Tuesday, 3 February 2026

सबसे बडा खुलासा आर्य समाज ने कितने मन्दिर तोडे #BHY4 Satya Sanatan Ankur Arya Ajeet Bharti

संसद का घेराव करने वाले लोग कौन थे सारे आर समाजी थे सब ने छाती की बटन खोल के गोली खाई उन्होंने कहा कि ऐसे मारना तो वो जज्बा जो है आप किसकिसको नकार होगे जी लाला लाजपत राय से लेकर भगत सिंह से लेकर उनका पूरा खानदान से लेकर सारे आर्य समाजत आप इतिहास उठाओ गोड़ी आपने गम पानी छाती प लिया पानी हां अच्छा वो वा नहीं मैंने छाती प ली है देखो गोली छाती प लेने का आनंद अलग है हां हां और झंडा छाती पे गाड़ने का आनंद उससे भी डबल है ठीक है मैं आप लोगों से अपील करना चाहता हूं कि जितने भी हमारे गुरुकुल हैं उनके पुनरुद्धार के लिए आप प्लीज हमारे विश्वानी सेवा फाउंडेशन को कुछ ना कुछ डोनेट अवश्य करें क्योंकि गुरुकुल कभी भी किसी के विनाश के लिए नहीं बल्कि विकास के लिए कार्य करते हैं इस भारत के विश्व गुरु पुनरुत्थान के लिए कार्य करते [संगीत] हैं आर्य समाज कभी मंदिर के विरोध में नहीं रहा राम मंदिर के जो कोषाध्यक्ष हैं गोविंद देवगिरी जी महाराज आप उनका स्पीच उठाओ हमारे इस देश में चर्चाओं के समय एक बात आती थी हैदराबाद के सनातन लोगों को मैंने समझाया कि भैया आप लोगों को आर्य समाजी लोगों को कुछ भला बुरा कहने से पहले 10 बार इस बात को सोचना चाहिए कि जिस समय यहां पर निजाम का राज था उस समय मंदिरों की रक्षा करने के लिए सनातन धर्मयोद्दा दैन सरस्वती महाराज ने खंडन किया होगा मूर्ति पूजा का लेकिन इन मूर्तियों के रक्षा के लिए वही आर्य समाजी बंधु आगे आकर के डंडे लेकर के खड़े हुए और इस प्रकार के इन वीरों को निर्माण किया स्वामी श्रद्धानंद महाराज ने जिनको हम भूल नहीं सकते श्रदानंद जी महाराज ने गुरुकुल कांगड़ी में इस प्रकार का एक वातावरण निर्माण कर दिया कि अंग्रेजों को सबसे बड़ा भय गुरुकुल कांगड़ी से लगने लग गया गुरुकुल कांगड़ी में उन्होंने जो किया वो अत्यंत बड़ी बात है और इसीलिए तो एक सामान क्या क्या मंत्र दे सकता था वह महात्मा इसका हम लोग विचार करें श्रद्धानंद जी का पूर्व जीवन देखेंगे तो कोई व बहुत अच्छा है ऐसा नहीं कहा जा सकता लेकिन एक सामान्य वकील में से एक एक विलासी वकील में से एक ऐसा महात्मा खड़ा हो गया जो चांदनी चौक में खड़ा होकर के गुंडों के सामने बोलता रहा चलाओ तेरी गोली आत्मा अमर है मैं मरने वाला नहीं हूं यह जो वीर्य यह जो की जय यह जो शक्ति हमारे एक एक व्यक्ति में फूंकी गई इसका मूल कारण वेदों का मूल उद्घोष था जो हम लोगों को ऋषि दयानंद सरस्वती महाराज ने सिखाया हमारे वेदों ने हम लोगों को मूष वाद नहीं सिखाया है जीवे म शतम नंदा म शरद शतम मोदाकॊंडम्मा में कहीं भी लाचारी आने नहीं देंगे यह जो वेदों का अत्यंत विलक्षण सिंहनाद है उस सिंहनाद को कभी तो भी हिंदू समाज में जागृत करने की आवश्यकता थी और वह करवाने के लिए परमात्मा के द्वारा भेजे गए उस महापुरुष का वंदन करने के लिए मैं यहां पर आया हूं तो वो खुद कह रहे हैं इस बात को कि जिस टाइम पर हैदराबाद की क्रांति हो रही थी और वहां निजाम मंदिरों को तोड़ रहे थे उस टाइम आर्य समाज के लोगों ने ह्यूमन चेन बनाई थी और अपनी जान थी मंदिरों की रक्षा के लिए जब करपात्री जी महाराज ने गाय रक्षा के लिए उनके लोग नहीं आए थे सामने तो आरे समाज की शरण में आए उन्होंने कहा कि हमें संसद का गहरा करना है करपात्री जी मराज शंकराचार्य वो गौर मूर्ति पूजक है और उन्होंने य कहा कि मह शी दयानंद सरस्वती शिव के अवतार है तो हमारे लोगों ने कहा कि हम खैर आपकी जो अतिशयोक्ति भावपूर्ण है हम उसके विरोध में नहीं है पर हम ऐसा नहीं मानते वो खुद कहते थे कि मैं जमिनी कणाद के समय होता तो मैं उनके आश्रम में झाड़ू लगा रहा होता मैं कोई अवतार अवतार नहीं हूं मेरी तो समाधि भी नहीं बननी चाहिए तो लोग वही माथा टेकने लग जाएंगे लेकिन हम आपके साथ हैं संसद का गहरा करने वाले लोग कौन थे सारे आर्य समाजी थे सब ने छाती की बटन खोल के गोली खाई उन्होंने कहा कि ऐसे मारना तो वो जज्बा जो है आप किस-किसको नकार होगे जी लाला लाजपत राय से लेकर भगत सिंह से लेकर उनका पूरा खानदान से लेकर सारे आर्य समाजत आप इतिहास उठाओ सारे क्रांतिकारी जिन्होंने धर्म के लिए लड़ाई लड़ी है इवन हमारा तो आर्य समाज मंदिर होता है भाई आप ये कैसे कह सकते हो इवन जयपुर से संचालित होने वाले एक अभिजीत चावड़ा जी तो उन्होंने कहा अरे आर्य समा जी ने तो बहुत मंदिर और मूर्तियां तोड़ी और अगले ही सेकंड में उन्होंने कहा कि नहीं हालांकि मैंने ये इतिहास कहीं पढ़ा नहीं है तो आप ये देखो कि खुद गोविंद देव गिरी जी महाराज कह रहे हैं कि उन्होंने मंदिरों की रक्षा करी ऋषि दयानंद के पास में जब एक उनका शिष्य जाता है तो कहता है रोड सीधी निकलनी है मंदिर आ रहा है रास्ते में तो गुरुजी हटवा दूं उन्होंने कहा नहीं रास्ता घुमाओ मैं मंदिर तुड़वाने नहीं आया मैं मूर्ति तुड़वाने नहीं आया हूं तो हम लोगों में जब इतना बड़ा गौरव है मैं कह रहा हूं कि हम लोगों ने हमारे पूरी हर आर समाज में इतना बड़ा मतलब वैभवपूर्ण उसका स्क्रीन बड़ी लगा कर के हमने उसका आयोजन किया है डोनेशन दी है कार सेवको में आर्य समाजी लोग थे हम लोग यह मानते हैं कि और इवन अजीत भाई उस सब बातों को भी आप छोड़ दो 150 साल पहले आर्य समाज आया हम प्रतिदिन हवन करने वाले लोग हमारा पता है पहला नारा क्या होता है सत्य सनातन वैदिक धर्म की जय मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम की जय तीसरा होता है योगेश्वर श्री कृष्ण महाराज की जय हम 150 साल से प्रति दिन ये नारा लगाते आ रहे हैं तो हम कैसे ये कह सकते हैं भाई तो मैं मानता हूं कि यह राष्ट्र के गौरव का स्वाभिमान का मसला है मामला है अगर मैं टंकारा में भगवा जो हमारे टंकारा में जो ऋषि दयानंद का जो घर है हम उसको अक्षुण रखने के लिए जान लड़ा देंगे तो हम भगवान श्री राम के लिए हम काशी के लिए हम मथुरा के लिए जान लड़ाए बिकॉज हम सनातनी है आप उपासना की तरीकों से हमें डिफरेंट नहीं कर सकते हम सबके पू हैं एक थोड़ है फिर शब वाला बोल देगा कि तुम कहे नाच रहे हो भाई तुम्हारे राम थोरे हैं इसन वाला कहेगा हमारे भी नहीं है भाई बिल्कुल तो ये साउथ साउथ में वो साउथ का जो पॉलिटिशियन है मैं नाम भूल रहा हूं उसका नहीं चिद्रम चम का उसने लिखा कि जो रामेश्वरम है वहां वो तो शिव का मंदिर है हमें कोई लेना देना नहीं है राम से उसका तो आओ ना काशी में आ जाए ना भाई कार सेवा करते हैं चलो आ मैंने उनको यही तो लिखा कार सेवा करते हैं माहादेव उस गधे को ये नहीं पता कि शिव जब ध्यान में जाते हैं तो किसके ध्यान में जाते हैं वो राम के ही ध्यान में जाते तो रामेश्वरम राम राम ही ईश्वर है या राम के ईश्वर शिव है रामेश्वर हनुमान जी किस किसी डिफरेंस नहीं कर सकते बकुल ये वही है हम इनमें डिफरेंस नहीं कर सकते कौन बड़ा कौन छोटा मुद्दा ही नहीं सही बात है हमारे लिए मुद्दा ही नहीं है अंकुर भाई वैसे फोन प तो कह रहे थे टोनस टोनस फ्लो देख रहे हो आप भाई माहौल होता है माहौल होता है ना यार हा आते ही तीन गोली ली है मैंने ऐसे थोड़ा ना गोली आपने गरम पानी है नी हां अच्छा वो नहीं मैंने छाती प ली है देखो गोली छाती प लेने का आनंद अलग है हा और झंडा छाती प गाड़ने का आनंद उससे भी डबल है ठीक है तो मैं ये कह रहा था कि जैसा कि अभी आपने वैष्णव और शैव ये सब चीजें बताई उस परे आधारित पोनियम सेल्वन से पुराना तो मेरे ख्याल से अभी हमें नहीं मिलता है जब शैव का साम्राज्य था हम जब उसमें देख रहे हैं पोनियम सेल्वन जब वापस से जिंदा हो रहा है उस टाइम आप देखोगे तो उस टाइम में वैष्णव शैव और बौद्ध तीनों बाहर आ हम वो कह रहे हैं इवन जब वो शास्त्र चल रहा है तो उस टाइम पर भी यही कहता है वो उसमें जो होता है कि जो पंडित बना हुआ है तो उसको भी ये कहा जाता है कि मैंने दोनों से बात कर ली है है ना तो दोनों एक ही है तो हम इनमें विभेद ही नहीं कर सकते ये साउथ और नॉर्थ वाली आप एक छोटी सी लाइन वो कह रहे है कि हम शिव कैलाश पर्वत तो यहां हमारे नॉर्थ में है ना और जो हम यहां कह रहे हैं कि भाई वैष्णव तो जो है जो उत्तर में है आप दक्षिण में जाक देखो उनके इतने नाट्य वहां पर होते हम तोय पूरा का पूरा झवा जो लड़ाई है सिर्फ के दिमाग में है यह वास्तव में हमारे आसपास कहीं भी नहीं है मैं कावड़ियों की सेवा में जाता हूं ठीक हमारे यहां से लोग देवियों जाते हैं और हमारे यहां पर अभी रामनवमी मन रही है अभी जन्माष्टमी मनेगी तो शैव वैष्णव शाक्त सब तो मन रहा है भाई हर एक के घर में मन रहा है आपके मंदिर की तरफ कैमरा घुमाओ तो वहां सारे हैं सही बात है हम तो सारों को मानने वाले लोग कहां ये वैष्णव और शैव चला है ये कहीं नहीं है ये कोई खूनी झं नहीं हमारे य ये नहीं है शिया सुन्नी वाला हमारे यहां है भी तोव दार्शनिक विचारधारा विचारधारा है उसका वे ऑफ लाइफ क्या है उसका दर्शन क्या है और इतने भेद इसलिए भेद इसलिए नहीं है कि हम एक दूसरे से हेट करते नहीं थोड़ा थोड़ा वेरिएशन है आपको आलू पसंद है आपको बैगन पसंद है आपको वो भाई सब्जी सब सही है और हम जबरदस्ती किसी के साथ नहीं करते त आलू हां हां अब कोई कट्टर हिंदू आ कहेगा आपने राम जी को बैगन क दिया उसको शिव को जो है आपने गो क दिया क्योंकि तो सपाई है भाई देखो हिंदुओं का घर ऐसा होता है जैसे मेरी मां है मेरी मां को वैष्णव माता में बहुत आस्था है ठीक है वो माता की पूजा करती है और हर वर्ष अभी तक हर वर्ष वो वैष्णव माता जाती ही है कई बार तो ऐसा होता है वर्ष में पांच छह बार चली गई बकुल फिर मेरे पिताजी वो घोर राम जी के भक्त बिल्कुल अखंड राम जी के भक्त फिर मेरे ताऊ जी वो हनुमान जी के भक्त फिर भाई वो भोले का भक्त मैं राम जी का भक्त फिर आपकी मेरी बहन है वो सभी ठीक है मतलब चाचा की बेटी है सभी ठीक है उसका कोई ऐसा पर्टिकुलर नहीं है तो हम तो इस टाइप के लोग है एक ही घर में रहने वाले और किसी अलल सब अलग है जो जैसे कर रहा है और ये ना पहले पुराने टाइम में तो अभी तो मतलब जैन और बौद्ध में नहीं है एक घर में जैन और बौद्ध नहीं है पर पहले तो एक घर में जैन और बौद्ध भी होते थे नहीं मैंने देखा है जो एससी होते हैं उनमें राम भक्त भी है और जो एक नया नया लटा बना है तो उसने बुद्धिज्म का डोरा बंधवा लिया ला ये तो नव ब चल रहा है स वो तो पॉलिटिकल होका धर्म से कोई लेना देना है ही नहीं उसका ने टाइम की जैसे अशोक और इनकी बात कर जो है बाद में जैन बन गया अशोक जो है बुद्ध धर्म का प्रचार कर रहा है और उस वक्त पूरी की पूरी जनता भी जो राजा बदलता था तो जनता भी कि हम भी हो गए इस टाइप से तो उससे पहले क्या था ये आपका चंद्रगुप्त का बेटा जो है वो जैन बन गया था बिंदु सर जैन बन गया था और दूसरा बेटा बौद्ध बन गया था वो सनातन में था और वो सनातनी ऋषियों का सम्मान कर रहा है पूरा वो सारी चीजें इस तरीके से ही चल रही है एक ही घर में आप चार तरीके के चार पंथ के लोग आपको देख रहे तीन पंथ के लोग आपको दिख रहे हैं और किसी में कोई भेदभाव नहीं यह तो हम तो भगवानों के बीच भेद करने की बात कर रहे हैं जो कि मतलब पॉसिबल ही नहीं कर ही नहीं सकते कर ही नहीं सकते बिलकुल

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😲 अपना Point साबित के लिए इतने कुतर्कआइये कुछ Cross Questions करें।

में एक बार क्या हुआ कि उनका खूब सारा लोगों ने आप जैसे यह दोनों ने बहुत विरोध किया और उन विरोध करने वाले लोगों ने महर्षि दयानंद सरस्वती जी...