Tuesday, 20 January 2026

#MANTHAN गांधी ने हिन्दुओं की लाशों पर कैसे नमक छिडका Satya Sanatan Ankur Arya

हमारा धर्म कभी नहीं कहता है कि अगर एक गाल पर थप्पड़ मार दे तो दूसरा गाल सामने कर दो यह मोहम्मद दास करमचंद गाजी ने यह कहा था और उस व्यक्ति ने मैं मोहनदास नहीं मानता मैं उस व्यक्ति को मोहनदास इसलिए नहीं मानता क्योंकि मोहन ने तो स्वयं सुदर्शन उठाया था गाय की रक्षा केवल हिंदुओं का या आर्य समाज का कार्य नहीं है यह संपूर्ण समाज का पूरे भारत नहीं पूरे विश्व का कार्य है क्योंकि यदि जिस दिन गाय समाप्त हो जाएगी उस दिन आप देख लेना लोग वैसे ही मरेंगे जिस प्रकार से जॉम्बीज वाली फिल्मों में दिखाया जाता [संगीत] है आप लोगों का बहुत-बहुत धन्यवाद कि आपने गुरुकुल की पुनर स्थापना उनके पुनर्निर्माण के लिए विश्वानी सेवा फाउंडेशन को खूब सपोर्ट दिया और यह सपोर्ट आगे भी आपका चलता रहे इसके लिए मैं आपसे बार-बार अपील करता रहूंगा जो हमारे भाई बहन गुरुकुल को अच्छा देखना चाहते हैं बढ़ते हुए देखना चाहते हैं विश्व गुरु भारत की ओर केवल गुरुकुल ही ले जा सकते हैं ऐसा जो मानते हैं वह हमें इस क्यूआर कोड पर स्कैन करके सपोर्ट कर सकते हैं समस्याओं की यदि हम बात करते हैं तो आपके अनुसार मूल मूल समस्याएं हैं क्या किन किन जो राष्ट्र जिनसे विसंगतियों से जूझ रहा है क्योंकि समस्याओं की बात करें तो मुझे लगता है 500 पृष्ठों की एक पुस्तक भी कम पड़ेगी केवल इस राष्ट्र की समस्याएं लिखने के लिए मैं सीधा-सीधा वही प्रश्न पहले मैं जानना चाहती हूं कि आप सभी के अनुसार वो मूल मूल सम समस्या क्या है जिनका समाधान आर्य समाज को करना चाहिए और राष्ट्र बहुत अधिक जिनसे प्रताड़ित है सभी अपना अपना विषय जो आप चाहे व वो समस्याए आप बताइए पर्यावरण एक बहुत बड़ी समस्या है यह तो मतलब सबके सामने ही है कि हम सब एक दूसरे से जो आजकल प्रतिस्पर्धा चल रही है मत की मता की मजहब की धर्म की बहुत सारी प्रतिस्पर्धा हैं लेकिन उनसे पहले तो हम पर्यावरण के कारण जो सबको समान रूप से मिलता है अगर दिल्ली का एक क्यूआई आज 500 है तो वह हिंदू मुसलमान सिख ईसाई सबके लिए है दूसरी समस्या यह है कि गायों का लगातार होने वाला कटान डेरी ने कई बार यह कह दिया है कि तकरीबन 68 पर मिल्क एकदम सिंथेटिक और कैंसरस है और छोटे से बच्चा जो बोतल में दूध पी रहा है आज थैली का या किसी कहीं से जो भी दुधिया लेकर आ रहा है वह सारा कैंसरस है अगर हम बड़े शहरों की बात करें और हम दिल्ली में बैठे हुए हैं तो एक बहुत बड़ी समस्या यह है कि आप प्रतिदिन 30 सिगरेट फूंकने के बराबर तो वैसे ही स्मोक अपने अंदर ले रहे हैं तो 12 साल तकरीबन आपकी एज वो कम हुई और कैंसर तो आपको 25 की उम्र में लग जाए या नवजात शिशु को लग जाए कुछ कहा ही नहीं जा सकता तो हम एक दूसरे से तो बाद में लड़कर मरेंगे उससे पहले तो हम ये जो समस्याएं हमने उठाई हुई है इनसे पहले हम समाप्त हो जाएंगे और यह सबसे बड़ा उदाहरण है आर्य समाज कि जिसके पास में इन दोनों समस्याओं का समाधान है आगे हम बात करेंगे कि भाई रेड कारपेट ग्रीन कारपेट और वाइट कारपेट अर्थात वामपंथ इस्लाम और ईसाइयत यह बहुत बड़ी समस्याएं और इनका समाधान भी आर्य समाज के पास में ही है तो समस्याएं तो बहुत हैं और समाधान एक संस्था के पास हो तो मैं मानता हूं कि धरती पर एक अनमोल संस्था है उसके विषय में आज हम तरह तरीके सेर हर एस्पेक्ट में बात करेंगे तो मुझे लगता है कि बहुत सारे ऐसे हीरे मोती अंदर से निकल के आएंगे विचारों के जो पूरी दुनिया और समाज के लिए हितकारी होंगे हम बात करते हैं गुरुकुल में पढ़ने वाले बच्चों की या किस तरह से यहां प जितने लोग उपस्थित हैं या जो लोग सुन रहे हैं वो गुरुकुल में भेज सकते हैं लेकिन एक हम जब आबादी की बात करते हैं तो बहुत बड़ी संख्या ऐसी है जिन्हें गुरुकुल के विषय में या तो पता नहीं है गुरुकुल के विषय में पता है तो उनमें वो एक हे दृष्टि है या तो कह सकते हैं कि हमारा जो मन होता है इतना चंचल है कि भोगवा के प्रति साधारण चीजों के प्रति जो इलुमिनाटी होता है बहुत ज्यादा प्रकाशित होता है उसके प्रति बहुत ज्यादा आकर्षित होता है उन लोगों को फिर गुरुकुल की तरफ लाने का क्या एक प्रकल्प ऐसा हो सकता है या ऐसा क्या किया जा सकता है क्या पॉइंट्स हो सकते हैं जिनसे उन लोगों को गुरुकुल की ओर जोड़ा जाए अंकुर भाई आप ही इसको आगे कीजिए मैं चाहूंगा कि इसका आंसर पूरी तरीके से तो बहन आयुषी जी ही दें और प्रशांत जी भी दे सकते हैं लेकिन दूसरा तरीका यह हो सकता है जिस प्रकार से वो अच्छा वो भी इलाज आर्य समाज ने बहुत पहले ही कर दिया था मैं हर बार यह कहता हूं कि जो हम आज सोच रहे हैं ऋषि दयानंद सरस्वती ने 150 साल पहले वो सोच लिया हम आज नारी सशक्तिकरण की बात करते हैं दलित उत्थान की बात करते हैं हम परिवार को संगठित करने की बात करते हैं आज हम गौरक्षा की बात कर रहे हैं आज हम वापस से वैदिक खेती की बात कर रहे हैं कि जितना यूरिया है पेस्टीसाइड सब खत्म करो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूरिया का कोटा कम कर दिया उसका बैग कम कर दिया उसको नीम कोटिंग कर दिया ऊपर से जो गाय आधारित खेती करेंगे उनको भी योगी जी भी अलग से 900 प्रति महीना दे रहे ये आज सोचना पड़ रहा है हमें और उन्होंने वो 150 साल पहले सोचा तो मैं कहता हूं आप सभी लोग तो उसी ऋषि परंपरा की संतान हो जो पूरी दुनिया से कम से कम दो शतक आगे चलते हो तो एक बार क्लैपिंग तो आपको अपने लिए करनी चाहिए कि आप इतनी उत्कृष्ट विचारधारा के लोग हो ऐसे आंदोलन से जुड़े हुए हो देखो कई बार ऐसा हो जाता है कई बार लोग कह आर्य समाज तो एक अलग ही परंपरा है एक अलग ही कल्ट है एक अलग ही संप्रदाय बन गया नहीं यह संप्रदाय नहीं है ये एक आंदोलन है और इस आंदोलन में पूरा विश्व एक साथ भागीदार है पूरे विश्व के अंदर जो समस्याएं चल रही है उनका समाधान ऋषि ने दिया और इसका समाधान कैसे दिया डीएवी के द्वारा जो आज कहते हैं कि भाई गुरुकुल में पढ़ने के बाद तो चोटा थमेगा और उसके बाद में आचार्य बनेगा कथा करेगा सत्यनारायण के और दो डोंगे चून मिल जाएंगे उसके अलावा और क्या मिलेगा और वो चून भी कौन सा उड़ा उड़ा पितरों के नाम वाला हैं वो जो नीचे होता है ना वो गोबर फेर दिया करें तो गोबर के कण भी मिल जाए कई बार तो उसम वो चढ़ाया सत्यनारायण की कथा में ले पंडित जी तुम रोटी बना लियो तो वो मिलेगा जी हम तो क्यों पढ़ाओ अपने बच्चों को गुरुकुल में तो हमें आज की तारीख में जो एजुकेशन है वो भी और जो गुरुकुल शिक्षा प्रणाली है व भी गुरुकुल कांगड़ी को देख लो आप चाहे गुरुकुल कुरुक्षेत्र को देख लो चाहे सारे जितने भी डीएवी हैं मैं आपको बताऊं डीएवी सरकारी संस्थाओं के बाद में सबसे बड़ा दूसरा संस्थान है जो शिक्षा प्रदान करने वाली संस्थाओं में से है और इस प्रकार से जो आपने कहा कि इसका क्या समाधान गुरुकुल से निकल सकता है मैं चाहूंगा कि दो हमारे सामने आचार्य बैठे हैं और बहन कल्पना जी गुरुकुल प्रकल्प स्टार्ट कर चुकी हैं अपना हां आयुषी जी और जल्द ही इनका अपना गुरुकुल खुलने वाला है तो आप ये जो कहते हो ना कि शेरनी की तरह दहाड़ है अब समझ लो कि इनके गुरुकुल से निकलने वाले बच्चे किसकी तरह दहाड़े इसमें एक और चीज है कि हमारा धर्म कभी नहीं कहता है कि अगर एक गाल पर थप्पड़ मार दे तो दूसरा गाल सामने कर दो यह मोहम्मद दास करमचंद गाजी ने ये कहा था और उस व्यक्ति ने मैं मोहनदास नहीं मानता मैं उस व्यक्ति को मोहनदास इसलिए नहीं मानता क्योंकि मोहन ने तो स्वयं सुदर्शन उठाया था तो मोहम्मद दास कर्मचंद गाजी ने जब यह बात कही वह वह व्यक्ति था जिसने किसी का दूसरे का कोर्ट उठाकर कह दिया कि यदि हम एक आंख के बदले एक आंख लेने लग गए तो पूरी दुनिया अंधी हो जाएगी और उस दुरात्मा की हत्या के बाद मैं कहूंगा वध के बाद उन्हीं लोगों को फांसी दे दी गई तो यदि एक की हत्या के बाद में दूसरे को फांसी दी जाएगी मोहम्मद दास ने यह क्यों नहीं लिख के गया कि यदि कल मेरी हत्या होती है तो मेरे हत्यारो को फांसी ना दी जाए भाई वह तो बदले की भावना हो गई ना एक आंख के बदले दूसरी आंख ना निकाली जाए क्योंकि यह बदले की भावना है तो क्या कर अपनी आंख फड़वा के बैठ जाए अगर हमारी एक आंख फोड़ी है तो दोनों निकाल लो ताकि सारी दुनिया को य पता लग जाए कि भाई इसकी तरफ कुंगली भी नहीं करनी नहीं तो जान तो मार देगा अगर हमने यह अपना पुरुष भूले हैं इस कारण से हम काटे गए हैं 150 साल तक और दूसरी बड़ी बात के उसी के वध के बाद में 6000 चित पावन ब्राह्मण महाराष्ट्र में मारे गए थे वह व्यक्ति जो अपने अनुयायियों को अहिंसा का पाठ नहीं समझा पाया वह हमें यह शु गुफा पकड़ा के गया है कि हमें हिंसा का पालन करना और एक गाल पर मार दूसरी गाल सामना कर देना जिसके खुद के मानने वाले 6000 नि निर्दोष ब्राह्मणों को गर्भ को चीर चीर करके भ्रूण तलक के ऊपर खड़े होने वाले लोगों को उन लोगों के ऊपर वो कुछ नहीं बोलकर गया अपने नय को इतना सिखाया नहीं गया और हम उसके मरने के 75 साल तक उसकी नपुंसकता को अपने ऊपर ढो रहे हैं तो इसे हमें तुरंत त्याग देना चाहिए हमारे धर्म में कहीं पर ऐसा नहीं है वेदों की रक्षा के लिए की गई हिंसा हिंसा नहीं होती वेद में जो डू एंड डोंट्स और हमारा संविधान लिखा है वैदी की हिंसा हिंसा ना भवती सीधी बात अगर कोई गाय का कत्ल कर रहा है और उसके प्रति हमने हिंसा की तो हम नहीं मानते उसको हिंसा मैं एक बात पूछना चाहता हूं कि 1400 सा साल पहले किसी मजहब की स्थापना हुई हजार कोश दूर चलकर वो यहां आया और उसने कहा कि मेरे नबी को यदि तुमने कह दे तुम वाजिब उल कत्ल हो अरे तू मेरे घर में बैठ कर के मुझे बता रहा है कि मैंने तेरे अब्बा को कुछ कह दिया तो तू मुझे मारेगा और तेने मेरे घर के ऊपर कब्जा कर लिया मैं क्या करूंगा तेरा मैं तो तेरी राख तलक नहीं दूंगा उसे भी खा जाऊंगा चाट जाऊंगा मुझे तो वैसा विचार करना चाहिए था लेकिन हम उसके चक्कर में अपने आप मर बैठे यह समस्या है आज हम जो समाप्त हो रहे हैं उसके कारण क्या है कि हम ने अपनी पौरुष का को खो दिया है हम जितने भी लोग यहां बैठे हुए हैं हम सबको कहा जाता है कि मार देंगे मैं कहा सामने जब आएंगे ना तो पेंट आगे दे गिलिए और पीछे तो पीड़ी नजर आवेगी उनकी क्योंकि उनमें हिम्मत नहीं है मांसाहारी व्यक्ति में कोलेस्ट्रोल बहुत ज्यादा होता है उनमें नहीं है आप एक उदाहरण मुझे बताओ कि जब उन्होंने छाती पर वार किया हो और केले ने केले को मारा हो एक मुझे बताओ रिंकू शर्मा था उसे भी धोखे से मारा गया घेर के मारा जाता है त से मारा जाता है और यह धोखे से मारना और घात से मारना यह आज का नहीं है इनके स्लीपर सेल में 1400 साल पुराना सिस्टम डाला गया है और हम वह हैं जो अगर तलवार हाथ से गिर तो दुश्मन को भी य कह देते मले को भी पहले तलवार उठा यदि उसकी पीठ आ गई तो पहले कहेंगे कि तु घूम का यदि सामने स्त्री बच्चे आ गए तो हम उसके मना कर देते हैं लेकिन उसी मोहम्मद दास गाजी के समय में जिस टाइम डायरेक्ट एक्शन डे हुआ नोवा खाली हुआ तो सबसे पहले को टारगेट बनाया गया महिलाओं को और छोटे बच्चों को हम ऐसे व्यक्ति को आज अपने ऊपर ढो रहे हैं और उससे भी बड़ी शर्मनाक बात यह है कि राष्ट्र के राष्ट्राध्यक्ष और अधिष्ठाता जो बन रहे हैं वह भी उसी के चरणों में पड़े हैं मैं मानता हूं के आर्य समाज को कम से कम महात्मा अगर हुए हैं तो वह उस समय पर स्वामी श्रद्धानंद थे जिन्होंने छाती के बटन यहां से यूं हटाकर कहा था कि अब मारना गोली अंग्रेजों को यह कहा था कि अब मारना गोली आर्य समाज वह है जिसने बलिदान दिया है जिसने सीने पर गोली खाई है हम उनकी संतति हैं तो हमें अपने साहस और अपने पुरुष के साथ में रहना है आपका आशीर्वाद बना रहे तो युवा तो इतने ही काफी है इतने ही बते रे हैं य आशीष जी 400 हजार लोगों को तो ट्रेंड कर चुके इतने कम समय में तो मैं यह मानता हूं कि इस शक्ति को आप लोगों के आशीर्वाद की अत्यंत आवश्यकता है बिलकुल और एक और प्रश्न जो बहुत मुख्य है एक समस्या जो इस राष्ट्र के लिए बहुत मुख्य है गावो विश्वस्य माता रहा हम ऐसा कहते हैं हम रोज नारे लगाते हैं अपने यहां पर भी आर्य समाज में भी कि गौ रक्षा हमके गौ माता की रक्षा हो लेकिन उस गौरक्षा की बात पे वो एक सरकार के स्तर की भी बात हो जाती है एक राष्ट्रीय स्तर की भी बात हो जाती है और सरकार को उस परे कानून बनाना पड़ता है उस गौरक्षा के विषय में जब आर्य समाज में यह नारा लगाया जाता है गौ माता की रक्षा हो तो गौ रक्षा के लिए आर्य समाज के पास क्या एक्शन प्लान है और वह क्या करना चाहता है आर्य समाज क्या कर सकता है मैं सीधा-सीधा अंकुर भाई को प्रश्न समर्पित करती हूं और गौरक्षा के विषय में आप बताइए कि आर्य समाज के पास क्या एक्शन प्लान है सूरत में यही सवाल मीनाक्षी जी ने किया था कि हम गाय रक्षा की बात तो बहुत करते हैं लेकिन हम गाय को बचाने के लिए करते क्या है तो ग अर्थात यह पृथ्वी गौ अर्थात यह गाय और मैं दोनों को जोड़कर इस प्रकार से चलता हूं कि जब तक गाय हैं तब तक यह पृथ्वी है अन्यथा जब यह गाय पूरी तरीके समाप्त हो जाएगी यह पृथ्वी भी नहीं बचेगी तो किसी ने कहा जिसने भी यह मान्यता बना रखी है कि जो पृथ्वी है गाय के सींग पर रखी हुई है तो मैं मानता हूं कि उसने तो यह किसी अतिशयोक्ति में या कोई भाव प्रकट करने के लिए कह दिया होगा लेकिन जो गाय के गोबर से जो खाद आप बनाते हैं यदि वही उसी का गोबर उसी गाय के मरने के बाद जो उसका सींग होता है ना वह टूट जाता है उसको वह अंदर से खोखला होता है और उसी के अंदर अगर हम वह गोबर को भर के और यह राजीव भाई दीक्षित का प्रयोग किया हुआ एक प्रयोग है मैंने उन्होंने उसको इस्तेमाल किया और हमने भी स्वयं उसका इस्तेमाल किया प्रयोग किया है उसको हम गाय के ही गोबर में दबा दे तो उसके अंदर से एक साल के बाद जो व सूख कर के निकलता है उसके एक कण उसका एक एक रत्ती इतना अनमोल हो जाता है जितना एक मोती होता है तो य किसी ने जो कहा है वह कहा होगा किसी भाव अतिरेक में लेकिन वास्तविकता यही है उसकी अगर हम गाय की रक्षा की बात करते हैं तो मैंने बहुत टाइम पहले एक वीडियो बनाया था कि मुस्लिम भी करेगा गाय की रक्षा अगर उसने यह वीडियो देख लिया और उसमें मैंने यह बात बताई थी के हम मैं देवबंद से हूं और हमारे यहां पर आज की तारीख में तो बहुत बदल गया है लेकिन एक एक ऐसा था कि बहुत बुजुर्ग व्यक्ति था और बकरीद के दिन वह नाले के पास खड़ा हुआ था उसके हाथ में एलुमिनियम का एक वो था डब्बा और लाठी उसके हाथ में थी और कांप रहा था तो मैंने ऐसे ही पूछ लिया कि आप कहां जा रहे हो तो उसने कहा कि यह देख नाले में देख तो मैंने नाले में देखा तो नाला जो था वह पूरा लाल हो रखा था तो उसने कहा कि मैं अपने पोते के लिए मेरे पोते को वैद जी ने गाय का दूध बताया है कि आधा दूध आधा पानी मिलाकर के उस बच्चे को पिलाओ तो बच सकता है अन्यता नहीं बचेगा मैंने कहा क्या बीमारी होगी कहने लगे उसकी मां नहीं बची उस बच्चे की मां नहीं बची वह जन्म पैदा करके वह मर गई है और वैद जी ने यह बताया है कि केवल और केवल गाय का दूध उसे बचा सकता है मैं गाय का दूध लेने के लिए आया था लेकिन सारी की सारी गाय तो यहां बह गी और यह कहक वो बिलक कर रो पड़ा बुजुर्ग आदमी मु सलमान तो मेरे पिताजी मेरे साथ में थे और हमारे उस टाइम पर दो गाय थी दोनों देसी तो हमने कहा कि हम आपको गाय का दूध पहुंच देंगे आप अपना मोहल्ला पता बता दो हम रोजाना पहुंच वाया करेंगे तो हमने पहुंच दी लेकिन वह समस्या जो है उसका समाधान नहीं हुआ कुछ ही साल के बाद में पूरे डेरी विभाग ने य कहा कि 68 पर दूध ऐसा हमारे बच्चे पी रहे हैं जो कैंसरस है और आने वाले समय में सब लोगों को होगा जो भी इस दूध को पी रहे हैं तो मेरा सवाल उस टाइम पर यह था कि चलो ठीक है वह सिंथेटिक है गायों की भैंसों की दूध उत्पादन करने वाले जो जानवर है उनकी संख्या बहुत कम हो चुकी है और हमारे पास केवल 33 पर ही या 32 पर ही दूध है जो नेचुरल रिसोर्सेस से आ रहा है लेकिन जो गाए या जो भैंसे चारा खा रही है व भी तो यूरिया और पेस्टिसाइड का है उसके ऊपर भी तो कीटनाशक स्प्रे लग रहा है वो भी तो जहरीला हो रहा है तो यह जो 32 प्र जानवर दूध दे रहे हैं उनका दूध भी जहरीला है अब गाय की रक्षा की बात करते हैं हम यहां पर रोजाना यज्ञ करते हैं उसके बाद में कहते हैं कि गौ माता का पालन हो लेकिन वह पालन होगा कैसे किसी एक समाज के करने से नहीं होगा यदि दूसरे समाज ने ठान लिया है कि उनकी भावनाओं को आत करने से हमें जन्नत मिलती है यदि उनकी भावना उसने उसको मां कह दिया तो उसका कत्ल करना है जानबूझकर सड़क पर डाल कर के काटना है और हमें पता है कि हमें पॉलिटिकल पार्टीज भी सारी सपोर्ट कर देंगी तो ऐसे में तो यह भावना दुर्भावना बनकर उभरे गी ही तो गाय की रक्षा तो उस हर व्यक्ति को करनी चाहिए जिसके घर में बच्चा पैदा हो रहा है और खास करके उनको करनी चाहिए जिनके घर में बच्चे अल्लाह की देन है भाई हमारा तो एक दो बच्चा होता है हम तो कर लेंगे जैसे भी कैसे जुगाड़ लेकिन तुम तो देख लो अपनी जिनकी अल्लाह की देन है पति की देन नहीं होती है वहां वहां अल्लाह की देन होती है पति तो सारा दिन बेचारे कहीं ना कहीं काम पर लगे रहते हैं बच्चे पैदा करने अल्ला को दे रखा उन्होंने अब मुझे नहीं पता पार्ट टाइम में कितनी जगह जॉब देनी पड़ती होगी लेकिन उन्हें तो कम से कम इस बात को सोचना चाहिए कि कम से कम जब मेरे घर में 12 बच्चे हैं तो उन 12 बच्चों को जो मैं दूध पिलाऊंगी तो उन बच्चों को दूध पिलाने के लिए मैं कहां माथा मारूंगी आज की तारीख में आप देखो अभी यह दीपावली गई है दीपावली के टाइम पर इतने छापे लगे और सारे जितने भी नकली प नकली घी नकली मावा नकली दूध नकली घी यह जो बनाने वाले लोग हैं कौन है कोई मोहम्मद इकबाल है कोई यासीन है कोई यामीन है यह कौन है यह लोग और क्या कर रहे हैं यह लोग यह लोग पूरी की पूरी दुनिया को खत्म कर रहे हैं और देखो डायरेक्टली या इनडायरेक्टली उनके खुद के बच्चे भी खत्म हो रहे हैं कोई भी बीमारी कोई भी रोग मैं कह रहा हूं सांस्कृतिक मतभेद को हम भुला दें हम भूल जाए कि उनकी किताब क्या है हमारी किताब क्या है उनकी विचारधारा क्या है हमारी विचारधारा क्या है उनका नबी कौन है हमारे महापुरुष कौन है हम किस परमेश्वर को मानते हैं वह किस अल्लाह को मानते हैं या गॉड को मानते हैं लेकिन यह जो वातावरण में घुला हुआ जहर है यह जो वातावरण दूषित हो रहा है यह जो रोजाना पेस्टिसाइड लग रहे हैं यह जो रोजाना यूरिया डाला जा रहा है अब देखो यूरिया जितना डाला जाएगा उतना ही धरती के अंदर सुस्की खुश्की आती है धरती बंजर होती है मेरे पास में जमीन का एक बहुत छोटा सा टुकड़ा है और मैं अपनी गाय आधारित खेती करता हूं तो मेरे बराबर वाले जो हैं वह चार बार पानी लगाते हैं और हम एक बार पानी लगाते हैं और हमारी धरती फिर भी गीली रहती है और हमारी फसल फिर भी अच्छी होती है क्योंकि हमने पूरी खेती ही गह आधारित की है यह तो एक डंप था जो हमारे देश के अंदर फेंक दिया गया उन लोगों को पता लग गया कि हमारे देश के अंदर जो यह यूरिया पेस्टिसाइड यूज हो रहा है इससे हमारी धरती समाप्त हो जाएगी और दर दु भाग्य की बात कि उन्होंने हमारी सारी गाय अपने वहां पर विकसित कर ली हम तो यहां चीते ले आए वे भी हमसे विकसित नहीं हुए वे भी मर गए लेकिन वे यहां से गाय लेकर गए उन्होंने वे भी विकसित कर ली गाय तो हमें बचानी ही पड़ेगी दूसरी बड़ी बात के आज जो बीमारियां है देखो अंग्रेजी बीमारी तो अंग्रेजी ही इलाज आज से 4050 साल पहले किसी ने भी शुगर नाम की बीमारी नहीं सुनी होगी बीपी किसी को होता नहीं था कैंसर का तो जानते नहीं थे बोला फोड़ा हो गया फोड़े का इलाज वैसे ही हो जाते थे इतनी बीमारी मैं तो कल किसी से सुन रहा था एक्ने प्रॉब्लम अब मुझे तो बाद में पता पड़ा कि बोला कील निकल जाती उसको एक्ने प्रॉब्लम खोलते हैं मैं कहा भाई अंग्रेजी बीमारी नवीन रोज बीमारी पैदा हो रही है हमें पता ही नहीं लगता कौन सी बीमारी आ गई और इन बीमारियों का क्या इलाज है सिर्फ अंग्रेजी पर ही मिलेगा अंग्रेजी बीमारियां कहां से आ रही है अंग्रेजी जो हमने खाद डाली है वो जो हमारे भोजन में जा रहा है गाय ना केवल दूध बल्कि जो उसका गोबर हमें मिलता है उससे भी उत्तम कोटी की खाद बनती है और उसी से अगर हम उसको डालेंगे तो उससे ही हमें मिलने वाला भोजन जो बीमारियों और विभिन्न प्रकार के प्रदूषण को भी हटाता है अब डीजल की गाड़िया हटाई जा रही बैल से खेती नहीं करेंगे जी अरे जब आप ट्रैक्टर इजाद कर असल में तो भारत वालों का यह है कि कॉपी पेस्ट मारना ट्रैक्टर हमने थोड़ा ना जाद किया तो फोर्ड नहीं र हम तो यहां से बस इंपोर्ट कर रहे मार्के बना रखी है बस दो बैल के पीछे आप ऐसा संयंत्र लगाओ ना आप वैसा संयंत्र बना दो वैसा ईजाद कर दो कि वह खेत को उसी श्रेष्ठता के साथ में उसी एक्यूरेसी के साथ में फाड़ सके आप बनाओ वैसा आप दो की बजाय छह अक्षरधाम की एक नाव में यात्रा होती है अंदर जाते हैं ना तो उसमें वैदिक गांव आता है और उसमें दिखाया गया कि छह बैलों से खेती करते थे तो तीन इधर है और तीन इधर है और पीछे उसके हल चला रखा है तो आप ईजाद कर दो जी वैसा ही लेकिन हमें वोह करना नहीं है गाय की रक्षा केवल हिंदुओं का या आर्य समाज का कार्य नहीं है यह संपूर्ण समाज का पूरे भारत नहीं पूरे विश्व का कार्य है क्योंकि यदि जिस दिन गाय समाप्त हो जाएगी उस दिन आप देख लेना लोग वैसे ही मरेंगे जिस प्रकार से जॉम्बीज वाली फिल्मों में दिखाया जाता है जिस दिन गाय समाप्त हो जाएगी छोटे-छोटे बच्चे जो कैंसर वो दिखाए जाते ना महामारी आ जाती है हॉलीवुड की फिल्मों में व आएंगी जो कुछ बचा हुआ है वह केवल गाय के कारण से ही बचा हुआ है आजकल जितने भी महिलाएं जो प्रेग्नेंट होती है डॉक्टर उनको डीएचएल को बोलता है ताकि उनका बच्चा बुद्धिमान हो तो इसके पीछे भी बहुत सार रिसर्च है कि जो देसी ए2 जो गाय होती है उसको नाम दिया गया ए2 अगर उसका दूध बच्चा पीता है तो उसके अंदर बुद्धिमत्ता का स्तर भी उतना ही ऊंचा होता है और इसको हम छोटे से उदाहरण से समझ सकते हैं हमारे 12थ के टीचर थे एक शास्त्री जी तो तो मंद बुद्धि बालक से वो पूछते थे कि तू भैंस का दूध पीता है क्या कहता हां जी और जो तेज बालक होते थे उनसे पूछते थे कि तू गाय का दूध पीता है क्या तो हमारे जैसे बचपन में गाय घर में थी सब सही और अभी भी जैसा आचार्य जी ने बताया मेरे पिताजी तो डोलती जितनी भी गाय है ना उनको बांध लाते हैं हालांकि उसका बोझ भुसे का वो मारी दोनों भाइयों की जो जेब है वो ढीली होती है बोला भाई दो ट्राले और लेने अभी हमें तो वो व्यवस्थाएं कर रहे और हम खुश है उसका मैं कारण बताता हूं एक छोटे से उ से आप समझना कभी भी जिनके बच्चों ने गाय का बच्चा चूंग नहीं देखा बछड़ा या बछड़ी उन्हें गौशाला ले जाना और बछड़ा [ __ ] हुए दिखाना तो जो गाय का बछड़ा होता है उसका मुंह ऐसे होता है और वो ऐसे मारता है ऊपर को और दूध निकाल कर पीता है और जो गाय होती है वह चाहे आप कितनी भी चालाक इसका दूध निकाल लो वो अपने बच्चे के लिए बचा ही लेगी उसका इतना दिमाग तेज होता है जो बच्चा दूध पीते टाइम उर्ध्व गमन करता है और जो भैंस का बच्चा होगा उसका सिर यूं होगा और वह ऐसे ऐसे खेंच खींच के यूं दूध पिएगा वह अधो गमन की तरफ होता है उसकी मोटी बुद्धि होती है उसे नहीं पता कौन सा चूंग रहा है कौन सा नहीं चूंग रहा किसी के भी नीचे बढ जाता है गाय अपने ही बछड़े को दूध पिलाती है दूसरा आ जाएगा लात मार देगी भैंस ऐसी है कि इसके नहीं तो दूसरे के नीचे कटड़ा घुस जाएगा तो उसे पिला देगी और उसके कटड़े के नाम का ना भी छोड़कर चारों थों का भी निकाल लोगे और तब भी कुछ नहीं कहने की तो यहीं से हमें पता लग जाता है कि माता के अंदर जो बुद्धि क्षमता है दूसरी बात आप उदाहरण एक और देखना गांवों में बच्चे घेर में खेलते रहते हैं और गाय खुली फिरती है लेकिन कभी भी बच्चे को कुचल की नहीं उसके ऊपर से कूद जाएगी भले ही अपनी जान पर चाहे जोखिम आ जाए लेकिन ऊपर से कूद जाएगी कभी कुचल नहीं और जो भैंसा होगा और जो भैंस होगी और जो उसके बच्चे होंगे उनके सामने आप बच्चे को छोड़कर देखना या तो उन्हें रौद देंगे या टक्कर मार देंगे या उड़ा देंगे छोटे बच्चे को गाय भी नहीं मारती है आपने देखा होगा बहुत सारे फोटो फ पर चलते छोटे छोटे बच्चे गायों के नीचे घुस जाते हैं गाय मर खड़ जाते है शेरनी से ज्यादा खतरनाक हो जाती है उसका बछड़ा होता है हाथ नहीं लगा सकते आप बछड़े के गाय इतनी मारक हो जाती है भैंस को पता ही नहीं एक बार क्या हुआ भैंस पावस नहीं रही थी दूध नहीं दे रही थी तो एक ना काला कपड़ा अपने ऊपर घेरा और वो धों में लग गया भैंस पावस ग अपना जाक जैसे आपका छोटा सा बच्चा 8 साल का काला कपड़ा घेर के उसके भैस के नीचे खड़ा कर दिया उसे कंबल को चाटती रही और दूध दे दिया और जबकि गाय अपने पूरे बछड़े को चाटती है पूरा उसका रस रसास्वादन लेती है तो यहीं से पता लग जाता है उसके अंदर कितनी बुद्धि है उसका अगर आपका बच्चा दूध पिएगा तो वह बुद्धिमान होगा डीए एवी एए लेने की भी आवश्यकता नहीं पड़ेगी

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