Tuesday, 20 January 2026

#MANTHAN मादरसों को समाप्त करना क्यों जरूरी Satya Sanatan Ayushi Rana

ना जी हमारा धर्म सिखाता है एक गाल पर थप्पड़ मारो दूसरा गाल आगे कर दो मैंने बोला दूसरे पर मारा तो जब सीता हरण होता है तो पुरुषोत्तम राम नहीं होते और जब चीर हरण द्रौपदी का होता है तो घनश्याम नहीं होते और नपुंसकता की सीमा तक जा पहुंची है कायरता हमारी नपुंसकता की सीमा तक जा पहुंची है कायरता हमारी अगर शक्ति की भाषा सीखी होती तो यह दुष्परिणाम नहीं होते अग शक्ति की भाषा सीखी होती तो यह दुष्परिणाम अप नहीं होते हमारा धर्म कभी नहीं कहता है कि अगर एक गाल पर थप्पड़ मार दे तो दूसरा गाल सामने कर दो यह मोहम्मद दास कर्मचंद गाजी ने य कहा था और उस व्यक्ति ने मैं मोहनदास नहीं मानता मैं उस व्यक्ति को मोहनदास इसलिए नहीं मानता क्योंकि मोहन ने तो स्वयं सुदर्शन उठाया था भारत का बच्चा बच्चा और ऐसा बोलकर डीजे बंद कर देते हैं तो भीड़ आगे से बोलती है कि जय जय श्री राम बोलेगा सबको पता है ना भीड़ में खड़े होकर कहीं अल्लाह अकबर बोल के देखियो सारी जगह खाली हो जाएगी बोला बम फटने वाला [संगीत] है साथ ही साथ मैं आप सभी से अपील करना चाहूंगा कि विश्वानी सेवा फाउंडेशन को आप स भी डोनेट अवश्य करें क्योंकि हमारी यह फाउंडेशन आप लोगों से बूंद-बूंद भर के जो हमारी गगरी भरती है वह हम किसी ना किसी गुरुकुल या फिर गौशाला या गाय के लिए कार्य करने वाले लोगों को प्रदान करते हैं अपनी तरफ से आपका निमित बनकर सप्रेम भेंट करते हैं तो आपकी जो भी इच्छा हो हमें वह भेज सकते हैं समस्याओं की यदि हम बात करते हैं तो आपके अनुसार मूल मूल समस्याएं हैं क्या किन किन जो राष्ट्र जिनसे विसंगतियों से जूझ रहा है क्योंकि समस्याओं की बात करें तो मुझे लगता है 500 पृष्ठों की एक पुस्तक भी कम पड़ेगी केवल इस राष्ट्र की समस्याएं लिखने के लिए मैं सीधा-सीधा वही प्रश्न पहले मैं जानना चाहती हूं कि आप सभी के अनुसार वो मूलम समस्याएं क्या है जिनका समाधान आर्य समाज को करना चाहिए और राष्ट्र बहुत अधिक जिनसे प्रताड़ित है सभी अपना अपना विषय जो आप चाहे वो वो समस्याएं आप बताइए अभी आपको सबसे प्रारंभ में आशीष जी ने बहुत सुंदर बात कही व्यक्तिगत समस्याएं भी है सामाजिक समस्याएं भी है राष्ट्रीय स्तर पर भी समस्याएं हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी समस्याएं हैं और प्रशांत जी ने एक बात में खत्म कर दिया समस्याएं लाखों है लेकिन उसका समाधान आर्य समाज के पास है आप यह बताओ कि आज से पहले कैंसर कितने कम लोगों को था बिल्कुल ना के बराबर लेकिन आज घर-घर में पहुंच गया आप विचार करो कि कुछ तो चेंज आया कुछ तो समस्या ऐसी हुई कि आज जो हर व्यक्ति डॉक्टर बहुत आसानी से कह देता है पसी टेस्ट करा लीजिए एकदम आसानी से इतना बड़ा आदमी सुन के घबरा जाए और ऐसे ऐसे टेस्ट आसानी से करने को कह रहे हैं वैज्ञानिकों ने बहुत तरक्की कर ली और मैं कहती हूं इतनी कर ली कि एक भी आदमी अब स्वस्थ नहीं बचा तो विचार करने की आवश्यकता है और अंकुर भाई ने अभी समस्याए बताई जिन पर आगे विचार किया जाएगा तो प्रत्येक समस्या का समाधान जितनी समस्याएं हैं गो को माता कहने वाले देश में हम आंख नहीं खोल पाते तब तक कितनी गौ माताए दुनिया से चली जाती है विचार करने की आवश्यकता है समस्याए माता को पूज्य मानते हैं बेटी को मातृ वत पदार यशु की बात करने वाले देश में कितनी बेटियों के साथ क्या होता है वो हम सबके सामने है तो समस्याए तो जहां जहां खोजने जा वही मिलेगी हर व्यक्ति से पूछ लीजिए जो व्यक्ति आपको दुनिया में लगता है यह सबसे ज्यादा प्रसन्न है इसको तो समस्या हो ही नहीं सकती आप उसके पास जाओगे आप कहोगे भगवान मैं फिर भी ठीक हूं इसको पहले सुधार कहने का अभिप्राय है प्रत्येक व्यक्ति के पास समस्याएं हैं तो समस्या का समाधान उस संस्था संस्था नहीं एक आंदोलन उस आंदोलन रूपी आर्य समाज के पास है अगर हम आएंगे जैसे स्वामी जी ने कहा वेदों की ओर लौट तो जब वेदों की ओर लौटेंगे तो सारी समस्याओं का समाधान स्वत ही हो जाएगा ऐसा मेरा मानना है गुरुकुल में वह स्वयं पढ़ी है और अभी अपना जीवन केवल एक सरकारी नौकरी में ना देकर मुझे अपने जीवन को उद्देश्य पूर्ण बनाना है ऐसा प्रकल्प बहन आयुषी ने शुरू किया इसके लिए उनका एक बार जोरदार तालियों से अभिनंदन कीजिए और जो भी उनका उत्तर हो आप बहन आयुष देखिए सर्वप्रथम तो मैं धन्यवाद दूंगी अपनी आचार्य डॉक्टर प्रियंवदा वेद भारती जी को मैं हमेशा कहती हूं कि जन्म देने वाली मां जन्म दे देती है लेकिन सबसे ज्यादा कठिन होता है उस वृक्ष को सींचना आप एक वृक्ष लगा दो वह कठिन है आसान नहीं है लगाना भी तो मुश्किल होता है लेकिन लगाना फिर भी थोड़ा आसान है उस वृक्ष को सींचना बड़ा मुश्किल होता है हमने शायद मां कैसे प्यार करती होगी मां का उतना प्यार नहीं देखा जितना अपनी आचार्य जी का प्यार देखा मतलब हम रोते भी थे आज भी आचार्य जी के सामने हम उतना बोल सकते हैं उतना रो सकते हैं जितना अपनी मां के सामने भी नहीं बोल सकते आप सोचिए कि आचार्य कितना प्यार से पालते हैं एक बच्चा कई बार लोग कह देते हैं और मैं कहती हूं यह सबसे ज्यादा अगर आज मैं गुरुकुल में नहीं जाती य यह बात नहीं कि इस मंच पर हूं इसलिए कह रही कि अगर आज गुरुकुल में नहीं जाती तो यह मंच छोड़िए आज कहीं मैं स्वयं भी नहीं जान रही होती मैं कौन हूं आज जो हूं वो गुरुकुल की देन है ये बात एकदम सत्य है उसका कारण ये है आज हम अपनी बेटियों को जगह-जगह पढ़ाते हैं नौकरी लग जाए एक सरकारी नौकरी के लिए पूरी जिंदगी भटका देते हैं बच्चे का उद्देश्य बना दिया सा विद्या या नियुक्त ये विमुक्त ये तो भूल गए समस्या तो यही है ना नियुक्त ये याद आ रहा है और उस नौकरी के लिए हम करोड़ों रुपया खर्च करते हैं और केवल बच्चे नहीं कर रहे आप 10थ क्लास का बच्चा कोचिंग जा रहा है दो लाख की कोचिंग की फीस माफ हो गई इसके लिए मां-बाप भी खुश है प्रसन्न है बहुत अच्छे धर्म अर्थ काम मोक्ष की तो चर्चा ही भूल जाइए और जबक सब जानते हैं सत्यता कुछ नहीं और इसका सबसे ज्यादा जो गुरुकुल में लाने के लिए प्रेरित कर सकता है तो व गुरुकुल के लोग ही कर सकते हैं क्योंकि व्यक्ति आपका आचरण देख के प्रेरित होता है आपका आचरण देखता है आपके मन में लगभग लोगों के मन में क्या छवि होती है जो गुरुकुल को नहीं जानते एक चोटा रखा होगा ऐसे ही घूम रहे होंगे एक ऐसी छवि जैसे भिखारी की छवि मैं कहती हूं हम उस परंपरा के लोग हैं जहां राजा दशरथ के पुत्र मर्यादा पुरुषोत्तम श्री रामचंद्र जी भी गुरुकुल में अध्ययन करते थे आज हमको लगता है कि गुरुकुल का बच्चा तो गरीब दीन हीन होता है हम उस परंपरा के लोग हैं जहां योगीराज श्री कृष्ण चंद्र जी महाराज जैसे लोग गुरुकुल में अध्ययन करते थे आप लौट तो सही वेदों की ओर लौटो याद रखिए सूर्य पश्चिम की ओर जबजब जाता है तब तब अस्त ही होता है उदय नहीं होता यह बात हमको याद रखनी पड़ेगी और गुरुकुल का विद्यार्थी अभी आत्महत्या की बात चल रही थी आत्महत्या 10 नंबर कम आ गए मां-बाप भी टेंशन में अरे नीट क्लियर नहीं हुआ तो बस कुछ नहीं भविष्य खत्म हो जाएगा अगर बच्चा इस पेपर को पास नहीं करा इतना जोर बच्चे पर डाल देते हैं कि 10थ का पेपर उसको लगता है यह मेरी जिंदगी का आखिरी पेपर है बस हम उसको इतना टेंशन में डाल रहे हैं जो युवा जिसको हमारे यहां आप सोचो हमारे यहां ऋषि कणा की परंपरा रही गौतम जबनी ऋषि जैसे लोगों की परंपरा रही और आज यह उत्थान नहीं कहते उत्थान तो वो था आज जो हम कर रहे हैं वोह विचार करने की आवश्यकता है और गुरुकुल में पढ़ने वाला विद्यार्थी देखिए प्रत्येक मनुष्य के जीवन में कठिन परिस्थितियां आती है ऐसा कोई नहीं जो कठिन परिस्थिति ना आए या किसी ने ना झेला हो लेकिन झेलने का अंतर कहां से आता है बस वो विचारधारा की बात है जब हम कहीं और पड़े होते तो शायद वो विचार नहीं आते अब विचार आता है कि मैंने जैसा कर्म किया अवश्य मेव भक्तवत्सल किया उनका फल मिलेगा तो मेरा कहने का अभिप्राय ये है कि गुरुकुल को प्रसारित करना है प्रचारित करना है गुरुकुल के विद्यार्थी ऐसे निकालने हैं जैसे स्वामी श्रद्धानंद जैसे लोग अगर गुरुकुल खोला तो सबसे पहले अपने पुत्रों को पढ़ाया मैं कहती हूं एक गुरुकुल के विद्यार्थी स्वामी रामदेव जी बस में नहीं आ रहे इतनी बड़ी-बड़ी कंपनियों के तो आप सोचो कि अगर ऐसे ऐसे विद्यार्थी निकलेंगे तो क्या ही होगा कहा जाता है ना आएंगे खत अरब से जिन में लिखा होगा गुरुकुल का ब्रह्मचारी हलचल मचा रहा है तो फिर से वही परंपरा को लाने की आवश्यकता है तो हमारे समाज में जिस युवा पीढ़ी को हम कहते हैं नशे में फलाने में फंसी ठिकाने में फंसी यह बात भी एक सत्य है लेकिन सत्य यह भी है कि जब जब देश को लहू की आवश्यकता होती है तो यह युवा पीढ़ी जिनको हम निकम्मा कहते हैं उन्हीं में से कुछ लोग रक्त बहाने के लिए सबसे आगे खड़े होते हैं यह भी हमारी युवा पीढ़ी का सच है यह भी हमारी ताक है तो हम दोनों पक्ष को जानते हुए अपने बच्चों को पढ़ाए प्लस लोगों को जागृत करें तीन लोगों को एक एक व्यक्ति जागृत करे रोज हमें एक व्यक्ति के पास जाना है पाच मिनट समाज के लिए देंगे तो निश्चित रूप से परिवर्तन आएगा और यही सोच के मैंने विचार किया अपने लिए तो सब जिए जिते आहार निद्रा भयन सामान्यत पशुरा धर्मो तेशा मद को विशेष धर्मे हीना पशु भी समान अपने लिए तो सब जीते हैं जो समाज के लिए जीता है अर्थात अगर आपने गुरुकुल में अध्ययन किया और अपने लिए जि परिवार पाल रहे हैं मस्त अपना जी रहे हैं समाज के लिए क्या किया वो भी तो आपका कर्तव्य है तो उस कर्तव्य का पालन करते हुए हम सभी अगर मिलकर के हम सभी जाए ना उनके पास क्यों अपेक्षा करते हैं कई बार लोग घर वापसी कराते हैं हम कहते हैं उनके में क्यों चले गए हमारे पास आते मैं कहती हूं इतना सामर्थ्य उत्पन्न करो कि लोगों को आप लेकर के आओ वो ले आए तो उन्होंने अपना लिया आप लेकर के आओ तो आप अपनाओ तो ऐसा सामर्थ्य शली अगर हम बनेंगे तो निश्चित रूप से लोग भी जागरूक होंगे और गुरुकुल के बच्चों को भेजेंगे स्वामी रामदेव जी को देख के अनेकों लाखों लोग प्रेरणा लेते हैं हमारे सामने बहन मीनाक्षी जी बताइए यूनिवर्सिटी में पढ़ने गई कैसे परिवर्तित हो गई तो इसलिए एक एक ब्रह्मचारी कितना कितना लाखों करोड़ों बड़ा कार्य किया है तो अगर एक एक ब्रह्मचारी मैं कहती हूं सूर्य नहीं बन सकते हम दिव्य नहीं है दयानंद से छोटी सी चिंगारी हैं लेकिन जहां खड़े हैं वही राष्ट्र की अमत के एक पुजारी हैं जहां खड़े हैं वही राष्ट्र की अमत के एक पुजारी बहुत आभार आयुषी बहन और बिल्कुल सच में इन्होंने जो कहा कि युवा मेरी पीढ़ी के यह लड़के भले कितने भी हो मॉडर्न स्वदेश भाई की पंक्तियां है मेरी पीढ़ी के ये लड़के भले कितने भी हो मॉडर्न जब भी चीरो ग सीना तो हिंदुस्तान निकलेगा हम दूसरे एक विषय की ओर आगे बढ़ते हैं जब हम समस्याओं की बात करते हैं अभी सबने कहा भी तो अभी परसों भी हमारा नारी सशक्तिकरण पर बात हुई थी मेरा जो प्रश्न है वो मूल रूप से ये है कि ऐसी यह परंपरा आई कहां से कि भ्रूण हत्या जैसी कि भाई बेटी है क्योंकि हमारे यहां जब हम वेद में पढ़ते हैं बहुत से मंत्र भी हैं कि भाई बेटी भी पैदा हो अग्नि रश्मी जन्मना जाता वेदा वो बेटी के लिए भी कहा जाता है ठीक है वो मां वाक जो है मां वाणी कहती है यम काम ये तम तम उग्रम कण म तो वहां पे भी बहुत सारी जो आध्यात्मिक ऋषिका हुई है बहुत सारे मंत्रों की दृष्टा रही है तो यह बात कहां से आई कि भाई बेटी अगर पैदा हुई है तो उसको नहीं पैदा होना चाहिए और मेरा कुल वंश खानदान तो केवल बेटा आगे बढ़ाएगा तो भ्रूण हत्या जैसी चीजें कहां से आई और उसका समाधान हमारे पास क्या है बिल्कुल आयुषी जी हमारे देश में सबसे प्रारंभ से मैं चलती हूं वैदिक काल था और वैदिक काल में अभी बहन बात कर रही थी कि अहम केतु अहम मुर्दा अहम उग्र विवा चनी की बात थी अर्थात राष्ट्रीय नारी मतलब भारतीय नारी उद्घोष करते है कि मैं राष्ट्र की ध्वजा हूं आप समझिए ध्वजा क्या होता है मैं मूर्धा हूं जैसे शरीर में मूर्धा का स्थान होता है मैं मूर्धा हूं लेकिन मध्यकाल ऐसा आया कि हम अपनी बेटियों को लेकर इतना भयभीत रहने लगे जैसा कि आपको पता ही है कि लोगों ने आक्रमण किया हम पर अत्याचार किया मानसिक गुलाम नहीं बना पाए वह अलग बात है शारीरिक बना पाए आज मानसिकता की तरफ बढ़ रहे हैं वह बात की चर्चा हम आगे करेंगे लेकिन उन्होंने जो हमको प्रताड़ित किया लोग अपनी बेटियों को लेकर भयभीत रहने लगे पुत्रियां होती थी विवाह कैसे होगा गोद में मारने लगे बच्चे को छोटी-छोटी बच्चियों को मारने लगे और आज भी वही परंपरा कई क्षेत्रों में निरंतर जारी है जैसा मैंने नारी सशक्तिकरण के सेशन में भी बोला था कि आज भी बेटी जब होती है पहली हो जाए तो चलो ले देके थोड़ी बहुत प्रसन्नता हो जाएगी चलो जी पहली है वो भी यही वाक्य के साथ मां को चिंता नहीं है बाप को चिंता नहीं है लेकिन आज भी और दुश्मन जैसे ये वामपंथी झंडा लेकर घूमते हैं ना जी बेटियों के दुश्मन पुरुष है पुरुषों को दुनिया इनके लिए तो दुनिया में सबसे निकम में सबसे खराब पुरुष प्रजाति है अगर यह ना हो तो दुनिया में कोई समस्या नहीं हो सकती लेकिन मैं कहती हूं कि इस भ्रूण हत्या से लेके और बेटी पे अत्याचार होने तक 99 पर अगर कोई गलत होता है तो व महिला ही प्रताड़ित करती है पुरुष कभी नहीं कहता बेटी क्यों हो गई यह बात सत्य है चाहे मानो या मत मानो बेटी होते ही सबसे पहले तो हॉस्पिटल जाने से पहले चिंता होती है बेटी तो नहीं होगी और यह बात तब से चलती है जब से बेटी हमारे यहां संस्कार हुआ करते थे और आज हम यह सोचते हैं कि बेटी तो नहीं है कहीं ना कहीं मां को भी सोचने पर मजबूर कर देते हैं कि बेटी हुई तो तेरे साथ क्या होगा पहली हो गई तो कोई बात नहीं और दूसरी हो गई तो लक्ष्मी जी आ गई कोई बात नहीं कोई बात नहीं पड़ोसी आएंगे कोई बात नहीं अरे कोई बात नहीं हो जा पता नहीं यह भी किसी को हो जाते हैं कुछ कर्म करे होंगे सांत ना देते हैं अरे दो बेटी आई है स्वागत कीजिए ना आप किसने कहा कि वंश को बेटा ही बढ़ाएगा एक बेटा है कोटा पढ़ने भेज दिया भाई साहब तैयारी कर रहे हैं बराबर पैसा भेजते हो एक पेपर में रह गए तुरंत आत्महत्या कर ली वंश को किसने बढ़ाया एक पिता की चार पुत्री है चारों को पहलवान बना दिया वंश को किसने बढ़ाया आज उनको पूरा देश जानता है अ विचार करो ना आपको शिक्षा देने की आवश्यकता है और यह त होगा जब मां करेंगी मां के करने से होगा परिवार के समाज के करने से होगा तो सब मिलकर के आज भी इस समस्या का अगर समाधान चाहते हो तो वास्तविक रूप में अपनी बेटियों को गर्गी मैत्री अपाला लोपा मुद्रा लक्ष्मीबाई बनाने की प्रेरणा दीजिए हम तो प्रेरणा देते हैं दीपिका पादुकोण बनने की यही तो जो देखेगा वही तो बिकेगा जो दिखेगा वही बिकेगा और ऐसे ऐसे बंदे आदर्श मान लिए जिनको पता ही नहीं चार करोड़ जेब में डालो कहीं खड़ा कर लो कोई नारे लगा लो उनको बुद्धि ही नहीं दिमाग ही नहीं लग रहा है आप सोचो ना ऐसे लोग बनना चाहेंगे हमारी बेटियां तो फिर से पतन की ओर जाएंगे तो भ्रूण हत्या रूपी जो बीमारी है अगर उसको कोई समाप्त कर सकता है दहेज प्रथा जितनी भी समस्याएं आप विचार करो एक मिनट और लूंगी कि अगर आदमी बेटियों से को लेकर डरता है तो अगर हम सच्चे अर्थों में और धरातल की बात करें ऊपर ऊपर हम बोलते बहुत है लेकिन विचार नहीं करते क्यों बेटियों को जीना नहीं चाहते क्यों नहीं बेटियों को चाहते हैं एक बेटी का विवाह कर दिया वो बेटी वहां भी प्रताड़ित है तो मां के जीवन पर क्या बीती है पिता के जीवन पर क्या बीती है उनको लगता है शायद बेटी ना होती तो अच्छा होता अगले घर जाकर दुखी है तो अगर हम सभी मिलकर प्रेरणा ले कि हम किसी भी बेटी का दिल नहीं दुखाए और बेटी भी प्रेरणा ले मैं भी अपनी सास को मां की तरह प्यार करूंगी लेकिन आपको रिटर्न में भी करना पड़ेगा एक आदमी प्यार करता रहे तो एक सीमा तक चलता है ज्यादा दिन तक नहीं टिकता वो प्यार दोनों का अगर बराबर रहेगा तो निश्चित रूप से हमारे समाज में परिवार में परिवर्तन आएगा और आ भी रहा है धीमे-धीमे लोग अपनी बहुओं को भी बड़ा अच्छा पढ़ाते हैं वो अलग बात है एक आदी निकल जाती है फिर लेकर के बहुत अपवाद भी हो जाता है तो हमको विचार करने की आवश्यकता है अगर अपने बच्चों को संस्कार देंगे गुरुकुल में पढ़ाएंगे तो जो समस्या अभी हुई थी और हमने बड़े मीम्स बनाए तो शायद वो नहीं बनेंगे बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ इसी को लेकर के है तो यही कहना जी अंकुल भाई ये जो बेटी वाला जो मामला है इसमें यह कहा जाता है अधिकतर हिंदुओं को ये कहा जाता है कि इनके अंदर ना पेट्रिया कल सोसाइटी ज्यादा है और इसको एक नया वर्ड दिया गया था पेट्रिया कल मिसोनी और फिर एक और दिया गया था जो पिछले ट्विटर के फाउंडर थे उन्होंने कहा के यह ब्राह्मण कल पेट्रिया कल मिसोनी है इसमें ब्राह्मण कल पेट्रिया कल मिसोनी में फिर मनु महाराज का भी नाम लिया गया और उन्होंने कहा कि क्योंकि मनुस्मृति में महिलाओं के दलन की बात लिखी गई है और वहीं से यह कहा गया है कि जो पितृ सत्तात्मक सत्ता है उसको ही सर्वोपरि माना जाए इसलिए मनु को सबसे पहले गाली दो अब कल परसों किसी ने ट्वीट किया हुआ था कि यह मनु की मूर्ति है जो जयपुर के सामने लगी हुई है हाई कोर्ट के इसको जितनी सजा दी जाए उतनी कम है मैंने कहा दे लो भाई मनु महाराज कहीं मिले तो पकड़ के दे लो एक बार हमारे सामने भी ले आना तो मैं इसके ऊपर दो बात कहना चाहता हूं कि जो पेट्रिया कल सोसाइटी है यह हमारी थी ही नहीं इब्राहिम में कोई भी लड़का होता है उस के साथ में उसके अब्बा का नाम जुड़ता है जैसे कि मोहम्मद बिन अब्दुल्लाह जैसे कि आयशा बिंत अबू बकर तो उसमें बाप का नाम जुड़ता है ना कि मां का नाम जुड़ता है जबकि अगर हम अपने पूर्वजों को देखें तो भगवान श्री कृष्ण के पिता का कोई नाम नहीं जानता उनकी माता का सब जानते हैं कुंती के माता का सब नाम जानते हैं लेकिन पिता का नहीं भीष्म के भी माता का सब नाम जानते हैं और मैं इसलिए नहीं ले रहा क्योंकि आपके दिमाग में उनकी माताओं के नाम चल रहे हैं क्योंकि आपको पता है कि कुंती है है आपको पता है यशोदा है आपको पता है कि गंगा है लेकिन पिता उं के नाम पर यदि हम आ जाएं आप बताओ कि भीष्म के पिता का नाम क्या था हमें खुद नहीं पता है और कुंती तो पांचों की थी लेकिन पिता उं में हम कंफ्यूज हो जाते हैं कल नियोग की बात चल रही थी अब जो नियोग का पूरा का पूरा भंडा फोर्ड महर्षि दयानंद सरस्वती पर करते हैं व इनडायरेक्टली एक तो मनु महाराज को गाली दे रहे हैं और रात दिन अपने आप को मनुवादी कहते हैं दूसरी बात कि वो जो पांच पांडव पैदा हुए थे वो भी तो नियोग से पैदा हुए थे और उनके आपको पिता के भी नाम नहीं पता तो इनडायरेक्टली आप उनको भी गाली दे रहे हैं हालांकि एक तो महापुरुष ऐसा हुआ है जिसको केवल फूंक मारने से ही पैदा हो गया था उसे तो उन्होंने भगवान ही मान लिया पर हम कम से कम किसी को भगवान तो नहीं मान रहे तो हमारी संस्कृति अलग है अब मैं करता हूं अपनी वैदिक संस्कृति की बात जहां अलग-अलग जगहों पर ऐसा उल्लेख आता है कि यदि किसी युद्ध में सारे पुरुष एकदम समाप्त हो जाए तो क्या य सृष्टि बचेगी और क्या एक साथ सारी स्त्रियां समाप्त हो जाए तो क्या यह सृष्टि बचेगी तो विद्वान ने कहा कि यदि एक ही झटके में सारी स्त्रियां समाप्त हो गई तो यह सृष्टि जो है ना यह 100 वर्ष मैक्सिमम 1 स वर्ष में समाप्त हो जाएगी यहां कोई नाम लेवा नहीं बचेगा इस मनुष्य जाति का लेकिन यदि सारे पुरुष समाप्त हो गए और स्त्रियां बच गई तो उसमें से कुछ ना कुछ प्रतिशत उस समय पर गर्भ से तो जरूर होंगी और आने वाले समय में वो बच्चों को जन्म भी देंगी और जब जन्म देंगी तो एक बार फिर से सृष्टि चल जाएगी तो हमारी संस्कृति में माता को केवल ऐसा नहीं कि अपने बच्चे का ही निर्माता है वह इस सृष्टि का निर्माता है और कल बहन जी ने परसों कहा था कि ब्रह्मा के बाद में यदि कोई निर्माता है तो केवल माता है तो इस कारण से भारतीय संस्कृति में माता का स्थान कन्या का स्थान सर्व उपरी रखा गया है हम भी कोई अच्छा कार्य करने के लिए घर से बाहर निकलते हैं तो पैर छूकर निकलते हैं अपनी कन्याओं के आशीष जी यहां बैठे हुए हैं मेरी बहन यहां बैठी हुई है दोनों के कन्याएं हैं और मुझे पता है कि जब भी कोई अच्छा कार्य होता है तो उसकी आरंभ करने से पहले कन्या के पैर छूकर चलने वाली संस्कृति कैसे पितृ सत्तात्मक हो सकती है हम तो केवल बॉडीगार्ड हैं मैं तो आज इन्हें कह रहा था बाद में भी मैं कहा पुरुषों को तो अपने अधिकार के लिए लड़ना चाहिए के केवल यत्र नार्यस्तु पूज्यंते रमन त्र देवता क्यों है भाई ये हमारे पैर छूकर क्यों नहीं शुभ काम कर सकते हमारे मां-बाप कन्याओं के ही क्यों चलते हैं गाड़ी आई जी कन्या के पैर उसम छपवा दिए मैंने कहा हमारे में कौन सा भूत बढ़ रे हमारे भी तो छपवा सको ते भाई ला जेब ढिल्ली हम करें हैं जमीन खरीदनी खेत की तो जेब ढिल्ली हम करें और उसमें से जब सबसे पहला होगा तो कन्या का व कन्या को काटेंगे हमारा क्या है बोले तुम तो कमाही रहे तो मार में कैसे कौन से भूत बढ़ रहे भाई जो हम नहीं दे सकते तो मैं तो ये कह रहा हूं कि भारतीय संस्कृति में चाहे किसी अन्य सभ्यता के अतिक्रमण के बाद में कुछ थोड़े बहुत समसामयिक परिवर्तन हो सकते हैं लेकिन हमारे डीएनए में वैसा नहीं है आज भी हमारे यहां पर कन्या को सर्वोपरि ही माना जाता है किसी के दुष्प्रभाव से यदि ऐसा हो रहा है तो उसको तत्काल त्याग देना चाहिए अन्यथा यह संस्कृति ज्यादा दिन तक चलने वाली नहीं है क्योंकि हमने बात देखी है कि पूरी दुनिया के अंदर यदि आप कहीं पर भी देखो जय श्री राम का नारा लगा दो तो आपके साथ में जय श्री राम का नारा लगाने वाले हजार खड़े हो जाएंगे कल ही परसों यह बात हो रही थी ना कि भारत का बच्चा बच्चा और ऐसा बोलकर डीजे बंद कर देते हैं तो भीड़ आगे से बोलती है कि जय जय श्री राम बोलेगा सबको पता है ना भीड़ में खड़े होकर कहीं अल्लाह अकबर बोल के देखियो सारी जगह खाली हो जाएगी बोला बम फटने वाला है यह हमारी संस्कृति है इसलिए उन्होंने उस संस्कृति को अपनाया था पूरी दुनिया के अंदर आज वह आतंकवादी के नाम से बदनाम है उनके जो नारे थे आतंकवादियों के नाम से बदनाम हो चुके हमें अपना डीएनए अपनी पहचान अपनी संस्कृति नहीं खोनी है इसलिए हमें सबसे पहला अपनी माताओं को सम्मान देना होगा और इसके लिए जिस प्रकार की भी गु प्रथा और देखो इसमें आर्य समाज का नाम भूल ग हम लेना भ्रूण हत्या इसका सबसे बड़ा विरोध यदि किसी ने किया तो आर्य समाज ने किया यदि बाल विवाह का विरोध किया तो महर्षि दयानंद सरस्वती जो और आर्य समाज ने किया और विधवा होने के बाद में पुनर्विवाह की यदि किसी ने विचार रखा तो व आर्य समाज था और पूरी दुनिया के पत्थर खाए जूते खाए गालियां खाई लेकिन महिला के सम्मान में सदैव खड़े रहे और एक पूरा पूरा समाज था जिन्होंने कहा कि गुरु कुलों से बाहर कर दो कन्याओं को इनको यज्ञोपवित का अधिकार नहीं इनको गायत्री मंत्र छोड़ दो वेद छोड़ दो इनको कुछ भी सुनने का अधिकार नहीं है पैर की जूतिया घर से बाहर नहीं निकलेंगी आप यह देखो कि जिस समय मुगलिया काल समाप्त हो गया उसके बाद भी ये प्रथाएं चल रही थी उन सब प्रथाओं को तोड़ने का कार्य भी आर्य समाज ने किया है तो आज यदि हमें अपने वैभव पर वापस लौट रहे हैं तो केवल ऋषि महर्षि दयानंद सरस्वती जी के कारण से बिल्कुल बहुत-बहुत आभार भाई अभी कल ही मेरी किसी से बात हो रही थी उन्होंने कहा पुराने समय की बात क्यों करते हैं अब देखिए ना अब स्त्रियों को इतने अधिकार मिले हुए हैं सारे कानून स्त्रियों के लिए बने हुए हैं लेकिन हमें नमन करने की इच्छा होती है हम इस प्रांगण में नमन करते हैं उस महर्षि देव दयानंद को जिसने ईट और पत्थर खाकर भी वो प्रयास किए और आज हम इस स्थिति में है कि हम यहां बैठकर आयुषी जी और मैं हम लोग इस तरह से कल्पना दी हैं हम इस तरह से बात कर सकते हैं तो सच में पुण्य नमन उस ऋषिवर देव दयानंद को अब एक प्रश्न बस एक मिनट के लिए आयुषी बहन को देती हूं वो चाहती भी थी इस विषय पर बात करना बलात्कार जैसी बात हमारे समाज में होती है और वह इसको किस रूप में जोड़कर देखना चाहती हैं कि हम लड़कियों को कैसे सशक्त बनाए और क्या आवश्यकता है संस्कृति की आपका जो भी मत है मैं इसम जो भी विषय है आपका मैं चाहती हूं कि आप इस पर प्रकाश डाले जैसे आज हमारे देश में अभी बहुत सारी बातें हमने सुनी और बिल्कुल एक वाक्य में सार यही है कि वैदिक शिक्षा ग्रहण करेगी तो ज्यादा सही होगा वह ठीक से नाचेगी और नहीं करेगी तो व ठीक ठीक नहीं होगा यही अभिप्राय था अब जो बहन ने प्रश्न किया आज हमारे देश में बहुत सारी समस्याएं हैं और हमको बताया जाता है कि अरे जी अहिंसा अहिंसा इससे जोड़ के मैं बताना चाह रही थी कि हमको बताया जाता है कोई बात नहीं यह तो चलता रहता है हो जाता है बहुत सारी समस्याए होती और हमारे धर्म मारना नहीं सिखाता हमारे यहां नहीं बताता हम उसकी प्रतिक्रिया करने ही नहीं देते आपने कितनी घटनाए देखी होगी बेटी के साथ गलत हुआ या कोई परेशान कर रहा है घर आके बताती है हम उसको चुप करा देते हैं कोई बात नहीं समाज क्या कहेगा लोग क्या कहेंगे करके चुप करा देते हैं ना बोलना चाहते ना बात करना चाहते और फिर हमारा धर्म नहीं सिखाता मारना आप उनको कहो अरे जी जवाब तो दो ना जी हमारा धर्म सिखाता है एक गाल पर थप्पड़ मारो दूसरा गाल आगे कर दो मैंने बोला दूसरे पर मारा तो सामने खड़े हो जाओगे जी पीटो ऐसे चलता है नहीं हमारा धर्म सिखाता है कि अगर नारी पर कोई गलत दृष्टि डाले तो सात समंदर पार जाकर के उसको समझा के आना कि दूसरे की स्त्री मां के समान होती है यह मर्यादा पुरुषोत्तम श्री रामचंद्र जी ने करके दिखाया था यह सिखाता है हमारा धर्म हमारा बताता है कि अगर कोई द्रोपदी पर गलत दृष्टि डाले या गलत वाक्य बोले लोग कहते हैं महिलाओं ने महाभारत करा दिया महिलाओं ने रामायण करा दी मैं कहती हूं नहीं नहीं आपने गलत दृष्टि डाली हमारे य मावत पदार यशु कहा गया लेकिन हमको बताया जाता हमारा धर्म नहीं सिखाता हमारा धर्म नहीं सिखाता राम जी को मानने वाले राम जी की नहीं मानते समस्या यह है राम जी को तो मानते हैं लेकिन राम जी की नहीं मानते कृष्ण जी को तो मानते हैं लेकिन योगीराज श्री कृष्ण चंद्र जी की बात नहीं मानते शिक्षाओं को नहीं मानते समस्या यही है वेद कहता है मम पुत्रा शत्रु अथ में दुहिता विराट वैदिक नारी उद्घोष करती है कि मम पुत्रा शत्रु हनो मेरा पुत्र शत्रु का विनाश करने वाला हो अथो में दुहिता विराट मेरी पुत्री विराट हो यह हमको वेद ने सिखाया लेकिन मैंने कहा ना कि वेदों की ओर लौटो वेदों की ओर लौटना भूल गए इसलिए यह समस्या उत्पन्न हुई है कि आज हमारे देश में तीन महीने की बच्ची से लेके और 60 वर्ष की महिला तक सुरक्षित नहीं है इसका कारण यही है याद रखिए जब सीता हरण होता है तो पुरुषोत्तम राम नहीं होते जब सीता हरण होता है अंकुर भाई ने कहा था ना हम तो बॉडीगार्ड है जब सीता हरण होता है तो पुरुषोत्तम राम नहीं होते और जब शीर हरण द्रौपदी का होता है तो घनश्याम नहीं होते और नपुंसकता की सीमा तक जा पहुंची है कायरता हमारी नपुंसकता की सीमा तक जा पहुंची है कायरता हमारी अगर शक्ति की भाषा सीखी होती तो यह दुष्परिणाम नहीं होते अगर शक्ति की भाषा सीखी होती तो यह दुष्परिणाम नहीं होते अपनी बेटियों को मजबूत बनाइए याद रखिए आम केतु तो अगर ध्वजा मूर्धा सुरक्षित नहीं होगी संभल के नहीं चलेगी तो यह वाली बात जो चलती है कि हम तो अहिंसक है जी हमारे यहां तो ये नहीं होता ये नहीं होता भैया उनको बताओ ना जी जय श्री राम का नारा जब आप लगाते हो तो रोंगटे खड़े होते हैं कि नहीं होते बिना भाव के थोड़ी लग जाता है जय श्री राम अगर कोई सामने से भी बोल दे तो हम उतने ही जोश में प्रतिक्रिया देते हैं तो अगर हमारे राम जी किसी को भयभीत करते हैं तो करे ना भाई साहब बुरे लोगों को हमसे डर ना लगे तो क्या लगे कुछ को तो डरना ही पड़ेगा तो वही वाली बात है अपनी बेटियों को मम पुत्रा शत्रु हनों की शिक्षा अगर देंगे तो निश्चित रूप से समाज उन्नति करेगा सही शिक्षा देंगे तो आज हमारी बेटियों के साथ जो हो रहा है वो नहीं होगा बहुत-बहुत अभिनंदन आयुषी बहन का इस चीज के लिए और इससे दोनों बातें निकलकर सामने आई भाइयों को सुनकर और बहन को सुनकर कि बेटियों को ऐसी शिक्षा दी जाए कि वो जहां पे भी उनके साथ समाज में राष्ट्र में घर में जहां पे भी गलत हो रहा है वो उसके लिए उस दुश्मन के सर पे नाच सके चढ़ के और घर में व ऐसी व्यवस्था बना सके कि वह साम्राज्य बनकर रहे और अपने घर को मंदिर जैसा बनाए तो यह दोनों बहुत आवश्यक बातें थी इस मंच से इसमें एक और चीज है कि हमारा धर्म कभी नहीं कहता है कि अगर एक गाल पर थप्पड़ मार दे तो दूसरा गाल सामने कर दो यह मोहम्मद दास करमचंद गाजी ने यह कहा था और उस व्यक्ति ने मैं मोहनदास नहीं मानता मैं उस व्यक्ति को मोहनदास इसलिए नहीं मानता क्योंकि मोहन ने तो स्वयं सुदर्शन उठाया था तो मद दस कर्मचंद गाजी ने जब यह बात कही वह वह व्यक्ति था जिसने किसी का दूसरे का कोट उठाकर कह दिया कि यदि हम एक आंख के बदले एक आंख लेने लग गए तो पूरी दुनिया अंधी हो जाएगी और उस दुरात्मा की हत्या के बाद मैं कहूंगा वध के बाद उन्हीं लोगों को फांसी दे दी गई तो यदि एक की हत्या के बाद में दूसरे को फांसी दी जाएगी मोहम्मद दास ने यह क्यों नहीं लिख गया कि यदि कल मेरी हत्या होती है तो मेरे हत्यारों को फांसी ना दी जाए भाई वो तो बदले की भावना हो गई ना एक आंख के बदले दूसरी आंख ना निकाली जाए क्योंकि यह बदले की भावना है तो क्या कर अपनी आंख फड़वा के बैठ जाए अगर हमारी एक आंख फोड़ी है तो दोनों निकाल लो ताकि सारी दुनिया को य पता लग जाए कि भाई इसकी तरफ कुंगली भी नहीं करनी नहीं तो जान तो मार देगा अगर हमने यह अपना पुरुष भूले हैं इस कारण से हम काटे गए हैं 1 स साल तक और दूसरी बड़ी बात के उसी के वध के बाद में 6000 चित पावन ब्राह्मण महाराष्ट्र में मारे गए थे वो व्यक्ति जो अपने अनुयायियों को हिंसा का पाठ नहीं समझा पाया वह हमें यह शगुफा पकड़ा के गया है कि हमें हिंसा का पालन करना और एक गाल पर मार दूसरी गाल सामना कर देना जिसके खुद के मानने वाले 6000 नि निर्दोष ब्राह्मणों को गर्भ को चीर चीर करके भ्रूण तलक के ऊपर खड़े होने वाले लोगों को उन लोगों के ऊपर वो कुछ नहीं बोल के गया अपने न्याय को इतना सिखा के नहीं गया और हम उसके मरने के 75 साल तक उसकी नपुंसकता को अपने ऊपर ढो रहे हैं तो इसे हमें तुरंत त्याग देना चाहिए हमारे धर्म में कहीं पर ऐसा नहीं है वेदों की रक्षा के लिए की गई हिंसा हिंसा नहीं होती वेद में जो डू ज एंड डोंट्स और हमारा संविधान लिखा है वैदी की हिंसा हिंसा ना भवती सीधी बात अगर कोई गाय का कत्ल कर रहा है और उसके प्रति हमने हिंसा की है तो हम नहीं मानते उसको हिंसा मैं एक बात पूछना चाहता हूं कि 1400 साल पहले किसी मजहब की स्थापना हुई हजार कोष दूर चलकर वो यहां आया और उसने कहा कि मेरे नबी को यदि तुमने कह दे तुम वाजिब उल कत्ल हो अरे तू तू मेरे घर में बैठ कर के मुझे बता रहा है कि मैंने तेरे अब्बा को कुछ कह दिया तो तू मु मारेगा और तेने मेरे घर के ऊपर कब्जा कर लिया मैं क्या करूंगा तेरा मैं तो तेरी राख तलक नहीं दूंगा उसे भी खा जाऊंगा चाट जाऊंगा मुझे तो वैसा विचार करना चाहिए था लेकिन हम उसके चक्कर में अपने आप मर बैठे यह समस्या है आज हम जो समाप्त हो रहे हैं उसके कारण क्या है कि हमने अपनी पौरुष को खो दिया है हम जितने भी लोग यहां बैठे हुए हैं हम सबको कहा जाता है कि मार देंगे मैं कहा सामने जब आएंगे ना तो पेंट आगे गिली और पीछे तो पीड़ी नजर आवेगी उनकी क्योंकि उनमें हिम्मत नहीं है मांसाहारी व्यक्ति में कोलेस्ट्रॉल बहुत ज्यादा होता है उनमें नहीं है आप एक उदाहरण मुझे बताओ कि जब उन्होंने छाती पर वार किया हो और केले ने केले को मारा हो एक मुझे बताओ रिंकू शर्मा था उसे भी धोखे से मारा गया घेर के मारा जाता है घात से मारा जाता है और यह धोखे से मारना और घात से मारना यह आज का नहीं है इनके स्लीपर सेल में 1400 साल पुराना सिस्टम डाला गया गया है और हम वह हैं जो अगर तलवार हाथ से गिर तो दुश्मन को भी य कह देते हैं मलेच्छ को भी पहले तलवार उठा यदि उसकी पीठ आ गई तो पहले कहेंगे कि तु घूम का यदि सामने स्त्री बच्चे आ गए तो हम उसके मना कर देते हैं लेकिन उसी मोहम्मद दास गाजी के समय में जिस टाइम डायरेक्ट एक्शन डे हुआ नोवा खाली हुआ तो सबसे पहले किसको टारगेट बनाया गया महिलाओं को और छोटे बच्चों को हम ऐसे व्यक्ति को आज अपने ऊपर ढो रहे हैं और उससे भी बड़ी शर्मनाक बात यह है कि राष्ट्र के राष्ट्राध्यक्ष और अधिष्ठाता जो बन रहे हैं वह भी उसी के चरणों में पड़े हैं मैं मानता हूं कि आर्य समाज को कम से कम महात्मा अगर हुए हैं तो वह उस समय पर स्वामी श्रद्धानंद थे जिन्होंने छाती के बटन यहां से यूं हटाकर कहा था कि अब मारना गोली अंग्रेजों को यह कहा था कि अब मारना गोली आर्य समाज वह है जिसने बलिदान दिया है जिसने सीने पर गोली खाई है हम उनकी संतति हैं तो हमें अपने साहस और अपने पुरुष के साथ में रहना है आपका आशीर्वाद बना रहे तो युवा तो इतने ही काफी हैं इतने ही बते रहे हैं ये आशीष जी 40000 लोगों को तो ट्रेंड कर चुके इतने कम समय में तो मैं ये मानता हूं कि इस शक्ति को आप लोगों के आशीर्वाद की अत्यंत आवश्यकता है बिलकुल

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😲 अपना Point साबित के लिए इतने कुतर्कआइये कुछ Cross Questions करें।

में एक बार क्या हुआ कि उनका खूब सारा लोगों ने आप जैसे यह दोनों ने बहुत विरोध किया और उन विरोध करने वाले लोगों ने महर्षि दयानंद सरस्वती जी...