होते मुंबई में विस्फोट ना होते तो मैंने उसकी रिवर्स इंजीनियरिंग करी और मुझे एक चीज प्राप्त हुई कि अजमेर दरगाह शरीफ जो कि ख्वाजा मोइनुद्दीन चि को ख्वाजा का अर्थ तो होता है बीच वाला और इसके मामले पर बहुत ज्यादा कंट्रोवर्सी भी हो चुकी है लेकिन मानते नहीं तो मैं ख्वाजा ही कह रहा हूं कुछ और शब्द का प्रयोग नहीं करूंगा तो ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती जिनका इन्होंने कहा कि भाई जो सूफी जम था उसने हिंदुओ का कन्वर्जन किया तो वहां पर तकरीबन 250 हिंदू लड़कियों के साथ में सामूहिक दुष्कर्म हुआ और किन्होला सोशल मीडिया लगा वही पुजारी थे बस वो उनके पुजारी थे क्योंकि उनका नाम सलीम चिस्ती था इसलिए वह बच गए क्योंकि उस समय पर कांग्रेस नीत सरकार थी इसलिए वह बच गए वह जो गुस्सा था अजमेर का राजस्थान के इतने सारे लोग उस समय बाबरी के कलंक को मिटाने के लिए अपने रक्त से वहां पर पहुंचे अंत में बताया जाता है कि राजस्थान के लोगों ने अपना घर का पता भी रास्ते पर सड़क पर भी लिखा अपने खून से और पता लगा के स्थान के और अजमेर के आसपास के कितने लोग वहां पर आए थे अगर हमारे अंदर पौरुष होता साहस होता वीरता होती तो हमारी एक बेटी जैसे कि कहा कि एक बेटी के अपमान के बाद महाभारत हो गया रामायण हो गई करोड़ों लोगों का भी अगर हमें नर संघार करना पड़ा तो हमने किया लेकिन उसकी अस्मिता पर उसने नजर कैसे डाली उसका हमने प्रति शोध लिया उसका ना केवल विरोध किया प्रथम सर्जिकल स्ट्राइक भी की शल में जाकर हमने मारा भी सात समंदर पार भी किए लेकिन 50 लड़किया और किसकी लड़कियां किसी रिक्शे वाले की नहीं थी किसी मजदूर की नहीं थी आईएएस आईपीएस प्रोफेसर्स एकदम एलीट क्लास सोफिया गर्ल्स कॉलेज में ऐसी एडमिशन नहीं होता उस महीने में जो लाखों रुपए महीने के कमाते थे बड़े बड़े बिजनेसमैन उनकी लड़कियों का हुआ और उसके बाद आकर के बाबरी विध्वंस हुआ अरे हम तो वो हैं जो कभी किसी भी प्रकार से पहल नहीं करते लेकिन फिर भी असहिष्णु हो गए मैं तो कहता हूं एक बार ढंग से अ सहिष्णु हो कर के ही देख लो क्या पता अरे क्या पता ये खरपतवार साफ ही हो जाए ये जो फसल उभर नहीं पा रही इसके बीच में जो बीच में कांग्रेस घास खड़ी है ये उखड़ ही जाए असहिष्णु हो कर के देख ही लो मैं तो खुद कहता हूं 15 मिनट के लिए पुलिस हटा के ही देख लो एक बार मैं तो कई बार कहता हूं अरे बिना हटाए तुम्हारी नस्ले समाप्त कर दी थी इस बात को याद रखो बिना हटाए फिर कहते हो पुलिस भी तुम्हारे साथ खड़ी हो जाती है मुजफ्फरनगर में शुरुआत करके देखी थी मैं वहीं से हूं पुलिस भी वही खड़ी थी 15 मिनट छोड़ो पुलिस वही थी एक सेकंड को भी नहीं हटी थी और फिर कहते हो तो सारे इतने गांव पर तो मेडा फेर दिया बुलडोजर चला दिया जी हमारे इनर टिकेट साहब ने तो नरेश त जी ने एक बार आवान किया था और वे जो उनके जहां वो जाकर के सिदे मुं होते तो जगह भी नहीं बची उनकी बन भी नहीं पाई दोबारा तो वह होने के बाद बाबरी विध्वंस हुआ उसके बाद इन्होंने 93 किया मुंबई के अंदर उसके बाद एक पूरा एस्पेक्ट बन गया कि भाई मुसलमान मतलब आतंकवादी उनके पास में माइंड नहीं था उनके पास में कुछ शुगर डैडी नहीं था जो उनको सलाता रहे फुसला रहे पीछे से पैसा देता रहे और उनके डिफेंड में खड़ा होता रहे जितने लोग जेल में गए वो फिर निकले नहीं उसके बाद उन्होंने जो कार्य करके देखा वही में फसते रहे और उस तरफ वामपंथियों का कैडर समाप्त होता चला गया वामपंथी इस्लामिक का शुगर डैडी बना उन्होंने कहा कि हम आपको वैचारिक इनपुट देंगे आप हमें कैडर दो इस्लामी को के पास में सूअर की तरह जब 12 बच्चे पैदा होंगे यही नहीं पता के किसके पास कच्छा है किसके पास बनियान है किसका सिण चला किसका नीचे से चल रहा किसका ऊपर से जब यही नहीं पता तो कहीं ना कहीं तो भर्ती होगा ही वामपंथियों ने उस आबादी का इस्तेमाल किया आज आप देखो कहीं बम बारूद फूट जाए किसी की हत्या कर दी जाए जिस टाइम तक व मार रहा होगा तो हमें फक्र है इस्लाम का नाम बुलंद है लेकिन जैसे ही उसका पित्तल भर दिया जाएगा तुरंत आ जाएगा अरे य तो प्रोफेसर का बे बे था य तो भाई साहब स्कूल हेड मास्टर का लौंडा था य तो डांसर बनना चाह रहा था य तो क्रिकेटर बनना चाह रहा था इसकी तो बोलिंग बड़ी फास्ट थी यह तो टिकटक पर डांस कर था बड़ स्वीट था वो क्या चल रहा आजकल इट्स सो ब्यूटीफुल इटस सो एलिगेंट इट लुक्स लाइक अ वा ऐसा कौन था शर्जील इमाम इट लुक्स लाइक अ वा सरजील इमाम वो तो इतना पढ़ा लिखा है अफजल गुरु अरे वो तो इतना एलीट बंदा था इट लुक्स लाइक अ वाव और जब तक यह हमास की बात है जब तक वो लोग इजराइल को मार रहे हैं यजीदी लड़कियों की मंडिया लगा रहे हैं उन्हो दो दो कोड़ी में बेच रहे हैं तब तक इस्लाम का नाम बुलंद हो रहा है हम अपने यह अपने जो फिलिस्तीनी भाई है मुसलमान भाई है उनके साथ है क्योंकि उन्होंने जो सरिया में लिखा हुआ है हदीस में लिखा हुआ है कि यदि एक यहूदी पत्थर के पीछे भी छिप जाएगा तो पत्थर चीक कर कहेगा मोमिन मेरे पीछे यहूदी छिपा हुआ है इसका अंत कर इसको मार दे जब तक अंतिम यहूदी नहीं निपट जाएगा तब तक कयामत भी नहीं आएगी और तब तक 72 हूर भी नहीं मिलेगी मैं तो देख रहा था वो छोटे-छोटे बच्चों का बोला बहुत अच्छी सुंदर हूर होंगी आपको पता नहीं है कि ये अगर समंदर में भी थूक देंगे समंदर मीठा हो जाएगा शहद से मीठा हो जाएगा मैंने कहा मौलाना हो के दिमाग में भी थूक सके नहीं वे जहां इतना कचरा भरा पड़ा है थोड़ा सा अमृत वहां भी आ जावे अरे थोड़ा सा वहां भी थकवा दो ये तुम समंदर में क्यों थकना चाहते हो वहां भी शहद बन जाएगा थोड़ा सा वहां भी थोड़ी मिठास आ जाएगी रात दिन हमारे खिलाफ इतनी मेरे खिलाफ तो फतवे निकाल रखे मारने ल के उ मैं जब वामपंथियों का कैडर समाप्त हो रहा था और उनको वैचारिक कोई गुरु नहीं मिल रहा था कोई ये कहने वाला नहीं मिल रहा था कि अरे 300 लोगों के लिए बम फोड़े वो थोड़ा ही ना फोड़ सकते हैं क्योंकि उस दिन तो सवा रोजा था आपको पता है इस बात का कुरान के अंदर एक आयत आती है न पाच उसमें कहा गया है कि जब ये हराम के महीने बीत जाए तो इन काफिर और मुशरिक को घेरो पहला तो लिखा सीधा ही कत्ल कर दो घेरो घात लगाओ जब तक कि व जकात ना दे दे नमाज ना पढ़ ले तब जाकर के उनका रास्ता छोड़ो और बद्र की लड़ाई 17 रमजान में हुई थी उसी के आधार पर 93 के बम धमाके हुए थे इस बात को खुद राकेश मारिया अपनी किताब में लिखता है कि टाइगर मेमन और जितने भी उस टाइम पर ये प्लान बनाने वाले लोग थे दाऊद इब्राहिम जैसे इन्होंने खास करके और अल्लाह के फजल करम से व दिन जुमा भीता अब आप मंदिर से निकलोगे प्रसाद लेकर निकलो लेकिन जब जमे के दिन नमाज पढ़ बाहर निकलते हैं तो क्या लेक निकलते हैं हा विभेद है वे पत्थर लेक नहीं निकले थे उस दिन बम लेकर निकले थे भाई साहब ने बताया कि बटवारे के टाइम पर यह हुआ 14 अगस्त की इन्होने बात की 14 अगस्त को अंतिम जुमा था रमजान का जिस दिन जयपुर में बम धमाके हुए थे रमन चल रहे थे जानबूझ कर उन्होने यह काम किए और फिर आपको पता है जब सन 2002 में गोधरा की ट्रेन जलाई गई थी क्या बताया गया उसका क्या पर्सपेक्टिव बनाया गया यह पर्सपेक्टिव बनाया गया पहले तो ये कहा गया कि चिंगारी लगी और साग लग गी फिर कहा गया हिंदुओं ने स्वयं अपने आप को जला लिया फिर कहा गया कि नरेंद्र मोदी ने खुद हिंदुओं को जलाया ताकि उसकी सत्ता वापस आ सके यह चीज आज चल रही है कि जिससे हम लड़ ही नहीं सकते कोर्ट खुद खड़ा हो कर के कह देता है जी वो तो हेड मास्टर का लड़का है वो तो हॉकी बहुत अच्छा खेलता था इस बात को पूरी तरह से इग्नोर कर दिया जाता है वाम पंथ अर्थात चीन और ईसाइयत जो इस्लामिक विचारधारा अर्थात पाकिस्तान इन दोनों विचारधाराओं का एक कॉकटेल बनाया गया जिसको पी कर के आपके घर के बच्चे वह हिंदू नामी भी है सिख नामी भी है ईसाई भी है मुस्लिम भी है उनकी कोई एक पहचान नहीं वो आपके बीच में ही जॉम्बीज बन कर के घूम रहे हैं और सबसे बड़ी विडंबना यह है कि ना हम उनके ऊपर रफाल छोड़ सकते ना परमाणु बम मार सकते इवन छोड़ो उनको थप्पड़ भी नहीं मार सकते क्योंकि दानवों के पास सबसे ज्यादा मानवाधिकार है क्योंकि मानवाधिकार आयोग मानवों के लिए नहीं आता है वो केवल और केवल उन दानव आतंकवादियों के लिए आता है जो इस मानवता के लिए सबसे बड़ा संकट बनकर खड़े हुए हैं आज की तारीख में जो आपने कहा कि आतंकवाद किस चर्म पर खड़ा हुआ है तो आज 500 से ज्यादा आतंकवादी संगठन पूरे विश्व के अंदर मोहम्मद और इस्लाम के नाम पर बने हुए हैं लेकिन फिर भी एक सुर में कोई कहने को तैयार नहीं कि यह मजहब आतंकवाद का मजहब है यह है उनका इकोसिस्टम यह है उनके कदमों में पड़ी हुई उनकी चरण धुली चाटने वाली मीडिया यह है उनका इको सिस्टम कि वह किसी को भी हेडमास्टर का बेटा और उनको शांति प्रिय बता देते हैं फिल्मों के अंदर आता है कि जब तक बजरंगी भाईजान मोहम्मद के नाम की कवाली नहीं गाता है तब तक तो उसको सफलता भी नहीं मिलती है जब तक हनुमान जी को मान रहा है तब तक नहीं मिलती है कहता है मोहम्मद भर दो झोली मेरी मोहम्मद अरे मोहम्मद की खुद की यार झोली खाली रही थी उसका बचा था ला में वो किसकी झोली भरेगा उसका खुद का खानदान कुछ साल के बाद खत्म हो गया वो किसकी झोड़ भरेगा भाई लेकिन हमारे दिमाग के अंदर ये वायरस डाला जा रहा है कि वो झोड़ी भरेगा वो झोड़ी भरेगा नहीं भर सकता यह हमें समझ और समझाने की आवश्यकता है सभी को आज का जो विषय है वह आर्य समाज के योगदान पर टिका हुआ है आज आप देखना के जितने भी संगठन बने बैठे हैं वह या तो कंठी माला लेकर बैठे हैं या उनका ध्यान तो होगा फिल्म में और सीरियल में और यहां माला चलती रहेगी या फिर ढोल ढपली लेकर समाज में उतर गए हैं या चाहे व रोड पर खड़े हैं चा सड़क पर खड़े हैं आज आप देखोगे कि इस आतंकवाद के खिलाफ यदि कोई व्यक्ति खड़ा है यदि कोई समीक्षात्मक दृष्टि लेकर के अपने विचार रख रहा है तो उसकी बैक में कहीं ना कहीं आर्य समाज ऋषि दयानंद है हां बहुत लोग हैं आतंक वो नाम नहीं लेंगे उनसे तो आप उम्मीद छोड़ दो आतंकवाद के समाप्ति की ओर और उस विचारधारा के उद्घाटन की ओर उस विचारधारा को एक्सपोज करने के लिए यदि कोई व्यक्ति खड़ा हुआ है तो आप थोड़ा सा भी अगर कुरेद के देखेंगे तो उसके बैकग्राउंड में कहीं ना कहीं आर्य समाज आपको अवश्य मिलेगा तो आतंकवाद की इस बड़ी समस्या का समाधान करने के लिए भी आर्य समाज ही खड़ा हुआ है और देखो चाहे वह आर्य समाज सांता क्रूज हो चाहे यह हो एक अलग भेद हो सकता है लेकिन समर्थन के लिए अगर कहीं पर भी लोग खड़े मिलेंगे तो व भी ऋषि दयानंद की विचारधारा से प्रेरित ही मिलेंगे आज बात आई अब यह क्वेश्चन आया कि भाई आर्य समाज आज कहां खड़ा है मैं मानता हूं कि हारी हुई लड़ाई लड़ रहा है लेकिन इस लड़ाई को हम जीतेंगे ऐसा मेरा पूर्ण विश्वास है क्योंकि जैसा कि आपने कहा कि अगर क्रांतिकारी मरे हैं तो उन्होंने जन्म लिया है तो मेरे एक मोटे मोटे हिसाब से साक लाख तो मरे ही थे उस टाइम भी भाई सात लाख तो हमें ही मिल जा भाई विवेकानंद दयानंद ने भी कहा स एक मिल जाए तो हम ही धरती पलट देंगे मैं न कह रहा साक लाख में से सात हजार भी एक ना एक दिन तो मिलेंगे तो मैं कहता हूं मैं आशावादी हूं मैं बहुत आशान्वित हूं हारी हुई लड़ाई जरूर लड़ रहे हैं और बहुत बाद में लड़ रहे हैं हम बहुत लेट हो चुके हैं लेकिन मैंने एक दौड़ देखी थी एक लड़की बहुत अच्छा दौड़ रही थी उसका ठोकर लगी हुआ गिर गी उसे उठाने के लिए कोई नहीं आया और सब भागते चले गए वो लड़की दोबारा उठी और वह फिर से भागी और रेस कंप्लीट होने से पहले व फर्स्ट आई तो आज भी अगर आप ये देखना कि जो सोशल मीडिया हो चाहे ग्राउंड लेवल पर हो जहां कहीं भी किसी ने पता का रखी है जहां पर भी आपको वीर शौर्य और साहस दिखाई देगा तो वहां कहीं ना कहीं दयानंद की प्रेरणा है वहां कहीं ना कहीं हमारे वैदिक धर्म का प्रताप है वहां कहीं ना कहीं गाय का दूध पीने वाला ही योद्धा खड़ा मिलेगा गाय की रक्षा करने वाला योद्धा ही मिलेगा भाई मोन मानेसर हो चाहे वह प्रशांत पुजारी हो वे हर एक व्यक्ति हर एक योद्धा आपको गाय का दूध पीने वाला ही मिलेगा भले ही गुरुकुल से ना पढा हो तो हम आशान्वित है लड़ भी मरेंगे भी और एक ना एक दिन जीतेंगे भी

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😲 अपना Point साबित के लिए इतने कुतर्कआइये कुछ Cross Questions करें।

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