कि प्रथम मे दक्षिणे हस्ते जयो मे सव्य हित्य अर्थात अथर्ववेद 750 आठ मंत्र कहता है कि यदि मेरे दाएं हाथ में कर्म है तो संभवत मेरे बाएं हाथ में विजय हैं यह कर्म करूंगा तो विजय क्यों नहीं होगी हमारे युवाओं को यह बात हमेशा ध्यान रखनी चाहिए कि कर्म प्रधान है यदि हम कर्म करेंगे तो हमारी विजय अवश्य ही हमको प्राप्त होगी ना कि नमस्कार दोस्तो आप सब का एक बार फिर से स्वागत है आपके अपने YouTube चैनल सत्य सनातन में दो दिन पहले मेरे एक मित्र ने मुझे सजेस्ट किया कि डॉक्टर स्ट्रेंज नाम के एक मूवी है वह आप जरूर देखिएगा उन लोगों ने अर्थात हॉलीवुड वालों में अमेरिका वालों ने माइंड बॉडी और सोल के ऊपर इतनी ज्यादा रिसर्च की होगी ऐसा मैं कभी सोच भी नहीं सकता था वह भारत से गई है वेदों से गई है संस्कृत और हमारी संस्कृति से गई है इस बात का स्पष्ट तौर पर उसमें वर्णन किया गया है एवरेस्ट दिखाया गया है नेपाल दिखाया गया है भारतीय संस्कृति से जुड़े हुए जितने भी सिद्धांत था उनको प्रैक्टिकल रूप में दिखाने का भरसक प्रयास किया गया है भले उसमें अपनी इमेजिनेशन कितनी ट्यूनर डाली गई हो लेकिन यह भारतवर्षा जहां का युवा अवसाद से ग्रसित है छोटी छोटी उम्र में आत्महत्या कर लेता है छोटी छोटी उम्र में ही सनक उसके अंदर आ जाती है मानसिक रोगों से ग्रसित हो जाता है गिर जाता है जबकि बॉडी माइंड एंड सौल का जो अ अपने थी जो इन तीनों का बैलेंस बना रहा था उसकी शुरुआत हुई भारत वर्ष हुई थी और इसकी शुरुआत हुई योग दर्शन के माध्यम से और भी ज्यादा सरल योग दर्शन के माध्यम से महर्षि पतंजलि जी ने यह बताया कि किस प्रकार से व्यक्ति आत्म साक्षात्कार से लेकर के परमात्म-साक्षात्कार तक के कर सकता है जब हमारा मन ही हिलते हुए पानी की तरह तरंगित होगा तो इसमें हम अपना चेहरा कैसे देख सकते हैं उससे पहले हम को अपने मन को शांत करना पड़ेगा तभी हम ठहरे हुए जल में अपना चेहरा देख सकते हैं अर्थात आत्म साक्षात्कार कर सकते हैं आत्म साक्षात्कार करने का मतलब है कि हमारा जो शरीर है उसको शरीर के रूप में लेना बुद्धि को बुद्धि के रूप में रहना मन को मन के रूप में लेना और आत्मा को आत्मा के रूप में लेना श्रीमद् भागवत गीता जिसके विषय में बहुत स्पष्ट तरीके से समझाती है कि यह जो आत्मा है यह राजा की तरह के ऊपर बैठी हुई है यह जो मन है यह चालक है उसमें बंद हुए पांच घोड़े हमारी पांच इंद्रियां हैं मंजू कि वह रमा हुआ है इस प्रकृति मैरून 5 घोड़ों के तहत टीम के ऊपर आधारित होकर के भागना-दौड़ना चाहता है और उसी के आधार पर आत्मा भटकती रहती है लेकिन यदि हम राजा बनकर के मालिक बन करके बैठें मन को अपने काबू में करने की मन को साधने की जो शक्ति है वह बुद्धि के माध्यम से हासिल कर ले तो मन को हम अपना गुलाम बना सकते हैं और जहां चाहे अर्थात लक्ष्य को भेदने के लिए जहां चाहे हम जा सकते हो और हमारी जो पांचों इंद्रियां है वह भी हमारा सहयोग करेंगी और न्याय दर्शन के अनुसार इस जीवन का उद्देश्य क्या व है भोग और अपवर्ग की प्राप्ति भोग की भी प्राप्ति करेंगे और अपवर्ग की प्राप्ति करेंगे लेकिन एक फेक नैरेटिव बनाया गया कि एक बहुत बड़ी चकाचौंध की दुनिया है जिससे युवाओं को अछूता नहीं रहना चाहिए और वह क्या है वह हॉलीवुड और बॉलीवुड की दुनियां हॉलीवुड अपनी गंदगी से बाहर निकला और उसने उसमें वैदिक संस्कृति कि योग दर्शन और भारतीय जितनी भी परंपराएं तुम का सम्मिश्रण करना शुरू कर दिया और लोगों को बताया कि किस प्रकार से वह अपनी जो प्राचीन संस्कृति थी उससे किस प्रकार से विजई बन सकता है मृत्युंजय बन सकता है लेकिन जो भारतीय तटों थे उन्होंने क्या किया उन्होंने सिर्फ बॉलीवुड में एक बात देखि छोटे कपड़े बड़ी-बड़ी पार्टीज और दारू पीना धुत होकर के रहना आज कोई फिल्म बॉलीवुड के हंसी नहीं आती है टॉलीवुड की देख लीजिए कोई फील में ही नहीं जिस मिनट शराब के सीन ना हो स्टार्टिंग सीन ही दारु पीने से होता है कोई भी फिल्म देख लीजिए ऐसा लगता है कि दारू पिए बिना तो बनना ही नहीं सकता सोच ही नहीं सकता है उसकी स्मरण शक्ति उसकी कार्य करने की शक्ति उसकी कोई भी फैसला लेने की शक्ति यहां तक कि लड़की को जाकर प्रपोज करना भी उसके लिए इतना ज्यादा मुश्किल हो जाता है बिना दारू पिए और इस बात से हमारे लोगों के अंदर बच्चों के अंदर युवाओं के अंदर इस बात की भावना कुंअर क्लिक करके बढ़ जाती है कि हां इस चकाचौंध की दुनिया के बिना हमारा कोई अस्तित्व ही नहीं दरअसल यह एक काल्पनिक दुनिया है और इस काल्पनिक दुनिया मैं आपके पास सब कुछ होता है आप यहां पर रेस लगाते हैं ड्राइविंग करते हैं उधर आपके ऊपर पैसों की भरमार बारिश हो जाती है इधर आप फिल्मों में बताते हैं कि आत्महत्या कोई आखिरी उपाय नहीं है लेकिन आप अंदर से तीव्र खोखले हो चुके हैं कि आप स्वं ही आत्महत्या कर लेते हैं आप ज़ूम नहीं बल्कि आपकी मैनेजर भी आत्महत्या कर लेती है हो सकता है कि यह कहीं ना कहीं किसी मर्डर की तरह भी संकेत करता हो लेकिन आज के युवाओं में जो इस चकाचौंध के विपरीत दूसरे जो सिक्के का दूसरा पहलू है वहां पर आत्महत्याओं के जो संख्या है उसमें भी बहुत ज्यादा वृद्धि हो रही है और इससे निजात पाने के लिए सब माता-पिता को भाइयों बहनों को आपस में बातचीत करनी पड़ेगी और बातचीत यह करनी पड़ेगी कि हमें या अथार्थ अवधि जीवन जीना पड़ेगा हम इस बात पैसों से ही नहीं बल्कि आत्मसात करना पड़ेगा कि यह जो काल्पनिक दुनिया है इसकी सच्चाई बहुत कोसों दूर है वास्तविकता से आज घर-घर में बच्चा-बच्चा टिक टॉक क्या बना हुआ है वह भी रात दिन इसको शेयर करने में लोगों तक पहुंचाने में अपनी ऊटपटांग बातें सिर्फ और सिर्फ इसलिए लगा रहता है ताकि वह लोगों से अटेंशन हासिल कर सके अटेंशन क्रिएट कर सके ऐसा ऐसा कंटेंट ऐसा हार्मफुल कंटेंट बनाता है जिसमें उसकी जान भी चली जाती है में देखा कि कुछ दिनों पहले कुछ लोग नदी में बह गए टिक तोक वीडियोस बनाते बनाते ऊपर से ही गिर पड़े कुछ लोग छतों से गिर पड़े कुछ लोग ट्रेन के नीचे आ गए यह सब जो अवसाद है जो मानसिक अवसाद है यह सिर्फ और सिर्फ अटेंशन क्रिएट करने के लिए है क्योंकि लोगों के अंदर एक खालीपन है एक खोखलापन है जो अपने मित्रों के साथ में नहीं रह सकते जो अपने गांव की गलियों में जो अपने आसपास के पेड़ पौधों में जो अपने घर के यहां पर घरौंदा बनाकर के रहने वाले पक्षियों में जो अपने आंगन में बंधने वाले पशुओं में नहीं देखता है वह खालीपन वह खालीपन कहां से आया वह खोखलापन कहां से आया जो एक खोखली स्क्रीन आपके दीवार पर लगी हुई है उसका नाम है टीवी एक होकर स्क्रीन जो सिनेमाघरों में लगी हुई है जिसको कहते हैं सिल्वर स्क्रीन उसके पीछे का जो खोखलापन है वह आपके दिलो-दिमाग में आंखों के माध्यम से उतर चुका है आपके युवाओं के अंदर यह खोखलापन है तभी वह रात-दिन कहीं तो बिजी खेलते रहते हैं कहीं सोशल मीडिया पर अपनी ऊंट पटांग होठों को बनाकर के वीडियोस और फोटोज अपलोड करते रहते हैं हर मिनट दर-मिनट देखते रहते हैं कितने लाइक इतने डिसलाइक साइड इससे बाहर निकालने के लिए आपको वापस अपनी प्राचीन वैदिक परंपरा पर जाना पड़ेगा बॉडी माइंड एंड सौल इन का बैलेंस बनाने के लिए इन में हर महिला ने के लिए आपको योगासन प्राणायाम ध्यान करना जरूरी है क्योंकि यही आपको यथार्थवादी जीवन के रॉबर्ट लाता है खोखले धार्मिक आडंबरों से बाहर निकलने की आवश्यकता है मैं कुछ मंत्र कुछ लोग आपको बताना चाहता हूं वेद किस ओर इशारा करता है आप इनको ध्यान से सुने वीडियो अपने अंदर तक देखा आपका बहुत-बहुत धन्यवाद यदि आपके बच्चों की युवाओं की थोड़ी सी भी आपको फिक्र है तो प्लीज उनको समझाइए उनके साथ बैठकर के बातचीत कीजिए और उनको इस चकाचौंध के साथ ही साथ यदि उसमें है यथार्थवादी जीवन जीने के लिए भी प्रेरित कीजिए उनको बताइए कि यह जीवन बहुत अनमोल है और इस जीवन को ईश्वर ने आपको ऐसे ही उठाकर के नहीं दे दिया है कि तुम मे दक्षिणे हस्ते जयो मे सव्य हित्य अर्थात अथर्ववेद 750 आठ मंत्र कहता है कि यदि मेरे दाएं हाथ में कर्म है तो संभवत मेरे बाएं हाथ में विजय हैं यह कर्म करूंगा तो विजय क्यों नहीं होगी हमारे युवाओं को यह बात हमेशा ध्यान रखने मां के कर्म प्रधान है यदि हम कर्म करेंगे तो हमारी विजय अवश्य ही हमको प्राप्त होगी श्रीमद भगवत गीता जी में भी यही कहा गया है कि कर्म कीजिए फल की इच्छा ना रखिए और हम इन दोनों अपराजेय ऋग्वेद 10 48 50 मंत्र कहता है मैं इंदौर हूं और इंद्र कौन ऐश्वर्य शक्ति से युक्त और कौन हूं मैं मैं कभी भी पराजित नहीं हो सकता हूं किसी भी चीज से मैं पराजित नहीं हो सकता हूं ऋग्वेद का यह मंत्र हम सबको कहता है कि कभी भी पराजित नहीं होना चाहिए मैं ही हूं ऐश्वर्य और शक्ति संयुक्त युवा ऐतरेय ब्राह्मण कहता है चरैवेति चरैवेति पप्पू निषाद जानवरों जगह इंद्र इच्छा रह सकता अर्थात चलते रहो चलते रहो जब तक अभियुक्त दैनिक श्रेष्ठ के लिए पुरुषार्थ करते हुए आपको अपनी मंजिल ना मिल जाए निट्ठल्ला बैठने वाला अकर्मण्य तो पापी होता है इसलिए हमें कभी भी ऐसा नहीं पीना चाहिए के हम बैठ जाएं हमें हमेशा चलते ही रहना चाहिए हम सब युवाओं के लिए यह जो आर्ष ग्रंथ हैं संदेश देते हैं हमें आशीर्वाद देते हैं उत्साह बलवान आर्य नस्ती उत्साहात परं बलम् सीता हरण के बाद किन्नरों करके परेशान हो करके जब श्री रामचंद्र जी बैठ जाते हैं तो लक्ष्मण जी उनको कहते हैं कि हे आर्य उत्साही व्यक्ति ही बलवान होता है जिसमें उत्साह बना रहता है वहीं बलवान होता है और उत्साही व्यक्ति ही इस जगत में कुछ करने के लिए सुलभ होता है उससे कुछ भी दुर्लभ नहीं है यह श्लोक हमें हम युवाओं को कहता है कि कभी भी हमको अपना उत्साह नहीं छोड़ना चाहिए पंचतंत्र में भी कहा गया है उदाहरण समध्यान बुद्धि शक्ति ही पराक्रम महक शौर्य थे यत्र वर्तंते तत्र दे वह सहायक रत अर्थात उद्यम शुद्ध चाहिए बुद्धि प्रतिभा शक्ति एवं पराक्रम यह छह गुण जहां पर होते हैं वहां पर भगवान भी ऐसे व्यक्ति की सहायता करता है और वह हमेशा सफल होता है और अंत में बस इतना कहना चाहता हूं कि हो तो गधी अर्जुन भी था लेकिन भगवान श्रीकृष्ण ने 18 अध्याय में यही समझाया यही बताया कि कभी भी हमको अधीर नहीं होना चाहिए अपनी हिम्मत नहीं छोड़नी चाहिए अंत तक हमको लड़ते रहना चाहिए मेरे संग जय सत्य सनातन वैदिक धर्म की जय जय हिंद वंदे मातरम
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😲 अपना Point साबित के लिए इतने कुतर्कआइये कुछ Cross Questions करें।
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लुट नमस्कार दोस्तों आप सबका एक बार फिर से स्वागत है आपके अपने YouTube चैनल सत्य सनातन में बहुत समय एक बाद पाठक जब एक बार फिर से हमारे साथ...
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मैं ये पूछना चाहती हूं जो ये भी पौराणिक जो ये कहते हैं कि महिलाओं को वेद पढ़ने का अधिकार नहीं है तो मुझे बता दो क्या तुम्हारे घर में सरस्...
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