Tuesday, 20 January 2026

#MANTHAN मनुस्मृति में मलेच्छों की सफाई का वर्णन Satya Sanatan Ankur Arya On Manusmriti

आज के टाइम में आप यह देखो कि इसको कितना नॉर्मल कर दिया गया है भारत के अंदर विदेशी संस्कृति को किस तरीके से दिखाया जाता है महिलाओं को प्रयोग की वस्तु मान लिया आपको आपने कच्छा पहन लिया एडवर्टाइजमेंट में दिखाया जाता है तो आपसे लड़की आक चिपक जाएगी तुरंत ही आपने जिलेट वाले से दाढी बना ली तो लड़की चिपक जाएगी आपने जूता बढ़िया पहन लिया तो लड़की आपके पास आ जाएगी विद्यालयों में हमें साइन को थी पढ़ाया जाता है लेकिन विधान और संविधान के विषय में कुछ नहीं पढ़ाया जाता और वही बालक कल फिर कोई भी अपराध करते हैं उनको यही नहीं पता होता कि हमने अपराध कर दिया है बाद में फिर अपराध बोध जब महसूस होता है तब आत्महत्या भी करते हैं अरे जब आपने नमक कम गिरने के ऊपर दूसरे को तलाक दे दिया और हलाला के नाम पर उसे मौलाना उठा ले गया और जब तलक उसका मन नहीं भरेगा जब तलक उसे वापस नहीं करेगा और उसकी जो होने वाली उस टाइम की औलाद है वो एक्सेप्ट भी होगी हम लोग बड़े-बड़े मंचों से कहते हैं कि मनुस्मृति को पढ़ना है मनुस्मृति को पढ़ना है लेकिन अगर एक आम जन मनुस्मृति को पढ़े तो क्यों पढ़े उसके पास क्या कारण है कि वह पढ़े उसको आप ऐसा क्या कारण उनको बता रहे हैं कि वह मनुस्मृति को पढ़े जी सबसे पहले तो धन्यवाद आपका और आर्य समाज न्यू मुल्तान नगर का हमारे प्रधान जी का जिन्होंने इतनी अच्छी व्यवस्था की और ऐसे महत्त्वपूर्ण विषयों के ऊपर बात करने के लिए उन्होंने हम सब का मार्गदर्शन किया कि जिन विषयों को वैसे लोग छेड़ते नहीं है अब सवाल पर आते हैं कि जो आपने सवाल कहा कि भाई मनुस्मृति को पढ़े क्यों क्योंकि यह कई बार सवाल आता है कि अगर हम अपने धार्मिक ग्रंथों को पढ़ते हैं तो क्या उसे नौकरी लगेगी क्या कहीं पर वह काम आएगी काम तो वही आर्कमिडीज का सिद्धांत आएगा काम तो वही आएगा कि अकबर का बाप कौन था और उसका बाप कौन था काम तो हमारे वही जॉमेट्री आएगी साइन कोस थीटा आएगा वही बातें अक्सर कर होती हैं लेकिन जब हम स्कूल में जाते हैं और स्कूल से बालक पढ़ कर के घर वापस आते हैं तो हर एक माता-पिता की यह चिंता रहती है कि हमारे बच्चे को संस्कार नहीं दिए जा रहे वह संस्कार जिनकी हमें हमेशा अपेक्षा रहती है क्या उन संस्कारों को दिलाने के लिए हमने ऐसे विद्यालय का चयन किया था जी नहीं हमने जिन विद्यालयों में अपने बालकों को भेजा है वहां केवल और केवल उनको एक तरीके से मानसिक गुलाम बनाने की तैयारी की जाती है अगर मैं किसी भी माता से जो आज काफी एड हो चुकी है उनसे मैं कहने लग जाऊं कि आपको ऑफिस में भेजा जाएगा वहां पर आप स्कर्ट पहन कर के नौकरी करना तो वह बिल्कुल मना कर देंगे लेकिन वही आदत अगर किसी दो साल तीन साल की बालिका को स्कूल में ले जाकर के डाली जाएगी तो वह जिस दिन बड़ी होगी वह उस दिन पहन कर के भी जाएगी आप एक छोटे से बालक को देखिए वह जूते जो पहनता है वह जुराब पहनता है बेल्ट लगाता है टाई लगाता है नीचे से लेकर ऊपर तक जो वेल ड्रेस्ड रहता है वो उसको देखिए और ऑफिस में जाने वाले एक व्यक्ति को देखिए छोटा बालक उसका ही एक छोटा सा नमूना है यानी के यस सर नो सर करना फाइल कंप्लीट करना टाई ठीक से पहनना पूरे एटिकेट्स और मैनर्स ये किसके लिए थे ये अंग्रेजों की कंपनियों में जाने वाले एंप्लॉयज के लिए थे लेकिन अगर कोई मुझे आज कहने लग जाए आचार्य प्रशांत जी को कहने लग जाए कि जी आप टाई बेल्ट पहन कर के जाना और यह दाढ़ी तो आपकी बिल्कुल नहीं रखनी इसमें बिल्कुल क्लीन शट रखना और यह बाल भी आपके ऐसे नहीं होने चाहिए जो करवी करवी से हैं है ना तो आप मना कर दोगे कह लोगे भाई मेरे को नौकरी नहीं करनी है लेकिन यही आदत यदि इनको जब यह दो साल के थे तब से डाली जाती है गुरुकुल में ना पढ़ कर के किसी विद्यालय में पढ़ते तो आज इनके गले में पट्टा होता चमड़े का नहीं होता चांदी का होता या सोने का होता पट्टा तो पट्टा है वह पट्टा होता उसी पट्टे की अपेक्षा में एक तो हम अपने बच्चों को कॉन्वेंट स्कूल में भेज रहे हैं ऊपर से कहते हैं हम संस्कार नहीं है यदि हमें ईश्वर कृत इस पूरी सृष्टि के डू एंड डोंट सीखने हैं तो हमें मनुस्मृति पढ़नी ही होगी जैसे कि विद्यालयों में हमें साइन कोस थीटा पढ़ाया जाता है लेकिन विधान और संविधान के विषय में कुछ नहीं पढ़ाया जाता और वही बालक कल फिर कोई भी अपराध करते हैं उनको यही नहीं पता होता कि हमने अपराध कर दिया है बाद में फिर अपराध बोध जब महसूस होता है तब आत्म हत्याएं भी करते हैं इसी कारण से मनुष्य के जीवन में मानवता के सिद्धांत को आगे बढ़ाने हेतु जो डू एंड डोंट्स हैं उनको जानने के हेतु हमें मनुस्मृति पढ़नी चाहिए क्योंकि यदि हम वह नहीं पढ़ेंगे तो हम एक अच्छे एंप्लॉई बन सकते हैं एक अच्छे बिजनेसमैन बन सकते हैं लेकिन अच्छे मनुष्य नहीं बन सकते इसीलिए मनु महाराज जिनकी संतानों को मनुष्य कहा गया है है उन मनु महाराज ने अपने सभी संतानों को एक डू एंड डोंट्स की पुस्तिका दी जिसका नाम है मनुस्मृति जिसके आधार पर हम एक अच्छे राष्ट्र अच्छी सभ्यता का निर्माण कर सकते हैं इसलिए हम मनुस्मृति अवश्य पढ़नी चाहिए धन्यवाद आचार्य जी बहुत खूबसूरत आपने आंसर दिया तो आचार्य जी मनुस्मृति में नियोग का प्रावधान है कि पति के द्वारा संतान उत्पन्न ना होने या उनके अकाल मृत्यु हो जाने पर जो स्त्री है वह अपने देवर से या अपने सम गोत्री से संतान उत्पत्ति कर सकती है जी इस पर आपका क्या कहना है यह जो विषय है वैसे तो अ जब सत्यार्थ प्रकाश पढ़ते हैं लोग तो मनुस्मृति का ना लेकर के इसको सीधे-सीधे सत्यार्थ प्रकाश में ही ऐसा लिखा हुआ है और ऐसा कह कर के महर्षि दयानंद सरस्वती जी पर ही इसका सारा आरोप मट दिया जाता है और महर्षि जी के विषय में बहुत ही अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए लोग आजकल हमने देखा है सोशल मीडिया पर काफी लोग प्रचार भी कर रहे हैं और नेगेटिव तरीके से उनका नाम लेते हैं जब बात नियोग की आती है तो उस समय तो लोग इसको ऐसा सोचते हैं कि यह पता ही नहीं क्या बात होगी लेकिन जब बात सरोगेसी की आती है तो हम प्रोग्रेसिव हो जाते हैं जब बात कहीं से हमें एग्स डोनेशन की बात आ जाती है हमें एग्स लेने हैं कई बार क्या होता है कि महिलाओं में जो एक्स बनते हैं वह बहुत वीक होते हैं पुरुषों में जो सीमन जो बनता है वह बहुत वीक होता है तो वह संतान उत्पत्ति के लिए पर्याप्त शक्ति सामर्थ्य नहीं होता उसमें और इस पर तो आज फिल्में बन रही है विकी डोनर जैसी फिल्म बनी और हॉलीवुड में बहुत इसको प्रोग्रेसिव माना जाता है आज कहीं भी आप देखोगे आईवीएफ की जो दुकाने खुली हुई हैं यह सारी क्या है हमारे धर्मों में हमेशा एक बात कही गई है विपत्ति काले मर्यादा नास्ति और विपत्ति काल में भी तब जब के वह पुरुष देखिए मनुस्मृति की यदि बात की जाए तो उसमें भी यह लिखा हुआ है कि यदि पति छोड़ जाए और आ 10 साल तक उसकी कोई पत्र भी ना मिला आपको कब कहा गया है और यदि आपकी संतान नहीं है तो वैसे समय में क्या करना है जिस कुल में उसका विवाह हुआ है उसी कुल में ही व संतान की उत्पत्ति करें और यदि वह पुरुष भी चाहता है कि मेरी भी संतान हो तो एक संतान उस माता की होगी एक संतान उस पुरुष की हो गी लेकिन उसके अलावा कहीं पर भी व्या विचार का कोई वर्णन नहीं है कहीं पर भी उसके साथ में किसी जबरदस्ती का वर्णन नहीं है दुष्कर्म करने का वर्णन नहीं है बलात्कार रेप जिसको हम बोलते हैं उसका वर्णन नहीं है किसलिए कहा गया है कुल को आगे बढ़ाने के लिए क्यों कहा गया है उसी से ही जो द्विव कहा गया है उसी से क्यों कहा गया है क्योंकि वो उसका सेम डीएनए कई बार ऐसा हो जाता है कि कोई माता-पिता की अकाल मृत्यु हो गई देखो कोरोना काल में इतनी मृत्यु हुई हैं और उसमें कोई कोई बालक तो अनाथ हो गया तो उनको उनके चाचा ताऊ या बुआ इनमें से ही तो पाल रहे हैं उनको कहीं अनाथ आश्रम में थोड़ा ना फेंक दिया जो हमारा जॉइंट फैमिली सिस्टम है वह क्यों स्ट्रांग था इसी कारण क्योंकि हमारे बालकों को मिलने वाले संस्कार हमारे ऐसा स्ट्रांग एक एजुकेशन सिस्टम होता था हमारे घर का कि जिसमें हमारे को जो एजुकेशन मिलती थी जो संस्कार मिलते थे उसके लिए बाहर नहीं भटकना पड़ता था अब नियोग कहां कहा गया है जहां बिल्कुल ऐसा विपत्ति काल आ जाए ऐसा नहीं कहा गया है कि तुम्हारे भी पैदा हो रहे हैं चलो देवर से भी हो जाए चलो जेठ से भी हो जाए ऐसा नहीं है उसमें उसमें कहा गया है कि यदि वह समाप्त हो जाए और कुल ना चल रहा हो वैसी स्थिति में अब जो हम सरोगेसी देखते हैं उसमें क्या है सरोगेसी एक पूरा बिजनेस है एक महिला अपने घर निकली अभी परसों की बात है उत्तर प्रदेश में एक माइनर लड़की के एग्स बेचता हुआ एक व्यक्ति गिरफ्तार कर लिया गया और उत्तर प्रदेश में क्योंकि योगी जी महाराज की सरकार है तो इस कारण से अब उस पर विधर्मी हों ने क्या वह प्रोपेगेंडा रचाया है के अंडे बेचते हुए एक्स का मतलब क्या समझ लिया अंडे अंडे बेचते हुए एक नाबालिक लड़की को गिरफ्तार कर लिया गया तो आप बात तो कही गई है कुछ और घटना है कुछ और लेकिन बदनाम करने के लिए छाप देंगे कुछ और ही इसी तरीके से नियोग में कहा गया कुछ और है लेकिन आपने उसको वभी चरण से जोड़ लिया अब यह पूरे विश्व के अंदर जो हमने कल महिला सशक्तिकरण पर बात की तो बहन आदरणीय बहन कल्पना जी यहीं पर बैठी हुई इन्होंने यह बात कही कल कि भाई शारीरिक सुख के लिए मनुष्य कितना नीचे गिर गया कि पहले तो यह बात हुई कि मेरे केवल पति से संबंध नहीं बल्कि विवाहित संबंध भी होने चाहिए पति कह रहा है सिर्फ पत्नी से ही नहीं विवाहित भी संबंध होने चाहिए फिर उसके बाद में कि शारीरिक सुख ही तो लेना है उसके लिए मुझे पुरुष की क्या आवश्यकता है मैं तो स्त्री स्त्री में भी शारीरिक सुख ले सकती हूं व भी बात आ गई इसी शारीरिक सुख को बिजनेस भी बनाया गया वैश्यावृति आज के टाइम में आप ये देखो कि इसको कितना नॉर्मल कर दिया गया है भारत के अंदर विदेशी संस्कृति को किस तरीके से दिखाया जाता है महिलाओं को प्रयोग की वस्तु मान लिया आपको आपने कच्छा पहन लिया एडवर्टाइजमेंट में दिखाया जाता है तो आपसे लड़की आख चिपक जाएगी तुरंत ही आपने जिलेट वाले से दाढ़ी बना ली तो लड़की चिपक जाएगी आपने जूता बढ़िया पहन लिया तो लड़की आपके पास आ जाएगी आपने साबुन अच्छी से वो जो व साबुन कह रहे अगर उससे आप नहा लिए तो आप आठ 10 लड़कियां तुरंत चिपक जाएंगी आके आप कोई गाड़ी लेकर निकल रहे हो तो तुरंत आपके लड़केया लिफ्ट मांगने के लिए लाइन लग जाएगी आप बाइक से निकल रहे हो कहीं से तो लड़कियों की लाइन लग जाए कि हमें पीछे बैठा लो जी यह क्या है यह महिला को एक वस्तु के रूप में एक आकर्षक वस्तु के रूप में प्रदर्शित किया जा रहा है और हमारी लड़कियां होती हैं यह भारतवर्ष की संस्कृति जहां की बची हुई थी और वहीं से ही आप कितना बड़ा बिजनेस सब लोग जानते हैं कि ओयो का बिजनेस ऐसे नहीं चल रहा था किसलिए चल रहा है केवल और केवल एक ही आधार पर चल रहा है यह जितना भी भारतवर्ष पूरे विश्व के अंदर जितना वैश्यावृति का कार्य पहले होता था पैसे देकर आज हो रहा है वो फ्री में कहने लगे कि वो जो पैसा देकर कल आयुषी जी बैठी थी जो पैसा देकर कोठे पर जाया करते थे ना लोग वो आज अपने घरों में बैठे रजा में बैठे हुए अपने फोन पर देख लेते हैं ठुमके लगते हुए ये सारी चीजें क्यों हो रही है हम क्या उस वैश्य वृत्ति वाले इशू पर नहीं बोल सकते क्या हम सरोगेसी वाले इशू पर नहीं बोल सकते जब हम किसी से एकस डोनेशन में लेते हैं हमें नहीं पता होता कि उसका कुल खानदान क्या है उसका डीएनए क्या है उसने किस प्रकार से और देखो सरोगेसी में तो क्या होता है कि उस लड़की को आप रखेंगे भी पा लेंगे भी उसके पेट में बच्चा है और आपका उसके ऊपर यह अधिकार नहीं है कि वह क्या खाएगी क्या पिएगोन खाने है पिज्जा खाना है फिल्म देखने जाना है या अपने बॉयफ्रेंड से मिलने जाना है तो आप उसको रोक नहीं सकते और वहां से आप संतान पैदा कर लोगे लेकिन अपने कुल से विपत्ति काल में पुरुष के मरने वो कार्य नहीं करना उसी वो किस्म का तो हमने यहां फायदा उठा रखा है कि उसका बिजनेस बना लिया एक आईवीएफ करवाने के लिए कम से कम कम से कम आपको चार से पा लाख रुपए देने पड़ेंगे एक सरोगेसी के लिए कम से कम 20 से 25 लाख रुपए देने पड़ेंगे जब हर चीज पैसे के सिस्टम में जब तक नहीं आएगी ना तब तक आपका विरोध होगा पैसा जो नोट है जो करेंसी है वह क्यों लाई गई क्योंकि हमारा आपसी बहुत प्रेम था आपस में भाई हम आपका काम कर रहे हैं आप हम दो किलो गेहूं दे रहे हमारे एक बैल है आपका एक बैल है दोनों के दोनों मिलकर पहले आपका खेत जोत देंगे उसके बाद मारा जोत देंगे भाई आपके अगर जो गन्ने का खेत खड़ा है उसमें से बीज ले लिया इस बार हमने बोलिया अगली बार बीज हम आपको दे देंगे आप बोलियो यही तो होता था यह आदान प्रदान था यह प्रेम भाव था इस प्रेम भाव को निपटा कर के पूरा का पूरा उस सब चीज का औद्योगीकरण कर दिया गया मैं यह नहीं कह रहा आज आप किसी से भी पूछो कि क्या आपकी कोई संतान नियोग द्वारा पैदा हुई मैं कहता हूं एक प्रतिशत भी हिंदू समाज में नियोग द्वारा बच्चे पैदा नहीं होते लेकिन मैं कह सकता हूं कि आने वाले 10 एक साल में 10 से 20 प्रत जो आबादी पैदा होगी वह सरोगेट मदर से पैदा होंगी या फिर कहीं ना कहीं डोनेशन में स्पर्म या एग्स लेने से पैदा होंगी लेकिन मैं उसके अलावा एक और क्वेश्चन पूछना चाहता हूं जो सवाल करते हैं नियोग के ऊपर नियोग का तो हमने आजल को उदाहरण देखा नहीं लेकिन हलाला के तो बहुत सारे उदाहरण है हलाला पर कोई क्यों नहीं बात करता भाई अरे जब आपने नमक कम गिरने के ऊपर दूसरे को तलाक दे दिया और हलाला के नाम पर उसे मौलाना उठा ले गया और जब तलक उसका मन नहीं भरेगा जब तलक उसे वापस नहीं करेगा और उसकी जो होने वाली उस टाइम की औलाद है वह एक्सेप्ट भी होगी और उसके बाद में फिर से तलाक होगा एक एक बीवी का चार चार 101 बार तलाक होता है और उसका द द बार ही हलाला होता है और उतने ही बच्चे भी यदि पैदा होते हैं उनके ऊपर क्यों नहीं सवाल उठाते हम तो अपने प्रत्यक्ष आंखों देखी हम यह बता देंगे कि उन लोगों के अंदर 10 से 20 30 पर बच्चे ऐसे हैं जो हलाला के द्वारा पैदा हुए लेकिन उसके ऊपर सवाल क्यों नहीं उठाते क्योंकि हिंदुओं को बिल्कुल ऐसा समझ लिया गया उठा के मुंह में धर लो बस और पिघल लो खा जाओ क्योंकि वो लोग सर तन से जुदा करने की धमकी तुरंत पकड़ा देंगे आपके हाथ में और धमकी बाद में देंगे पहले तो गर्दन उतार के थाली में परोस देंगे इस वजह से हम उनके बारे में कुछ बोलते ही नहीं है बात यहां पर केवल नियोग सरोगेसी या हलाला से बचे हुए पैदा बच्चों के नहीं है बात है यहां पर किसी भी तरीके से मर्यादा की हमारे जो विधान है जो संविधान है उसमें हर जगह हर तरीके की बातें कही गई हैं दिनचर्या की प्रतिदिन दिनचर्या की बात कही गई है 100 साल में अगर कोई ऐसी व्यवस्था ऐसा कोई महामारी आ गई उस दौरान में अगर कोई व्यवस्था लगानी है उसकी बात कही गई है और हजार साल में काम आने वाली बात भी कही गई है क्योंकि वही तो असली धार्मिक ग्रंथ होगा जिसमें हर मानवता से संबंधित हर एक चीज का आंसर होगा इस कारण से मैं कहना चाहूंगा कि इस विषय को बहुत ज्यादा बढ़ा चढ़ाकर बताया तो जाता है लेकिन उसी के एस्पेक्ट में जो दूसरे विषय हैं कम से कम उन पर भी कभी ना कभी चर्चा अवश्य होनी चाहिए हलाला और उनसे पैदा होने वाले बच्चों को भी न्याय मिलना चाहिए बहुत सुंदर बहुत सुंदर आचार्य जी बोलते हैं कि ये जो मानवता का संविधान है मनुस्मृति मानवता का संविधान है एक संविधान बीआर अंबेडकर जी ने भी बनाया जी ऐसा बोल दे कि उन्होंने मनुस्मृति को जलाया था जी तो आपको क्या लगता है कि अगर बीआर जी का बीआर अंबेडकर जी का अगर वह हटा दे संविधान और यह मानवता का संविधान लगा दिया जाए लागू कर दिया जाए मानवता का तो क्या देश चल पाएगा क्वेश्चन बहुत अच्छा है और आजकल मुझे लग रहा है कि जितना भी सोशल मीडिया पर प्रहार हो रहा है आप छाट छाट के सवाल मेरे लिए लाए हो ये अच्छा ये मेरे प्रश्न नहीं है क्योंकि मुझे लगता है बहुत ज्यादा यूथ में कल भी ये बात बोल रही थी कि सोशल मीडिया पर बहुत ज्यादा है तो सोशल मीडिया पर जब भी हम मनुस्मृति के बारे में सुनते हैं या कोई वीडियो डालते तो यही प्रश्न निकल के आते हैं तो मैंने ये जो प्रश्न लिए हैं यह उन्हीं युवाओं के प्रश्न है अगर युवा नहीं पढ़ेगा तो कुछ नहीं होगा बिल्कुल नहीं आपने सवाल बहुत अच्छे लिए हैं और वह जो लोग इस पर आरोप लगाते हैं उनको यह जवाब मिलना बहुत जरूरी है सबसे पहले मैं यह स्पष्ट कर दूं कि मनु महाराज ब्राह्मण नहीं थे मनु महाराज एक क्षत्रिय थे एक राजा थे जब उन्हें यह आया कि जब हमारी जो प्रजा है उसके लिए कुछ डू एंड डोंट्स होने चाहिए तब उन्होंने एक अवकाश लिया और इस पूरे के पूरे विधान का निर्माण किया तो पहला चीज जो मनु महाराज का विरोध किया जाता है ब्राह्मण कह कर के मनु महाराज का विरोध होता है ब्राह्मणवाद का विरोध उसके साथ-साथ लिखा जाता है ब्राह्मणवाद का विरोध ब्राह्मणवाद का अंत मनुवाद का अंत तो पहली चीज के वह खुद ही ब्राह्मण नहीं थे तो ब्राह्मणवाद का आप विरोध कहां पर करोगे दूसरी चीज के जो आपने कहा बी आर अंबेडकर साहब ने विधान संविधान लिखा तो मैं मानता हूं कि बी आर अंबेडकर साहब ने कोई संविधान नहीं लिखा था बल्कि बहुत सारे संविधान जो ऑलरेडी बने हुए थे वहां से कलेक्ट करने का काम यह हुआ था उन्होंने जो उसमें दो चीज डाली थी वोह अस्पताल बनाया गया था और जो आरक्षण था पूरे विश्व में कहीं पर भी आरक्षण नहीं है पूरे विश्व में अभी किछ कुछ लोगों ने कहा था कि साउथ अफ्रीका की क्रिकेट टीम में आरक्षण है और हमें पता लग गया आरक्षण के नाम पर जो लड़का आया था ना उसमें उसका बेचारे का टोटल रिकॉर्ड यह था कि पूरे वर्ल्ड कप में 100 रन नहीं बना पाया देख प्रतिभा से ही कोई कार्य मिलना चाहिए कोई भी उपाधि मिलनी चाहिए ऐसा हमारे मनु महाराज ने शुरुआत से ही कहा है और जैसा कि गौतम भाई ने भी इसमें कहा है के जो काबिलियत है बहन जी ने बताया कि जो हमारी काबिलियत है ना उसके आधार पर भी हमारे सारे ऑक्यूपेशंस थे और यह जो वर्ण व्यवस्था महाराज ने बनाई थी यह वर्ण व्यवस्था नहीं बल्कि हमारे वर्क कैटेगरी हैं तो अगर हम अंबेडकर साहब की बात करें तो अंबेडकर साहब और मनु विधान को अगर हम पैरेलली थोड़ा सा स्टडी करते हैं तो अंबेडकर साहब ने अगर मनुस्मृति जलाई और कहा कि इसमें असमानता एं हैं तो उन्होंने अपने खुद के संविधान में कौन सी असमानता दूर कर दी भाई उन्होंने भी तो मनु महाराज के ऊपर उनका यह आरोप था कि यहां पर जन्मना सारी जातियां मिलती है ब्राह्मण का बेटा ब्राह्मण बनता है तो आपने अपने विधान में उसको खत्म कर देना चाहिए था उन्होंने भी तो उसी को कॉपी पेस्ट कर लिया तो फिर अगर मनु महाराज पापी हैं तो अंबेडकर जी भी तो पापी हैं यदि उन्होंने ही उसका निर्माण किया है और सारे लोग यही उनके ऊपर उनकी पीठ थपथपा रहे हैं कि उन्होंने संविधान लिख दिया संविधान लिख दिया तो लिख दिया था तो उसमें कर देते कि भाई जिसका जो ऑक्यूपेशन है जिसकी जो काबिलियत है उसके आधार पर उसका वर्ण या फिर उसकी जो कैटेगरी है वो बढ़ती चली जाएगी लेकिन आज तो हम राष्ट्रपति हो चाहे हमारे सांसद हो चाहे मंत्री हो चाहे वो कुछ भी बन जाए लेकिन वह रहेगा हमेशा शेड्यूल कास्ट ही ऐसा क्यों है यदि उसके सारे लेवल्स अप हो चुके हैं तो उसके बाद में व शेड्यूल क्यों है उसके बाद में दलित क्यों कहलाया जा रहा है दूसरी चीज के मनु महाराज ने जिन धार्मिक व्यवस्थाओं का अनुपालन करने की बात कही है उन धार्मिक संस्थानों में आपसे कभी भी कोई भी कास्ट सर्टिफिकेट नहीं मांगा जाता जैसे कि यहां एक आर्य समाज मंदिर में सब लोग आए हैं मैं आप सबसे पूछना चाहता हूं क्या आप जब अंदर आए तो आपसे कहा गया कि कास्ट सर्टिफिकेट लेकर के आना क्या कहा गया कि भाई अपना आधार कार्ड ले आना है ना ताकि जांच हो सके वो सुरक्षा कारणों से कहा गया होगा यह जितने भी सनातन धर्मं के जितने मंदिर हैं किसी में भी कहा जाता हो मैं देख रहा था यह साई से लेकर के बालाजी से लेकर के हनुमान जी से लेकर के इतने बड़े-बड़े मंदिर हैं उनमें करोड़ों लोग जाते हैं लेकिन क्या उनसे कहा जाता है कि आप कास्ट सर्टिफिकेट लेकर के आओ या माथे पर अपनी जाति खुदवा कर ले आओ नहीं कहा जाता है किसी से भी यह इतने बड़े-बड़े अब कथावाचक चल रहे हैं उनमें आठ आठ 10 10 लाख की भीड़ बैठी हुई है किससे कहा गया है कि राम का नाम या गायत्री मंत्र तभी सुन सकते हो जब तुम अपना कास्ट सर्टिफिकेट ले आओगे लेकिन विद्या के मंदिरों में आपको सबसे पहले एडमिशन के टाइम पर ही कास्ट सर्टिफिकेट चाहिए वो जो विद्या का मंदिर है व जो हमारे विधान के अनुसार ही चलता है जिस संविधान की हम बात कर रहे हैं उन्हीं विधान के अनुसार वो मंदिर चलता है उसमें यदि छोटा सा बालक भी यदि कोई जाता है तो उसको पहले कहा जाता है कि बेटा अपना कास्ट सर्टिफिकेट बनवा करके लेकर आना आपके पिताजी की क्या कास्ट है वो यहां पर लिखवा हो आपका धर्म क्या है वो यहां पर लिखवा हो जब एक छोटे से बालक को ही यह पता लग गया कि मेरी कास्ट क्या है देखो कोई भी बालक पैदा होता है मेरा भी छोटा सा बालक है आपका भी छोटा सा बालक है उसको आपने नहीं बताया कि हमारी कास्ट क्या है तो उसको नहीं पता है भगवान किसी को कास्ट में किसी की अलग-अलग कैटेगरी में पैदा नहीं करता है लेकिन हमने बताया जब अपने बच्चे के हाथ में कास्ट सर्टिफिकेट दे दिया कि बेटा एससी है तू एसटी है तू ओबीसी है तू अपने स्कूल में जा और यह जाकर वहां पकड़ा देना किसी भी बच्चे को डी मलारा इज करने का यह सबसे बड़ा तरीका है छोटे बच्चे को ही पता दिया आपने कि आपकी सामाजिक स्थिति देखिए मेरे कितने सारे मित्र होंगे आपके सारे कितने मित्र होंगे आपके कलीग्स होंगे उनमें किसी को भी ऐसा नहीं कहा जाता कि चतरी कास्ट क्या है तब तू मेरा दोस्त बनना मुझे तो नहीं पता था कि भाई आपकी क्या कास्ट है आपकी क्या कास्ट है मुझे नहीं पता जितने भी आर्य लगाते हैं मुझे तो नहीं पता लेकिन हम तो सबसे गले मिलते हैं यह हमारे समाज का हिस्सा था ही नहीं संविधान की जो बातें हैं वही अपने आप में देखिए हो सकता है किसी को कष्ट हो लेकिन उसकी जो मूलभूत अवधारणा है यदि वह बदल दी जाती उसी टाइम पर ही तो कम से कम आज वमन से ना होता मनु महाराज जो कहते हैं वह यह कहते हैं कि यदि आपका और यह बात केवल मनु महाराज ने नहीं मेगस्थनीज जो भारतवर्ष आता है तो वह भी यही बात कह रहा है कि जब मैं यहां के घरों में जाता हूं तो मैंने यह बात देखी कि एक व्यक्ति जो बाहर बैठा हुआ मोची का कार्य कर रहा है तो जब मैंने उससे पूछा कि तुम्हारे कितने बेटे हैं तो उसने बताया कि मेरे चार बेटे हैं क्याक करते हैं कि मेरा एक बेटा आचार्य बन चुका है दूसरा बेटा मेरा फौज में जा चुका है तो उन्होंने कहा कि क्या वह भी मोची ही है उन्होंने कहा नहीं इस घर में केवल मोची मैं हूं वह नहीं है वह क्षत्रिय है और वह अध्यापक है वह आचार्य हो चुका है वह ब्राह्मण कोटि में आता है अर्थात यह मनु महाराज की भी बात नहीं है यह मेगस्थनीज काल की बात कर रहा हूं जब तलक यहां पर मुगलों का और अंग्रेजों का शासनकाल नहीं आया था यह विघटन उसके बाद का है दूसरी बात के हमारे यहां पर अब न्याय व्यवस्था की बात आएगी यदि किसी व्यक्ति ने हत्या कर दी तो चाहे वह किसी भी कास्ट का हो तो अगर उस पर धारा 302 लगी है तो उसको उसी के अनुसार दंड मिलेगा लेकिन कहा यह जाता है कि आज जो विधान आज जो यह मनुवादी जो विचारधारा के लोग हैं वह यह चाहते हैं कि यदि एक कोई अपराध किया है ब्राह्मण ने तो मनु महाराज ने उसमें लिख दिया के ब्राह्मण को तो छोड़ दो लेकिन दलित अगर पकड़ा गया अच्छा इन्होंने दलित और शूद्र को भी एक कर दिया लेकिन यदि कोई शूद्र पकड़ा गया तो उसको मारो उसको पीटो जबकि मनु महाराज स्वयं यह कहते हैं कि यदि एक ब्राह्मण एक अपराध करता है वही अपराध एक क्षत्रिय करता है वही अपराध एक वैश्य वही अपराध एक शूद्र करता है तो ब्राह्मण को कम से कम 100 गु अगर अगर दलित को अगर अगर शूद्र को आ रुपए का दंड दिया गया है ब तो ब्राह्मण को 64 देना चाहिए उसका मल्टीप्लाई कर दो वैश्य को 16 है वैश्य को 16 है अक्षत को 32 और ब्राह्मण को 44 और उसका करने का कारण यह है क्योंकि जो शूद्र है वह तो अनपढ था उसने मा कोई पाप कर दिया या कोई अपराध कर दिया तो ब्राह्मण तो पढ़ा लिखा था उसने ऐसा पाप क्यों किया तो उसको 64 गुना उससे 64 तो न्यूनतम रख 64 तो न्यूनतम है अधिकतम 100 है और देने को 120 भी दे सकता है यदि राजा का मन कर रहा है संतुष्टि नहीं मिल रही है तो व 120 भी दे सकता है मनु महाराज ने तो यह कहा है तो असली समानता तो यह है असली आरक्षण तो यह है जी सजाओ में आरक्षण दिलवा दोगे आप संविधान के हिसाब से दिलवा भाई एक दलित ने यदि कोई हत्या कर दी और एक ब्राह्मण ने हत्या कर दी तो ब्राह्मण को तो आप दे दो 120 साल की सजा और दलित को दे दो 8 साल की सजा दिलवा दो बताओ नहीं हो सकता तो मानवता का विधान मानवता का संविधान तो यही है और उससे भी बड़ी बात मैं आपको कह दूं कि भारत में भले इसको जलाया जाता हो लेकिन 32 से अधिक देश ऐसे प्रमाणित रूप से हैं जिन्होंने मनु महाराज के विधान से ही अपने संविधान में चीजें ली हैं और देखो हमारा दुर्भाग्य के हमारे देश का विधान 32 देशों में कॉपी पेस्ट किया जा रहा है और हमारा इतना बड़ा लोकतंत्र है जो अन्य 16 देशों से कॉपी प पेस्ट करके हम यहां ला रहे हैं तो इससे बड़ा दुर्भाग्य हमारा और क्या होगा भले ही भगवान मनु महाराज का मैं तो भगवान इसीलिए बोलता हूं क्योंकि भग अर्थात ऐश्वर्य वान वह इसलिए ऐश्वर्य वान है क्योंकि उन्होंने पूरे विश्व में अपना ऐश्वर्य दिया है अपने बुद्धि का ऐश्वर्य दिया है और मनु महाराज ने जो चीजें बनाई हैं उसकी असल वैल्यू विदेशों में है अगर आप बाहर के देशों में जाकर के देखोगे तो उन्होंने तो अपने यहां पर पीएचडी कोर्स बनाए हैं मनु महाराज के ऊपर लेकिन भारत का दुर्भाग्य है इसलिए मैं तो कहना चाहूंगा कि यदि संविधान को भी मनु महाराज से ही प्रेरित होकर के लिखा जाएगा मैं यह नहीं कहता अमूल चूल सब परिवर्तन कर दो लेकिन यदि उससे पर उससे प्रेरित होकर के लिखा जाएगा तो समाज में कम से कम अपराध बहुत मात्रा में कम हो जाएंगे अगर आज एक कोई व्यक्ति हत्या करता है तो 3232 साल तक केस चलता है लेकिन मनु महाराज के यहां प ऐसा नहीं होता है यदि किसी व्यक्ति ने रेप कर दिया अब यह तंदूर कांड वाला था वह छूट गया जी अभी तो एक वो क्या नाम था वो राम रहीम उसके ऊपर कितने सारे केस चल रहे थे उसको पेरोल मिल ग जी अगर यहीं पर मनु महाराज का विधान होता तो उसको हत्या करवा उसका तो कम से कम मृत्युदंड कम से कम ऐसे लोगों हैं लोहे के पलंग पर चला देते उसको तो ये इस कारण से ना केवल भारतवर्ष में बल्कि पूरे विश्व में लागू होना चाहिए मेरा तो मन ये कहता है बहुत-बहुत धन्यवाद आचार्य जी

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