Tuesday, 20 January 2026

#MANTHAN Fake Feminism की आड में नगनता का बाजार महिला सशक्तिकरण व महर्षि दयानंद Satya Sanatan

मैथिली शरण गुप्त की पंक्तियां है हम कौन थे अभी बहन बता रही थी भारती और शंकराचार्य का शास्त्रार्थ होता था हम वो थे कि अगर मेरे पति हार गए मैं अर्धांगिनी हूं अगर मैं नहीं हारू गी तो हारा हुआ नहीं माना जाएगा और शास्त्रार्थ क्या करती थी हम वो थे इसीलिए कहा क्या कर नहीं सकती यदि शिक्षिका हो नारियां साक्षर नहीं कहा अक्षर ज्ञानी नहीं कहा क्या कर नहीं सकती यदि शिक्षिका हो नारियां और रण रंग सुधर्म रक्षा कर चुकी सुकुमार बोलो नर से नारियां किस बात में है कम हुई मध्यस्थ शास्त्रार्थ में वे भारती के सम हुई मध्यस्थ शास्त्रार्थ में वे भारती के सम हुई यह बराबरी की आवश्यकता है बराबरी में ये नहीं वो 9:00 बजे आता है तो मैं 10 बजे आऊंगी पिंजड़ा तोड़ो अभियान आप अपने बच्चे को इतना प्यार से लेकर चलो ना कि वह अभिमन्यु बने इतना प्यार से लेकर चलो ना कि आपकी बच्ची पति की मृत्यु हो जाए तो 2 साल की नव युवती घबराती नहीं है किन अंग्रेजों के सामने जो कहते थे कि सीन उनके राज्य में सूरज नहीं डूबता उन अंग्रेजों के सामने एक बेटी खड़े होक कहती है आप पढ़ के देखिए वृंदावन लाल वर्मा की झांसी की रानी उसने कहा मैं जीते जी अपनी झांसी नहीं दूंगी यह है सशक्तिकरण यूं तो जीने के लिए लोग जिया करते हैं और लाभ जीवन का है नहीं फिर भी जिया करते हैं और मरने से पहले मरते हैं हजारों लेकिन जिंदगी उन्हीं की होती है जो मर के भी जिया करते हैं जिंदगी उन्हीं की होती है जो मर के भी जिया करते [प्रशंसा] [संगीत] हैं आज का हमारा विषय है महिला सशक्तिकरण तो पहला प्रश्न की महिला सशक्तिकरण क्या है और उसकी आवश्यकता ही क्यों पड़ी आपने प्रश्न पूछा सशक्तिकरण की आवश्यकता क्यों पड़ी तो मुझे लगता है कि हमारे समाज में सनातन में एक पंक्ति कही जाती है माता निर्माता भवती माता निर्माता होती है और जो निर्माण करने वाला है ब्रह्मा जी के बाद अगर किसी को सृजन का दिया गया व माता को दिया गया है तो जो निर्माण करने वाला है अगर स्वयं सशक्त होगा तभी तो सशक्त राष्ट्र का निर्माण कर पाएगा सशक्त समाज का निर्माण कर पाएगा सशक्त परिवार का निर्माण कर पाएगा इसीलिए सशक्तिकरण की आवश्यकता है नेपोलिन बोनापार्ट ने कहा था आप मुझे 6 हज माताए दे दीजिए मैं आपको एक अच्छा राष्ट्र दे दूंगा अभिप्राय य है कि जिसको राष्ट्र को बनाना है आपको संबोधित किया जाता है मात शक्ति कह कर के पित शक्ति हमने कभी नहीं सुना लेकिन मातृ शक्ति कहा गया है तो माता निर्माता है अगर निर्माण करने वाली जो है वो सही दिशा में चलेगी तो परिवार समाज और राष्ट्र तीनों सही दिशा में चलेंगे इसीलिए सशक्तिकरण की आवश्यकता है क्या आप सब एक दूसरे से सहमत है और वास्तव में इसको महिला सशक्तिकरण मानते हैं अभी सबने बड़ी सुंदर सशक्तिकरण की परिभाषा बताई फम की बात हुई बहुत सारे शब्दों का हम प्रयोग करते हैं पर वो वास्तविकता में अपना अर्थ खो बैठे है जी सभी का एक मत यही है कि माता निर्माता है और ऋषि दर जब सत्या प्रकाश के द्वितीय समुल्लास का प्रारंभ करते हैं तो शप ब्राह्मण में एक पंक्ति देते हैं मात मान पित मान आचार्य वाल पुरुषो वेदा और मातृ मान उसको नहीं कहा गया जिसकी मा है वही मातृ मान है उन्होंने कहा प्रशस्ता धार्मिक विदुष माता यस विद्यते स मात मान जिसकी म प्रशस्ता है धार्मिक है विदुषी है उसको मातृ बान कहा गया तो अगर मां एक उत्तम होगी तो संतान भी उत्तम होगी ये स्वाभाविक है और वीर शिवाजी को छत्रपति शिवाजी बनाने वाली जीजाबाई थी ये हम सभी जानते हैं तो सशक्तिकरण सही अर्थों में जैसे बहन मीनाक्षी जी ने कहा था कि सही दिशा में हमको समानता का अधिकार चाहिए लेकिन कहां चाहिए अभी नारे लगाने हैं तो बड़ नारे लगाएंगे और जैसे ही दो डंडे लगे तो सशक्तिकरण गया भाड़ में बराबरी गई भाड़ में नारी शक्ति को मार दिया हम तुरंत भूल जाते अरे बराबरी वहा भी तो करो अगर नारे लगाने में बराबरी चाहिए तो आपको माल खाने में भी तो बराबरी मिलेगी अगर कोई दंड मिल रहा है उसम भी बराबरी मिलेगी हम बराबरी अपनी सहूलियत के हिसाब से चाहते हैं वैसे बराब चाहिए लेकिन स्कूटी खराब हो जाएगी तो तुरंत घर फोन करेंगे भाई स्कूटी खराब हो गई हस्बैंड को फोन करेंगे पिता को फोन करेंगे क्यों भाई कहां गई आपकी बराबरी कभी आपने सुना कि पति ने फोन किया हो आइए जरा मेरी बाइक खराब हो गई मेरी गाड़ी खराब हो गई तो बराबरी अपने हिसाब से जैसे हमारे यहां एक मिनट और लूंगी फ्रीडम ऑफ स्पीच है जैसे अपने हिसाब से हम उसको देखते हैं कि कैसे हमको चलना है जैसे महाभारत का उदाहरण उठाए कण है रत का पया धस गया तो क्या कहता है तीर मत मारो क्यों क्योंकि अधर्म हो जाएगा तो कृष्ण जी कहते हैं आई तो त याद धर्म की अंत समय में आई अगर याद पहले आ जाती तो होती नहीं लड़ाई अर्थात जब भरी सभा में एक महिला का अपमान कर रहे थे तब तुम्हारा धर्म कहां गया था जब सारे मिलकर के पांडवों को फसा रहे थे तब तुम्हारा धर्म कहां गया था जब न लोग मिलकर के अकेले अभिमन्यु को घे लिए तब तुम्हारा धर्म कहा गया तो फ्रीडम ऑफ स्पीच बराबरी का अधिकार नारी सशक्तिकरण ये शब्द हम वहां यूज करते हैं जहां हमको अपना लाभ दिखता है तो लाभ ना देखे बराबरी चाहिए तो हर क्षेत्र में बराबरी करे वो आवश्यक है सबने बहुत सुंदर परिभाषा की और हम सबसे सहमत है आपस में सहमत है आजकल नकली नारी सशक्तिकरण बहुत चल रहा है हम देखते हैं कि हमारे देश में कानून भी बन रहे हैं समलैंगिकता के कानून बन रहे तो मैं जानना चाहती हूं आयुषी जी से कि यह मेंटली कोई इशू है या सच में ऐसे अधिकार कुछ मिलने चाहिए अभी बहन ने बहुत सुंदर बताया मीनाक्षी जी ने और इससे पहले मैं इसी मुद्दे पर विचार कर रही थी आप विचार करो कि आर्य समाज के उत्सव में हमें नारी सशक्तिकरण क्यों लिखना पड़ा कुछ तो कारण है ना कि हमको यहां लिखना पड़ा कि नारी को सशक्त करने की आवश्यकता है और बहन ने वही बात बिल्कुल पुष्ट कर दी कारण उसका यह है आप यह बताइए गायत्री मंत्र नहीं पढ़ना चाहिए और यह बात डंके की चोट प कही जा रही है उस देश में जहां पर ऋगवेद का उदाहरण देते हुए कहा जाता है कि स्त्री ही ब्रह्मा बभु वि था स्त्री यज की ब्रह्मा होवे और ब्रह्मा को चारों वेदों का ज्ञान होना चाहिए और गायत्री मंत्र ब्रह्मा जी पढ़ेंगे नहीं तो मैंने उसमें तर्क दिया मैंने बोला इसके दो उत्तर माने जा सकते हैं या तो आप हमें इतना बुद्धिमान मानते हो कि धियो योना प्रचोदयात बुद्धि की आवश्यकता हमको नहीं है महिलाओं की बुद्धि सत ही होती है खराब नहीं होती या तो एक ये तर्क है हमको बुद्धिमान मान लो यह बात आप मानेंगे नहीं दूसरा तर्क ये है कि आप ये मानते हैं कि सद बुद्धि की आवश्यकता हमको है ही नहीं मात्र बुद्धि ही हो चाहे वो डॉक्टर वाली बात है ना किडनी चुराओ या इलाज करो केवल बुद्धि आपके पास होनी चाहिए सद बुद्धि नहीं चाहिए तो दोनों तर्क आप नहीं मानेंगे तो आप एक बात सोच के देखिए नारी सशक्तिकरण की आवश्यकता इसलिए है कि आज भी हमारे देश में अगर भरे मंच से यह कह दिया जाए कि नारी गायत्री मंत्र नहीं पढ़ सकती और इस बात को मानने वाली सबसे ज्यादा महिला ही है सत्य वचन महाराज महिलाएं वेद नहीं पढ़ सकती सत्य वचन महाराज महिलाएं गायत्री मंत्र नहीं मैंने कहा ना बड़ी प्यारी होती है महिलाएं बड़ी प्यारी प्यारी कह लीजिए भोली कह लीजिए और मैंने कहा ना अगर शब्द कह दूंगी तो बुरा लगेगा लेकिन भोली अच्छा लगेगा बड़ी भोली होती है मैं एक उदाहरण और दे रही थी चाहे पत्नी कितनी प्यारी हो उसे भेद बताना ना चाहिए लड़ाई सी बात पे आपने बताया नहीं था जी आप ही ने तो कहा तो हम दिमाग नहीं लगाते चल रहे हैं गायत्री मंत्र नहीं पढ़ना चाहिए परसों यही तर्क देके मैंने रील डाल दी अब कई लोग कह रहे हैं आप शास्त्र पढ़ो मैंने बोला शास्त्र लेके आओ दिखाओ तो सही समाज में मिलावट का कारण यही हो गया इतने पतित हुए कि आज तक संभल नहीं पा रहे लेकिन आज भी बुद्धि नहीं लगा रहे हम कौन थे मैथली शरण गुप्त की पंक्तियां है हम कौन थे अभी बहन बता रही थी भारती और शंकराचार्य का शास्त्रार्थ होता था हम वो थे कि अगर मेरे पति हार गए मैं अर्धांगिनी हूं अगर मैं नहीं हारू गी तो हारा हुआ नहीं माना जाएगा और शास्त्रार्थ क्या करती थी हम वो थे इसीलिए कहा क्या कर नहीं सकती यदि शिक्षित हो नारियां साक्षर नहीं कहा अक्षर ज्ञानी नहीं कहा क्या कर नहीं सकती यदि शिक्षिका हो नारियां और रण रंग सुधर्म रक्षा कर चुकी सुकुमार यां बोलो नर से नारियां किस बात में है कम हुई मध्यस्थ शास्त्रार्थ में वे भारती के सम हुई मध्यस्थ शास्त्रार्थ में वे भारती के सम हुई ये बराबरी की आवश्यकता है बराबरी में ये नहीं वो 9:00 बजे आता है तो मैं 10 बजे आऊंगी पिंजरा तोड़ो अभियान यह आवश्यकता नहीं है ज कभी भी चले जाओ यूनिवर्सिटी के गेट पे अलग डिजाइन के कपड़े आपको समझ में आएगा कौन महाशय बैठे हैं किस लिए बैठे हैं उनकी मांग यह नहीं है कि हमें भी गायत्री मंदर पढ़ने का अधिकार मिले हमें भी यज्ज पवित्र बहनों को यज्ज पवित्र का मतलब ही नहीं पता जिन्होंने सुबह उठके दो आजादी दो आजादी का मतलब ही बस यही किया है तो उनको कुछ नहीं पता लेकिन पिंजड़ा तोड़ अभियान बराबरी मतलब अच्छे में करो नाना क्यों नहीं करते हम अच्छों में बराबरी मेरे को कोई मना करे आप गायत्री मंत्र नहीं पढ़ सकते यहीं पढ़ूंगी तू रोक के दिखा ये है तर्क लोग कहते हैं और जी हमको आप ये समझिए कितनी बड़ी हानि होती है एक शब्द से लोगों ने कहा आप मंदिर नहीं जा सकते हमने कहा ठीक है हम जा जाएंगे ही नहीं छोड़ दिया आप नहीं जा सकते अच्छा हम भी नहीं जाएंगे आप आर्य समाज नहीं जा सकते हम नहीं जाएंगे आप यहां नहीं जा सकते हैं हम नहीं जाएंगे क्यों नहीं जाएंगे क्यों तो पूछा होता ये आपका अधिकार है यह आप पूछ सकते हैं अगर आप गायत्री मंत्र पढ़ेंगे तो मैं भी पढ़ूंगी ओम भूर भुव स्वा आप सोचो ना यो योना प्रचोदय सद बुद्धि की आवश्यक हमको नहीं है लेकिन यह सवाल नहीं करते यहीं पर हमको बराबरी नहीं चाहिए बराबरी चाहिए 10 बजे में हॉस्टल में आऊंगी अगर पूछ लिया वार्डन ने तो उसकी लंका लगनी तय है यही तो बराबरी चाहिए अगर ट्रेन में जरा सा भी आप यह समझिए बराबरी का मतलब क्या होता है बराबरी का मतलब होता है कि पति की मृत्यु हो जाए पति दुनिया में नहीं है आज का समाज होता तो विधवा कह के ताने मार मार के मार देता यह हमारी कमी है एक समाज का सच यह भी है ये भी हमको स्वीकार करना पड़ेगा एक सच यह भी है कि बेटी हो जाए तो अरे लक्ष्मी जी आई है क्यों लक्ष्मी जी आई है बेटी है भाई स्वीकार करो ना कोई बात नहीं दूसरी अरे कोई बात नहीं बेटा भी हो जाएगा क्यों भाई यह बात समाज में चलती है यह बात हम बात नहीं करते लेकिन याद रखिए कबूतर के आंख बंद कर लेने से समस्या हल नहीं हो जाएगी बेटी हुई है बाप को समस्या नहीं मां को समस्या नहीं दादी को समस्या नहीं दादा को समस्या नहीं पड़ोसन आएगी गंदा सा मुह लेके अच्छा बेटी हो गई कोई बात नहीं बेटा भी हो जाएगा ऐसे राने की बता भगवान ने इसी घर में देनी थी अब विचार करो यही तो समाज का सच है ना क्यों हमने बात करते इन मुद्दों पर यह भी समाज का एक बहुत बड़ा और मैं आपको बताती हूं 75 पर की आबादी यही है और इसीलिए कहीं ना कहीं मैं एक बात कहती हूं आप प्रत्येक के मस्तिष्क को समझने का प्रयास कीजिए ना मेरी बेटी पिंजड़ा तोड़ अभियान में जुड़ी क्यों मैंने क्यों नहीं समझा कि मेरी बेटी को पीड़ा क्या थी मेरा व्यक्ति धर्म छोड़ के गया क्यों मैंने क्यों नहीं समझा मेरा बच् काला पहाड़ बना क्यों मैंने क्यों नहीं समझा मेरा व्यक्ति मेवा इतना कट्टर नहीं था सामान्य बिचारा धर्म परिवर्तन हो गया लेकिन उसको बिचारे को कुछ नहीं पता ना उसे उधर का आता ना इधर का ठीक आता लेकिन उन्होंने मजबूत बना लिया हम अपना घर बैठ कर के अरे कोई बात नहीं हम तो ठीक है कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी हम खुश है करो ना इन मुद्दों पर बात क्यों नहीं करते एक व्यक्ति का जाना एक बच्चे का पिंजरा तोड़ अभियान में जुड़ जाना हमारी असफलता है स्वीकार करो क्यों नहीं लाए अपनी बच्ची को उसको बताओ बराबरी है मंत्र पढ़ हमको बराबरी का अधिकार दिया जाता है आर्य समाज के उत्सव में आना है अकेले चल के आते हैं कोई दिक्कत नहीं कोई मना नहीं करता लेकिन अगर मैं ही कहूं मुझे भी आजादी के नारे लगाने है तो घर वाले क घर बैठो यह बात नहीं करते इन मुद्दों पर भी बात करेंगे तो हमारी बेटी किसी अभियान में नहीं जुड़े गी आप अपने बच्चे को इतना प्यार से लेकर चलो ना कि वो अभिमन्यु बने इतना प्यार से लेकर चलो ना कि आपकी बच्ची पति की मृत्यु हो जाए तो 23 साल की नव युवती घबराती नहीं है किन अंग्रेजों के सामने जो कहते थे कि सीना उनके राज्य में सर नहीं डूबता उन अंग्रेजों के सामने एक बेटी खड़े होकर कहती है आप पढ़ के देखिए वृंदावन लाल वर्मा की झांसी की रानी उसने कहा मैं जीते जी अपनी झांसी नहीं दूंगी यह है सशक्तिकरण इस सशक्तिकरण की बात क्यों नहीं करते हम उसी के लिए सुभद्रा कुमारी चौहान ने कहा था सशक्तिकरण की परिभाषा चेंज हो गई लेकिन वो बच्चे भी अपने हैं अपना भाई काला पहाड़ ना बने अपनी बच्ची गलत अभियान में ना खड़ी हो उसे खींच के लाने की जिम्मेदारी हमारी है क्योंकि है तो हमारी बेटी उसको लाने की जिम्मेदारी आप सोचो कि उसने कहा मैं जीते जी अपनी झांसी नहीं दूंगी हम कहते हैं पुरुष हमका साथ नहीं देते ये नहीं देते पूरी झांसी साथ खड़ी हो गई थी एक महिला के आह्वान पे विचार तो करो आप अच्छे आंदोलनों को लेकर चलो तो सही आप लीड करोगे लेकिन आप में ताकत होनी चाहिए अब आपको आंदोलन ही करना है 9:00 बजे घर आना है तो अपने वाले भी और विरोध में हो जाएंगे आप तार्किक आंदोलन कीजिए सही दिशा में देश के राष्ट्र के समाज के परिवार के उत्थान के लिए आंदोलन कीजिए दुनिया आपके साथ होगी आप सोचो 23 साल की नव युवती कहते हैं मैं अपनी झांसी नहीं दूंगी एक बेटा आज हमारा बेटा होता है सत्संग में नहीं आ पाते जी छोटा बच्चा है बड़ा रोएगा हम नहीं आ पा रहे छोटा बच्चा है जी हम कॉलेज नहीं आ सकते कितने बहाने बनाते हैं हम सोचो आप और वो तो इतने बड़े राज्य की महारानी है और अपने पुत्र को जिसको पता है कि तेरे प्राण नहीं बचेंगे अपने पुत्र को पीठ से बांधती है दोनों हाथों से तलवार चलाती है घोड़े की लगा मुंह में दबाती है इसीलिए सुभद्रा कुमारी चौहान ने कहा था उनकी गाथा छोड़ चले हम झांसी के मैदानों में जहां खड़ी थी लक्ष्मीबाई मर्द बनी मर्दानम में जहां खड़ी थी लक्ष्मीबाई मर्द बनी मर्दानम में ये है सशक्तिकरण और आपको लड़ना है तो अच्छे मुद्दों पर लड़ी हम गायत्री मंत्र पढ़ेंगे जैसे बहन ने कहा अगर चार महिलाएं वहीं खड़े हो जाए पंडित जी हम तो पढ़ेंगे आपका जो होता वो कर लो बात खत्म होना ही नहीं आगे लेकिन आप मजबूत नहीं है पुरुषों की गलती मत बताओ आपसे ही नहीं बोला गया आपने ही नहीं कहा य जो पवित्र का अधिकार अभी आचार्य नंदिता जी आपके आर्य समाज में भी आई है इतनी प्रतिष्ठित लोग हैं इतनी कन्याओं का निर्माण कर रही हैं उन्होंने ये जो पवित्र संस्कार कराया तो आर्य प्रतिनिधि सभा ने कमेंट पढ़ रही थी आर्य समाज बिल्कुल पागल है किसी को भी अजो पवित दे देते हैं और महिलाएं उस कमेंट को बड़े मुस्कुराते हुए पढ़ें उनको समझ में नहीं आएगा आर्य समाज तुम्हारा वकील है उन लोगों के सामने जो तुम्हें बोलना भी देना नहीं चाहते उनके सामने हम वकील बनके खड़े हैं एक बार अो अपने अधिकार के लिए अधिकार लेकिन सही माता-पिता की संपत्ति प अधिकार है लेकिन सेवा करना कर्तव्य भूल जाते हैं वो अधिकार नहीं कह रही हूं अधिकार कह रही हूं कि सही अधिकार के लिए यज जो पवित मेरा अधिकार है और उसमें पढ़ाएंगे शादी में आर मतलब कुछ लोग पहनाते हैं पत्नी के नाम का भी पति पहने का भाई साहब उसको पहले ही पूरे परिवार का बोझ डाल के आपने गधा बनाने की तैयारी कर ली एक यज्ज पवित का और डाल दो मतलब कहने का अभिप्राय यह है कि आप सही दिशा में अगर सशक्तिकरण करेंगे तो निश्चित रूप से समाज में परिवर्तन आएगा लेकिन नारी को आदर करवाना आना चाहिए हमने राम जी पैदा किए बड़ा गर्व होता है अरे जी कौशल्या जी ने कीजिए जीजाबाई ने छत्रपति शिवाजी महाराज किए माता विद्यावती ने भगत सिंह करे लेकिन रावण को पैदा करने वाली कौन थी उसपे भी बात कर लो उसको पुरुषों ने थोड़ी करा हमने ही करा तो कहने का अभिप्राय यह है कि अपने अच्छे और बुरे दोनों पॉइंट को जान कर के जो आगे बढ़ता है निश्चित रूप से वो समाज वो परिवार वो राष्ट्र उन्नति करता है तो सशक्तिकरण अगर सही दिशा में होगा जो समाज के परिवार के लिए अच्छा होगा अपने लिए जिए तो क्या जिए ये पंक्ति आपको समझा कर के बहन को माइक देती हूं कि यूं तो जीने के लिए लोग जिया करते हैं अपना सशक्तिकरण करा मुझे आजादी मुझे आजादी परिवार कौन संभालेगा हमारी जिम्मेदारी है अपने कर्तव्यों को समझिए यूं तो जीने के लिए लोग जिया करते हैं और लाभ जीवन का है नहीं फिर भी जिया करते हैं और मरने से पहले मरते हैं हजारों लेकिन जिंदगी उन्हीं की होती है जो मर के भी जिया करते हैं जिंदगी उन्हीं की होती है जो मर के भी जिया करते हैं अब मेरा आखरी सवाल आयुषी दीदी से है कि हमने बात की महिला सशक्तिकरण की कि महिला सशक्तिकरण क्या है कैसा था या इसकी आवश्यकता क्यों है पर हम अपने समाज में ला कैसे सकते हैं क्योंकि बात हर जगह हो रही है पर भू हत्या भी हर जगह हो रही है रेप हर जगह हो रहे है तो इस चीज को हम कैसे कंट्रोल कर सकते हैं उसके लिए हमें क्या कार्य करने की आवश्यकता है देखिए जापान और कोरिया अच्छी कार बना सकते हैं लेकिन अगर कोई संस्कार दे सकता है तो वह भारत दे सकता है तो सारी समस्याओं का समाधान चाहे वो भ्रूण हत्या हो चाहे वो रेप केस हो चाहे वो कुछ भी समस्या हो सबका समाधान है संस्कार और अभी बहुत सारे प्रश्न चल रहे थे मैं कई प्रश्नों का उत्तर सामने बैठे भाई का उदाहरण देकर देना चाहूंगी फ से जुड़े हैं शायद विकास नाम है मैं अगर गलत नहीं हूं तो भाई बहुत देर से बैठे हैं अभी हमारे यहां तलाक की भी बात हुई मैं सारे समस्याओं को समेट होंगी अभी नौकरी की भी बात हुई कि महिला नौकरी कैसे करेगी तो घर कैसे संभले पहले हमारे यहां आठ और 60 की परंपरा थी आठ का अभिप्राय है कि आठ का बच्चा घर में नहीं रहेगा 8 साल के बाद बच्चा गुरुकुल जाए 60 के बाद आपको वानप्रस्थ सन्यास में निकल ही जाना है घर में नहीं रहना जब आ साल का बच्चा गुरुकुल जाएगा तो गुरुकुल में पलेगा आप विचार करो आज हम कहते हैं हम बराबरी और हम ऊंचे मैं कहती हूं हम कौन थे वही चर्चा जो मैंने पहले शुरू की हम वो थे कि नालंदा तला जैसे विश्वविद्यालय हुआ करते थे जहा 10 दज विद्या शिक्षा प्रन करते थे और लोग चलते हुए आते थे बैठा द्वारपाल भी परीक्ष लेता था हम इतने उन्नत थे अभी हम कह रहे थे कि घर कैसे संभले का घर कैसे संभले का या परिवार क्यों टूट रहे हैं इसका कारण यह है कि हम या तो पति पर जिम्मेदारी डालते हैं या पत्नी पर डालते हैं या सास पर डालते हैं या नंद पर डालते हैं पूरा परिवार मिलकर जिम्मेदारी निभाने का प्रयास नहीं करता समस्या तभी उत्पन्न होती है पहला तो अभी संपत्ति का आचार्य कल्पना जी ने उदाहरण दिया कि ऐसा संपत्ति का बंटवारा कर दिया कि नंद का पूरा अधिकार है क पीढ़ियों बाद भी तो समस्या वहां उत्पन्न होती है या बच्चा पालने का अधिकार केवल माता का है या कर्तव्य माता का है अभी भाभी जी आई जैसे अंदर प्रवेश किया आके भैया को बच्चा दे दिया इसका मतलब आपकी भी जिम्मेदारी है देखिए सामने उदाहरण है और भैया ने बड़े प्यार से संभाला भी अगर दोनों मिलक संभालेंगे आप विचार करो क्या परिवार में समस्या होगी नहीं हो सकती लेकिन भाभी जी बच्चा पति को दे और इनकी माता जी कहे तुम बच्चा संभालोगे तुम्हारा यही काम है बड़े पत्नी के गुलाम हुए घूमते हो तो आप समझ लीजिए समस्या यहीं से शुरू हो जाएगी अगर सुधार करना है तो कोने कोने में सुधार करो तब जाकर के परिवर्तन होगा यह परिवर्तन हमारे अंदर से प्रारंभ होगा आप विचार करो इतना सशक्तिकरण हम इतने लोग बैठे हैं क्यों परिचर्चा कर पा रहे हैं क्योंकि अंकुर भाई ने विचार किया कि इस बार ऐसा होना चाहिए तभी तो हम यहां बैठे हैं ना हम कहते हैं एक सफल पुरुष के पीछे एक नारी का हाथ होता है मैं कहती हूं अ इतने सारे बैठे कहीं ना कहीं उनके प्रयास के कारण इतने सारे लोग एकत्रित है वरना एक मंच में इतने लोग तो मिल नहीं सकते तो उन्होंने कहा ना कि आप आगे पढ़िए हमारा समाज अगर हम संस्कारी रहेंगे अगर हम परिवार के अंदर रहेंगे तो भी हमारा समाज आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है और दोनों ही चीजें स्वीकार्य हैं कई जगह बेटियों को मार दिया जाता है पता लगा दोबारा समझा के भेज दी गई आज आसपास की घटनाए पता लगा उसको मृत्यु के घाट उतार दिया लड़ते रहो केस तो दोनों ही परि श्रद्धा जी ने कहा कि परिस्थिति के अनुसार हो सकता है सच में उसके साथ गलत हो रहा हो तो अपने बच्चे को हृदय से लगाओ क्योंकि आपका जन्म अनमोल है आपको केवल इसलिए नहीं मिला दिया गया कि हम फलाने के साथ शादी कर रहे हैं समलिंग में करेंगे फलाना करेंगे ढिकाना करेंगे इतनी सारी समस्याए उत्पन्न कर दी गई गृहस्थ को आश्रम कहा गया तपस्या कहा गया सब आश्रमों का मूल कहा गया और आज हमने उसको भोग का साधन बना दिया समस्या यहीं से उत्पन्न हुई जिनसे हमें प्रेरणा लेनी थी जिन योगीराज श्री कृष्ण चंद्र जी महाराज को आदर्श मानना था आज उनको क्या बना के रखा यह विचार तो करो गृहस्थ की प्रेरणा लो ना कृष्ण जी महाराज से 12 वर्ष तक तपस्या करी थी आज कितने उनके नाम पर दुकान चलाओ आडंबर चलाओ सत्य मत बताओ लेकिन 12 वर्ष तपस्या करके माता रुक्मिणी से एक पुत्र उत्पन्न किए थे जिनका नाम था प्रद्युम्न और जब प्रद्युमन चला करते थे तो लोग पहचानते नहीं थे कि कृष्ण है कि प्रद्युम्न है यह होती है तपस्या उनको क्या बना दिया एक बस छलिया बना दिया रास रचाने वाला और अभी मैंने कमेंट कर दिया आप क्या थी आप कैसे बोलती थी आज आप क्या हो गई मैंने कहा मैं वही थी जो आज हूं तुम समझ गलत पाए हो गलत दिशा में पकड़ लिए हैं मतलब अभिप्राय ये है मीठा मीठा तो अच्छा है और जो कड़वा है वो थू जिनको आदर्श मानना था जिसको योद्धा मानना था उनको आपने क्या बना के रख दिया हमारे आदर्श क्या होंगे एक एक साथ में लेकर अगर आपके बेटे भी घूमेंगे तो स्वीकार करेंगे ना जी वो तो भगवान थे तो महापुरुष होते इसलिए हैं कि उनसे प्रेरणा ले सके अगर हम उनसे यह प्रेरणा लेंगे तो कैसे चलेगा देश तो अगर हमारे संस्कार ठीक नहीं होंगे रेप केस क्यों हो रहा है राह चलती बच्ची सुरक्षित क्यों नहीं जिस देश के लिए मनु महाराज ने कहा था त देश प्रसूत स्या सका जन्म चरित्र श पथव सर्व मानवा इस भारत देश से पूरी पृथ्वी के मानवों को गांव नहीं का शहर नहीं का मोहल्ला नहीं का इसीलिए कहती हम कौन थे हम वो थे कि पूरी पृथ्वी के मानव को अपने अपने चरित्रों की शिक्षा लेनी चाहिए हम वह थे हम वो थे जो पद्मिनी को शीशे में दिखाने के लिए हट जाया करते थे नहीं देखोगे तुम विदेशी आक्रांता औकात में रहो हमारी बह बेटियों पर नजर डालने की कोशिश मत करना नजरें छीन ली जाएंगी लेकिन आज आज तो रील्स पर खुद ही ठुमके लग रहे हैं समझ में ही नहीं आता जिनको देने के देखने के लिए पैसे खर्च करने पड़ते थे आज फ्री में ही मनोरंजन हो रहा है उपभोग की वस्तु आपने बनाया क्या दोष देना पुरुषों को नारी को उपभोग की वस्तु कौन बना रहा है हम अपने को उपभोग प्रस्तुत करेंगे तो क्यों नहीं बनेंगे उपभोग एक वो रानी पद्मिनी थी मैं तो आज हमास और इजराइल का युद्ध देख रही हूं तो मुझे समझ में आता है कि उन्होंने क्यों ये सोचा होगा की जोहर किया जाए मेरे मरने के बाद भी मेरे शरीर को ना छुपाए कहा था ना झांसी की रानी ने भी मरने के बाद भी मेरे शरीर को ना छुपाए क्या स्वाभिमान था वो स्वाभिमान था कि रानी पद्मिनी को शीशे में देखने प आड़ा था बस शीशे में दिखा दो 16000 रानियों ने जोहर किया था आज बकवास करते हुए फ की दुनिया में बोल तो देते हैं जोहर कायरता थी मैं कहती हूं मोमबत्ती में जरा हाथ तो लगाओ फिर बताएंगे जोहर क्या था 16000 रानिया जल के जिस देश में मरी हो स्वाभिमान के लिए उस देश में जब रील्स पे दुष्टता करती हुई बेटियों को आदर्श बांधते हुए समाज को देखोगे तो रेप नहीं होगा तो क्या होगा बात कड़वी है लेकिन याद रखिए ज्यादा मीठा खाने से शुगर हो सकता है इसलिए नीम का काम भी जरूरी है तो ये रील जो हम चला रहे हैं क्या संस्कार देंगे बच्चों को क्या समझाएंगे बच्चों को सीरियल देखेंगे एक शादी हुई नहीं दूसरी पहले चल जाता है दो शादी चार शादी एक अफेयर के बिना तो चल ही नहीं सकता इसी ने तो बिगाड़ हालांकि आजकल लाइन पर है जितनी मोटी बिंदी उतनी खराब महिला यही करते है ना जितने पंडित जी उतने ही खराब यही तो दिखाया जाता है ना क्यों नहीं कर सकते दूसरों का अपमान क्योंकि कमजोर को सब मारते हैं मजबूत को हाथ लगा के दिखाओ ना नहीं कर सकते कमजोर वीर भोग्या वसुंधरा बड़ी-बड़ी बातें करते हैं लेकिन वो मजबूती लाइए सब चेंज होगा सिलेबस चेंज समलैंगिकता की बात केवल नीचे से नहीं हो रही यूनिवर्सिटी में नहीं आप थोड़े दिन रुकिए अभी तो कहां कहा पद पर पहुंचने हैं वो आप सबको पता है मैं नाम नहीं ले रही मेरी कुछ मजबूरियां है वरना आप समझते हैं कि कहां पद पर बिठाने की तैयारी है जिस देश को इतना आदर्श माना गया हो जिस देश को भारत मां कहा जाता हो जिस देश में नारी का इतना सम्मान हो अगर हम सुनते हैं कि हमारी बेटी के 30 टुकड़े करके फ्रिज में रख दिए तो कहीं ना कहीं आत्मा तो रोती है दुख तो होता है और याद रखिए अपने बच्चों को इसी वातावरण में हमने भी भेजना है हम कहीं अंतरिक्ष में पढ़ने नहीं भेजेंगे कहां भेजेंगे इसी वातावरण में तो पड़ेगी हमारी बच्ची कैसे बचा पाओगे इसलिए आज दूसरों के घर में है तो बच जाओ याद रखो जलते घर को देखने वाला फूस का छप्पर आपका है भरी सड़क पर लड़की को चाकू मार दिया गया और जिस दिल्ली को देश की राजधानी कहा जाता है किसी ने रोकने की कोशिश नहीं करी आप विचार करो हम कितने मानव है हम कहां मनुष्य है विचार तो करो चलते घर को देखने वालो फूस का छप्पर आपका है आग के पीछे तेज हवा है आगे मुकद्दर आपका है उसके कत्ल पर मैं भी चुप था मेरा नंबर अब आया और मेरे कत्ल पर आप भी चुप है तो अगला नंबर आपका है मेरे कत्ल प आप भी चुप है तो अगला नंबर आपका है जागरूक होके लड़ संगठित होकर लड़ परिस्थिति के अनुसार जैसा जिसके साथ होता है पहले उसको समझिए अपने बच्चों को संभालिए अगर मेरा बच्चा कहीं जा भी रहा है श्रद्धा जी ने बहुत सुंदर कहा प्रत्येक की परिस्थिति अलग होती है परिस्थितियों को समझ के संभालिए अगर आप ठुकरा देंगे वना लो अछूतों को गले से लगा आ रयो वरना ये लाल गैरों के घर जाएंगे अगर नहीं संभालोगे तो दूसरा संभालेगा अपनी बच्चों को संभालिए संस्कार दीजिए और याद रखिए जिस दिन संस्कार दिया तो आपका बेटा छत्रपति शिवाजी महाराज बनेगा और आपका बेटा श्रीराम बनने का प्रयास करेगा योगीराज श्री कृष्ण चंद्र जी महाराज बनने का प्रयास करेगा तो निश्चित रूप से हमारे समाज में परिवर्तन आएगा एकएक व्यक्ति से राष्ट्र बनता है बस एक घटना कहके वाणी को विराम देती हूं कि एक जंगल में आग लग गई मैं अक्सर कहती हूं कि अकेला क्या कर सकता है मैं कहती हूं अकेला चना भार नहीं फोड़ सकता लेकिन ढंग से उछल जाए तो बरबे की आंख जरूर फोड़ देता है तो जंगल में आग लगी तो छोटी सी चिड़िया बड़े-बड़े पक्षी भागने लगे काल्पनिक कथा है तो एक छोटी सी चिड़िया चोंच में पानी ला रही है अभी सोचेंगे ना मुल्तान नगर में इतने से लोग बैठे हैं तो क्यासे विचार जाएगा मैं कहती हूं विचार आप कीजिए तो सही शब्द ब्रह्म होता है नष्ट नहीं होता तो छोटी सी चिड़िया पानी ला रही है चोंच में हाथी ने मजाक उड़ाया हा हा हा इतनी छोटी सी चिड़िया क्या करेगी तू कुछ नहीं होना तेरे से उसने कहा नहीं मैं इस जंगल में रही हूं मैंने इसको गंदा किया है जब इस जंगल का इतिहास लिखा जाएगा तो मेरा नाम आग लगाने वालों में नहीं आग बुझाने वालों में आएगा तो हमारा नाम आग लगाने वालों में नहीं आग बुझाने वालों में आए उसने कहा मैं बहुत छोटी हूं हो सकता है नाम भी ना आए लेकिन अगर नाम भी नहीं आएगा तो आत्मा और परमात्मा से मैं नजर मिलाकर कहूंगी जब मेरा देश चल रहा था जब मेरा समाज जल रहा था तो मैं लड़ी संघर्ष किया तो हम सभी संघर्षशील हो तो निश्चित रूप से परिवर्तन होगा मंजिल मिले ना मिले याद रखिए मंजिल मिले ना मिले कोई बात नहीं मंजिल की जुस्तजू में अपना कारवा तो हो मंजिल की जुस्तजू में अपना कारवा तो हो धन्यवाद बहुत-बहुत धन्यवाद

No comments:

Post a Comment

😲 अपना Point साबित के लिए इतने कुतर्कआइये कुछ Cross Questions करें।

में एक बार क्या हुआ कि उनका खूब सारा लोगों ने आप जैसे यह दोनों ने बहुत विरोध किया और उन विरोध करने वाले लोगों ने महर्षि दयानंद सरस्वती जी...