Tuesday, 3 February 2026

मुसनलटो के लिए आशीष चौरसिया का नाम ही काफी है। Full Debate On Quran

[संगीत] हेलो हां जी आप बोल हा हा हेलो आवाज आ रही है ना जी जी जी भाई और बताइए हा मैं ये पूछ रहा था कि जो मैं सिर्फ एक ही टॉपिक पर बात करूंगा वो यह है कि जो ज्यादातर नॉन मुस्लिम जो है ज्यादातर हिंदू या आर्य समाज वाले कुरान की आयत उठाते हैं सर त की पाच आ हा कौन गया है सर त की पाच अच्छा हा सर त की पाचम कहा जाता है सब काफिर को मार दो य कहा जाता है जी मेरा सवाल है कि क्या उसकी हिस्ट्री किसी ने पढ़ी है शने नजूल फिर आप किस सूरते हाल में व नाजिल की गई ठीक तो कुरान भाई सर्वकाल के लिए है कि किसी एक काल के लिए है हर एक काल में मानने लायक है ना तो क्या आज के टाइम पर व मानने लायक नहीं है क्या आज के टाइम प मानने लायक नहीं है नहीं नहीं ऐसा नहीं है है मानने लायक हां बोलिए बोलिए हां हां मैं जैसे कि अगर ये कहना भाई जैसे आप नहीं बोल रहे तो मैं बता रहा हूं कि जैसे ये कहना कि भैया उस काल में मानी जाती थी इस काल में मानी नहीं जाती राइट मैं नहीं मैं ऐसा नहीं कह रहा बकुल या फिर उस काल के लिए थी आज के समय में वो चीज प्रासंगिक नहीं है तो जो ईश्वर का ज्ञान होता है वो सर्वकाल के लिए होता है ना ऐसा नहीं कि कभी माना जाएगा तो कभी नहीं माना जाएगा पहले माना जाता था वो टाइम प माना जाता था आज के टाइम प नहीं माना जा रहा है आगे चलके हो सकता है माना जाए ये क्या बात हुई नहीं नहीं मैं ये मैंने सब कहा ही क्या बोलते हैं वहां पहले माना जाता था अब माना नहीं जाएगा फिर कभी माना जाएगा ऐसा नहीं कह रहा हा हा मैं सिर्फ ये कह रहा हूं कि क्या आपने इसका तफसीर पढ़ी है तफसीर इने कसीर भी पढ़ा है और बाकायदा पढ़ा है आप बताइए मुझे आगे की बात बताना तो मैं ये बताना चाहता हूं कि किन काफिरों को मानने के लिए कहा गया अगर आपने तफसीर पढ़ी है तो फिर मुझे इस सवाल का जवाब दीजिए काफिर के काफिर के डेफिनेशन के हिसाब से सूरा बकरा में जो सूरा बकरा में लिखा है आयत नंबर 98 में उसके हिसाब से डेफिनेशन क्या है इतना तो मुझे लगता है आपको पता ही होगा तो वो वो हिसाब से तो हम लोग काफिर है ना नहीं आप समझे नहीं मैं क्या पूछ रहा हूं आप समझाइए मैं ये कह रहा हूं कि आपने तफसीर पढ़ी है आप कह रहे हैं तफसीर आपने पढ़ी है हां जी तो फिर मैं आपसे पूछना रसे आपने बोलेंगे ना किस सरते हाल में नाजिल हुई थी भाई नहीं हा तो नाजिल देखि तफसीर का मतलब अलग होता है मेरे भाई नहीं तफर की बात नहीं क रहा उस तथाकथित आयत के बारे में बोल रहा हूं ना उसके बारे में आपने शुरुआत में यह बात कही ना कि उसकी हिस्ट्री पता है आपको या फिर उसकी मसले पर वो आयत उतारी गई थी राइट तो आपने उसकी ्र आपको पता है कि नहीं हा तो हिस्ट्री की किताब या फिर हिस्ट्री की लिखी बात को धर्म धर्म कैसे कह सकते हैं भाई धर्म धर्म उपदेश कैसे कह सकते हैं धर्म की बात नहीं कह सकते ना वो तो हिस्ट्री की चीज हो गई नहीं नहीं नहीं मेरे भाई मैं य क रहा मेरे भाई एक बात सुनिए हिस्ट्री का मतलब कि वो हिस्ट्री हर हर काल में नहीं होती हर काल में प्रासंगिक नहीं होती राइट हिस्ट्री उस समय के लिए उस उस समय की बातों के लिए होती है लेकिन जो ईश्वर का ज्ञान होता है ना वो हर एक काल में मानने योग्य होता है मेरे भाई आप समझे नहीं मैं क्या कह रहा हूं आप समझा दीजिए मैं ये कह रहा हूं कि कुरान की आयत है ठीक है उसको एक तो उसका ट्रांसलेशन होता है उसकी एक तस्वीर होती है तफसीर होती है दो चीजें होती है एक ट्रांसलेशन एक तफसीर जी जी तो क्या आपने उसकी तफसीर पढ़ी है तफसीर पढ़ी है तफसीर पढ़ी है आप बताइए कि उसम गड़बड़ी क्या है आप मुझे बताइए ना आप डिा कर रहे तो उस चीज को आप कृपया बताइए कि आखिर उसमें गलत क्या है अगर मैंने यह कहा कि भैया काफिरों को अर्थात हमें तर दे जाए तो हमको मारने के बारे में ही लिखा है ना और मैं प्रूफ कर सकता हूं आप बात करते अभ प्र हो जाएगा सुन लीजिए पहले मैं ये कहना चाह रहा हूं कि आपने अगर पढ़ी है तो उसम मतलब क्या पढ़ाया भाई एक तफसीर एक आयत की तफसीर चार चार पन्नों की होती है अब मैं सब आपको बताने बैठ जाऊंगा तो गड़बड़ हो जाएगा आप बताइए फिर उसके बाद मैं बताता हूं ना तब आपको पता चल जाए मैंने पढ़ी है कि नहीं पढ़ी है चलिए तो मतलब कौन सी किताब पढ़ी आपने किताब का नाम बता सकते हैं आप तफसीर इब्ने कसीर अच्छा अहले सुन्नत की है हां अहले सुन्नत नहीं इसके विषय में मैं थोड़ा सा संशय में हूं क्योंकि मैंने कभी भी उसका वो संपादक का वो नहीं पढ़ा है मैं डायरेक्ट आयतों प ही आ गया था पढ़ने के लिए च बता सकता हूं हां मैं आपको मैं आपको भेज भी सकता हूं अगर उसका जो क्या बोलते हैं पीडीएफ नहीं हां पीडीएफ भेज सकता हूं मैं आपको अच्छा तो इस विषय प इस मौजू प आप मुझे बता ही सकते हैं कुछ हां क्योंकि आपने मेरे पास फोन किया है भाई तो कुछ तो आप इसके विषय में अपना विचार बनाए होंगे कि हां भैया इनको यह बात बताऊंगा तो वो बात बता दीजिए मुझे हां बता रहा बता रहा मैं कहना चाह रहा हूं कि जो सूर तौबा है उसम जो जिक्र आया है काफिर का वो रसूल अल्लाह के जमाने का है जब रसूल अल्लाह मक्के में थे और वहां पर कुछ लोग मतलब मुस्लिम प्लस देखिए एक य प मैं पॉइंट करना चाहूंगा जैसा कि आपने कहा है अपनी बात को याद रखिएगा कि आपने कहा कि रसूलल्लाह के जमाने का है ठीक है ये याद रखिएगा आ बोलिए बोलिए जमाने से मतलब य नहीं है मतलब बो नाजिल तब हुई थी तो वो उस जमाने में नाजिल हुई थी पहली बात तो उस जमाने में नाजिल हुई थी काफिर के लिए ठीक है अब भी वैलिड है काफिर के लिए लेकिन आपके लिए नहीं है क्यों क्योंकि कुरान के तबार से मैं काफिर नहीं हूं भाई मैं आपके रसूल को नहीं मानता मैं आपके जिब्राइल मिखाइल प रती भर भी विश्वास नहीं करता बल्कि मैं तोलिए मैं कह रहा हूं कि तफसीर पढ़ लीज हां तो वही तफसीर पढ़ के भी तो मैं मैंने यही निष्कर्ष निकाला है ना तो बो स्कॉलर्स की पढ़ी है मेरे भाई शिया स्कॉलर्स की पढ़ सब समझ में आ जाएगा शिया स्कॉलर की नाम बताइए आप मुझे सुनी स्कलर तो कहते हैं कि भैया हमारी पढ़ो किसकी पढ़े भाई नहीं देखिए देखिए सुन लीजिए हा तफसीर मैंने दोनों की पढ़ी है अले सुन्नत की भी और शिया की दोनों में जो बात लिखी गई है वो एक मतलब जमाने में आयत किस पर रिवील हुई रसूल अल्लाह प के जो उन्हें परेशान कर रहे थे तंग कर रहे थे लोग उनके लिए थी ना कि ये कि भाई सबके लिए हो गई हा तो बुरा मानने लगते हसन भाई बात ये है कि उस टाइम प लोग परेशान कर रहे थे तो उस टाइम प ये चीज नाजिल हुई ठीक है हां तो आज के टाइम पर तो वो चीज हो नहीं रही ना तो उसको हटा दिया जाना चाहिए देखिए भाई वो आप कैसे आप समझाइए क्योंकि देखिए आपने फोन किया है तो कुछ तो सोच समझ के फोन किया होगा कि भैया क्योंकि आपने जैसे कहा कि आप एक ही आयत प उसी आयत प बात करोगे सूरा तौबा के पाच प तो मैं भी तो उसी प टिका हूं मैं तो भटक नहीं रहा हूं और चकि आप प्रिपरेशन करके आए हो कि नहीं भैया सरा तौबा के पाच प ही बात करना है तो मैं कह रहा हूं कि बात कीजिए उसी प मैं भटक भी नहीं रहा हूं नहीं तो कई लोगों से बाज लोगों से बात होती रहती है तो मैं इधर से उधर जंप भी कर जाता हूं अगर वो विषय दे देते हैं मुझे तो मैं उस विषय को भी पकड़ लेता हूं लेकिन मैं आपसे क्योंकि आपने पहले ही कहा भैया मैं सरा तबा पा प बात करना चाहता हूं तो मैंने कहा ठीक है तो मैं उसी पर टिका हुआ हूं तो मैं यह कह रहा हूं कि वो आयत उस समय के लिए थी हा तो उन लोगों के लिए तो अब ये तो नहीं कहा जा सकता उससे देख के भाई उसके लिए फर उसम आप लो आप जो इंसान फर एपल उस जमाने में ना ही डेमोक्रेसी था बिल्कुल था भाई आपकी कुरान तो कब आई उससे पहले ही मनुस्मृति वजूद में थी डेमोक्रेसी नहीं था डेमोक्रेसी के अरे भाई एक अच्छी व्यवस्था थी अब आपके यहां पर नहीं थी तो यह आपकी गलती है या फिर आप भी नहीं भाई आपके पूर्वज भी पहले हमारा ही हिस्सा थे यह बात को अगर आप पढ़े लिखे होंगे तो मानेंगे कि आप भी हिंदू थे अगर आप अपनी वंशावली लेंगे तो आपके दादा परदादा में से फिर हिंदू ही निकलने शुरू करेंगे आपके डीएनए में हिंदू ही होगा आ रहा लेकिन ठीक है उसको छोड़ दीजिए मैं कह रहा हूं कि जैसा कि आपने खुद अपनी बात में कहा हेलो भाई जैसा कि आपने खुद अपनी बात ने कहा कि यह उस टाइम पर रसूल अल्लाह के जमाने के टाइम पर बोली गई थी नाजिल की गई थी सूरते हालों को देखते हुए तो मतलब के आज के टाइम पर वो चीज प्रासंगिक नहीं है तो उसे धर्म की किताब में क्यों रखा जाए जो कि यह कहा जाता है है कि भैया सारी दुनिया के लिए है तो वो चीजें तो सारी दुनिया के लिए नहीं हो सकती ना क्योंकि वो उस टाइम पे उस काल पे उस एरिया के लोगों के लिए बोला गया था एक कबीले वालों के लिए बोला गया था मोहम्मद साहब का वो जो खुतबा सॉरी वो जो कबीला था वह पूरी दुनिया के लिए तो था नहीं तो उस प्रकार से देखा जाए मोहम्मद साहब जो लूट पार या फिर जो भी करते थे जंग वगर जंग वगैरह जो करते थे तो उससे एक समूह विशेष के लोगों को ही लाभ होता था ना नाना कि पूरी दुनिया को लाभ हो रहा था और यह बातें उसी समूह के लोगों के लिए कही गई थी कि जहां पाओ पकड़ के कत्ल कर दो तो भैया वो हर किसी के लिए नहीं हो सकता ना पूरी उम्मत के लिए नहीं हो सकता मेरे भाई कृपया इस बात को समझने की चेष्टा कीजिए मैं कोई गलत बात या फिर वो नहीं क रहा अगर मैं गलत हूं तो आप मुझे बताइए मैं गलत हूं भाई या फिर अगर आपको और प्रिपरेशन करनी है तो कीजिए और फिर दोबारा मेरे पास कॉल कीजिए और इसी सरा तौबा के पांच के ऊपर ही तफसीर वगैरह का भी हवाला आप दे दीजिए मुझे हदीस का भी हवाला दे दीजिए मैं तैयार हूं ठीक है नहीं ता भाई मेरे पास भी टाइम नहीं रहता देखे थे ना आप सुबह कॉल किए थे लेकिन मैंने कहा कि भैया सुबह नहीं बात कर पाऊंगा शाम के टाइम पर बात करूंगा क्योंकि व्यस्तता मुझे भी रहती है भाई फिर भी मैं अपना समय निकाल के आपसे बात कर रहा हूं लिए धनवाद नहीं नहीं आपका भी बहुत बहुत धन्यवाद भाई क्योंकि आप बहुत अच्छे से बात कर रहे मुझे बहुत अच्छा लग रहा है कि चलो हमारे भाई कुछ ना कुछ सत्य को जानने की तरफ कदम तो बढ़ा रहे हैं तो जो है भाई देखिए हमारी मान्यता के हिसाब से मैं जो मानता हूं वो सही है आपकी मान्यता के हिसाब से आप जो मानते हैं वो सही है लेकिन हम दोनों में से सही क्या होगा सच्चा रास्ता एक ही होता है दो तीन नहीं होता तो उसे हम बैठ के आपस में मुनाजत करेंगे उस पर विचार विमर्श करेंगे तो जो सही बात होगी सत्य बात होगी वो नुमाया हो जाएगी तो इसलिए मैं कह रहा था जी तो मे हां तो मेरा य कहने का मतलब था हां के कु पूरे से यह मुराद नहीं है कि सब काफिर को मानना ये बिल्कुल गलत लिया जाता है लेकिन देखिए भाई आप बता भी नहीं पा रहे ना उसे मुझे सेटिस्फेक्शन भी नहीं मिल पा रहा है आपके जो भी आप बता रहे हो मैं तो कह रहा हूं ना जैसा कि आपने बताया उस जमाने के लिए रसूल अल्लाह के जमाने के लिए रसूल अल्लाह के कबीले वालों के लिए वो बात बोली गई थी तो सब पूरी उम्मत के लिए जो उम्मत किताब जाती है उस बात नहीं हो सकती रसल अल्ला के लिए कहा बोली बात आपने बोला था आपने सु ली सुन लीजिए सुन लीजिए कुश एक लश्कर था कबीला तो उस उस कबीले के लिए कहा गया था क्यों कहा गया था आप मुझे बताइए भाई मैं कारण पर नहीं जा रहा मैं क्रिया प जा रहा ह जाहिर सी बात है हम कारण क्यों नहीं जाने जानना चाहिए ना क्यों कहा था जैसा कि जंग आपने जैसा कि ये बात बताया था ना कि जो लोग थे बदमाशिया कर रहे थे परेशान करते थे उनके बारे में कहा गया था ठीक है मैं मान रहा हूं मैं कभी भी उस बात को झुठला नहीं रहा कि नहीं भैया यह बात गलत है उनको कोई परेशान नहीं करता था चलो माना कि परेशान करते थे लेकिन वह बातें पूरी उम्मत के लिए जो मार्गदर्शन की किताब कही जाती है उसमें लिख देना जो कि एक समूह विशेष के लोगों के दरमियान में यह प्रश्न उठा था और उनको यह बात बोली गई य पूरी उम्मत के लिए कैसे हो गया और यह सर्वकालिक कैसे हो गया भाई तब कुरान सर्वकालिक नहीं है ना अब इस पर अगर मैं बात करना चाहूं तो और बात लंबी ख सकती है लेकिन ज्यादा मैं कहूंगा नहीं एक पॉइंट बताऊंगा कि जैसे कि कुरान में लिखा गया है कि यह किताब मैंने तुम्हे तुम्हारी भाषा में उतारी है ताकि तुम्हे समझने में सहूलियत हो तो उस प्रकार से भी देखा एक कबीले वालो के लिए भाषा के जानकार लोगों के लिए था अरबी वालों के लिए था सबके लिए नहीं था तो उस प्रकार से भी देखा जाए तो उसे ईश्वरीय ज्ञान या फिर ईश्वर प्रदत चीज नहीं कह सकते कुरान को देख व अलग मला हैसे बात कीजिए भाई नहीं क्या बोलते उसम कु लश्कर था जी वो परेशान करते थे बारबार बिल्कुल करते थे करते थे इसलिए हुकम दिया गया था अब आप ये कहेंगे सुनिए अब आप पहले तो आप ये कह रहे थे कि रिकॉर्डिंग में मैंने देखा था स में नको काफिर को मतलब मारने का भी आपने कई सवाल उठाए हा बक या तो आप ये ना कहे क्या के काफिर को मारने के लिए क्यों कहा गया क्योंकि काफिर की जो डेफिनेशन बताई गई है सरा बकड़ा में तो उसके हिसाब से तो हम ही है ना क्योंकि वो जो डेफिनेशन बताई गई है जो जिब्राइल को सी सुन लीजिए सु ली सुन सुन लीजिए एक बात आपको बताऊ सारी चीज कुरान में नहीं है किसम में नहीं नहीं है ऐसा कैसे हो सकता है अच्छा तो तारिक जमील वगैरह को ही आप झुला रहे हो जो कहते हैं कि भैया दुनिया का सारा इल्म कुरान कुरान में है देखिए सारा इल्म से यह मतलब है के बताया गया है हर इल्म के बारे में लेकिन डिटेल में नहीं देखिए भाई मैं तो यह नहीं कहता कि भैया सारा ज्ञान वेद में है क्योंकि वेद का मतलब होता है ज्ञान और ज्ञान आपको कहीं पर भी मिल सकता है मतलब के ज्ञान वेद हर जगह प है अर्थात के ज्ञान हर जगह प है आप कहीं से भी ग्रहण कीजिए लेकिन सत्य ज्ञान सत्य ज्ञान को ही वेद कहा गया है तो उस प्रकार सेक देखिए न के विय ज्ञान के मसले से आपके यहां प बोल दिया गया है ना लास्ट में कि आज से तुम्हारा ये दन मुकम्मल हो गया अब तुम्हारा सोचना समझना मुकम्मल हो गया क्योंकि ये हमने तुम्हें ये क्या नाम से कुरान दे दिए है जबकि हमारे वैदिक शास्त्रों में लिखा है कि मुझे मंत्र याद नहीं आ रहा है ठीक से जिसमें बोला गया है कि किसी भी चीज को तर्क की कसौटी पर तोलो अगर सही लगती है तो मानो वरना छोड़ दो अर्थात कि जानने की गुंजाइश वेदों के बाद भी ईश्वर ने कही है कि और भी जानकारी लेते रहो किसी भी चीज को देखो तो उसको तर्क की कसौटी पर तोलो अगर सही लगता है तो मानो अन्यथा छोड़ दो मतलब ज्ञान लेते रहो जरूरी नहीं है उन्होंने यह नहीं कहा कि वेद पर बस करो ईश्वर का ज्ञान य नहीं है या फिर ऋषियों ने यह नहीं कहा कि वेद प ही बस कर दो नहीं उन्होंने कहा कि ज्ञान लेते रहो तो उस प्रकार से मैं तो ज्ञान ले रहा हूं हर जगह से भाई और आप भी ज्ञान ले रहे हैं जो कि बहुत अच्छी बात मैं ये कह रहा हूं कि देखिए कुरान में जैसे ये है कि नमाज पढ़े ठीक है नहीं हम अलग वे में चले जा रहे नहीं नहीं नहीं नमाज मैं समझाना कुछ और चाह रहा हूं पहले समझ लीजिए बात को मैं उस टॉपिक प नहीं जा रहा देखिए नमाज के बारे में है कि नमाज मतलब पढ़ो या ये कह सकते हैं एस्टेब्लिश प्रेयर हां तो अब अब मैं ये कहूं कि भाई उसमें तो कह दिया कि नमाज पढ़नी है लेकिन य क्या ये बताया उसमें कि कितनी रकत पढ़नी है हां अया तीन बार का बोला है कुछ मैं आपको बता सकता हूं सरा हुद में सूरा हुद में आई थिंक बोला है के कायम करो नमाज दिन के तीन वक्त में हां दिन के तीन वक्त में कहा है लेकिन कितनी रत कहा है तीन तीन वक्त मतलब क्या हो सकता है अब बाज लोग उसका मुत तर्जुमा निकाल सकते हैं भाई लेकिन जो उसके लजी माने आते हैं ना वो तीन ही आते हैं क्या मैं आपको अगर होगा तो मैं ट पर आपको वो भी स्क्रीनशॉट बता दूंगा या फिर पूरा नंबर बता दूंगा आप देख लीजिएगा उसम जो अगर आप पढ़ सि अगर आप अरबी जानते भाई तो अरबी का वर्ड बाय वर्ड तर्जुमा निकालेंगे तो आपको पता चलेगा कि भया तीन बार पढ़ने के लिए बोला गया है न टाइम पढ़ने के लिए बोला गया बो य पता है नहीं नहीं पता है भा नहीं पता य से पता चलने किसी एक स्लर होते रानर हैला हा तो उन्होने जो किताब मतलब उन्होने जो एक्ने प से भटक रहे हैं मैं कह रहा हूं सरा तौबा पाच प ही बात कीजिए हां उसी प बात कर रहा हूं हा उसी प बात कर रहा हूं मैं आपको ये बताना चाह रं कि अगर आप ये सोचे कि भैया हर चीज कुरान में मिल जाएगी तो ऐसा संभव नहीं है नहीं मैं ऐसा बिल्कुल नहीं सोचता इवन मैं कभी नहीं सोचता कि भैया कुरान में मानवता की बात कोई अच्छी मिल जाएगी या फिर कुछ मिल जाए क्यक मैं जानता हूं कि भैया अगर एक जगह पर कुछ अच्छी बात लिखी है ना तो उसको काटते हुए दूसरी बात भी लिखी है जिससे कि दोनों इतर हो जाते हैं अलहदा बातें भी लिखी है कहीं पर अगर अी बात लिखी है तो उसका अलहदा बातें भी लिखी है कि भैया ठीक उसके उलट बो गया है कहीं बोला गया है ईश्वर इल्म रखने वाला है कुरान में ही शायद है कि ईश्वर इल्म रखने वाला है दिलों की बात जानता है यह वो और कई सारी चीज बताया कि ईश्वर जो चाहता है व कर देता है अला के बारे में ईश्वर सॉरी ईश्वर नहीं अल्लाह तो एक जगह पे तो ये लिखा है और ठीक उसके उलट बातें पता चलती है पढ़ने पर तो उस प्रकार से तो है नहीं नहीं अब आते हैं सूर तौबा पे हां सूर तौबा पे आते हैं तो देखिए तफसीर अगर आप इसकी पढ़ेंगे तो आपको ये पता चलेगा कि ये आयत जो है नॉर्मल लोगों के लिए नहीं थी वो उस समय के लिए थी उन लोगों के लिए थी और आप अगर इसको डिटेल में पढ़ेंगे तो ये भी पता चलेगा आपको कि ये जो है आठ नन हिजरी जीन हिजरी जी ये नाजिल हुआ था पूरा कंप्लीट हुआ था मब और ये जो कब हुआ था ये जंग थी बूक नाम की जो जंग थी जो रसूल अला और कुशियो के लोग बीच में ई थी जी तो ये जो है मतलब उसी वक्त ये मतलब थोड़ थोड़े हिस्से कुछ हिस्से पहले कुछ हिस्से बाद में कुछ हिस्से बीच में जन के ऐसे नाजिल हु जी तो जैसा कि भाई अच्छा बोल लीजिए आप तो वो वो के लिए मतलब वो उन लोगों को कह रहे थे कि भाई जो जो मुसलमानों को परेशान करते हैं आप करते हैं परेशान हां आप लोग तो परेशान हो ही जाते हो अगर मैं सत्य बोलता हूं तो परेशानी हो जाती है या फिर मैं आपकी गलतिया दिखाता हूं तो परेशानी हो जाती है मैं आपको सिर्फ अभी थोड़ा बेसिक समझाना चाह रहा हूं देखिए मैं इससे आगे नहीं जा रहा बात ये है कि कोई आदमी लंगड़ा है और अगर मैं उसे लंगड़ा कह देता हूं ना तो परेशानी उसको हो जाती है तो उसी प्रकार से क्या फेस होती है फॉर एग्जांपल जैसे कि मैं कुरान की बता बातें बताता हूं कि भैया ये अल्लाह दोगली बातें करते हैं कभी ये कह देते हैं तो कभी वो कह देते हैं तो कुछ लोगों को बुरा लग जाता है जबकि एज इट इज वो लिखा है भाई आपकी आयत में हां मैं जानता हूं मैं जानता हूं मैं जानता हूं आप आप एक बात मुझे बता दीजिए याद नहीं आप सूर तौबा पे बात कीजिए भाई आप भटक रहे हैं रह रह के विषय पे आपने जैसा कि आपने आपने जो बात की ु आइए आपने इससे पहले जो बात बताई कि कुछ खास लोगों प य बातें खास लोगों के लिए थी ना नहीं नहीं सुनिए पले आपने वर्ड बाय वर्ड बोला कि कुछ विशेष लोगों के लिए खास लोगों के लिए था मैं कह रहा खास लोगों के लिए था तो पूरी उमत के लिए है यह कहना गलत है ना उमत के लिए है इसका मतलब यह है कि दो तरह के काफिर होते ये आपको समझना पड़ेगा तफसीर में जा इसलिए आपसे कह रहा आप पढ़ र में सी चीज दो तरह के काफिर होते एक काफिर वो जैसे फर एपल जैसे नर्मल नॉन मुस्लिम जो मुसलमान सबसे ल कार कौन से होते भाई बता दीजिए अ सुन अच्छ अ तरह के जो अच्छे हमारे सा मतलब हम कोई ज समझ बात समझ रहे दूसरे तरह के वो जो हम जम कर हैं हम ठीक है ये दो बात है फॉर एग्जांपल मैं आपको एग्जांपल देके समझाता हूं हां जैसे अमेरिका है जी नॉन मुस्लिम देश है ना हम नहीं मुस्लिम भी है देश देखिए कंट्री को अमेरिका है मैंने उसको एज अ होल अगर मैं लू तो क्या हो अच्छा अच्छा अच्छा मैं समझ नहीं पाया हां हां ठी ठीक है मान हा ऑफिशियल तो नॉन मुस्लिम है हां ऑफिशियल उसे नॉन मुस्लिम तो अब ये बताइए वो जो क्या बोलते हैं बम गिराते हैं वो क्या बोलते हैं उधर मुसलमानों पे हा सीरिया में और लेबनान में इधर उधर ये क्या हरकत है इनकी हरकत क्यों ऐसी उल्टी सीधी करते हैं तो ऐसे लोगों को कहा गया कि ऐसे लोगों को मत छोड़ो दो तरह के होते हैं काफिर एक अच्छे काफिर एक बुरे काफिर अच्छे काफिर है उनका अगर हमने एक रुपया भी मारा है ना अच्छे काफिर का तो के ऊपर जवाब देना पड़ेगा हमें र पढ पले अच्छे काफिर और बुरे काफिर ये मीटर की कौन बता रहा है कि अच्छे काफिर कौन होता है बुरे काफिर कौन होता है कुछ हवाला दे सकते हैं देखिए हां हवाला दे दूंगा ये हवाले का आपके इंतजार रहेगा अभी तो नहीं दे पाएंगे आप बाद में दे दीजिएगा मैं इंतजार करूंगा ठीक है और मैं ये भी कह रहा हूं कि काफिर जो बुरे काफिर होते हैं तो उस हिसाब से भी देखा जाए तो क्या हम लोगों के बारे में क्या है नहीं आप लोगों के बारे में क्या है बताइए कुछ लोग तो भाई मुझे कहते कि मैं काफिर से भी बहुत बड़ा मुझे तो कहते हैं शैतान का बच्चा ऐसा वैसा कई लोगों के फोन आते रहते हैं गालियां वगैरह भी भगते हैं तो उस प्रकार से देखा जाए देखिए देखिए देखिए वो खुद गुनाहगार है वो उस चीज के खुद गुनाहगार है वो वो इस्लाम से उनका कोई लेना देना नहीं है देखिए बात फिर वहीं प आती है कि जो इंसान अब मान लीजिए कोई गाली दे रहा है तो क्या गाली देना कुरान में लिखा है कि गाली दो तो तौबा की बात तो क्लियर नहीं हो रही है ना भाई और जैसा कि आप बता रहे काफिर का कि अच्छे काफिर बुरे काफिर तो मैं कह रहा हूं कि जैसे कि सूरा बकरा हम बताया गया है कि काफिर की डेफिनेशन क्या है तो उसकी मुराद से आप क्या समझते हैं हमें मैंने अभी आपसे क्या कहा देखिए आप एक बात मिस करहा देखिए सरा भा अगर आप तफर नहीं पढ़ने के तो मेरे बात बता रहा मैं र पढ़ रहा हूं भाई मैं तफर को समझ रहा हूं लेकिन उसको एक बार पहले स् भी तो बात कीजिए क्योंकि काफिर के विषय में आप जो कह रहे कि दो तरह के काफिर होते हैं ऐसा वैसा मैं कह रहा हूं आप कुरान की बात को नहीं मानते क्या मानता हूं क्यों नहीं मानता तो कुरान के सूरा बकरा के 98 के तबार से आपकी क्या मुराद है क्या बताइए 98 भाई आप देखिए आप ज्यादा पढ़े लिखे हो मैं देखिए कुरान के विषय में जितना आपको ज्ञान होगा उतना मुझे नहीं लगता कि मुझे ज्ञान है क्या मैं तो अभी भी अज्ञानी हूं कई सारी चीजों में मैं सीखता रहता हूं इनफैक्ट एक बहन ने मुझे बताया कि भैया आपकी इंग्लिश में आपने एक जगह प गलत बोला था तो मैंने कहा हां भाई बहन हो सकता है मैं गलत बोला हूं क्योंकि इंग्लिश में मुझे महारत हासिल नहीं है वो तो बोलचाल की भाषा में कभी कभार बोल दिया जाता है तो उस प्रकार से आज ही सुबह एक बहन ने मुझे गलती बताई थी मेरी तो उस प्रकार से भाई मैं तो अभी भी गलतियां करता हूं और सीख रहा हूं आप मुकम्मल होंगे तो कृपया बता दीजिए मुझे कि हां कहां है क्या है ठीक है ठीक बता सरा बकड़ा 98 तो उसके हिसाब से हा काफिर के माने क्या है और काफिर हम नहीं है उसके माने उसके मुराद से उसके मुराद से हां जी क्या है आप बता तो दीजिए मुझे मुझे नहीं पता ना मैं बता तो रहा हूं आपको हां तो जो जिब्राइल मिकाइल और रसूल को नहीं मान रहा है वो काफिर है हा ठीक है है बिल्कुल है तो हम तो नहीं मान रहे हैं तो हम काफिर है ना है बिल्कुल है इसमें किसने मना किया काफिर नहीं हा तो जो काफिरों को मारने के बारे में बात कही गई है तो वो किसके बारे में है अटक ग नहीं सरा तौबा अटक नहीं गया मैं अटक रहा हूं क्योंकि आपने ही बोला है कि सूरा तौबा प ही बात कर मेरी जितनी भी बात सरा तौबा के इर्दगिर्द है विय से भटक नहीं रहा नहीं तो आप ख कहे भया विषय से भटक रहे हैं इसलिए कह रहा आप र पढ़ आपको र पढ़ हूं भाई और तफसीर पढ़ के भी मुझे जो समझ में आया है वही मैं बात बता रहा हूं आपको मैं तो कह रहा हूं कि भैया तफसीर के हवाले से आप कुछ बता सके तो बताइए लेकिन आप कोई प्रमाण नहीं दे रहे आप वैसे ही केवल लिप सर्विस कर रहे तो ऐसे नहीं हो पाएगा जब तक कि आप कुछ प्रमाण ना दो मुझे देखिए भाई प आपको दे स दे दीजिए और पीडीएफ गगर पढ़के यह सब जो भी आप बता रहे हैं ना व सब पढ़ के मैंने य निष्कर्ष निकाला है और कई सारे लोगों के तर्जुमे भी मैंने देखे हैं जिनम थोड़े से लजी माने मिस्ट मतलब ल माने थोड़े से उसम क्या बोलते तर्जुमे में गड़बड़ हो सकती है र में गड़बड़ी हो सकती है परंतु लफ्ज माना है उससे तो यही बात मु माया होती है कि भैया यह किसके बारे में कहा जा रहा है और कौन है वो तो इसीलिए मैंने जो मुझे दिखा और जो मैंने समझा वो मैं बता रहा हूं जिसको कि आज तक कोई गलत साबित नहीं कर पाता तो इसीलिए कह रहा हूं कि अगर भाई आपकी प्रिपरेशन नहीं है मुझे लगा कि आप बकायदा तैयारी तयारी करके आए होंगे कि हां भैया सूरा तौबा पांच में ही बात करेंगे मैं कह रहा हूं कल सुबह फिर से बात कीजिए आप और सूर तौबा प ही बात कीजिएगा आयत नंबर पांच पे ही पूरी तैयारी के साथ और पूरे प्रमाणों के साथ में फिर आपसे कॉल करूंगा बात करूंगा ठीक है देखिए भाई मैंने सुन आखरी बात बस उसके बाद आप सुन अ मैं ये कह रहा था हेलो हां हेलो मैं ये कह रहा था कि देखिए तफसीर जो है इस वक्त मेरे पास जो अवेलेबल बुक्स है उसम इतना डिटेल में नहीं लिखा ये मेरे पापा ने बात बताई थी और वो मैं उनसे पूछ के आपको भे सकता हूं ठीक है ठीक है बिल्कुल भेज दीजिएगा कोई समय कोई समस्या नहीं भाई आप भेज दीजिएगा और मैं हमेशा तैयार रहूंगा आपका नंबर भी मैंने सेव कर लिया है आप फे जी जी जी जी तो आप तो उसमें सारी चीज नहीं लिखी जो मैंने बताई आपको नहीं जो जिस प्रकार की है वो तंडा ही है लेकिन अगर आप आप मानते किसको है कुरान आपके लिए मेन है ना तो कुरान की बात जो जस की तस है देखिए वो तफसीर अलग चीज हो गई तफसीर में उन्होंने उस चीज को और डिटेल से और कई सारे हवाले देक समझाया है परंतु उनमें भी वही बातें समझ में आ रही है इसलिए मैं कह रहा हूं इसलिए मैं कह रहा हूं कि भैया मैं आपको तफसीर दिखा दूंगा हो सकता है कि मेरा तफसीर कुछ गड़बड़ हो तो आप बताइए आपके हिसाब से कौन सा तफसीर पढ जो सही हो ठीक है तो आप कह रहे कि मब आपने पढ़ रखा है र हा थोड़ा बहुत तो पढ़ ही रखा है भाई आपकी जितना नॉलेज नहीं होगा भाई मुझे ठीक है नहीं मैं ये नहीं कह रहा भाई मुझे भी कौन ले बड़ा महा तो ठीक है हालाकि आप इसका नहीं बता पाए संतुष्ट जने कोई भी बात नहीं हो पाई फिर भी मैं कह रहा हूं आगे से आप थोड़ी सी तैयारी कीजिए और फिर से बात करेंगे हम लोग और भाई लोग अच्छे से बात करेंगे ठीक है चलिए भाई नमस्ते से

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